27 अप्रैल 2020

वायरस या विषाणु क्या होता है ?

वायरस या विषाणु क्या होता है ?


Estimated reading time: 5 minutes, 34 seconds

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
corona virus

वायरस (virus) अकोशिकीय अतिसूक्ष्म जीव हैं जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ये नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन से मिलकर गठित होते हैं, शरीर के बाहर तो ये मृत-समान होते हैं परंतु शरीर के अंदर जीवित हो जाते हैं। इन्हें क्रिस्टल के रूप में इकट्ठा किया जा सकता है। एक विषाणु बिना किसी सजीव माध्यम के पुनरुत्पादन नहीं कर सकता है। यह सैकड़ों वर्षों तक सुशुप्तावस्था में रह सकता है और जब भी एक जीवित मध्यम या धारक के संपर्क में आता है उस जीव की कोशिका को भेद कर आच्छादित कर देता है और जीव बीमार हो जाता है। एक बार जब विषाणु जीवित कोशिका में प्रवेश कर जाता है, वह कोशिका के मूल आरएनए एवं डीएनए की जेनेटिक संरचना को अपनी जेनेटिक सूचना से बदल देता है और संक्रमित कोशिका अपने जैसे संक्रमित कोशिकाओं का पुनरुत्पादन शुरू कर देती है। कई बार उनके दो डीएनए या आरएनए जो विभाजित हो चुके हों,आपस में जुड़कर नई किस्म कि संरचना को जन्म देते हैं | ऐसे में उनके इलाज में इस्तेमाल की जा रही दवाएं बेअसर हो जाती हैं और तब नए सिरे से दवाएं विकसित करने कि जरुरत पड़ती है|"वायरस कोशिका के बाहर तो मरे हुए ऱहते है लेकिन जब ये कोशिका में प्रवेश करते है तो इनका जीवन चक्र प्रारम्भ होने लगता है | क्योंकि कोशिकाओं के भीतर वो सारी सामग्री होती है जो उनको अपनी संख्या बढ़ाने के लिए चाहिए| फिर ये कोशिकाएं भले ही इंसान कि हो,किसी जानवर की हो, कीट-पतंगों की हो या फिर बैकटीरिया की ही क्यों न हो | ऐसे भी वायरस होते हैं जो खुद बैक्टीरिया पर हमला कर देते हैं तथा उनके शरीर में ही बढ़ने लगते हैं | इन्हें बैक्टीरियाफेज कहा जाता है| किसी दुसरे प्राणी के शरीर में जाने के बाद वायरस के लक्षण दिखाई देने में जितना समय लगता है, उसे इनक्यूबेसन पीरियड कहा जाता है | विषाणु अति सूक्ष्म, परजीवी, अकोशिकीय (Noncellular) और विशेष न्यूक्लियो प्रोटीन कण है, जो जीवित परपोषी के अन्दर रहकर जनन (Reproduction) करते हैं। विषाणु को सिर्फ इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है। विषाणुओं के अध्ययन को विषाणु विज्ञान (Virology) कहा जाता है। विषाणु का अंग्रेजी शब्द वाइरस का शाब्दिक अर्थ विष होता है। सर्वप्रथम सन 1796ई०  में डाक्टर एडवर्ड जेनर ने पता लगाया कि चेचक, विषाणु के कारण होता है। उन्होंने चेचक के टीके का आविष्कार भी किया |


सबसे पहले वायरस या विषाणु कि खोज किसने किया ?


विषाणु की खोज सबसे पहले रूसी वनस्पति इवानविस्की ने 1892 ई. में तम्बाकू की पत्ती में मोजैक रोग (Mosaic disease) के कारण की खोज करते समय किया था।




कैसे होते है वायरस ?



वायरस बहुत सूक्ष्म होते हैं| रहने को तो कोशिका भी सूक्ष्म होती है लेकिन वायरस कोशिका के आकार से भी बहुत छोटे होते हैं| उनको देखने के लिए इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप का इस्तमाल करना पड़ता है वायरस में चूँकि कोशिका नहीं होती इसलिए छोटे और बेक्टीरिया में कोशिका होती है इसलिए बेक्टीरिया बड़े होते हैं | दोनों के आकार में कितना फर्क होता है इसको हम एक उदाहरण द्वारा समझ सकते हैं – खसरे के वायरस का व्यास 220नैनोमीटर होता है जो कि E coli नामक बेक्टीरिया के आकर का आठवां हिस्सा होता है | इसी तरह हेपिटाईटिस का वायरस और भी सूक्ष्म होता है इसका आकार E coli बेक्टीरिया के 40वें हिस्से के बराबर होता है| सन 1931ई० में इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप बनने से पहले इनको देखा नहीं जा सका था |



विषाणु की संरचना


विषाणु प्रोटीन के आवरण से घिरी रचना होती हैं , जिसमें न्यूक्लिक अम्ल उपस्थित होता हैं | अनेक प्रोटीन इकाइयाँ ( Capsomeres ) वाइरस के बाहरी आवरण या कैप्सिड ( Capsid ) में उपस्थित होती हैं | इस पूरे कन को ‘ विरिऑन ‘ कहते हैं , जिनका आकार 10 – 500 मिलीमाइक्रॉन होता हैं | DNA या RNA में से कोई एक न्यूक्लिक अम्ल में पाया जाता हैं | पतली पूँछ के रूप में प्रोटीन कवच होता हैं |




क्या वायरस सदैव हानिकारक ही होतें है ? 





विषाणु, लाभप्रद एवं हानिकारक दोनों प्रकार के होते हैं। जीवाणुभोजी विषाणु एक लाभप्रद विषाणु है, यह हैजापेचिशटायफायड आदि रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को नष्ट कर मानव की रोगों से रक्षा करता है। वायरस का उपयोग लाभदायक कार्यों में भी संभव है जैसे हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए बैक्टीरियोफेज का प्रयोग किया जाता है. इनके द्वारा जल को सड़ने से बचाया जा सकता है | कुछ विषाणु पौधे या जन्तुओं में रोग उत्पन्न करते हैं एवं हानिप्रद होते हैं। एचआईवीइन्फ्लूएन्जा वाइरसपोलियो वाइरस रोग उत्पन्न करने वाले प्रमुख विषाणु हैं। सम्पर्क द्वारा, वायु द्वारा, भोजन एवं जल द्वारा तथा कीटों द्वारा विषाणुओं का संचरण होता है परन्तु विशिष्ट प्रकार के विषाणु विशिष्ट विधियों द्वारा संचरण करते हैं।


वायरस या विषाणु के प्रकार:-


परपोषी प्रकति के अनुसार विषाणु तीन प्रकार के होते हैं:-


1.  पादप विषाणु (plant virus) :-  इनमें न्यूक्लिक अम्ल के रूप में RNA होता हैं | जैसे – टी.एम.वी.(T.M.V. ) , पीला मोजैक विषाणु ( Y.M.V. ) आदि |



2.  जन्तु विषाणु (animal virus):-  इनमें न्यूक्लिक अम्ल के रूप में DNA तथा कभी – कभी  RNA पाया जाता हैं , जो प्रायः गोल होते हैं | जैसे – इन्फ्लूएंजा, मम्पस वाइरस आदि |



3.  जीवाणुभोजी (bacteriophage):- इनमें DNA होता हैं तथा ये केवल जीवाणुओं के ऊपर आश्रित होते हैं |




जीवाणु और विषाणु में अंतर:-


जीवाणु

विषाणु

जीवाणु एक कोशिकीय जीव है
विषाणु अकोशिकीय होता है।
जीवाणु सुसुप्त अवस्था मे नहीं रहते हैं।
विषाणु जीवित कोशिका के बाहर सुसुप्त अवस्था मे हजारों साल तक रह सकते है और जब भी इन्हें जीवित कोशिका मिलती है ये जीवित हो जाते हैं।
जीवाणु का आकार विषाणु से बड़ा होता है और इन्हें प्रकाशीय सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखा जा सकता है।
विषाणु का आकार जीवाणु से छोटा होता है। विषाणु को इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखा जाता है।
इन्हें संग्रह नहीं किया जा सकता।
इन्हें निर्जीव की भांति क्रिस्टल के रूप में संग्रह कर सकते हैं।



वायरस के बारे में रोचक तथ्य:-





1 क्या आप जानते हैं कि सबसे छोटा वायरस टोबैको नेक्रोसिस वायरस (Tobacco necrosis virus) है जिसका परिमाण लगभग 17 nm होता है|इसके विपरीत सबसे बड़ा जन्तु वायरस (Animal virus) पोटैटो फीवर वायरस (Potato fever virus) है लगभग 400 nm. 


2 जीवाणुभोजी (Bacteriophage) की खोज टूवार्ट (Twart) एवं हेरिल ने की थी. ऐसे विषाणु या वायरस जो जीवाणुओं में प्रवेश करके बहुगुणन (Multiplication) करते हैं उन्हें जीवाणुभोजी या बैक्टीरियोफेज कहते हैं| 


3 लखनऊ के पेलियोबोटनी संस्थान में 3.2 बिलियन वर्ष पुरानी चट्टान में सायनोबैक्टीरिया के जीवाश्म रखे हैं| 


4 वायरस के प्रोटीन कोट को कैप्सिड (Capsid) कहते हैं|


5 बॉडन (Bawden) व डार्लिंगटन (Darlington) ने बताया कि वायरस न्यूक्लियोप्रोटीन से बने होते हैं
|

वायरस के द्वारा इंसानों में होने वाली बीमारी:-


क्र०
बीमारी
प्रभावित अंग
विषाणु का नाम
1
चेचक
सम्पूर्ण शरीर
वैरिओला वायरस
2
छोटी माता
सम्पूर्ण शरीर
वैरिसेला वायरस
3
इन्फ़्लुएजा
सम्पूर्ण शरीर
मिक्सो वायरस
4
एड्स
प्रतिरक्षा प्रणाली
HIV
5
पोलियो
गला,रीढ़,नाड़ी
पोलियो
6
रेबीज
तंत्रिका तंत्र
रैबडो वायरस
7
गलसोथ 
पैराथाइराइड ग्रंथि

8
डेंगूज्वर
सम्पूर्ण शरीर
अरबो वायरस
9
हर्पीस
त्वचा
हरपीस
10
खसरा
सम्पूर्ण शरीर
मोर्बिली वायरस
11
ट्रेकोमा
आँख

12
मेनिनजाईटिस
मस्तिष्क

13
हिपेटाईटीस
यकृत

14
कोविड-19
फेफड़ा
सार्स कोव-2

25 अप्रैल 2020

योजना आयोग

भारत में योजना आयोग

Estimated reading time: 9 minutes, 52 seconds

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
भारतीय योजना आयोग 
भारत में ब्रिटिश राज के अंतर्गत सबसे पहले 1930 में बुनियादी आर्थिक योजनाएं बनाने का काम शुरू हुआ। भारत की औपनिवेशिक सरकार ने औपचारिक रूप से एक कार्य योजना बोर्ड का गठन भी किया, जिसने 1944 से 1946 तक कार्य किया। निजी उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों ने 1944 में कम से कम तीन विकास योजनाएं बनाईं। स्वतंत्रता के बाद भारत ने योजना बनाने का एक औपचारिक मॉडल अपनाया और इसके तहत योजना आयोग, जो सीधे भारत के प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता था, इसका गठन 15 मार्च 1950 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव के द्वारा की गई थी | योजना आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता था| भारत में योजना आयोग के सम्बन्ध में कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं था | आज़ादी के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने समाजवादी आर्थिक मॉडल को आगे बढ़ाया। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अनेक महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय लिए जिनमें पंचवर्षीय योजना की शुरुआत भी थी। सन् 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना की नींव डाली गई | जवाहरलाल नेहरू ने 8 दिसंबर, 1951 को संसद में पहली पंचवर्षीय योजना को पेश किया था और उन्होंने उस समय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लक्ष्य 2.1 फ़ीसदी निर्धारित किया था। इस परियोजना में कृषि क्षेत्र पर विशेष ज़ोर दिया गया क्योंकि उस दौरान खाद्यान्न की कमी गंभीर चिंता का विषय थी। इसी पंचवर्षीय योजना के दौरान पाँच इस्पात संयंत्रों की नींव रखी गई। अधिकतर पंचवर्षीय योजनाओं में किसी न किसी क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई। आइये अब तक भारत में लागू हुए पंचवर्षीय योजनाओं एवं उसके लक्ष्यों पर दृष्टिपात करते है -

पहली पंचवर्षीय योजना(1951-1956) एवं इसके लक्ष्य:-


इस योजना की अवधि 1951 से 1956 तक थी |
यह योजना हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित थी |
इस योजना का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास कि प्रक्रिया शुरू करना था |
शरणार्थियों का पुनर्वास
इस योजना में कृषि को उच्च प्राथमिकता दी गई
यह योजना सफल रही और अपने लक्ष्य [2.1] से आगे 3.6% की वृद्धि दर हासिल किया
इस योजना के दौरान रास्ट्रीय आय में 18% तथा प्रति व्यक्ति आय में 11% की कुल वृद्धि हुई |

दूसरी पंचवर्षीय योजना(1956-1961) एवं इसके लक्ष्य:-


इस योजना की अवधि 1956 से 1961 के बीच की थी |

यह योजना प्रो. पी. सी. महालनोबिस के मॉडल पर आधारित थी |

सार्वजनिक क्षेत्र के विकास में 1953 में भारतीय सांख्यिकीविद् प्रशांत चन्द्र महलानोबिस द्वारा विकसित मॉडल का पालन किया।

इसका मुख्य उद्देश्य समाजवादी समाज कि स्थापना करना था |

इस पंचवर्षीय योजना के लिए भारी तथा मूल उद्योगों पर विशेष बल दिया गया |

इसका मुख्य लक्ष्य देश के औद्योगिक विकास पर था |
इसमें भारी उद्द्योगों व खनिजों को उच्च प्राथमिकता दी गई जिस पर 24% राशि खर्च की गई |
दिवितीय प्राथमिकता यातायात व संचार को दी गई जिस पर 28% राशि खर्च की गई |
अनेक बड़े उद्द्योग जैसे- दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला, इस्पात सयंत्रों कि स्थापना की गई |
यह योजना भी सफल रही और इसने 4.1% की वृद्धि दर हासिल की थी |

तीसरी पंचवर्षीय योजना(1961-1966) एवं इसके लक्ष्य:-



इस योजना की अवधि 1961 से 1966 के बीच की थी |

इस योजना ने अपना लक्ष्य आत्मनिर्भर एवं स्वयं स्फूर्ति अर्थव्यवस्था की स्थापना करना रखा।

इस योजना को 'गाडगिल योजनाभी कहा जाता है

कृषि व उद्योग दोनों के विकास को लगभग समान महत्व दिया गया।

चीन (1962) और पाकिस्तान (1965) से युद्ध एवं वर्षा न होने के कारण यह योजना अपना लक्ष्य प्राप्त करने में असफल रही|
यह योजना अपने निर्धारित लक्ष्य 5.6% की वृद्धि को प्राप्त करने में असफल रही तथा 2.5%की वार्षिक वृद्धि दर ही प्राप्त कर सकी |
युद्ध और वर्षा न होने के कारन चौथी योजना तीन वर्ष के लिए स्थगित करके इसके स्थान पर तीन एक वर्षीय योजनाएँ लागू की गईं।

जानिये क्या है नाविक https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/2020/05/indian-navigation-system.html


योजना अवकाश PLAN HOLIDAY (1966-67 से 1968-69 ई०)

योजना अवकाश की समय अवधि 1966 से 1969 तक थी |
योजना अवधि में तीन वार्षिक योजनायें तैयार की गईं|
इन तीन सालों में कोई भी पंचवर्षीय योजना नहीं बनायीं गयी थी बल्कि हर साल एक वर्षीय योजना बनायीं गयी थी और हर योजना में कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ उद्योग क्षेत्र को समान प्राथमिकता दी गई थी |
योजना अवकाश को बनाने के पीछे का कारण भारत-पाकिस्तान युद्ध, संसाधनों कि कमी, मूल्य-स्तर में वृद्धि और तीसरी पंचवर्षीय योजना की विफलता थी |

चौथी पंचवर्षीय योजना(1969-1974ई०) एवं इसके लक्ष्य:-



इस योजना की अवधि 1969 से 1974 तक थी |

इस योजना के दो मुख्य उद्देश्य थे; पहला, स्थिरता के साथ विकास और दूसरा आत्म निर्भरता की स्थिति प्राप्त करना 

इस योजना के दौरान ही 1971 के चुनावों के दौरान इंदिरा गांधी द्वारा "गरिबी हटाओ" का नारा दिया गया था |

यह योजना असफल रही थी और 5.7% की विकास दर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 3.3% की वृद्धि दर हासिल कर सकी थी |

योजना कि विफलता का कारन मौसम की प्रतिकूलता तथा बंग्लादेशी शरणार्थियों का आगमन था |

पांचवीं पंचवर्षीय योजना(1974-1978ई०) एवं इसके लक्ष्य:-


इस योजना की अवधि 1974 से 1979 तक थी |
इस योजना में कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी, इसके बाद उद्योग और खानों को वरीयता दी गयी थी |
इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी,उन्मूलन,तथा आत्मनिर्भरता की प्राप्ति थी |
इस योजना के प्रारंभ में इसका लक्ष्य 5.5% वार्षिक वृद्धि रखी गई थी लेकिन बाद में इसे 4.4% वार्षिक कर दिया गया |
यह योजना सामान्यतः सफल रही लेकिन गरीबी और बेरोजगारी में कमी करने में असफल रही |
इस योजना का ड्राफ्ट डी.पी. धरद्वारा तैयार किया गया था |
नव निर्वाचित मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की सरकार ने इस योजना को समय से पहले ही 1978 में समाप्त कर दिया था और इसके स्थान पर एक वार्षिक प्लानबना दिया था जिसे रोलिंग प्लान कहा गया था |

छठी पंचवर्षीय योजना(1980-1985ई०) एवं इसके लक्ष्य:-



इस योजना की अवधि 1980 से 1985 तक थी |

इस योजना का प्रारंभ रोलिंग प्लान जो मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की सरकार द्वारा बनाई गई थी, को समाप्त करके की गई |

योजना का मूल उद्देश्य गरीबी उन्मूलन और तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करना था |

छठी पंचवर्षीय योजना ने भारत में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की थी |

इस योजना काल में राशन की दुकाने बंद कर देने से खाद्य कीमतों में वृद्धि हुई थी|
इस योजना के समय से नेहरु के समाजवाद का अंत हो गया था |
योजना में विकास का लक्ष्य 5.2% वार्षिक वृद्धि रखा गया था तथा सफ़लतापुर्वाक 5.4% वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त की गई |
इसी योजना के समय से देश में फैमिली प्लानिंगकी शुरुआत और नाबार्ड बैंक (1982) की स्थापना हुई थी |

सातवीं पंचवर्षीय योजना(1985-1990ई०) एवं इसके लक्ष्य:-



इस योजना की अवधि 1985 से 1990 तक थी |

इस योजना के उद्देश्यों में आत्म निर्भर अर्थव्यवस्था की स्थापना और रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना शामिल था |

इसी योजना में जवाहर रोजगार योजना [रोजगारपरक] कार्यक्रम शुरू किया गया |

इस योजना में पहली बार निजी क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र की तुलना में अधिक में प्राथमिकता मिली थी|

इसका विकास लक्ष्य 5.0% था लेकिन इसने 5.8% वृद्धि दर हासिल की थी | अतः ये सफल योजना साबित हुई|


वार्षिक योजनाएं:-


केन्द्रीय राजनीति में अस्थिरता की स्थिति होने के कारण आठवीं पंचवर्षीय योजना समय पर शुरू नहीं हो सकी, इस कारण 1990-91 और 1991-92 में दो वार्षिक योजनायें बनायीं गयी थीं|



आठवीं पंचवर्षीय योजना(1992-1997ई०) एवं इसके लक्ष्य:-


इस योजना की अवधि 1992 से 1997 तक थी |
इस योजना में मानव संसाधन विकास जैसे रोजगार, शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी |
इसके अतिरिक्त आधारभूत ढांचे का सशक्तिकरण तथा शताब्दी के अंत तक लगभग पूर्ण रोजगार कि प्राप्ति को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया |
इस योजना के दौरान ही नरसिम्हा राव सरकार ने भारत की नयी आर्थिक नीति को मंजूरी दी थी |
देश में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी मॉडल) की शुरुआत हुई थी |
प्रधानमंत्री रोजगार योजना कि शुरुआत [1993ई०] हुई |

नौवीं पंचवर्षीय योजना(1997-2002ई०) एवं इसके लक्ष्य:-



इस योजना की अवधि 1997 से 2002 तक थी |

इस योजना की सर्वोच्च प्राथमिकता "न्याय और समानता के साथ विकास" पर दिया गया था 

नौवी योजना में सकल राष्ट्रीय उत्पाद के 6.5 प्रतिशत के लक्ष्य के विरूद्ध वास्तविक उपलब्धि केवल 5.4 प्रतिशत रही।

इस प्रकार यह योजना असफल रही |

इसे भारत की आजादी के 50 वें वर्ष में चालू किया गया था |
क्षेत्रीय संतुलन के मुद्दे को इस योजना में विशेष स्थान दिया गया |

दसवीं पंचवर्षीय योजना(2002-2007ई०) एवं इसके लक्ष्य:-


इस योजना की अवधि 2002 से 2007 तक थी |

योजना काल के दौरान जी. डी. पी. में वार्षिक वृद्धि दर 8% करने का लक्ष्य रखा गया |

इस योजना का उद्देश्य देश में गरीबी और बेरोजगारी को समाप्त करना तथा अगले 10 वर्षो में प्रति व्यक्ति आय दुगना करना था |

योजना काल में 5 करोड़ रोजगार के अवसर उपलब्ध करना लक्षित किया गया |

वर्ष 2007 तक प्राथमिक शिक्षा की पहुँच को सर्वव्यापी बनाना |
वर्ष 2007 तक वनों से घिरे क्षेत्र को 25 प्रतिशत और वर्ष 2012 तक 33 प्रतिशत बढ़ाना।
वर्ष 2012 तक पीने योग्य पानी की पहुँच सभी ग्रामों में क़ायम करना।
इस योजना में 8.0% विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तव में केवल 7.2% की वृद्ध दर हासिल की जा सकी थी|योजना काल में मुद्रा स्फीति की दर औसतन 5% रखने का लक्ष्य था, जबकि वास्तव में यह 5.02% रही है |
सभी मुख्य नदियों को वर्ष 2007 तक और अन्य अनुसुचित जल क्षेत्रों को वर्ष 2012 तक साफ़ करना।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना(2007-2012ई०) एवं इसके लक्ष्य:-


इस योजना की अवधि 2007 से 2012 तक थी |
यह योजना सी. रंगराजन द्वारा तैयार की गयी थी
इसकी मुख्य थीम "तेज़ और अधिक समावेशी विकास" थी |
इस योजना में 8.1 % विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तव में केवल 7.9% की वृद्ध दर हासिल की जासकी थी 
देश के सभी ग्रामों में विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा गया |
रोजगार के 7 करोड़ नए अवसर सृजित करना |
जीडीपी वृद्धि दर को 8% से बढ़ाकर 10% करना और इसे 12वीं योजना के दौरान 10% पर बरकार रखना ताकि 2016- 17 तक प्रति व्यक्ति
आय को दोगुना किया जा सके।
कृषि आधारित वृद्धि दर को 4% प्रतिवर्ष तक बढ़ाना।
2011 से 2012 तक प्राथमिक स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में 2003-04 के 52.2% के मुकाबले 20% की कमी करना।
वर्षीय या अधिक के बच्चों व व्यक्तियों की साक्षरता दर को 85% तक बढ़ाना।
प्रजनन दर को घटाकर 2.1 के स्तर पर लाना।
बाल मृत्यु दर को घटाकर 28 प्रति 1000 व मातृ मृत्यु दर को ‘1 प्रति 1000’ करना।
2009 तक सभी के लिए पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना।
0-3 वर्ष की आयु में बच्चों के बीच कुपोषण के स्तर में वर्तमान के मुकाबले 50% तक की कमी लाना।
लिंग अनुपात को बढ़ाकर 2011-12 तक 935 2016-17 तक 950 करना
नवंबर 2007 तक प्रत्येक गाँव में टेलीफोन सुविधा मुहैया कराना।
देश के वन क्षेत्र में 5% की वृद्धि कराना।
देश के प्रमुख शहरों में 2011-12 तक विश्व स्वास्थ्य संगठनके मानकों के अनुरूप वायु शुद्धता का स्तर प्राप्त करना।
2016-17 तक ऊर्जा क्षमता में 20% की वृद्धि करना|

बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012 से 2017) एवं इसके लक्ष्य:-


इस योजना की अवधि 2012 से 2017 तक थी| 
यह योजना सी. रंगराजन द्वारा तैयार की गयी थी |

12वीं पंचवर्षीय योजना में सालाना 10 फीसदी की आर्थिक विकास दर हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया था ।

इसकी मुख्य थीम "तेज़, अधिक समावेशी और सतत विकास" थी |

इस योजना में 8% विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तव में केवल 6.8% की वृद्ध दर हासिल की जा सकी थी |

ग्रामीण आबादी के 50% जनसँख्या को पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना |

देश के 90% परिवारों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना |
हर साल 1 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़ लगाकर हरियाली फैलाना |
वर्ष 2017 तक सभी गांवों को बिजली उपलब्ध कराना |
गैर कृषि क्षेत्र में 50 मिलियन नए काम के अवसर पैदा करना |
0-3 साल के बच्चों के बीच कुपोषण को कम करना |



भारत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं वर्ष 2017 से बनाना बंद कर दिया है | 17 अगस्त 2014 को योजना आयोग खत्म कर दिया गया और इसके जगह पर नीति आयोग का गठन हुआ।  इस प्रकार सोवियत रूस की नकल पर बनायीं जा रहीं पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से देश की आर्थिक नियोजन प्रणाली को बंद कर दिया गया है | और 12वीं पंचवर्षीय योजना भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना कही जाएगी |

दोस्तों अगर जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेंट  करें, शेयर करें, और पेज को FOLLOW जरुर करें |
जय हिन्द, जय भारत |


22 अप्रैल 2020

EARTH DAY

EARTH DAY

 Estimated reading time: 5 minutes, 14 seconds           

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
EARTH DAY 2020
रात में जब हम आकाश कि और देखते हैं तो हमें अनगिनत तारे नजर आते हैं जो हमसे बहुत दूर हैं और जिनके बारे में हमें ज्यादा कुछ पता नहीं है इन्हीं ग्रहों और तारों के बीच एक सुन्दर सा ग्रह भी है जो सबसे अलग है जहाँ हम रहते हैं, जिसे हम पृथ्वी कहते हैं | प्रकृति ने इस ग्रह को बहुत सी संपदाओं से नवाजा है कई तरह कि स्थालाकृतियाँ, स्थल मंडल,जल मंडल,वायु मंडल,जैव मंडल में विभाजित कर इस को सजाया और संवारा है| और सबसे बड़ी बात कि यहाँ जीवन को पैदा किया है लाखों तरह के जीव-जंतुओं,वनस्पतिओं से पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण किया है | अपनी इस रचना में प्रकृति ने मानव को इस ग्रह का सबसे बुद्धिमान प्राणी बनाया ताकि वो इस धरती के संसाधनों का सदउपयोग कर अपना विकास कर सके और साथ ही साथ धरती और इसमें रहने वाले जीवों की संरक्षित और इसके पर्यावरण सुरक्षा प्रदान करें| लेकिन मनुष्य विकास कि होड़ में पृथ्वी के प्रति अपने कर्तव्यों को अनदेखा कर रहा है और अपने उद्देश्यों कि पूर्ति हेतु पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र से खिलवाड़ कर रहा है| बढ़ते औद्योगिकरण,नगरीयकरण,वृक्षभूमि का सफाया,जंगलों कि आग,खननकार्य ,निर्माण कार्य,प्रदुषण, इत्यादि से हमारे पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, सूर्य कि हानिकारक किरणों से बचाने वाला ओजोन परत का क्षरण हो रहा है| उद्योगों से निकलने वाले जहरीले पदार्थों का नदी के जल में मिलने से जल प्रदुषण हो रहा है जिससे जल में रहने वाले जीव मर रहे हैं | तापमान बढ़ने एवं जल के अत्यधिक दोहन से नदियां का सूखना, पर्यावरण प्रदूषण एक बहुत बड़ा कारण है जो हमें भूमणडलीय तापक्रम में वृद्धि की ओर ले जा रहा है। रोजाना बढ़ते औद्योगिकीकरण वनों की कटाई की ओर ले जा रहें हैं जो अंतत: धरती के तापमान को बढ़ाने का कारण बन रहा है । जो धरती पर स्वाश्वत जीवन के लिये खतरा है | जिसको कुछ छोटे उपायों को अपनाकर कम किया जा सकता है, जैसे पेड़-पौधे लगाना, वनों की कटाई को रोकना, वायु प्रदूषण को रोकने के लिये वाहनों के इस्तेमाल को कम करना, बिजली के गैर-जरुरी इस्तेमाल को घटा कर ऊर्जा संरक्षण को बढ़ाना। यही छोटे कदम बड़े कदम बन सकते हैं अगर इसे पूरे विश्वभर के द्वारा एक साथ अनुसरण किया जाये।

क्यों मनाया जाता है अर्थ डे ?


पृथ्वी पर रहने वाले जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों को बचाने और दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 22 अप्रैल को अर्थ डे (World Earth Day) मनाया जाता है | पृथ्वी दिवस यानि अर्थ डे के मौके पर पर्यावरण संरक्षण के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है, साथ ही लोग पर्यावरण को बेहतर बनाने का संकल्प भी लेते हैं |

पृथ्वी दिवस/अर्थ डे का इतिहास


पृथ्वी दिवस एक वार्षिक आयोजन है, जिसे 22 अप्रैल को दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्थन प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाता है. इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप की थी | और सबसे पहले पृथ्वी दिवस यानि अर्थ डे 1970 में मनाया गया था अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है | इसकी शुरुआत एक अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने की थी। 1969 में सांता बारबरा, कैलिफोर्निया में तेल रिसाव की भारी बर्बादी को देखने के बाद वे इतने आहत हुए कि उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर कुछ करने का फैसला किया। नेल्सन के आह्वान पर 22 अप्रैल 1970 को लगभग 2 करोड़ अमेरिकी लोगों ने एक स्वस्थ, स्थायी पर्यावरण के लक्ष्य के साथ पृथ्वी दिवस के पहले आयोजन में भाग लिया। हजारों कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने प्रदूषण के विरुद्ध प्रदर्शन किया। यह पर्यावरण की जागरुकता को लेकर सबसे बड़ा आयोजन था। इसके बाद धीरे-धीरे दुनियाभर में यह आयोजन होने लगा। टेलिविज़न अभिनेता एड्डी अलबर्ट ने भी पृथ्वी दिवस, के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी |

पृथ्वी दिवस शब्द


"पृथ्वी दिवस या अर्थ डे" शब्द को जुलियन कोनिग ने दिया था। इस नए आंदोलन को मनाने के लिए 22 अप्रैल का दिन चुना गया। क्योंकि इसी दिन केनिग का जन्मदिन भी होता है। वहीं रोन कोब्ब ने एक पारिस्थितिक प्रतीक (Ecological symbol) का निर्माण किया, जिसे बाद में पृथ्वी दिवस के प्रतीक के रूप में अपनाया गया था। यह लोगो "E" व "O" अक्षरों को जोड़कर बनाया गया था जिसमे "E" "Environment" व "O" "Organism" को दर्शाता है।

पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक संकल्प


https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
EARTH DAY 2020

आज विश्व में हर जगह प्रकृति का दोहन जारी है तथा इसके दोहन और प्रदूषण की वज़ह से विश्व स्तर पर लोगों की चिंता सामने आना शुरू हुई है। आज जलवायु परिवर्तन पृथ्वी के लिये सबसे बड़ा संकट का कारण बन गया है। यदि पृथ्वी के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लग जाएगा तो इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इस विश्व पृथ्वी दिवस पर संकल्प लेना चाहिये कि हम पृथ्वी और उसके वातावरण को बचाने का प्रयास करेंगे । पृथ्वी दिवस के अवसर पर हम सभी को पृथ्वी के प्रहरी बनकर उसे बचाने और आवश्यकतानुरूप उपभोग का संकल्प लेना होगा, तभी हम उसकी लंबी आयु की कामना कर सकते हैं। मनुष्य इस ब्रह्मांड का मस्तिष्क यानी चेतना है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद हमारी पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी स्पष्ट नहीं है। मनुष्य ने न केवल जलवायु चक्रों को बदल दिया है, बल्कि ब्रह्मांड के जीवित स्वरूप को नष्ट कर इसकी जैविक लय को अवरुद्ध कर दिया है। ब्रह्मांड में और किसी अन्य जीव के पास मनुष्य जैसे विशेषाधिकार नहीं हैं तथा सिर्फ मनुष्य ही पृथ्वी को जीवंत रखने में सबसे प्रभावी योगदान कर सकते हैं। पृथ्वी के पर्यावरण को बचाना हम सब कि जिम्मेदारी है | यह भी ध्यान रखें कि पृथ्वी के पर्यावरण को बचाने के लिए हम ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, तो कम से कम इतना तो करें कि पॉलिथीन के उपयोग को नकारें, कागज का इस्तेमाल कम करें और रिसाइकल प्रक्रिया को बढ़ावा दें। क्योंकि जितनी ज्यादा खराब सामग्री रिसाइकल होगी, उतना ही पृथ्वी का कचरा कम होगा | पर्यावरण प्रदूषण से बढ़ रही समस्याओं को निपटने के लिए व्यापक प्रयास करने होंगे | पर्यावरण से संबंधित शिक्षा को हमे लोगों तक पहुचाना चाहिए। जिस से लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो | और हमारी ये पृथ्वी सुरक्षित रहे |


दोस्तों जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेन्ट और शेयर और हाँ FOLLOW जरुर करें |
जय हिन्द ,जय भारत 

Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...