14 जुलाई 2020

WHAT IS UDISE CODE AND HOW TO SEARCH IT

WHAT IS UDISE CODE AND HOW TO SEARCH IT


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किसी संस्था से सम्बन्धित बहुत से कार्यों के संपादन हेतु हमें उस संस्था के खास Unique Code की आवश्यक होती है, जिससे कि उससे सम्बन्धित जानकरियां प्राप्त की जा सके, उसकी पहचान हो सके । जैसे बैंकिंग के लिए ifsc,micr,branch code इत्यादि की जरुरत होती है ठीक इसी तरह अगर हम School U-DISE Code की बात करे तो भारत में स्कूलों के बारे में एक डेटाबेस है जिसे यू-डायस कोड (U-DISE CODE) कहते हैं| डेटाबेस स्कूल शिक्षा विभाग, एमएचआरडी, सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा विकसित किया गया है । जिसे भारत के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा Maintaine किया जाता है |यह स्कूलों के लिए एक आवश्यक कोड है, जिससे कि स्कूल से सम्बंधित जानकारी, छात्रवृत्ति से लेकर स्थानान्तरण प्रमाण पत्र, ड्रॉपआउट (शाला त्यागी) के स्तर और स्कूल के शौचालयों की स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। तो आज हम इसके बारे में ही बात करने वाले है कि School DISE Code क्या होता है और हम कैसे अपने स्कूल का U-DISE Code search कर सकते है 

School DISE Code Means:- 

यह 11 अंकों का नम्बर होता है। इसके द्वारा विद्यालय की पहचान होती है, जिसे विकासखंड, संकुल स्तर, जिला स्तर के साथ ही राष्ट्रीय स्तर तक पहचाना जाता है। सभी विद्यालयों के लिए U-DISE Code लेना ज़रुरी है जैसे- अनुदानित, शासकीय, अशासकीय, मदरसा आदि के साथ ही अन्य विद्यालयों के लिए भी डायस कोड ज़रुरी होता है। 

U-DISE Code Full Form:- 

यू-डायस कोड फुल फॉर्म – Unified District Information System For Education होता है। 

ऐसे बहुत से स्टूडेंट और टीचर्स होते है जिन्हें स्कूल डाइस कोड पता नहीं होता है और किसी आवश्यक कार्य के लिए फिर उन्हें परेशान होना पड़ता है। लेकिन आज की पोस्ट पढ़ने के बाद आपको स्कूल डायस कोड (School DISE Code) सर्च करने की जानकारी विस्तार में मिलेगी। तो आइए जानते है -

USE OF U-DISE CODE:- 

U-DISE Code का उपयोग स्कूल के विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जिसे जानना आपके लिए जरुरी है तो चलिए जानते है school dise code के उपयोग क्या है- 

स्कूल से स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने हेतु आपको U-DISE Code कि आवश्यकता होती है |
छात्रवृत्ति पोर्टल में School U-DISE Code काम आता है।
पाठ्यपुस्तक निःशुल्क प्राप्त करने में। 

RTE पोर्टल में इसकी जरुरत होती है।
शालाओं व विद्यार्थियों को सुविधा प्रदान करने में। 

U-DISE Code के 11 अंकों में छुपे राज- 

प्रायः सभी स्कूलों को 11 अंकों का ही U-DISE Code प्रदान किया गया है | इस 11 नंबर के कोड में पहले के 2 कोड राज्य को दर्शाते है। उसके बाद के 2 अंक जिले को प्रदर्शित करते है। जिले के बाद के 2 अंक ब्लॉक को प्रदर्शित करते है और उसके बाद के 3 अंक गाँव या शहर को दर्शाते है तथा अंत के 2 अंक विद्यालय को दर्शाते है। 

How To Search School U-DISE Code:- 

U-DISE Code पता करने के लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की जरुरत नहीं होगी। इसका तरीका बहुत आसान है। आइए जानते है School U-DISE Code ऑनलाइन कैसे सर्च करें- 

Step 1: Enter School U-DISE Code 

सबसे पहले आपको Google में School DISE Code टाइप करके सर्च करना होगा। 

Step 2: इसके बाद आपको अपने सर्च रिजल्ट में पहले नंबर पर इस http://udise.in/ UDISE के Website पर क्लिक करें |

Step 3: अब यहाँ Udise.in की वेबसाइट ओपन होगी। 

Step 4: Select State इसमें आपको अपना स्टेट सिलेक्ट करना है और “Go” पर क्लिक कर दीजिए। 
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Step 5: Select District अब अपनी District Select करे और “Go” पर क्लिक कर दीजिए 
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Step 6: Search School DISE Code Go पर क्लिक करते ही एक पीडीऍफ़ फाइल डाउनलोड होगी,जिसमें “School UDISE Code List” आ जाएगी। यहाँ पर आपको अपने स्कूल डायस कोड मिल जाएगा। इस तरह आप अपने School UDISE Code सर्च कर सकते है और अपना कार्य कर सकते है। आप जिस भी स्टेट से है वहां का UDISE Code आपको मिल जाएगा जैसे- School UDISE Code Chhattisgarh या School DISE Code Panjab भी सर्च कर सकते है।

दोस्तों उम्मीद है आप इस तरह से आप अपने स्कूल के यू-डाइस कोड को खोज पाएंगे | अगर पोस्ट अच्छा लगा हो तो कमेंट और शेयर जरुर करें धन्यवाद | जय हिन्द , जय भारत |

11 जुलाई 2020

WHAT IS IFSC, MICR AND CHECK NUMBER IN HINDI

WHAT IS IFSC, MICR AND CHECK NUMBER IN HINDI


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IFSC कोड क्या है?


भारतीय वित्तीय प्रणाली कोड (IFSC) Indian Financial System Code भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा भारत में प्रत्येक बैंक शाखाओं को आवंटित 11 अंकों का एक अद्वितीय कोड है जो RTGS (रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट), NEFT (नेशनल) जैसे ऑनलाइन फंड ट्रांसफर सिस्टम में योगदान कर रहा है इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) और IMPS (तत्काल भुगतान सेवा)।
IFSC कोड सुनिश्चित करता है कि धन सही खाते में स्थानांतरित किया गया है। बैंक का IFSC कोड आमतौर पर बैंक की चेक पत्तियों पर पाया जाता है। पहले चार अंक बैंक को दर्शाते हैं। इसके बाद अंक शून्य होता है। अंतिम छह अंक बैंक शाखा को दर्शाते हैं। किसी भी बैंक खाते में ऑनलाइन फंड ट्रांसफर करने के लिए, प्राप्तकर्ता के बैंक शाखा के IFSC कोड को जानना आवश्यक है ।
ऑनलाइन आईएफएससी कोड खोजक के साथ, आप आसानी से अपनी जरूरत के अनुसार आईएफएससी कोड पा सकते हैं। बैंक के IFSC कोड को खोजने के लिए, आपको बैंक, राज्य और जिले के नाम का चयन करना होगा जहां बैंक स्थित है और बैंक शाखा है। विवरण प्रदान करने के बाद, आपके बैंक का IFSC कोड आपके बैंक, राज्य, जिले, शहर, शाखा, शाखा कोड, पते और संपर्क नंबर जैसी जानकारी के साथ दिखाई देगा।
किसी भी फंड ट्रांसफर को करने से पहले, आपको बैंक के साथ यह जांचना होगा कि किसी गलत लेनदेन से बचने के लिए प्राप्तकर्ता के बैंक की शाखा का IFSC कोड सही है या नहीं।


MICR कोड क्या है?



मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकॉग्निशन (MICR) एक प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी है जिसका इस्तेमाल बैंकिंग इंडस्ट्री में MICR कोड को प्रिंट करने के लिए किया जाता है। MICR कोड भारत में बैंक शाखाओं के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा आवंटित एक 9-अंकीय कोड है जो इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम (ECS) में योगदान दे रहा है।
MICR कोड आमतौर पर चेक लीफ के निचले भाग पर प्रिंट किया जाता है जो आसान processing की सुविधा देता है। इसके अलावा, यह बैंक पासबुक के पहले पृष्ठ पर पाया जाता है। पहले तीन अंक सिटी कोड को दर्शाते हैं, मध्य तीन अंक बैंक कोड को दर्शाते हैं और अंतिम तीन अंक शाखा कोड को दर्शाते हैं। इस कोड के साथ, मशीनें तेजी से जांच प्रक्रिया कर सकती हैं। ऑनलाइन फंड ट्रांसफर के लिए MICR कोड अनिवार्य है। चूंकि MICR कोड चुंबकीय स्याही से प्रिंट किया जाता है, मशीनें आसानी से कोड पढ़ सकती हैं, इस प्रकार त्रुटियां कम से कम हो जाती हैं।


चेक नंबर क्या है?



एक चेक नंबर एक 6-अंकीय संख्या है जो विशिष्ट रूप से प्रत्येक चेक लीफ को दी गई है। यह चेक के निचले भाग में बाईं ओर लिखा होता है। यह सलाह दी जाती है कि जब आप बैंक से प्राप्त करते हैं, तो एक नई चेक बुक में प्रत्येक चेक लीफ पर संख्या की गिनती और जांच करें। यह सुनिश्चित करना है कि चेक बुक से कोई चेक गायब न हो।

09 जुलाई 2020

How States in India got their Names

How States in India got their Names Origin and Interesting.

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हिंदुस्तान के नाम को लेकर विभिन्न कहानियाँ कल्पनाएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन शायद बहुत कम ऐसे लोग हैं जो हिंदुस्तान के नाम से जुड़े तथ्य से वाकिफ हैं। वास्तव में हिंदुस्तान को उसका नाम हिंद नदी और आर्यन उपासक द्वारा मिला जो हिंद नदी को सिंध नाम से पुकारते थे। जबकि पारसी द्वारा इसे हिंद कहा जाता था। अतः ‘हिंदुस्तान’दो नामों का मिश्रण बना। ये है- हिंदू और सिंधु। यह कहने की जरूरत नहीं है कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है। यही नहीं यहाँ पग पग में बोली बदलती है, पग पग में संस्कृति नए आवरण में नजर आती है। यहाँ परम्परा, धर्म, आधुनिकता, मान्यताएं सबकी अपनी अपनी खास विशेषताएं हैं। यही कारण है कि भारत को विविधता में एकता वाला देश कहा जाता है। लाखों-करोड़ों लोग भारत के 28 राज्यों में एक साथ रहते हैं जहाँ भाषा, इतिहास, शासक आदि विभिन्न राज्यों को नाम देने में महति भूमिका अदा करती है। बहरहाल क्या कभी आपने सोचा है कि देश के अलग अलग राज्यों को उनके नाम विशेष कैसे मिले? शायद नहीं। आइये देश के 29 राज्यों के नामों से जुड़े दिलचस्प तथ्यों पर एक नजर दौड़ाते हैं।



1.  सिक्किम 
इसकी उत्पत्ति लिम्बु से हुई है। इसमें ‘सू’ का अर्थ है नया और ‘खिम’का अर्थ है विशाल भवन। पूर्णतः में हम कह सकते हैं नया विशाल भवन। इसके अलावा सिक्किम को तिब्बती भाषा में डेंजांग नाम से जाना जाता है। अब उत्तर-पूर्वी दिशा में स्थित सात बहनों के नामों की उत्पत्ति पर नजर दौड़ाते हैं।

2. हिमाचल प्रदेश
नाम से स्पष्ट है। यह हिम का आंचल है। इस प्रदेश का नाम भी संस्कृत भाषा से उत्पन्न हुआ है। संस्कृत में हिम का अर्थ होता है बर्फ और आंचल का मतलब पहाड़। पूर्णतः इसे बर्फीले पहाड़ों का घर कहा जाता है।

3. पंजाब
पंजाब असल में इंडो-इरानी शब्द है। बहरहाल ‘पंज’ शब्द का अर्थ है पांच और ‘आब’ का मतलब पानी। अतः इसे पांच नदियों की भूमि के रूप में जाना जाता है।

4. उत्तराखण्ड
सन 2000 में उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश से अलग होकर एक नए राज्य के रूप में उभरा। इसका अर्थ है उत्तरी पहाड़। लेकिन बाद में इसका नाम उत्तरांचल से उत्तराखण्ड कर दिया गया जिसका मतलब है उत्तरी भूमि।
5. हरियाणा
हरियाणा दो शब्दों से मिलकर बना है। हरि और आना। हरि मतलब विष्णु या फिर विष्णु के अवतार श्री कृष्ण। समग्रता में आप कह सकते हैं कि हरि को आने के लिए कहा जा रहा है। मान्यताओं के मुताबिक महाभारत काल में श्री कृष्ण यहाँ आए थे। इसी कारण इस राज्य का नाम हरियाणा रखा गया।
6. उत्तर प्रदेश
उत्तर यानी उत्तरी दिशा और प्रदेश यानी राज्य। इस राज्य के लिए हम कह सकते हैं कि राज्य जो उत्तर दिशा में स्थित है।

7. राजस्थान
यह नाम संस्कृत शब्द ‘राजा’ से उत्पन्न हुआ है। लेकिन प्राचीन समय में इस शहर को ‘राजपुताना’ नाम से जाना जाता था अर्थात राजपूतों का शहर।
8. बिहार 
यह पाली शब्द ‘विहार’ से उत्पन्न हुआ है। इसका अर्थ है आवास या डेरा डालना। समय के साथ यह विहार से बिहार हुआ। एक समय तक इसे बौद्ध मठधारियों के विहार का स्थाना माना जाता था।

9. पश्चिम बंगाल 

जरा सोचिए कि बंगाल के साथ पश्चिम क्यों जुड़ा? इससे पहले कि हम इसके नाम के इतिहास के बारे में जानें, यह जान लेना आवश्यक है कि इसकी उत्पत्ति किस भाषा से हुई है। इस नाम की उत्पत्ति भी संस्कृत भाषा से ही हुई है। संस्कृत शब्द ‘वांग’ से इसे लिया गया है। लेकिन समय के साथ साथ इसे अलग अलग नामों से पुकारा जाने लगा। मसलन पारसी इसे बांग्लाह के नाम से पुकारते थे। जबकि हिंदी में इसे बंगाल कहा जाता है और बंगाली में इसे बांग्ला कहा जाने लगा। असल में इस नाम के साथ पश्चिम 1905 के विभाजन के बाद जुड़ा। 1947 में हुए विभाजन के बाद पश्चिम बंगाल एक राज्य बना जबकि पूर्व बंगाल एक नए देश के रूप में विश्व मानचित्र में जुड़ा जो बांग्लादेश नाम से जाना गया। 

10. झारखण्ड

झारखण्ड संस्कृत शब्द ‘झर’ से बना है। इसका अर्थ है जंगल और खण्ड मतलब है भूमि। अतः समग्रता में आप इसे जंगल की भूमि कह सकते हैं। झारखण्ड को ‘वनांचल’ नाम से भी जाना जाता है। 

11. ओडिशा
यह संस्कृत शब्द ‘ओडरा विषय’या ‘ओडरा देश’से उत्पन्न हुआ है। इसका मतलब है कि

ओडरा लोग जो मध्य भारत में निवास करते हैं। 


12. छत्तीसगढ़
पहले इस राज्य को दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था। लेकिन इस नाम से सम्बंधित किसी तरह के प्रमाण या साक्ष्य मौजूद नहीं है। जबकि इस राज्य में 36 किले मौजूद हैं। यही कारण है कि इसे आज हम छत्तीसगढ़ के नाम से जानते हैं।

13. मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश मतलब मध्य में स्थित राज्य। आजादी के पहले देश के ज्यादातर राज्य मध्य प्रदेश के रूप में ही जाने जाते थे जो कि ब्रितानियों द्वारा प्रशासित राज्य थे। सन 1950 में सेंट्रल प्रोविंस और बरार, मकरई और छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर सेंट्रल प्रोविंस के रूप में जाना जाने लगे। 

14. गुजरात
इसकी उत्पत्ति गुजरा से हुई। असल में यह वह भूमि है जो 700 और 800 में गुज्जरों द्वारा शासित थी। अतः इसे गुज्जरों की भूमि कहा जाता था। 

15. महाराष्ट्र -
महाराष्ट्र के नाम के साथ विभिन्न किस्म के मत जुड़े हुए हैं।
इसकी संस्कृत शब्द से उत्पत्ति हुई है। ‘महा’ मतबल महान और ‘राष्ट्र’ मतलब देश यानी महान देश। इसके अलावा अशोक के अभिलेखों के मुताबिक इसकी उत्पत्ति वंश से हुई है अतः इसे राष्ट्रिका कहा जाता है। राष्ट्रकूट एक वंश है जिसका 8 से 10 सदी तक शासन रहा है और राष्ट्र शब्द ‘रत्ता’ से उत्पन्न हुआ है। यही नहीं यह भी माना जाता है कि राष्ट्र शब्द ‘राठी’या ‘रथ’ से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ होता है रथ गाड़ी।

16. गोआ
अब तक ठीक ठीक यह नहीं कहा जा सकता है कि इस शहर को ‘गोआ’ नाम कैसे मिला। संभवतः यह शब्द संस्कृत से लिया गया है। जिसमें ‘गो’का अर्थ गाय होता है। कुछ लोगों की मान्यता है कि गोआ यूरोपीय या पुर्तगाली शब्द है।
17. आंध्र प्रदेश
यह संस्कृत शब्द ‘आंध्र’ से उभरा है। इसका अर्थ है दक्षिण। इस क्षेत्र विशेष में जनजातियों का भी आवास है जिन्हें ‘आंध्र’के नाम से जाना जाता है। मौर्य काल के इतिहास आंध्र भ्रुट्य के रूप में जाना जाता था। इसका मतलब है दक्षिण के नौकरशाह।

18. कर्नाटक 
इसकी उत्पत्ती ‘करू’शब्द से हुई है। इसका अर्थ है कि गगनचुम्बी। ‘नाद’मतलब भूमि। यह दक्कन पठार को परिलक्षित करता है।

19. तमिलनाडु
तमिलनाडु का अर्थ है कि तमिलों का घर। तमिल मतलब मीठा शरबत। नाडु एक तमिल शब्द है जिसका अर्थ है जन्मभूमि या देश।

20. केरला
इस शहर के नाम के साथ भी कई मत जुड़े हैं। इसकी उत्पत्ति ‘चरना’से हुई है जिसका अर्थ है संकलित और ‘आलम’ यानी भूमि। केरलम शब्द चेरा वंश के शासकों से उत्पन्न हुआ है जो कि 1-5 ए.डी. तक मौजूद रहे। शब्द बना ‘चेरा आलम’ अंततः इसका नाम बदलकर केरलम हुआ। संस्कृत शब्द ‘केरलम’ का अर्थ है एक जुड़ी हुई भूमि। भौगोलिक रूप से कह सकते हैं कि केरला समुद्र से निकली अतिरिक्त भूमि है।

21. तेलंगाना
तेलंगाना शब्द ‘त्रिलिंग’ से उत्पन्न हुआ है। इसका अर्थ है शिव के तीन लिंग। 


अब उत्तर-पूर्वी दिशा में स्थित सात बहनों के नामों की उत्पत्ति पर नजर दौड़ाते हैं-

22. 
त्रिपुरा 
त्रिपुरा के नाम के साथ कई मत और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। 
त्रिपुरा, कोकबोरोक शब्द से जन्मा है। इसका अर्थ है ‘तुई। ‘तुई’ मतलब पानी और ‘पारा’ मतलब नजदीक। 
मान्यता के मुताबिक राजा त्रिपुर के नाम से इस राज्य को त्रिपुरा नाम मिला। शायद ही आप इस तथ्य से वाकिफ हों कि यह राज्य क्षेत्रफल के हिसाब से देश का तीसरा सबसे छोटा राज्य है | 

23. अरुणाचल प्रदेश 
इसकी उत्पत्ति अरुण शब्द से हुई है। इसका अर्थ है सुबह की ज्योति और आंचल मतलब पहाड़ अर्थात सुबह की ज्योति का पहाड़।

24. असम
इसका मतलब ‘अहम’शासकों से उत्पन्न हुआ है। जिन्होंने 6 सदियों तक असम पर राज किया। अहम इंडो-आर्यन शब्द असामा से भी उत्पन्न माना जाता है जिसका अर्थ है अनियमित। 

25. मेघालय
यह राज्य बादलों का घर है। मेघ यानी बादल और आलय यानी घर अर्थात बादलों का घर।

26. मणिपुर
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है यह मणियों का शहर है।

27. मिज़ोरम
‘मी’का अर्थ है लोग और ‘ज़ो’यानी पहाड़ के निवासी।

28. नागालैंड 
नागालैंड शब्द की उत्पत्ति बर्मा शब्द से हुई है। यह है नाका। नाका का अर्थ नागा होता है। नागा मतलब ऐसे लोग जिनके नाक और कान छिदे हुए होते हैं। इसे नागा की भूमि भी कहा जाता है।

07 जुलाई 2020

WHAT IS CIBIL SCORE AND CIBIL REPORT IN HINDI


WHAT IS CIBIL SCORE AND CIBIL REPORT IN HINDI



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CIBIL स्कोर क्या है?
CIBIL स्कोर एक उपभोक्ता का क्रेडिट स्कोर है। यह उपभोक्ता के क्रेडिट इतिहास का 3 अंकों का संख्यात्मक सारांश और व्यक्ति की क्रेडिट प्रोफ़ाइल का प्रतिबिंब है। आज, उपभोक्ता अपने सपनों और वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए क्रेडिट कार्ड और ऋण की तलाश करते हैं। CIBIL स्कोर इस क्रेडिट को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। लेकिन CIBIL स्कोर क्या है? और क्या कारक हैं जो इसे प्रभावित करते हैं?

यहाँ इन सवालों के जवाब यहां दिए गए हैं:-

1. CIBIL स्कोर क्या है?
CIBIL स्कोर एक उपभोक्ता का क्रेडिट स्कोर है। सीधे शब्दों में कहें, यह उपभोक्ता के क्रेडिट इतिहास का 3 अंकों का संख्यात्मक सारांश और व्यक्ति की क्रेडिट प्रोफ़ाइल का आइना है। यह पिछले क्रेडिट व्यवहार पर आधारित है, जैसे कि उधार और पुनर्भुगतान की आदतें जो कि बैंक और ऋणदाताओं द्वारा नियमित आधार पर CIBIL के साथ साझा की जाती हैं (जिसका विवरण उपभोक्ता की CIBIL रिपोर्ट में चित्रित किया गया है)।
स्कोर CIBIL रिपोर्ट के 'खातों' और 'पूछताछ' अनुभागों में पाए गए विवरणों पर आधारित है, जिसमें ऋण खातों या क्रेडिट कार्डों, भुगतान की स्थिति, बकाया राशियों और देय तारीख से पहले के दिनों तक (लेकिन केवल उन तक ही सीमित नहीं) शामिल हैं। 300 से 900 तक, CIBIL स्कोर 900 के करीब है, उच्चतर उपभोक्ता के क्रेडिट कार्ड या ऋण आवेदन को स्वीकृत होने की संभावना है। एक व्यक्ति के पिछले व्यवहार को उसके भविष्य के कार्यों के एक संकेतक के रूप में लिया जाता है, और उसके अनुरूप, CIBIL स्कोर उपभोक्ता की क्रेडिट-योग्यता को दर्शाता है। ट्रांसयूनियन CIBIL (पूर्व में क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड) भारत की अग्रणी क्रेडिट सूचना कंपनी है जिसमें उपभोक्ता सूचनाओं का सबसे बड़ा संग्रह है। इसकी स्थापना 2000 में हुई थी।

2. CIBIL रिपोर्ट क्या है?
CIBIL रिपोर्ट एक समेकित क्रेडिट रिपोर्ट है जिसमें उपभोक्ता का CIBIL स्कोर और क्रेडिट सारांश, व्यक्तिगत जानकारी, संपर्क जानकारी, रोजगार सूचना और ऋण खाता जानकारी शामिल होती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऋणदाता CIBIL स्कोर दोनों पर विचार करते हैं और किसी व्यक्ति की ऋण पात्रता का आकलन करने के लिए रिपोर्ट करते हैं।

3. CIBIL स्कोर को प्रभावित करने वाले कारक क्या हैं?
CIBIL स्कोर एक स्कोरिंग एल्गोरिथ्म द्वारा उत्पन्न होता है, जो बड़ी संख्या में डेटा बिंदुओं और मैक्रो-लेवल क्रेडिट रुझानों को ध्यान में रखता है। यह 36 महीनों के क्रेडिट इतिहास पर आधारित है। मुख्य रूप से, चार प्रमुख कारक हैं जो एक उपभोक्ता के CIBIL स्कोर को प्रभावित करते हैं - भुगतान इतिहास, सुरक्षित या असुरक्षित ऋण का क्रेडिट मिश्रण, पूछताछ और क्रेडिट उपयोग। हालांकि, नवीनतम CIBIL स्कोर एल्गोरिदम में क्रेडिट की गहराई भी शामिल है (यानी, आपके मौजूदा क्रेडिट इतिहास की अवधि, जब आपका सबसे पुराना क्रेडिट खाता खोला गया था), बकाया शेष राशि का दीर्घकालिक रुझान, क्रेडिट कार्ड पर लेनदेन इतिहास, वास्तविक चुकौती का अनुपात कुल देय राशि की राशि और नए खाते खोले गए / खाते बंद हो गए।
आप एक सकारात्मक क्रेडिट प्रोफाइल की दिशा में कैसे काम कर सकते हैं?
आपका CIBIL स्कोर आपके क्रेडिट इतिहास और पिछले भुगतानों पर बनाया गया है लेकिन यह आपके भविष्य के क्रेडिट तक पहुंच को प्रभावित करेगा। आज आप जो करते हैं वह आपको एक मजबूत और स्वस्थ क्रेडिट प्रोफ़ाइल बनाने में मदद कर सकता है। ऐसे:
हमेशा अपना बकाया समय पर चुकाएं क्योंकि ऋणदाता देर से भुगतान को नकारात्मक रूप से देखते हैं।
* अपने संतुलन को कम रखें, बहुत अधिक क्रेडिट का उपयोग न करें, और अपने उपयोग को नियंत्रित करें। और मॉडरेशन में नए क्रेडिट के लिए आवेदन करें।
* सुरक्षित (जैसे होम लोन और ऑटो ऋण) और असुरक्षित ऋण (व्यक्तिगत ऋण और क्रेडिट कार्ड की तरह) का एक स्वस्थ क्रेडिट मिश्रण बनाए रखें - बहुत से असुरक्षित ऋण नकारात्मक रूप से देखे जा सकते हैं।
अपने सह-हस्ताक्षरित, गारंटीकृत और संयुक्त खातों की मासिक रूप से निगरानी करें। याद रखें कि सह-हस्ताक्षरित, गारंटीकृत या संयुक्त रूप से रखे गए खातों में छूटे हुए भुगतानों के लिए आपको समान रूप से उत्तरदायी माना जाता है, और आपके संयुक्त धारक की (या गारंटीकृत व्यक्ति की) लापरवाही क्रेडिट की पहुंच की आपकी क्षमता को प्रभावित कर सकती है जब आपको इसकी आवश्यकता होती है।

IFSC, MICR  AND CHECK NUMBER क्या होता है इसे जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें -
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/2020/07/what-is-ifsc-micr-and-check-number-in-hindi.html

* पूरे वर्ष में बार-बार अपने क्रेडिट इतिहास की समीक्षा करें। अप्रिय आश्चर्य (जैसे अस्वीकृत ऋण आवेदन) से बचने के लिए अपने CIBIL स्कोर की निगरानी करें और नियमित रूप से रिपोर्ट करें। नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट की जाँच करने से आपको संभावित अशुद्धियों के प्रति सचेत किया जा सकता है, यदि कोई हो। यदि आप किसी भी विसंगति को देखते हैं, तो आप CIBIL वेबसाइट पर विवाद दर्ज कर सकते हैं या ऋणदाता से CIBIL में सुधार की रिपोर्ट करने का अनुरोध कर सकते हैं।
एक सकारात्मक क्रेडिट प्रोफ़ाइल क्रेडिट तक पहुंच का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपको इसकी आवश्यकता होने पर क्रेडिट-सचेत और ऋण-तैयार होने के लिए नियमित रूप से अपनी क्रेडिट प्रोफ़ाइल की निगरानी करना याद रखें।

05 जुलाई 2020

SBI ATM NEW WITHDRAWAL RULES TRANSACTION LIMITS CHARGES

SBI ATM NEW WITHDRAWAL RULES TRANSACTION LIMITS CHARGES
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SBI ATM NEW WITHDRAWAL RULES IN HINDI

एसबीआई के नए एटीएम निकासी नियम: लेन-देन की सीमा, शुल्क और अन्य विवरण:-

*1 जुलाई से, एसबीआई एटीएम नकद निकासी नियम बदल गए हैं|
*एसबीआई ने अप्रैल में सभी एटीएम लेनदेन के लिए सेवा शुल्क माफ कर दिया था|



एसबीआई के नए एटीएम से निकासी की सीमा और शुल्क:-
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 1 जुलाई से अपने एटीएम निकासी नियमों को संशोधित किया है। एसबीआई ग्राहकों को पता होना चाहिए कि बैंक द्वारा 3 महीने के लिए दी गई छूट, जो 30 जून को समाप्त हो गई है, को आगे नहीं बढ़ाया गया है। कोरोनोवायरस महामारी के मद्देनजर, एसबीआई ने एसबीआई एटीएम पर किए गए सभी एटीएम लेनदेन के साथ-साथ अन्य बैंक एटीएम से भी अधिक संख्या में लेनदेन के लिए सेवा शुल्क माफ कर दिया था। "24 मार्च को वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा के मद्देनजर, भारतीय स्टेट बैंक ने सभी एटीएम लेनदेन के लिए एटीएम शुल्क माफ करने का फैसला किया है ..."

यहां आपको SBI की नई एटीएम निकासी सीमा और शुल्क के बारे में जानने की आवश्यकता है -

1) अपने बचत बैंक खाते में 25,000 औसत मासिक शेष (एएमबी) वाले खाताधारकों को आठ मुफ्त लेनदेन मिलेंगे, जिनमें एसबीआई एटीएम में पांच लेनदेन और अन्य बैंक एटीएम से तीन लेनदेन छह मेट्रो केंद्रों (मुंबई, नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद) के खाताधारकों को मिलेंगे| गैर-महानगरों में, ऐसे खाताधारकों को 10 मुफ्त लेनदेन मिलेंगे, जिनमें एसबीआई के एटीएम में पांच और अन्य बैंक एटीएम में पांच शामिल हैं।

2) 25,000 से ऊपर 50,000 तक के औसत मासिक शेष (एएमबी) एसबीआई खाताधारकों को अन्य बैंक एटीएम ( 3 in metros, 5 non-metros) में 8 मुफ्त लेनदेन मिलेंगे।

3) SBI अपने ग्राहकों को अपने बचत खातों में स्टेट बैंक समूह (SBG) के एटीएम में असीमित लेनदेन करने पर ₹ 25,000 से अधिक का औसत बैलेंस बनाए रखने की अनुमति देगा।

4) एसबीआई खाताधारक 50,000 से ऊपर और1,00,000 तक के औसत बैलेंस बनाए रखते है तो उन्हें 8 मुफ्त लेनदेन प्राप्त होंगें अन्य बैंक एटीएम (3 महानगरों, 5 गैर-महानगरों) 
5) एसबीआई अपने ग्राहकों को उनके बचत खातों में 1,00,000 से अधिक के औसत बैलेंस को बनाए रखने की अनुमति देगा, जो एसबीजी एटीएम के साथ-साथ अन्य बैंकों के एटीएम में असीमित लेनदेन करते हैं।
6) SBI निर्धारित सीमा से परे किसी भी अतिरिक्त वित्तीय लेनदेन के लिए ₹10+GST to ₹20+GST तक शुल्क लेगा।
7) SBI निर्धारित सीमा से परे किसी भी अतिरिक्त गैर-वित्तीय लेनदेन के लिए ₹5+GST to ₹8+GST तक का शुल्क लेगा।
8) बैंक अपर्याप्त बैलेंस के कारण लेनदेन में गिरावट के लिए ₹20+GST का शुल्क लेगा।
9) एसबीआई एटीएम लेनदेन पर शाखा लेनदेन के लिए एकतरफा अंतर-परिवर्तनीयता की अनुमति देगा। इसका मतलब है कि एक ग्राहक को एसबीआई एटीएम में 6 मेट्रो केंद्रों पर अधिकतम 10 मुफ्त डेबिट लेनदेन और अन्य केंद्र एटीएम में अधिकतम 12 मुफ्त डेबिट लेनदेन की अनुमति होगी (यदि अन्य बैंक एटीएम में कोई लेनदेन नहीं है और शाखा में कोई लेनदेन नहीं है)
10) सभी स्थानों पर सभी वेतन खातों के लिए, एसबीआई एसबीजी एटीएम और अन्य बैंक एटीएम में मुफ्त असीमित लेनदेन की पेशकश करेगा।


आधार कार्ड को पैन कार्ड से कैसे लिंक करें जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें :-https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/2020/06/how-to-link-aadhaar-card-to-pan-card-online-in-hindi.html

04 जुलाई 2020

JIOMEET VIDEO CONFERENCING APP

JIOMEET VIDEO CALLING & CONFERENCING APP


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jiomeet app
महीनों तक परीक्षण करने के बाद रिलायंस जियो ने आखिरकार देश में JioMeet लॉन्च कर दिया है। JioMeet ऐप Google Play store और Apple App स्टोर दोनों पर उपलब्ध है। JioMeet के साथ, रिलायंस जियो निस्संदेह अन्य वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म जैसे कि Zoom, Google meet, skype, Microsoft teams, जैसे अन्य एप्स को कड़ी टक्कर देने की क्षमता रखता है।

Reliance ने JioMeet को उस समय लॉन्च किया जब देश भर के लोग उन उत्पादों को त्याग रहे हैं जो भारत में विशेष रूप से चीन द्वार बनाये गए हैं। वर्तमान में, JioMeet को ऐप स्टोर पर 4.8 और Google Play स्टोर पर 4.6 रेटिंग दी गई है। ऐप को पहले ही 100k एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं द्वारा डाउनलोड किया गया है।
हमने कुछ समय के लिए JioMeet वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप्लिकेशन का उपयोग किया था और यहां आपको प्लेटफॉर्म के बारे में जानने के लिए आवश्यक कुछ और टिप्स और ट्रिक्स बताए गए हैं जो आप प्लेटफॉर्म का बेहतर तरीके से उपयोग कर सकते हैं।
JioMeet: कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखें Jio JioMeet वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म भारत में लॉन्च किया गया: मीटिंग कैसे डाउनलोड करें और शुरू करें, jiomeet.jio.com पर देखें
JioMeet को एक ही समय में एक से अधिक मीटिंग और ग्रुप वीडियो कॉन्फ्रेंस कॉलिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
मीटिंग शुरू करने के लिए JioMeet पर साइन करना आसान है। आपको बस मोबाइल नंबर, नाम, ईमेल आईडी दर्ज करना होगा। बस।
आप साइन अप किए बिना एक बैठक में शामिल होने में सक्षम होंगे। एक बैठक शुरू करने के लिए आपको एक खाता बनाना होगा और लॉगिन करना होगा।
ज़ूम के समान, JioMeet आपको मीटिंग को शेड्यूल करने और प्रतिभागियों के साथ मीटिंग कोड साझा करने की सुविधा देता है।
अधिकांश वीडियो कॉलिंग प्लेटफ़ॉर्म में मुफ्त मिलने की समय सीमा होती है। JioMeet पर एक बैठक बिना किसी रुकावट के 24 घंटे तक चल सकती है।
गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए, JioMeet पर होस्ट की गई प्रत्येक बैठक पासवर्ड संरक्षित है। ज़ूम के समान, JioMeet भी स्क्रीन शेयरिंग विकल्प के साथ आता है। ज़ूम के रूप में, JioMeet भी वेटिंग रूम विकल्प के साथ आता है। आप इसे सक्षम या अक्षम करने का विकल्प चुन सकते हैं। बैठक की बेहतर सुरक्षा के लिए विकल्प को सक्षम किया जाना चाहिए। प्रतीक्षा कक्ष विकल्प चालू होने के बाद, कोई भी बिना होस्ट की अनुमति के बैठक में शामिल नहीं हो पाएगा।
JioMeet मल्टी-डिवाइस सपोर्ट के साथ आता है। कॉल करने पर आप एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस पर स्विच करने में सक्षम होंगे। यह 5 डिवाइस तक सपोर्ट करता है। एक और दिलचस्प फीचर जो JioMeet लाता है वह है सेफ ड्राइविंग मोड। यह उन लोगों के लिए मददगार होगा जिन्हें कहीं जाने के दौरान एक महत्वपूर्ण वीडियो सम्मेलन में भाग लेने की आवश्यकता होती है।

jio meet app download करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें -


JioMeet कॉल कैसे जुड़ें-

JioMeet मीटिंग में शामिल होने के लिए आपको होम स्क्रीन पर Join विकल्प पर क्लिक करना होगा और होस्ट द्वारा प्रदान की गई मीटिंग आईडी दर्ज करनी होगी।
JioMeet video conferencing शामिल होने से पहले ऑडियो और वीडियो को disable करने का विकल्प प्रदान करता है। विशेष रूप से, JioMeet आपको एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की अनुमति देता है, भले ही आपका JioMeet के साथ कोई खाता न हो।

JioMeet कॉल कैसे शुरू करें 

meeting शुरू करने के लिए आपको अपने नाम (पहले और अंतिम) और फोन नंबर के साथ साइन अप करना होगा, और फिर ओटीपी दर्ज करना होगा। होम स्क्रीन पर न्यू मीटिंग ऑप्शन पर क्लिक करें। 
चुनें कि क्या आप वीडियो को चालू या बंद रखना चाहते हैं और एक व्यक्तिगत मीटिंग आईडी बनाते हैं। आईडी जनरेट नहीं करने का विकल्प भी है लेकिन यदि आप विकल्प को सक्षम करते हैं तो यह बेहतर है। 
स्टार्ट मीटिंग पर क्लिक करें प्रतिभागी विकल्प पर क्लिक करके और फिर आमंत्रित पर प्रतिभागियों को आमंत्रित करें। जब आप जुड़ते हैं तो आप प्रतिभागियों को म्यूट या अनम्यूट कर सकते हैं। आप अन्य लोगों के अलावा, मैसेज, व्हाट्सएप, ट्विटर सहित विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से मीटिंग आईडी लिंक भेज सकते हैं।

03 जुलाई 2020

Aadhaar card lost how to order a reprint

AADHAAR CARD LOST HOW TO ORDER A REPRINT


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AADHAAR TWEET

आज हम सब आधार कार्ड की उपयोगिता से भली-भांति परिचित हैं| आधार प्रणाली निवासियों को देश भर में ऑनलाईन पहचान सत्यापन का एकमात्र स्‍त्रोत प्रदान करती है। निवासियों का एक बार नामांकन हो जाने पर वे आधार नम्‍बर का इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से उपयोग कर अपनी पहचान को सत्‍यापित और प्रमाणित कर सकते हैं। इसके द्वारा नागरिक प्रत्‍येक बार सेवाओं जैसे बैंक खाता खोलने के लिए, ड्राइविंग लाइसेंस आदि प्राप्‍त करने हेतु बार-बार पहचान समर्थन दस्‍तावेजों को उपलब्‍ध कराने की परेशानी से बच सकते हैं। पहचान का एक पोर्टेबल सबूत, जिसे कभी भी कहीं भी ऑनलाईन आधार प्रमाणीकरण के माध्‍यम से सत्‍यापित किया जा सकता है| लेकिन कभी ऐसा भी होता है कि आपसे जाने अनजाने आपका आधार कार्ड कहीं खो जाता है या किसी तरह नष्ट हो जाता है और आप उसे फिर से रीप्रिंट करना चाहते हैं और आपका मोबाइल नम्बर आपके आधार कार्ड से पंजीकृत/लिंक नहीं होने कि वजह से इसे रीप्रिंट करना मुश्किल होता है लेकिन अब इस बात कि चिंता करने कि आवश्यकता नहीं है मोबाइल नम्बर पंजीकृत नहीं होने के बावजूद भी आप अपने आधार को रीप्रिंट कर सकते हैं| 
अगर आपका आधार कार्ड खो गया है तो इसके लिए घबराने या चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड धारकों के लिए (Reprint) पुनर्मुद्रण का आदेश दिया है। अब, यदि आपका मोबाइल नंबर आधार में पंजीकृत नहीं है, तो भी आप आधार (Reprint) पुनर्मुद्रण कर सकते हैं। एक ट्वीट में UIDAI ने कहा, "अगर आपका मोबाइल नंबर आधार में पंजीकृत नहीं है। तो भी आप आधार (Reprint) पुनर्मुद्रण का order दे सकते हैं|हालांकि, इस सेवा का उपयोग करने का मतलब यह नहीं है कि आप जो नया मोबाइल नंबर देते हैं, वह आपके आधार में पंजीकृत हो जाएगा।" किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है। 
यदि आपके पास मोबाइल नंबर पंजीकृत नहीं है, तो आप अपने आधार कार्ड (Reprint) पुनर्मुद्रण के लिए कैसे ऑर्डर कर सकते हैं:- 

1) (UIDAI) यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग-इन करें।2) 'Order Aadhaar Reprint' विकल्प पर क्लिक करें। 
3) अपना आधार नंबर (UID) या नामांकन आईडी (EID) डालें | 
4) स्क्रीन पर प्रदर्शित सुरक्षा कोड टाइप करें और 'मेरा मोबाइल नंबर पंजीकृत नहीं है' पर क्लिक करें। 
5) उस मोबाइल नंबर को दर्ज करें जिस पर आप ओटीपी प्राप्त करना चाहते हैं। 
6) मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी को इनपुट करें। T & C चेकबॉक्स चेक करें और सबमिट करें। 
7) Make Payment पर क्लिक करें। ऑनलाइन भुगतान मोड का चयन करें और भुगतान करें। 
8) अगले पेज पर भुगतान गेटवे पर दिखाई देगा जहाँ आपको ₹50 (जीएसटी और स्पीड पोस्ट शुल्क को मिलाकर) का भुगतान करना होगा।9) अपने SRN वाले पावती स्लिप को डाउनलोड करें और सेव करें 
10) सफल भुगतान के बाद, आपका आधार कार्ड प्रिंट हो जाएगा और आपको 15 दिनों के भीतर स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज दिया जाएगा। 

आधार कार्ड के लिए नामांकन के समय प्रदान की गई पावती पर्ची में उल्लेखित नामांकन संख्या प्रदान करके कोई व्यक्ति UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट से आधार कार्ड की दूसरी कॉपी प्राप्त कर सकता है।

Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...