20 मई 2020

PRESIDENT-VICE PRESIDENT AND PRIME MINISTER OF INDIA

भारतीय राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्रियों के नाम एवं कार्यकाल 

Estimated reading time: 2 minutes, 21 seconds

भारत के राष्ट्रपति के नाम एवं उनके कार्यकाल

क्र०
नाम
कार्यकाल
1
डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1884 - 1963)
26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 तक
2
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1888-1975)
13 मई 1962 से  13 मई 1967 तक
3
डॉ. जाकिर हुसैन (1897 - 1969)
13 मई 1967 से  03 मई 1969 तक
4
वराहगिरि वेंकटगिरि (1884 - 1980)(कार्यवाहक)
03 मई 1969 से  20 जुलाई 1969 तक
5
न्यायमूर्ति मोहम्मद हिदायतुल्लाह (1905 - 1992)(कार्यवाहक)
20 जुलाई 1969 से 24 अगस्त 1969 तक
6
वराहगिरि वेंकटगिरि (1884 - 1980)
24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक
7
फखरुद्दीन अली अहमद (1905 - 1977)
24 अगस्त 1974 से 11  फरवरी 1977 तक
8
बी.डी. जत्ती (1913 - 2002)(कार्यवाहक)
11 फरवरी 1977 से 25 जुलाई 1977 तक
9
नीलम संजीव रेड्डी (1913 - 1996)
25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1982 तक
10
ज्ञानी जैल सिंह (1916 - 1994)
25 जुलाई 1982 से 25 जुलाई 1987 तक
11
आर. वेंकटरमण (1910 - 2009)
25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक
12
डॉ. शंकर दयाल शर्मा (1918 - 1999)
25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997 तक
13
के. आर. नारायणन (1920 - 2005)
25 जुलाई 1997 से 25 जुलाई 2002 तक
14
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (1931-2015)
25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक
15
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल (जन्म - 1934)
25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012 तक
16
श्री प्रणब मुखर्जी (जन्म - 1935)
25 जुलाई 2012 से 25 जुलाई  2017 तक
17
श्री राम नाथ कोविन्द (जन्म - 1945)
25 जुलाई 2017 से अब तक


क्र०
नाम
कार्यकाल
1
जवाहरलाल नेहरू (1889-1964)
15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक
2
गुलजारी लाल नंदा (1898-1997) (कार्यवाहक)
27 मई 1964 से 9 जून 1964 तक
3
लाल बहादुर शास्त्री  (1904-1966)
9 जून 1964 से 11 जनवरी  1966 तक
4
गुलजारी लाल नंदा (1898-1997) (कार्यवाहक)
11 जनवरी  1966 से 24 जनवरी 1966 तक
5
इंदिरा गांधी (1917-1984)
24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक
6
मोरारजी देसाई (1896-1995)
24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक
7
चरण सिंह (1902-1987)
28 जुलाई 1979  से 14 जनवरी 1980 तक
8
इंदिरा गांधी (1917-1984)
14 जनवरी 1980 से 31अक्टूबर 1984 तक
9
राजीव गांधी (1944-1991)
31 अक्टूबर 1984 से 01 दिसंबर 1989 तक
10
विश्वनाथ प्रताप सिंह (1931-2008)
02 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990 तक
11
चंद्रशेखर (1927-2007)
10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक
12
पी. वी. नरसिम्हा राव (1921-2004)
21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक
13
अटल बिहारी वाजपेयी (1926-2018)
16 मई, 1996  से 01 जून 1996 तक
14
एच. डी. देवेगौड़ा (1933)
01 जून 1996  से 21 अप्रैल 1997 तक
15
इंद्रकुमार गुजराल (1933-2012)
21 अप्रैल 1997 से 18 मार्च 1998 तक
16
अटल बिहारी वाजपेयी (1926-2018)
19 मार्च 1998  से 13 अक्टूबर 1999 तक
17
अटल बिहारी वाजपेयी (1926-2018)
13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक
18
डॉ. मनमोहन सिंह (जन्म-1932)
22 मई 2004 से 26 मई  2014 तक
19
नरेंद्र मोदी (जन्म-1950)
26 मई 2014 से वर्तमान तक


19 मई 2020

AMPHAN CYCLONE

अम्फान चक्रवाती तूफान


Estimated reading time: 4 minutes, 2 seconds.



https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
AMPHAN CYCLONE

देश पहले से ही कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है। इसी बीच एक और बड़ी प्राकृतिक आपदा आ गई है। इस आपदा का नाम है अम्फान चक्रवाती तूफान (amphan cyclone)। ये तूफान लगातार भयंकर रूप लेता जा रहा है और इससे ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ा संकट है। सुपर तूफान में 150 से 200 की रफ्तार में हवाएं चलती हैं। जब इतनी वेग से हवाएं और साथ में सैलाब आता है तो मिनटों में अधिवास तबाह हो जाते हैं। अम्फान तूफान संभवत: सोमवार (18 मई, 2020) शाम तक "सुपर साइक्लोनिक तूफान" में बदल गया और बुधवार (20 मई, 2020) तक पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट से भी टकराएगा| दो दशकों के बाद पहली बार कोई सुपर साइक्लोन भारत में दस्तक दे रहा है सुपर साइक्लोन में 150-200km की रफ्तार से हवाएं चलती हैं और 20 मई को लगभग 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है| पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को वहां से हटाकर सुरक्षित जगहों पर रखने की व्यवस्था की गई है|भारतीय मौसम विभाग (IMD),  के अनुसार, यह चक्रवात आने वाले कुछ घंटो में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा|


कैसे करता है विनाश ?


चक्रवात अपनी ऊर्जा समुद्र से ग्रहण करता है और फिर पृथ्वी की ओर लपकता है। जब यह पृथ्वी की ओर बढ़ता है उस वक्त यह अपने प्रचंड वेग और ऊर्जा के साथ 150 से 250 किमी के वेग से जब पृथ्वी की सतह से टकराता है तो भीषण आंधी और तूफान के साथ धरती पर तबाही मचा देता है। ये तबाही इतनी भयंकर होती है कि बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह भसक जाती हैं। पानी के वेग से सड़कें फट जाती हैं। आसान उदाहरण की तरह समझें तो जिस तरह आँच पर रखा दूध तापमान बढ़ते ही पतीले से बाहर आने का यत्न करता है, वैसे ही समुद्र का तापमान बढ़ते ही उसकाआयतन बढ़ता है और वह किनारों को तोड़ने की कोशिश करता है।


किन-किन क्षेत्रों के प्रभावित होने की संभावना है?


चक्रवाती तूफान अम्फान को लेकर देश में लोग डरे हुए हैं। हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो अम्फान का असर उत्तर भारतीय इलाके में नहीं होगा। एनडीआरएफ के महानिदेशक एसएन प्रधान ने बताया कि अम्फान का असर दिल्ली, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों पर नहीं पड़ेगा। तूफान देश की तटीय सीमाओं को ही छूएगा। हालांकि उत्तर भारत के कुछ इलाकों में आंधी या बारिश हो सकती है।



कौन रखता है चक्रवातों के नाम?


पूरी दुनिया में छह क्षेत्रीय विशेष मेट्रोलॉजिकल सेंटर (regional specialised metrological centres) (RSMCs) और पांच क्षेत्रीय ट्रॉपिकल साइक्लोन वॉर्निंग सेंटर (regional Tropical Cyclone Warning Centres) (TCWCs) को अनिवार्य है की वो एडवाइजरी जारी करें और ट्रॉपिकल साइक्लोन का नामकरण करें|भारत का मौसम विभाग 6 RSMCs में से एक है जो कि उष्णकटिबंधीय चक्रवात और स्टॉर्म सर्ज के लिए एडवाइजरी WMO / ESCAP पैनल के तहत 13 सदस्य देशों को देता है जो हैं बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन|यह RSMC, नई दिल्ली के लिए अनिवार्य है कि बंगाल की खाड़ी (BoB) और अरब सागर (AS) सहित उत्तर हिंद महासागर (NIO) पर विकसित होने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखे|



उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण क्यों किया जाता है?


नामकरण करने के पीछे ये उद्देश होता है कि वैज्ञानिक समुदाय, आपदा प्रबंधकों, मीडिया और आम जनता को प्रत्येक चक्रवातों को अलग-अलग पहचानने में आसानी हो, नामकरण से इसके विकास के बारे में जागरूकता पैदा होती है, और यह एक क्षेत्र पर उष्णकटिबंधीय चक्रवात की एक साथ होने वाली भ्रम को दूर करने में भी मदद करता है, यह उष्णकटिबंधीय चक्रवात को याद रखने में भी मदद करता है| नामकरण के कारण व्यापक दर्शकों तक आसानी से, तेजी से और प्रभावी रूप से चेतावनी पहुंचती है|


चक्रवात अम्फान तूफान का नाम कैसे पड़ा?


उष्णकटिबंधीय चक्रवात जो विभिन्न महासागर में बनते हैं, उनका नाम संबंधित RSMC और TCWCs द्वारा रखा जाता है| मानक प्रक्रिया का पालन करते हुए, RSMC, नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी और अरब सागर सहित उत्तर हिंद महासागर के लिए उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को नाम प्रदान करती है| 2000 में ओमान की सल्तनत के मस्कट में आयोजित उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Panel on Tropical Cyclones) (PTC) पैनल WMO / ESCAP का 27वां सत्र की चर्चा में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को नाम देने के लिए सिद्धांतों में सहमती हुई| लंबे विचार-विमर्श के बाद, सितंबर 2004 से उत्तर हिंद महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण शुरू हुआ| सूची में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड सहित WMO / ESCAP PTC के 8 सदस्य देशों द्वारा प्रस्तावित नाम हैं| आपको बता दें कि सूची में से लगभग सभी नामों का उपयोग अंतिम नाम (Amphan) को छोड़कर आज तक किया जा चूका है| इसलिए, पिछली सूची से अंतिम नाम  'अम्फान' नाम का उपयोग इस बार किया गया है |



18 मई 2020

PHOTO BACKGROUND CHANGE ONLINE

PHOTO BACKGROUND CHANGE ONLINE


Estimated reading time: 2 minutes, 22 seconds.



दोस्तों हर कोई अपने जीवन के खुबसूरत लम्हों को याद कर खुश होता है और उन लम्हों को सहेज कर रखना चाहता है| और आज के दौर में ये काम बहुत ही आसान हो गया है आज हम जब चाहें मोबाइल के कैमरे से फोटो और विडियो बना सकते हैं लेकिन जरा उन लोगों के बारे में सोचिये जिनके समय में ये टेक्नोलॉजी नहीं थी और अगर थी भी तो सब कि पहुँच में नहीं थी| आज साइंस की मदद से हर हाथ में कैमरा है | लेकिन कभी कभी हम जैसी फोटो लेना चाहते है वैसी ले नहीं पाते कभी फोटो अच्छी होती है तो उसका बैकग्राउंड अच्छा नहीं होता है और बैकग्राउंड की वजह से फोटो कि खूबसूरती फीकी पड़ने लगती है आप लोगों ने कभी ना कभी किसी ना किसी फोटो के बैकग्राउंड को चेंज करने का जरुर सोचा होगा कई सारे background remover application और software का प्रयोग कर काफी प्रयास भी किया होगा | आप के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए आज मैं आपको कुछ ऐसा तरीका बताऊंगा जिसके लिए ना तो आपको कोई application और ना ही कोई app download करने कि जरुरत होगी आप ऑनलाइन सिर्फ कुछ ही मिनटों में अपने फोटो का background remove कर सकते और उसमे दूसरी फोटो भी लगा सकते हैं | वो भी इतनी आसानी से कि आपको यकीं नहीं होगा | और आप अपने इस क्रिएशन को facebook, whatsap,instagram, जैसे सोसल मीडिया प्लेटफोर्म पर शेयर कर सकते हैं  मैं आप को स्टेप बाय स्टेप बताऊंगा ताकि आप को समझने में परेशानी ना हो तो चलिए शुरू करते हैं |


सबसे पहले आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर वेबसाइट को ओपन कर लें –



वेबसाइट ओपन होने के बाद आपको कुछ इस तरह का इंटरफ़ेस 

नजर आएगा –


https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/



(1) इसमें आप सबसे पहले UPLOAD IMAGE पर क्लिक कर आपको जिस भी फोटो का background remove करना है उसको सेलेक्ट कर लें 

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/




यहाँ पर मैं आपको इस फोटो का background remove करके दिखाऊंगा 









(2)  फोटो को UPLOAD करने के बाद आप देखेंगे कि आपको फोटो के दो SECTION दिखाई देंगे पहला वाले मैं ORIGINAL PHOTO और दुसरे वाले में background remove वाला फोटो दिखाई देगा कुछ इस तरह -

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/



इसमें आप को दो आप्शन दिखाई देंगे (1) DOWNLOAD का (2) EDIT का 
आपको दूसरे वाले एडिट के आप्शन पर क्लिक करना है |
एडिट के आप्शन पर क्लिक करने से आपको कुछ ऐसा इंटरफ़ेस देखने को मिलेगा –

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/



यहाँ पर आप अपने फोटो में कुछ ERASE करना चाहते हैं तो वो भी कर सकते हैं इसके बाद आप अपने फोटो में बैकग्राउंड इमेज या कलर सेट कर सकते हैं एक फोटो की BACKGROUND को आप जितनी बार चेंज करना चाहते है चेंज कर सकते हैं | यहाँ पर कोई लिमिट नहीं है जब आपकी EDITING COMPLETE हो जायेगा तब नीचे DOWNLOAD BUTTON पर CLICK  कर फोटो को SAVE कर सकते हैं कुछ इस तरह-


https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/


































उम्मीद है आपको जानकारी अच्छी लगी होगी अगर  आपका कोई सवाल हो तो कमेन्ट कर पूछ सकते हैं |

14 मई 2020

INDIAN NAVIGATION SYSTEM



INDIAN NAVIGATION SYSTEM (NAVIC)

Estimated reading time: 5 minutes, 23 seconds

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
दोस्तों हमारा देश भारत क्षेत्रफल कि दृष्टी से दुनिया का सातवाँ बड़ा देश है, इसके वृहद् क्षेत्र ,जलवायु विभिन्नता, कई तरह की  स्थालाकृतियाँ और भोगौलिक बनावट, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भाषाई विविधतता की दृष्टी से इसे उपमहाद्वीप की संज्ञा दी जाती है| इसके इतने विशाल स्वरुप  का अध्ययन,सुरक्षा,मौसम, जलवायु,सामरिक हलचल, संचार, परिवहन इत्यादि आवश्यकताओं की दृष्टि से इसका अपना जीपीएस या यूँ कहें कि अपना कोई नेविगेसन सिस्टम नहीं होने के कारण हमें दूसरे देश जैसे कि अमेरिका के जीपीएस पर आश्रित रहना पड़ता था | जिसका परिणाम हमने मई 1999 में देखा था जब पाकिस्तानी सेनिक घुसपैठिये की तरह कश्मीर में घुस गए और कारगिल की कई पहाड़ियों पर उन्होंने कब्जा जमा लिया था| ऐसे हालत में हमारी सेना को घुसपैठियों का सही लोकेशन पता लगाने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था और जब हमारी सरकार ने अमेरिका से जीपीएस के द्वारा घुसपैठियों की जानकारी माँगी  तो अमेरिका ने भारत के उम्मीदों पर पानी फेरते हुए भारत की सहायता करने से मना कर दिया| इसके बावजूद भी हमारा देश युद्ध जीत गया और इस मुश्किल वक़्त में अमेरिका के दोहरे चरित्र को भी भारत ने देख लिया | इस अमेरिकी असहयोग से भारत ने सबक हासिल किया और अपनी नैविगेसन प्रणाली बनाने पर काम करना शुरू कर दिया | और आज उसी का परिणाम है कि भारत अपनी नैविगेशन प्रणाली बनाने वाले चंद देशों में शामिल है| जिसे भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (Indian Space Research Organization - ISRO) ने बनाया है| नाविक एक तरह से RPS (Regional Navigation System) है| नाविक प्रणाली का पहला उपग्रह आई.आर.एन.एस.एस.-1 01 जुलाई, 2013 को प्रक्षेपित किया गया. और इस प्रणाली का आखिरी उपग्रह यानी आई.आर.एन.एस.एस.-1आई 12 अप्रैल, 2018 को पी.एस.एल.वी.-सी41 द्वारा स्थापित किया गया | आज यह नैविगेसन प्रणाली शुरू हो चुकी है |

GPS और  RPS में अंतर-

GPS (जीपीएस)- इसका पूरा नाम Global Positioning System है यह अमेरिकी अंतरिक्ष विज्ञान संस्था नासा द्वारा विकसित उपग्रह पर आधारित नैविगेसन प्रणाली है जिसका उपयोग हम आमतौर पर अपने मोबाइल में गूगल मेप के माध्यम से अपनी या किसी स्थान कि लोकेसन पता करने, अपनी लोकेशन से किसी दूसरी लोकेशन की दूरी पता करने के लिए करते हैं| इन कार्यों के अतिरिक्त जीपीएस से और भी कई तरह के कार्य किये जाते हैं, यह कम से कम 24 उपग्रहों से बना है। GPS किसी भी मौसम में 24 घंटे काम करता है |

RPS (आरपीएस)- इसका पूरा नाम रीजनल पोजिशनिंग सिस्टम(Regional Navigation System) है| भारत द्वारा बनाया गए नैविगेसन प्रणाली को हम जीपीएस कि श्रेणी में नहीं रख सकते क्योंकि यह सिर्फ भारत के ऊपर ही काम करेगा| इसके लिए ISRO ने 8 सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में भारत के ऊपर स्थापित किये हैं जिसमे 07 सैटेलाइट नेविगेशन के लिए हैं और 01 सैटेलाइट मैसेजिंग के लिए है| इनका पूरा नाम है - इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) था जिसको बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सैटेलाइट सिस्टम का नाम भारत के मछुवारों को समर्पित करते हुए नाविक रखा है| नाविक यानि कि नैविगेशन इंडियन कॉन्स्टेलशन (NAVIC) इससे भारत में कहीं भी आपको जीपीएस से बेहतर नेवीगेशन मिलेगा साथ ही देश की सीमाओं से 1500 किमी बाहर तक का सटीक पोजिशनिंग पता चल पाएगा| जीपीएस पुरे वैश्विक स्तर पर कार्य करता है जबकि RPS का क्षेत्र सीमित होता है|  


भारत के अलावा इन देशों के पास है अपना खुद का नैविगेसन सिस्टम-

दुनिया में कुछ ही ऐसे देश हैं जिनके पास अपना खुद का नैविगेसन सिस्टम हैं| जिनमे अमेरिका के पास जीपीएस(24 सैटेलाइट) है, रूस के पास ग्लोनास(24 सैटेलाइट), भारत के पास नाविक(8 सैटेलाइट),यूरोप का गैलीलियो(26 सैटेलाइट), चीन का बीडाउ(30 सैटेलाइट) | इनमें से यूरोप के गैलीलियो और चीन के बीडाउ ने काम करना शुरू नहीं किया है इस तरह हम कह सकते हैं कि भारत इस नैविगेसन सिस्टम को प्राप्त करने वाला विश्व का तीसरा देश बन चूका है|

नाविक के उपग्रह- 

IRNSA यानी 'Indian Regional Navigation Satellite System जिसे हम नाविक के नाम से भी जानते है इसमें कुल 8 सैटेलाइट हैं जिनमें 7 नैविगेसन के लिए है जो कि हर समय दक्षिण एशिया में 1500 किमी के दायरे में नजर रखेंगे और 1 उपग्रह मेसेंजिंग के लिए है| इसमें 4 उपग्रह भूसमकालिक कक्षा में और 4 उपग्रह भू-स्थिर कक्षा में स्थापित किये गए हैं|  भूस्थिर कक्षा पृथ्वी से 35786 किमी ऊंचाई पर स्थित वह कक्षा है, जहां स्थित उपग्रह पृथ्वी से हमेशा एक ही स्थान पर दिखाई देता है| इसरो ने आईआरएनएसएस के उपग्रहों के कुल 9 प्रक्षेपण किये जिनमें से 1 प्रक्षेपण आईआरएनएसएस-1H (IRNSS-1H) 31 अगस्त 2017 असफल रहा|


जीपीएस और नाविक में बेहतर कौन ?

अमेरिकी जीपीएस के 24 उपग्रह पूरे विश्व के लिए अंतरिक्ष में फैले हुए हैं, और आईआरएनएसएस के केवल 7+1(मैसेजिंग ) उपग्रह भारत और उसके पड़ोसी देशों को कवर कर रहे हैं जीपीएस और नाविक में ज्यादा बेहतर नाविक है क्योंकि नाविक में एस और एल बैंड कि दोहरी आवृति है इसलिए यह जीपीएस से सटीक होगा, जीपीएस के मुकाबले शहरी इलाकों में नाविक की सटीकता छह गुना अधिक होगी। जबकी जीपीएस केवल एल बैंड पर आधारित है| इससे उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है| जब कम आवृत्ति वाले संकेत वायुमंडल में यात्रा करते हैं, तो इसके वेग में बदलाव हो जाता है. इस कारण इस मॉडल को इसे समय-समय पर अपडेट करना पड़ता है| वहीं नाविक के मामले में दोहरी आवृत्ति (एस और एल बैंड) की देरी में अंतर को मापा जा सकता है और वास्तविक देरी का आकलन किया जा सकता है. इस प्रकार आवृत्ति त्रुटि खोजने के लिए नाविक किसी भी प्रकार से किसी भी मॉडल पर निर्भर नहीं है और ये जीपीएस से अधिक सटीक है|

जाने कैसे फोटो का बैकग्राउंड चेंज करें:-

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/2020/05/photo-background-change-online.html



नाविक का उपयोग-


नाविक का उपयोग से हम अपने स्मार्ट फ़ोन और अपने वाहनों अपनी स्थिति और रास्तों कि जानकारी ज्यादा सटीकता के साथ पता कर सकेंगे |
युद्ध के समय इस सिस्टम से हथियारों को सटीकता से संचालित करना, दुश्मन देश की सेना का पता लगाने में | युद्ध के समय हम इसका उपयोग निर्बाध रूप से कर सकेंगे
NAVIC से हमें जमीन, वायु और जल तीनों पर रास्ता आसानी से पता चलेगा. साथ ही आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी |
नाविक से मैपिंग, भूगर्भीय डाटा कैप्चर करने, ड्राइवरों के लिए दृश्य और आवाज नेविगेशन के अलावा वाहन ट्रैकिंग और बेड़े प्रबंधन में भी मददगार साबित होगा|
इसका उपयोग किसी सैन्य मिशन पर, हथियारों की आवाजाही और मिसाइल छोड़ने या उसे नैविगेट करने के लिए किया जा सकेगा |

दोस्तों नाविक का इस्तेमाल पुराने स्मार्ट फोन पर नहीं किया जा सकेगा| इसका उपयोग नाविक नैविगेशन प्रणाली लगी चिप युक्त स्मार्ट फोन एवं अन्य डिवाइसों में ही किया जा सकेगा |

Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...