भारत में योजना आयोग
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| भारतीय योजना आयोग |
पहली पंचवर्षीय योजना(1951-1956) एवं इसके लक्ष्य:-
इस योजना की अवधि 1951 से 1956 तक थी |
यह
योजना हैरोड-डोमर मॉडल
पर आधारित थी |
इस योजना का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास कि
प्रक्रिया शुरू करना था |
शरणार्थियों का पुनर्वास
इस योजना में कृषि को उच्च प्राथमिकता दी गई
यह
योजना सफल रही और अपने लक्ष्य [2.1] से आगे 3.6% की
वृद्धि दर हासिल किया
इस योजना के दौरान रास्ट्रीय आय
में 18% तथा प्रति व्यक्ति आय में 11% की कुल वृद्धि हुई |दूसरी पंचवर्षीय योजना(1956-1961) एवं इसके लक्ष्य:-
इस
योजना की अवधि 1956 से 1961 के बीच
की थी |
यह योजना प्रो. पी. सी. महालनोबिस
के मॉडल पर आधारित थी |
सार्वजनिक क्षेत्र के विकास में 1953 में भारतीय सांख्यिकीविद् प्रशांत चन्द्र महलानोबिस द्वारा
विकसित मॉडल का पालन किया।
इसका मुख्य उद्देश्य समाजवादी समाज कि
स्थापना करना था |
इस पंचवर्षीय योजना के लिए भारी तथा मूल उद्योगों पर विशेष बल
दिया गया |
इसका मुख्य लक्ष्य देश के औद्योगिक
विकास पर था |
इसमें भारी उद्द्योगों व खनिजों को
उच्च प्राथमिकता दी गई जिस पर 24% राशि खर्च की गई |
दिवितीय प्राथमिकता यातायात व संचार
को दी गई जिस पर 28% राशि
खर्च की गई |
अनेक बड़े उद्द्योग जैसे- दुर्गापुर,
भिलाई, राउरकेला, इस्पात सयंत्रों कि स्थापना की गई |
यह योजना भी सफल रही और इसने 4.1% की वृद्धि दर हासिल की थी |तीसरी पंचवर्षीय योजना(1961-1966) एवं इसके लक्ष्य:-
इस
योजना की अवधि 1961 से 1966 के बीच की थी |
इस
योजना ने अपना लक्ष्य आत्मनिर्भर एवं स्वयं – स्फूर्ति अर्थव्यवस्था की स्थापना करना रखा।
इस योजना को 'गाडगिल
योजना' भी कहा
जाता है
कृषि व उद्योग दोनों के विकास को लगभग
समान महत्व दिया गया।
चीन (1962) और पाकिस्तान (1965) से
युद्ध एवं वर्षा न होने के कारण यह योजना अपना लक्ष्य प्राप्त करने में असफल रही|
यह योजना अपने निर्धारित लक्ष्य 5.6% की
वृद्धि को प्राप्त करने में असफल रही तथा 2.5%की वार्षिक वृद्धि दर ही प्राप्त कर सकी |
युद्ध और वर्षा न होने के कारन चौथी योजना तीन वर्ष के लिए
स्थगित करके इसके स्थान पर तीन एक वर्षीय योजनाएँ लागू की गईं।जानिये क्या है नाविक https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/2020/05/indian-navigation-system.html
योजना अवकाश PLAN HOLIDAY (1966-67 से 1968-69 ई०)
योजना
अवकाश की समय अवधि 1966 से 1969 तक थी |
योजना अवधि में तीन वार्षिक योजनायें
तैयार की गईं|
इन तीन सालों में कोई भी पंचवर्षीय योजना नहीं बनायीं गयी थी
बल्कि हर साल एक वर्षीय योजना बनायीं गयी थी और हर योजना में कृषि और सम्बद्ध
क्षेत्रों के साथ-साथ उद्योग क्षेत्र को समान प्राथमिकता दी गई थी |
योजना अवकाश को बनाने के पीछे का कारण भारत-पाकिस्तान युद्ध,
संसाधनों कि कमी, मूल्य-स्तर में वृद्धि और तीसरी पंचवर्षीय योजना की विफलता थी |
चौथी पंचवर्षीय योजना(1969-1974ई०) एवं इसके लक्ष्य:-
इस
योजना की अवधि 1969 से 1974 तक थी |
इस योजना के दो
मुख्य उद्देश्य थे; पहला, स्थिरता के साथ विकास और
दूसरा आत्म निर्भरता की स्थिति प्राप्त करना
इस योजना के दौरान ही 1971 के
चुनावों के दौरान इंदिरा गांधी द्वारा "गरिबी हटाओ" का नारा दिया गया था
|
यह योजना असफल रही थी और 5.7% की विकास दर के लक्ष्य के
मुकाबले केवल 3.3% की
वृद्धि दर हासिल कर सकी थी |
योजना कि विफलता का कारन मौसम
की प्रतिकूलता तथा बंग्लादेशी शरणार्थियों का आगमन था |
पांचवीं पंचवर्षीय योजना(1974-1978ई०) एवं इसके लक्ष्य:-
इस
योजना की अवधि 1974 से 1979 तक थी |
इस
योजना में कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी, इसके
बाद उद्योग और खानों को वरीयता दी गयी थी |
इस योजना का मुख्य
उद्देश्य गरीबी,उन्मूलन,तथा आत्मनिर्भरता की प्राप्ति थी |
इस योजना के प्रारंभ
में इसका लक्ष्य 5.5%
वार्षिक
वृद्धि रखी गई थी लेकिन बाद में इसे 4.4% वार्षिक कर दिया गया |
यह योजना सामान्यतः
सफल रही लेकिन गरीबी और बेरोजगारी में कमी करने में असफल रही |
इस योजना का
ड्राफ्ट ‘डी.पी. धर’ द्वारा तैयार किया गया था |
नव निर्वाचित मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की सरकार ने इस
योजना को समय से पहले ही 1978 में
समाप्त कर दिया था और इसके स्थान पर एक “वार्षिक प्लान” बना दिया था जिसे रोलिंग
प्लान कहा गया था |
छठी पंचवर्षीय योजना(1980-1985ई०) एवं इसके लक्ष्य:-
इस योजना की अवधि 1980 से 1985 तक थी |
इस योजना का प्रारंभ रोलिंग प्लान जो मोरारजी देसाई की जनता
पार्टी की सरकार द्वारा बनाई गई थी, को समाप्त करके की गई |
योजना का मूल उद्देश्य गरीबी उन्मूलन और तकनीकी आत्मनिर्भरता
प्राप्त करना था |
छठी पंचवर्षीय योजना ने भारत में
आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की थी |
इस योजना काल में राशन की दुकाने बंद कर देने से खाद्य
कीमतों में वृद्धि हुई थी|
इस योजना के समय से नेहरु के समाजवाद का अंत हो गया था |
योजना में विकास का लक्ष्य 5.2% वार्षिक वृद्धि रखा गया था तथा सफ़लतापुर्वाक 5.4% वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त की गई |
इसी योजना के समय से देश में ‘फैमिली
प्लानिंग’ की शुरुआत और
नाबार्ड बैंक (1982) की
स्थापना हुई थी |
सातवीं पंचवर्षीय योजना(1985-1990ई०) एवं इसके लक्ष्य:-
इस योजना की अवधि 1985 से 1990 तक थी |
इस योजना के उद्देश्यों में
आत्म निर्भर अर्थव्यवस्था की स्थापना और रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना शामिल
था |
इसी
योजना में जवाहर रोजगार योजना [रोजगारपरक] कार्यक्रम शुरू किया गया |
इस योजना में पहली बार निजी
क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र की तुलना में अधिक में प्राथमिकता मिली थी|
इसका विकास लक्ष्य 5.0% था लेकिन इसने 5.8% वृद्धि
दर हासिल की थी | अतः ये सफल योजना साबित हुई|
वार्षिक योजनाएं:-
केन्द्रीय
राजनीति में अस्थिरता की स्थिति होने के कारण आठवीं पंचवर्षीय योजना समय पर शुरू
नहीं हो सकी, इस
कारण 1990-91 और 1991-92 में दो वार्षिक योजनायें बनायीं गयी थीं|
आठवीं पंचवर्षीय योजना(1992-1997ई०) एवं इसके लक्ष्य:-
इस योजना की अवधि 1992 से 1997 तक थी |
इस योजना में मानव संसाधन
विकास जैसे रोजगार, शिक्षा
और सार्वजनिक स्वास्थ्य के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी |
इसके
अतिरिक्त आधारभूत ढांचे का सशक्तिकरण तथा शताब्दी के अंत तक लगभग पूर्ण रोजगार कि
प्राप्ति को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया |
इस
योजना के दौरान ही नरसिम्हा राव सरकार ने भारत की नयी आर्थिक नीति को मंजूरी दी थी
|
देश
में उदारीकरण, निजीकरण
और वैश्वीकरण (एलपीजी मॉडल) की शुरुआत हुई थी |
प्रधानमंत्री रोजगार योजना कि शुरुआत [1993ई०] हुई |नौवीं पंचवर्षीय योजना(1997-2002ई०) एवं इसके लक्ष्य:-
इस योजना की अवधि 1997 से 2002 तक थी |
इस योजना की सर्वोच्च प्राथमिकता "न्याय और समानता के
साथ विकास" पर दिया गया था
नौवी योजना में सकल राष्ट्रीय
उत्पाद के 6.5 प्रतिशत के लक्ष्य के विरूद्ध
वास्तविक उपलब्धि केवल 5.4 प्रतिशत रही।
इस
प्रकार यह योजना असफल रही |
इसे
भारत की आजादी के 50 वें
वर्ष में चालू किया गया था |
क्षेत्रीय
संतुलन के मुद्दे को इस योजना में विशेष स्थान दिया गया |
दसवीं पंचवर्षीय योजना(2002-2007ई०) एवं इसके लक्ष्य:-
इस योजना की अवधि 2002 से 2007 तक थी |
योजना
काल के दौरान जी. डी. पी. में वार्षिक वृद्धि दर 8% करने
का लक्ष्य रखा गया |
इस
योजना का उद्देश्य देश में गरीबी और बेरोजगारी को समाप्त करना तथा अगले 10 वर्षो
में प्रति व्यक्ति आय दुगना करना था |
योजना
काल में 5 करोड़ रोजगार के अवसर उपलब्ध करना लक्षित किया गया |
वर्ष
2007 तक प्राथमिक शिक्षा की पहुँच को
सर्वव्यापी बनाना |
वर्ष 2007 तक वनों से घिरे क्षेत्र को 25 प्रतिशत और वर्ष 2012 तक 33 प्रतिशत बढ़ाना।
वर्ष 2012 तक पीने योग्य पानी की पहुँच सभी ग्रामों में क़ायम करना।
इस योजना में 8.0% विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा
गया था लेकिन वास्तव में केवल 7.2% की वृद्ध दर हासिल की जा सकी थी|योजना
काल में मुद्रा स्फीति की दर औसतन 5% रखने का लक्ष्य था, जबकि वास्तव में यह 5.02%
रही है |
सभी मुख्य नदियों को वर्ष 2007 तक और अन्य
अनुसुचित जल क्षेत्रों को वर्ष 2012 तक साफ़ करना।
ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना(2007-2012ई०) एवं इसके लक्ष्य:-
इस योजना की अवधि 2007 से 2012 तक थी |
यह
योजना सी. रंगराजन द्वारा तैयार की गयी थी
इसकी मुख्य थीम "तेज़ और अधिक
समावेशी विकास" थी |
इस
योजना में 8.1 % विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया
था लेकिन वास्तव में केवल 7.9% की वृद्ध दर हासिल की जासकी थी
देश के
सभी ग्रामों में विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा गया |
रोजगार
के 7 करोड़ नए अवसर सृजित करना |
जीडीपी
वृद्धि दर को 8% से
बढ़ाकर 10% करना और
इसे 12वीं
योजना के दौरान 10% पर
बरकार रखना ताकि 2016- 17 तक
प्रति व्यक्ति
आय को
दोगुना किया जा सके।
कृषि
आधारित वृद्धि दर को 4% प्रतिवर्ष
तक बढ़ाना।
2011 से 2012 तक प्राथमिक
स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में 2003-04 के 52.2% के मुकाबले 20% की कमी करना।
वर्षीय या अधिक के बच्चों व व्यक्तियों
की साक्षरता दर को 85% तक
बढ़ाना।
प्रजनन दर को घटाकर 2.1 के स्तर पर लाना।
बाल मृत्यु दर को घटाकर 28 प्रति 1000 व मातृ मृत्यु दर को ‘1 प्रति 1000’ करना।
2009 तक सभी के लिए पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना।
0-3 वर्ष की आयु में बच्चों के बीच कुपोषण के स्तर में वर्तमान
के मुकाबले 50% तक की
कमी लाना।
लिंग अनुपात को बढ़ाकर 2011-12 तक 935 व 2016-17 तक 950 करना
नवंबर 2007 तक प्रत्येक गाँव में टेलीफोन सुविधा
मुहैया कराना।
देश के वन क्षेत्र में 5% की वृद्धि कराना।
देश के प्रमुख शहरों में 2011-12 तक ‘विश्व स्वास्थ्य
संगठन’ के
मानकों के अनुरूप वायु शुद्धता का स्तर प्राप्त करना।
2016-17 तक ऊर्जा क्षमता में 20% की वृद्धि करना|
बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012 से 2017) एवं इसके लक्ष्य:-
इस
योजना की अवधि 2012 से 2017 तक थी|
यह योजना सी. रंगराजन द्वारा
तैयार की गयी थी |
12वीं पंचवर्षीय योजना में सालाना 10 फीसदी की आर्थिक विकास दर
हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया था ।
इसकी
मुख्य थीम "तेज़, अधिक समावेशी और सतत विकास" थी |
इस योजना में 8% विकास दर हासिल करने का
लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तव में केवल 6.8% की वृद्ध दर हासिल की जा सकी थी |
ग्रामीण
आबादी के 50% जनसँख्या
को पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना |
देश
के 90% परिवारों
को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना |
हर
साल 1 मिलियन
हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़ लगाकर हरियाली फैलाना |
वर्ष
2017 तक सभी
गांवों को बिजली उपलब्ध कराना |
गैर
कृषि क्षेत्र में 50 मिलियन
नए काम के अवसर पैदा करना |
0-3 साल के
बच्चों के बीच कुपोषण को कम करना |
भारत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं वर्ष 2017 से बनाना बंद कर दिया है | 17 अगस्त 2014 को योजना आयोग खत्म
कर दिया गया और इसके जगह पर नीति आयोग का गठन हुआ। इस प्रकार सोवियत रूस की नकल पर बनायीं जा रहीं
पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से देश की आर्थिक नियोजन प्रणाली को बंद कर दिया गया
है | और 12वीं पंचवर्षीय योजना भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना कही जाएगी |
दोस्तों अगर जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेंट करें, शेयर करें, और पेज को FOLLOW जरुर करें |
जय हिन्द, जय भारत |

Boht Achhi jankari h sir ji
जवाब देंहटाएंTHANKS
हटाएंBahut hi sundar jankari sir ji
जवाब देंहटाएंTHANKS AJEET JI
हटाएंA complete blog
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