27 मई 2020

POPULATION OF INDIA


POPULATION OF INDIA


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आधुनिक समय में भारत में जनगणना का इतिहास 19वीं शताब्दी से शुरू होता है। भारत की पहली आम जनगणना का आयोजन लार्ड मियो के शासन काल मे 1865 ई०से शुरू होकर 1872ई० के बीच सम्पन्न हुई थी। 1871-72 की जनगणना को Synchronous census नहीं माना जाता है क्योंकि इस जनगणना के लिए आंकड़े एक साथ इकट्ठे नहीं किए गए थे। इस जनगणना के आंकड़े 1865ई० से 1872ई० के बीच 6 वर्षों के अंतराल में इकठ्ठा किए गए थे जिसके कारण ये अधिक सटीक नहीं माने गए हैं। यहाँ Synchronous शब्द का अर्थ है एक ही समय में सभी जगह होने वाली या दूसरे शब्दों में निरंतर रूप से एक ही कालावधि में पूरे देश में होने वाली जनगणना से है | यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि इंग्लिश भाषा में पहली Synchronous census 1881ई० की जनगणना को माना गया है। 1881 ई० कि जनगणना लार्ड रिपन के शासन काल में हुई थी और यहीं से प्रेत्यक 10 साल में नियमित जनगणना की शुरुवात हुई |1881 ई० में जो जनगणना हुई थी वह पूरे भारत में एक साथ सम्पन्न कराई गई थी और एक साथ ही देश के सभी भागों से आंकड़े इकठ्ठा किए गए थे। इसलिए भारत की पहली समवर्ती या पूरे देश में एक ही समय में होने वाली जनगणना 1881ई० की जनगणना को माना जाता है। 1881ई० से अब तक भारत में हर 10 वर्षों के अंतराल पर एक बार जनगणना कराई जाती है।

जनगणना की आवश्यकता क्यों ?


देश की जनता के कल्याण के मकसद से नीतियों और कार्यक्रमों के विकास के लिए जनगणना के आँकड़ों की बार-बार जरूरत पड़ती है। ये आँकड़े प्रभावी और सफल लोक प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं।संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों, पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों की सीटों का निर्धारण भी इन्ही आँकड़ों के जरिए किया जाता है।





भारत में जनसँख्या की वृद्धि और वृद्धि दर 1901 से 2011 के बीच 

भारत की जनसंख्या और इसकी वृद्धि : 1901-2011     Population and its Growth, India : 1901-2011
जनगणना वर्ष
जनसंख्या
दशकीय वृद्धि
दशकीय वृद्धि में परिवर्तन
औसत वार्षिक घातांकीय वृद्धि दर(%)
1901 के पश्चात प्रगतिशील वृद्धि दर
पूर्ण
प्रतिशत
पूर्ण
प्रतिशत
1901
23,83,96,327
1911
25,20,93,390
1,36,97,063
5.75
0.56
5.75
1921
251321213
-7,72,177
(0.31)
-14469240
-6.05
-0.03
5.42
1931
27,89,77,238
2,76,56,025
11.00
28428202
11.31
1.04
17.02
1941
31,36,60,580
3,96,83,342
14.22
12027317
3.22
1.33
33.67
1951
36,10,88,090
4,24,27,510
13.31
2744168
-0.91
1.25
51.47
1961
43,92,34,771
7,81,46,681
21.64
35719171
8.33
1.96
84.25
1971
54,81,59,652
10,89,24,881
24.80
30778200
3.16
2.20
129.94
1981
68,33,29,097
13,51,69,445
24.66
26244564
-0.14
2.22
186.64
1991
84,64,21,039
16,30,91,942
23.87
2,79,22,497
17.12
2.16
255.05
2001
1,02,87,37,436
18,23,16,397
21.54
1,92,24,455
10.54
1.97
331.52
2011
1,21,01,93,422
18,14,55,986
17.64
–8,60,411
-0.47
1.64
407.64

1947 में भारत की आजादी के बाद प्रत्येक 10 वर्ष के बाद जनगणना का आयोजन किया जाता है| स्वतंत्र भारत में पहली बार जनगणना का आयोजन 1951 में किया गया था| भारत में जनगणना का कार्य गृह मंत्रलाय के तहत रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त की देखरेख में आयोजित किया जाता है और यह एक संघीय सरकार द्वारा आयोजित सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में से एक है। भारत 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों का एक संघ है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी 1.2 अरब थी। भारत का क्षेत्रफल पूरी दुनिया के कुल क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है जिसमे पूरी दुनिया की कुल आबादी का 17.5 प्रतिशत निवास करती है। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। यहाँ पूरे भारत की कुल आबादी का 16.5 प्रतिशत निवास करती है|

नीचे दिए गए सारणी में भारत के सभी राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों की जनसंख्या का विवरण 2011 के अनुसार दिया गया है:-

राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश
कुल जनसंख्या
भारत की कुल जनसंख्या का %
1. उत्तर प्रदेश
19,98,12,341
16.50
2. महाराष्ट्र
11,23,74,333
9.28
3. बिहार
10,40,99,452
8.60
4. पश्चिम बंगाल
9,12,76,115
4.54
5. आंध्र प्रदेश
8,45,80,777
6.99
6. मध्य प्रदेश
7,26,26,809
6.00
7. तमिलनाडु
7,24,47,030
5.96
8. राजस्थान
6,85,48,473
5.05
9. कर्नाटक
6,10,95,297
4.99
10. गुजरात
6,04,39,692
3.47
11. ओडिशा
4,19,74,218
2.76
12. केरल
3,34,06,061
2.72
13. झारखण्ड
3,29,88,134
2.58
14. असम
3,12,05,576
2.29
15. पंजाब
2,77,43,338
2.11
16. छत्तीसगढ़
2,55,45,198
2.09
17. हरियाणा
2,53,51,462
1.39
18. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली
1,67,87,941
1.04
19. जम्मू-कश्मीर
1,25,41,302
1.04
20. उत्तराखण्ड
1,00,86,292
0.83
21. हिमाचल प्रदेश
68,64,602
0.57
22. त्रिपुरा
36,73,917
0.30
23. मेघालय
29,66,889
0.25
24. मणिपुर
27,27,749
0.23
25. नागालैंड
19,78,502
0.16
26. गोवा
14,58,545
0.12
27. अरुणाचल प्रदेश
13,83,727
0.11
28. पुदुचेरी
12,47,953
0.10
29. मिजोरम
10,97,206
0.09
30. चण्डीगढ़
10,55,450
0.09
31. सिक्किम
6,10,577
0.05
32. अंडमान निकोबार द्वीपसमूह
3,80,581
0.03
33. दादरा एवं नागर हवेली
3,43,709
0.03
34. दमन एवं दीव
2,43,247
0.02
35. लक्षद्वीप
64,473
0.01
Source: Census 2011, India 2016

भारत की आबादी 20 वीं सदी की शुरूआत में लगभग 23.84 करोड़ थी जो 2011 में बढ़कर 121 करोड़ तक पहुँच गयी थी| भारत में सबसे कम जनसंख्या वाला केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप है, जिसकी कुल जनसंख्या मात्र 64,473 है जो कि भारत की कुल जनसंख्या का 0.01% है| भारत का जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किलोमीटर 382 व्यक्ति है| यदि भारत की आबादी 17% की वर्तमान दर से बढ़ती रही तो यह 2050 तक दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन को पीछे छोड़ देगा|

26 मई 2020

PANDEMIC

PANDEMIC ,EPIDEMIC AND OUT- 

-BREAK IN HINDI

सर्वव्यापी महामारी , महामारी ,प्रकोप में  अंतर 


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PANDEMIC

आज सारा विश्व करोना वायरस की चपेट में है हर कोई इस सर्वव्यापी महामारी से परेशान है| जैसा कि आपको पता है कि इस बीमारी कि शुरआत दिसम्बर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई है| और आज सारी दुनिया इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूप से पीड़ित है हम यहाँ पर इस आपको इस करोना काल में महामारियों के नामकरण से सम्बंधित कुछ जानकारी देंगे | सबसे पहले हम विश्व 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' के विषय में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त कर लेते हैं क्योंकि किसी भी महामारी का नामकरण एवं इसके प्रकार को निर्धारित करने का कार्य यही संस्था करती है 'विश्व स्वास्थ्य संगठन'(World Health Organization) ने कोरोना वायरस (coronavirus)या कोविड-19 (COVID-19) को 11 मार्च को कोरोनावायरस या कोविड-19 को सर्वव्यापी महामारी (pandemic) घोषित कर दिया था इससे पहले तक इसे आउटब्रेक यानी प्रकोप कहा जा रहा था| लेकिन जब कोरोना वायरस के ए‍क के बाद एक कई मामले सामने आए थे तो 3 शब्दों- (1.)सर्वव्यापी महामारी (pandemic) (2) महामारी (epidemic) और (3) प्रकोप (outbreak) को बहुत प्रयोग में लिया गया था। वैसे तो इन तीन शब्दों का अर्थ काफी अलग हैं और इनका इस्‍तेमाल बीमारी के प्रसार का पैमाने का अंतर बताने के लिये किया जाता है। इसके बावजूद भी लोग इनके बीच का अंतर पता नहीं कर पाते हैं। इसलिए इस आर्टिकल में आपकी मुश्किल आसान करने के लिए हम आपको इनके बीच के अंतर के बारे में बता रहे हैं।


'विश्व स्वास्थ्य संगठन' (WHO)  क्या है?


विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानव विकसित करने की संस्था है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 194 सदस्य देश तथा दो संबद्ध सदस्य हैं। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है। इस संस्था की स्थापना अप्रैल 1948 को की गयी थी। इसका उद्देश्य संसार के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है। डब्‍ल्‍यूएचओ का मुख्यालय स्विट्ज़रलैण्ड के जिनेवा शहर में स्थित है। इथियोपिया के डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस विश्व स्वास्थ्य संगठन के नए महानिदेशक निर्वाचित हुए हैं।



सर्वव्यापी महामारीमहामारी ,प्रकोप में अंतर-




(1) - प्रकोप (Outbreak) क्या है ?


प्रकोप (outbreak) इस मामले में जब किसी बीमारी का प्रसार का पैमाना छोटा और असामान्य होता है और मामलों की संख्या आमतौर पर छोटी होती है। इसके अलावा रोग को कवर करने वाला क्षेत्र भी छोटा होता है। उदाहरण के लिए, एक मामला जिसमें कक्षा में लगभग 10-20 बच्चों को पेट का फ्लू एक साथ होता है ये एक तरह का प्रकोप (outbreak)है। ध्यान देने वाली बात है जब भी कोई नई बीमारी सामने आती है तो वो प्रकोप बनकर सामने आती है। क्योंकि इस लक्षण नए होते है इसलिए समय रहते इन्हें काबू में लाना जरूरी होता है। जब भी कोई बीमारी प्रकोप बनकर सामने आता है तो संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों को जरुरी कदम उठाने चाहिए । ये क्षेत्र एक छोटा समुदाय हो सकता है ये कोई संक्रामक रोग हो सकता है, जो उस समुदाय के लिए नया हो या लंबे समय तक नहीं देखा गया हो | ये रोग कुछ दिन, हफ़्ते या सालों तक जारी रह सकता है | जो व्यक्ति-से-व्यक्ति, पशु-से-व्यक्ति में फ़ैल सकता है| महामारी जब किसी क्षेत्र में अपेक्षा से अधिक बीमारी के मामले दर्ज किए जाते हैं तो इसे प्रकोप घोषित किया जाता है |


2- जानपदिक/महामारी (Epidemic) क्या है ?


जब किसी प्रकोप का दायरा बढ़ कर एक बहुत बड़े क्षेत्र तक फ़ैल जाता है और ये बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र को कवर करती है। और बीमारी बड़े पैमाने पर फैलती चली जाती है। तो इस प्रकार की बीमारी महामारी (Epidemic) का नाम दिया जाता है| जैसे- जब चीन में वुहान के बाहर कोरोनावायरस या कोविड-19 के मामले सामने आने लगे, तो पहले ये वायरस प्रकोप के रुप में सामने आया था बाद में इसने महामारी का रुप ले लिए था।


3- सर्वव्यापी महामारी (Pandemic) क्या है ?


सर्वव्यापी महामारी (Pandemic) वो संक्रामक बीमारी है जो किसी छोटे से क्षेत्र से शुरू होकर एक क्षेत्र को प्रभावित करता है| इससे कम समय में अधिक लोग संक्रमित होते हैं | सर्वव्यापी महामारी (Pandemic) उस संक्रामक बीमारी को कहते हैं जो एक देश के बाद दूसरे देश में बड़ी तेजी से फलता है | जब कोई बीमारी प्रकोप बनकर महामारी का रूप ले लेती है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने लगती है और नियंत्रण से बाहर हो जाए तो इसे सर्वव्यापी महामारी कहा जाता है। जब एक महामारी कई देशों में एक ही समय के दौरान में फैलती है, तो इसे सर्वव्यापी महामारी माना जाता है। जानपदिक यानि महामारी (Epidemic) की तुलना में सर्वव्यापी महामारी (Pandemic) अधिक मौतों का कारण बनता है| डब्‍लूएचओ ने 11 मार्च को कोरोना वायरस को pandemic घोषित कर  है।



दुनिया में हर 100 साल पर 'महामारी' का हमला हुआ है-

ये सिर्फ मात्र संयोग है या कुछ और कि पिछले चार सौ साल में हर सौ साल के बाद एक ऐसी बीमारी इस दुनिया में जरुर आई है जिसने पूरी दुनिया में तबाही मचाई और लाखों करोड़ों लोगों के जान के साथ साथ इसने कई इंसानी बस्तियों के तो नामो-निशान तक मिटा दिए |

(1) दुनिया में हर 100 साल पर 'महामारी' का हमला हुआ है. सन् 1720 में दुनिया में द ग्रेट प्लेग आफ मार्सेल फैला था | मार्सिले फ्रांस का एक शहर है | जहाँ प्लेग फैलते ही कुछ महीनों में 50 हज़ार लोग मारे गए | बाकी के 50 हजार लोग अगले दो सालों में मारे गए जिसमें लगभग 1 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई थी |

(2) द ग्रेट प्लेग आफ मार्सेल के 100 सालों के बाद सन 1820 में  एशियाई देशों में कॉलरा यानी हैजा ने महामारी का रूप लिया | इस महामारी ने जापान, अरब देशों, भारत, बैंकॉक, मनीला, जावा, चीन और मॉरिशस जैसे देशों को अपनी जकड़ में ले लिया | हैजा की वजह से सिर्फ जावा में 1 लाख लोगों की मौत हुई थी | जबकि सबसे ज्यादा मौतें थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस में हुई थी |

(3) इसी तरह सन् 1918-1920 में दुनिया ने झेला स्पेनिश फ्लू का क़हर इस बीमारी ने उस वक्त करीब 5 करोड़ लोगों को मौत की नींद सुला दिया था | सन 1920 करीब 100 साल बाद धरती पर फिर तबाही आई. इस बार ये तबाही स्पैनिश फ्लू की शक्ल में आई थी. वैसे ये फ्लू फैला तो 1918 से ही था | लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर 1920 में देखने को मिला | कहा जाता है कि इस फ्लू की वजह से पूरी दुनिया में दो से 5 करोड़ के बीच लोग मारे गए थे | और अब फिर 100 साल बाद दुनिया पर आई कोरोना की तबाही जिसकी वजह से पूरी दुनिया में लॉक डाउन है | और अभी तक लाखों लोग काल के गाल में समा चुके हैं |



दोस्तों जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों में शेयर करें | धन्यवाद  जय हिन्द, जय भारत 

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