दोस्तों पेश है आपकी खिदमत में हाफिज होशियापुरी साहब की एक बेहतरीन ग़ज़ल उम्मीद है आपको पसंद आएगी
हाफिज होशियारपुरी
इन्तेकाल :- 10 जनवरी 1973 कराची, पकिस्तान
ऐसी भी क्या जल्दी प्यारे, जाने मिले फिर या ना मिले हम
शाद-शिकन होठों कि लारजिस, इशरत बाक़ी का गहवारा
क़ैफ़ी आज़मी कि इस ग़ज़ल को भी पढ़ें -
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/2020/06/kaifi-azmi.html
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पैदाइश :- 05 जनवरी 1912 होशियारपुर, भारत
इन्तेकाल :- 10 जनवरी 1973 कराची, पकिस्तान
ऐसी भी क्या जल्दी प्यारे, जाने मिले फिर या ना मिले हम
कौन कहेगा फिर ये फ़साना , बैठ जाओ सुन लो पुरी दम |
वस्ल की शीरीनी में पिन्हा, हिज्र की तल्खी भी है कम कम
तुम से मिलने की भी ख़ुशी है, तुम से जुदा होने का भी ग़म |
हुस्नो- इश्क़ जुदा होते है, जाने क्या तूफान उठेगा
हुस्न की आँखे भी है पुरनम, इश्क़ की आँखे भी है पुरनम |
मेरी वफ़ा तो नादानी थी, तुमने मगर ये क्या ठानी थी
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काश ना करते मझसे मोहब्बत, काश ना होता दिल का ये आलम |
परवाने की खाक़ परेशां, शमां की लौ भी लरजाँ-लरजाँ
महफ़िल की महफ़िल है वीरां,कौन करे अब किस का मातम |
कुछ भी हो पर इन आँखों ने, अक्सर ये आलम देखा है
इश्क़ की दुनिया नाज़े सरापा, हुस्न की दुनिया इज्ज़-ए-मुजस्सम |
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दाएरा-ए -इमकान -ए -तमन्ना, नर्म लचकती बाँहों के ख़म |
अपने-अपने दिल के हाथों, दोनों ही बर्बाद हुए हैं
मैं हूँ और वफ़ा का रोना, वो है और जफा का मातम |
नाकामी सी नाकामी है, महरूमी सी महरूमी है
दिल का मानना सई-ए-मुसलसल,उनको भुलाना कोशिश-ए-पैहम
अहद-ए-वफा है और भी मोहकम, तेरी जुदाई के मैं कुर्बान
तेरी जुदाई के मैं कुर्बान,अहद-ए-वफा है और भी मोहकम |
हाफिज होशियापुरी
क़ैफ़ी आज़मी कि इस ग़ज़ल को भी पढ़ें -
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