11 जून 2020

CORONAVIRUS FAMILY

CORONAVIRUS FAMILY

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CORONA VIRUS
कोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान शहर में शुरू हुआ था। कोरोना वायरस, विषाणुओं के एक बहुत बड़े परिवार कता हिस्सा है लेकिन इनमें से सिर्फ 6 विषाणु ही ऐसे हैं जो इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं। नोवेल कोरोना वायरस यानी ये नया वायरस पहली बार सामने आया है जो इंसान को संक्रमित कर रहा है। 


करोना शब्द की उत्पत्ति


कोरोनावायरस का लेटिन भाषा के 'कोरोना' से लिया गया है। कोरोना का लैटिन में मतलब क्राउन या ताज होता है। इस वायरस के कणों के इर्द-गिर्द उभरे हुए कांटे जैसे ढाँचों से इलेक्ट्रान सूक्षमदर्शी में मुकुट जैसा आकार दिखता है, जिस पर इसका नाम रखा गया था। सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा सूर्य को ढक लेता है तो चन्द्रमा के चारों ओर किरण निकलती प्रतीत होती है उसको भी कोरोना कहते हैं |  



अधिकारिक नामकरण कब किया गया ?


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 11 फ़रवरी 2020 को कहा कि घातक कोरोना वायरस का आधिकारिक नाम कोविड-19’ होगा । इस विषाणु की पहचान पहली बार 31 दिसंबर 2019 को चीन में हुई थी। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एधानोम गेब्रेयेसुस ने जिनेवा में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अब हमारे पास बीमारी के लिए नाम है और यह कोविड-19’ है।’’उन्होंने नाम की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘‘को’’ का मतलब ‘‘कोरोना’’, ‘‘वि’’ का मतलब ‘‘वायरस’’ और ‘‘डी’’ का मतलब ‘‘डिसीज’’ (बीमारी) है। और ये बीमारी जिस वायरस से होता है उसका नाम severe acute respiratory syndrome कोरोना वायरस-2 (SARS-CoV-2) है |


कोरोना वायरस को महामारी कब और किसने घोषित किया गया ?


'विश्व स्वास्थ्य संगठन'(World Health Organization) ने कोरोना वायरस (coronavirus)या कोविड-19 (COVID-19) को 11 मार्च 2020 को कोरोनावायरस या कोविड-19 को सर्वव्यापी महामारी (pandemic) घोषित कर दिया था |

कोरोना वायरस परिवार :-


1. एचसीओवी-229- 

मानव कोरोना वायरस 229-ई (एचसीओवी-229-ई) कोरोना वायरस की एक प्रजाति है जो मनुष्यों और चमगादड़ों को संक्रमित करती है। यह संक्रामक वायरस एक सिंगल-स्ट्रांडेड आरएनए वायरस है जो एपीएन रिसेप्टर के जरिये अपने मनुष्यों की कोशिकाओं में प्रवेश करता है। एचसीओवी-229-ई छोटी-छोटी उल्टी और श्वसन के माध्यम से प्रसारित होता है। इसके लक्षणों में सर्दी-जुकाम से लेकर तेज बुखार जैसे कि निमोनिया और ब्रोन्कोलाइटिस शामिल हैं।  

2. एचसीओवी-एनएल-63 

एचसीओवी-एनएल-63 अल्फा कोरोना वायरस की है। इसकी पहचान 2004 के अंत में नीदरलैंड के ब्रोंकोलाइटिस वाले सात महीने के बच्चे में की गई थी। बाद में दुनिया में कई बीमारियों के साथ इसका जुड़ाव सामने आया है। इन बीमारियों में श्वांस नलिका के संक्रमण, क्रुप और ब्रोन्कोलाइटिस शामिल हैं। वायरस मुख्य रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और तीव्र श्वसन संबंधी बीमारी के रोगियों में पाया जाता है। एम्स्टर्डम में एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 4.7% आम श्वसन रोगों में एचसीओवी-एनएल-63 की उपस्थिति है।  

3. एचसीओवी-ओसी-43 

एचसीओवी-229-ई के साथ-साथ, एचसीओवी-ओसी-43 भी एक सामान्य सर्दी का कारक वायरस है। यह वायरस शिशुओं में निमोनिया सहित, श्वसन नलिका संक्रमण पनपाता है। बुजुर्ग और कमजोर इम्यून क्षमता वाले व्यक्तियों जैसे कि कीमोथेरेपी से गुजरने वाले और एचआईवी-एड्स से पीड़ित लोग भी इसके ज्यादा शिकार होते हैं। सर्दी के मौसम में जब हमें जुखाम होता हे तो यह इसी वायरस की बदौलत है। 


4. एचसीओवी-एचकेयू-1


एचसीओवी-एचकेयू-1 को पहली बार जनवरी, 2005 में हांगकांग के एक 71 वर्षीय व्यक्ति में पहचाना गया था, जो कि तीव्र श्वसन समस्या से जूझ रहा था। उसमें रेडियोलॉजिकल रूप से द्विपक्षीय निमोनिया की पुष्टि की गई थी। उस दौरान यह आदमी चीन के शेनझेन से लौटा था।

5. सार्स 

कोरोना वायरस के परिवार का एक पूर्वज वायरस सार्स (सीवियर एक्यूट रिस्पिरेटरी सिंड्रोम) सबसे पहले 2003 में चीन में पाया गया था। यह चमगादड़ों से इंसानों में आया था। इसकी वजह से 2003 में चीन और हांगकांग में करीब 650 लोग मारे गए थे। जांच में पता चला कि यह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में आया था।

6. मर्स 

मध्य-पूर्व देशों में मर्स-सीओवी (मिडिल ईस्ट रिस्पिरेटरी सिंड्रोम वायरस) को 2012 में सऊदी अरब में खोजा गया था। यह वायरस कोरोना वायरस परिवार का पूर्वज है। मर्स-सीओवी की वजह से अब तक मध्य-पूर्व के देशों में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह वायरस ऊंटों के जरिये इंसानों में आया था।

7. नोवल कोरोना वायरस

नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) का पहला मामला दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में सामने आया था। इसके लक्षणों में बुखार, सर्दी-जुखाम, खांसी, सांस लेने में तकलीफ होती है। ये लक्षण सार्स और मेर्स से काफी मिलते-जुलते हैं। कोविड-19 की अनुवांशिक संरचना 80 फीसदी तक चमगादड़ों में पाए जाने वाले सार्स वायरस जैसी मिली। 

एक-एक कर पहचाने गए कोरोना वायरस

1960 : हैम्रे और प्रॉकनाउ का रिसर्च पेपर एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी एंड मेडिसिन में 1966 में छपा था, जिसमें सबसे पहले कोरोना वायरसों में शामिल 229ई का उल्लेख था |

1967 : वायरोलॉजी पत्र में छपे एक शोध में कहा गया कि पहला मानवीय कोरोना वायरस 1965 में खोजा गया और टायरेल व बायनो के पेपर में इसे बी814 नाम दिया गया |

2003 : चीन में सार्स की शुरूआत हुई | यह वायरस किस जानवर से फैला, यह अब तक पता नहीं है लेकिन माना जाता है कि चमगादड़ से बिल्लियों के ज़रिये यह मनुष्यों तक आया |

2004 : नीदरलैंड्स में पहली बार सांस संबंधी रोग पैदा करने वाले वायरस को पहचाना गया | तब मनुष्यों में कोरोन वायरसों के संक्रमण को लेकर रिसर्च में तेज़ी आई और एनएल63 और एचकेयू1 की खोज 2004 में हांगकांग में हुई |

2012 : सउदी अरब में ऊंटों के ज़रिये मनुष्यों में मर्स महामारी के रूप में कोरोना वायरस सामने आया |

2019 : चीन के वुहान शहर में सार्स-कोव-2 यानी कोविड 19 की शुरूआत हुई | यह भी किस जानवर से फैला है, अब तक पुष्ट नहीं है लेकिन फिर थ्योरीज़ चमगादड़ को ही सोर्स मान रही हैं |

10 जून 2020

TIK TOK VIDEO DOWNLOAD WITHOUT WATERMARK

TIK TOK VIDEO DOWNLOAD WITHOUT WATERMARK


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दोस्तों आज हर कोई TIK TOK ऐप से परिचित है जहाँ पर लाखों शोर्ट विडियो अपलोड,डाउनलोड, और शेयर किये जाते हैं यह आज की तारीख में शोर्ट विडियो एप्स की लिस्ट में टॉप पर है आज बहुत सारे लोग इस ऐप को इस्तेमाल करके अपने हुनर को दुनिया के सामने ला रहें है और अपने फैन फोलोविंग में इजाफा भी कर रहे है साथ ही साथ नाम और पैसा दोनों कमा रहे हैं | कई बार हमें जब कोई विडियो पसंद आ जाता है तो हम उसे अपने मोबाइल की गैलेरी में सेव करना चाहते है लेकिन इस ऐप में सेव विडियो का आप्शन तो होता है लेकिन बिना वॉटरमार्क के विडियो डाउनलोड करने की सुविधा इसमें मौजूद नहीं है मतलब जब हम किसी विडियो को सेव विडियो करते हैं तो उसमे विडियो बनाने वाले की ID भी शो होने लगती है जिससे विडियो डाउनलोड करने का सारा मजा बेकार हो जाता है | बिना वॉटरमार्क के विडियो डाउनलोड नहीं होने की वजह से हमारी समझ में नहीं आता की हम विडियो को कैसे डाउनलोड करें | चलिए आज मैं आप कि इस उलझन को सुलझा देता हूँ जिससे आप TIK TOK की कोई भी विडियो डाउनलोड कर पाएंगे वो भी बिना किसी वॉटरमार्क के वो भी बिलकुल फ्री इसके लिये मैं आप को दो तरीके बताऊंगा-

 ऑनलाइन तरीका

 2  थर्ड पार्टी ऐप के जरिये


आइये सबसे पहले हम ऑनलाइन तरीके को देखते है-



सबसे पहले आप अपने स्मार्ट फोन में TIK TOK ऐप को ओपन कर लें 


इसके बाद आप को जिस भी विडियो को बिना वॉटरमार्क के डाउनलोड करना है उसे सर्च कर लें 


स्क्रीन के नीचे दायें तरफ विडियो में दिए शेयर बटन पर क्लिक करें | 

शेयर बटन पर क्लिक करने के बाद आपको कई सारे आप्शन नजर आयेंगे जिनमें से आप कॉपी लिंक [COPY LINK] पर क्लिक करें | 

कॉपी लिंक बटन पर क्लिक करने से लिंक कॉपी हो जायेगा | 

अब आप अपने स्मार्टफोन के किसी भी ब्राउज़र को ओपन कर लें और Tiktokshort.com/download लिख कर सर्च करें और वहीँ पर सर्च filed में उस लिंक को paste कर दें | 
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TIK TOK


ऐसा करने पर विडियो के नीचे की ओर दो तरह के डाउनलोड बटन उभर का आता है 1 download without water mark 2 download original 

आप पहले आप्शन download without water mark पर क्लिक कर विडियो को बिना किसी वॉटरमार्क के डाउनलोड कर सकते हैं |



अब हम दूसरा तरीका थर्ड पार्टी ऐप के जरिये के डाउनलोड करना सीखेंगे-


सबसे पहले आप को प्ले स्टोर से एक ऐप डाउनलोड करना होगा | 


इसके लिए आप अपना प्ले स्टोर ओपन करें और video downloader for tik tok ऐप डाउनलोड कर लें

सके बाद आप अपने स्मार्ट फोन में TIK TOK ऐप को ओपन कर लें

इसके बाद आप को जिस भी विडियो को बिना वॉटरमार्क के डाउनलोड करना है उसे सर्च कर लें

स्क्रीन के नीचे दायें तरफ विडियो में दिए शेयर बटन पर क्लिक करें |

शेयर बटन पर क्लिक करने के बाद आपको कई सारे आप्शन नजर आयेंगे जिनमें से आप कॉपी लिंक [COPY LINK] पर क्लिक करें |

कॉपी लिंक बटन पर क्लिक करने से लिंक कॉपी हो जायेगा |

अब आपको इस video downloader app को ओपन करना होगा पहली बार ऐप ओपन करें पर ऐप आप से कुछ परमीसन मांगेगा जिसे आप को allow कर देना है फिर आपको ऐप के होमपेज पर paste link and download पर क्लिक करने के बाद खाली बॉक्स दिखाई देगा जिसमे आपको लिंक पेस्ट करना होगा इसके बाद डाउनलोड के बटन पर क्लिक कर दें जिसके बाद कुछ सेकेण्ड में आप का विडियो बिना वॉटरमार्क के आपके गैलरी में सेव हो जायेगा |

तो दोस्तों अब आप जान गए होंगे कि tik tok से विडियो बिना वॉटरमार्क के कैसे डाउनलोड करते हैं | जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के बीच शेयर करें | धन्यवाद |

06 जून 2020

KAIFI AZMI

क़ैफ़ी आज़मी


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पराधीन भारत में पैदा होने, स्वतंत्र भारत में बूढ़े होने की सच्चाई से रूबरू होने और समाजवादी भारत में मरने का ख्वाब देखने वाले क़ैफ़ी आज़मी का जन्म उत्तरप्रदेश के जिला आजमगढ़ के गाँव मिजवान में 1918ई० में हुआ | क़ैफ़ी आज़मी का असली नाम अख्तर हुसैन रिजवी था। आपके ‘झनकार’, ‘आवारा सज्दे’ आदि संग्रह प्रकाशित हुए | क़ैफ़ी ने कई फिल्मों में प्रसिद्ध गीत लिखे- ‘हकीक़त’, ‘हीर राँझा’, ‘गर्म हवा’, ‘अनीता’, हिंदुस्तान की कसम’, शोला और शबनम’, अनुपमा आदि | इनकी पहली फिल्म बुजदिल थी जिसमें उन्होंने गीत लिखे | हीर-रांझा क़ैफ़ी  आज़मी के अद्वितीय लेखन का प्रसिद्ध उदहारण है | हीर-रांझा और गर्म हवा की पटकथा भी उन्होंने ही लिखी थी | ‘नया अदब’ का संपादन किया और इप्टा के संस्थापकों में रहे | 10 मई सन 2002 में आपका इन्तेकाल हो गया |


लाई फिर इक लग़्ज़िश-ए-मस्ताना


लाई फिर इक लग़्ज़िश-ए-मस्ताना1 तेरे शहर में

फिर बनेंगी मस्जिदें मय-ख़ाना तेरे शहर में


आज फिर टूटेंगी तेरे घर की नाज़ुक खिड़कियाँ
आज फिर देखा गया दीवाना तेरे शहर में

जुर्म है तेरी गली से सर झुका कर लौटना
कुफ़्र2 है पथराव से घबराना तेरे शहर में

शाह-नामे3 लिक्खे हैं खंडरात की हर ईंट पर
हर जगह है दफ़्न इक अफ़्साना तेरे शहर में

कुछ कनीज़ें4 जो हरीम-ए-नाज़5 में हैं बारयाब
माँगती हैं जान ओ दिल नज़राना तेरे शहर में

नंगी सड़कों पर भटक कर देख जब मरती है रात
रेंगता है हर तरफ़ वीराना तेरे शहर में

शब्दार्थ:- 

1. मादक लडखडाहट  2. विधर्मिता  3. फिरदौस  की अमर कृति  4. दासियां  5. प्रेमिका का घर  6. जिसे प्रवेश मिल गया हो 

हफीज होशियारपुरी के इस ग़ज़ल को भी पढ़ें -
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/2020/03/aisi-bhi-kya-jaldi-pyare-hafij-hoshiyarpuri.html

03 जून 2020

LUNAR ECLIPSE 2020

LUNAR ECLIPSE 2020

चंद्रग्रहण 2020 

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LUNAR ECLIPSE 
यह वर्ष 2020 खगोलीय घटनाओं में रूचि रखने वालों के लिए बेहद ख़ास है क्योंकि इस वर्ष हमें कई चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा | वर्ष 2020 में चार चंद्र ग्रहण हैं- एक जनवरी में हुआ था और बाकी जून, जुलाई और नवंबर में लगने वाले हैं. 5 जून को होने वाला चंद्रग्रहण उपच्छाया होगा. इसका अर्थ है कि चांद, पृथ्वी की हल्की छाया से होकर गुजरेगा वर्ष 2020 में पहला चंद्रग्रहण 10 जनवरी को लगा था| और अब दुसरा चंद्रग्रहण 5 जून को लगने जा रहा है जो कि उपच्छाया चंद्रग्रहण होगा | जिसकी शुरुआत 5 जून की रात 11:16 बजे से प्रारंभ होकर 6 जून 2:32 मीनट तक रहेगा | ग्रहण रात 12:54 बजे अपने अधितम प्रभाव में होगा | जून में ही 21 तारीख को सूर्य ग्रहण भी लगेगा खास बात ये है कि ये दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई देगा यह ग्रहण भारत सहित एशिया, अफ्रीका, यूरोप और आस्ट्रेलिया के लोग देख पाएंगे |


चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) किसे कहते हैं ?

जिस तरह से सूर्य का अपना प्रकाश होता है उस तरह से चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं होता है वो सूर्य के परावर्तित प्रकाश से चमकता है मतलब जब भी हम चंद्रमा को देखते है और उसका जितना भाग हमें चमकता हुआ नजर आता है उतने भाग पर सूर्य का प्रकाश पड़ रहा होता है| इसी प्रक्रिया में जब पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है तो चन्द्रमा पर पड़ने वाला सूर्य का प्रकाश पृथ्वी की छाया से ढक जाता है इसी खगोलीय घटना को चन्द्रग्रहण कहा जाता है | दुसरे शब्दों में कहें तो जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में संरेखित होते हैं तो हम पृथ्वी की स्थिति के आधार पर सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण देखते हैं | चंद्र ग्रहण उस वक्त लगता है जब पूरा चांद निकला हुआ हो और पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाए | इस तरह सूर्य की किरणों को सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती हैं | यह तभी होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा दोनों के बीच आ जाए |

चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं-
(1) पूर्ण   (2)आंशिक (3) उपच्छाया

चंद्रग्रहण को कैसे देखें ?


चंद्रग्रहण को कैसे देख सकेंगे चंद्रग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष साधन की आवश्यकता नही होती है आप इसे नंगी आखों से भी देख सकते है | लेकिन यह एक उपच्छाया चंद्रग्रहण है इसलिए अगर आप टेलिस्कोप की सहायत से अगर इस ग्रहण को देखेंगे तो ये और भी शानदार नजर आएगा | उपच्छाया चंद्रग्रहण कोई केवल टेलिस्कोप से ही देखा जा सकता है क्योंकि उपच्छाया चंद्रग्रहण में चंद्रमा कि धुंधली सी परत नजर आती है | इस घटना में चंद्रमा के आकार में कोई फर्क नजर नहीं आता है |


सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse)

सूर्यग्रहण भी एक खगोलीय घटना है | चांद के पृथ्वी और सूर्य के बीच आने के कारण सूर्यग्रहण होता है | इस दौरान चांद की छाया धरती पर पड़ती है और जिस जगह पर यह छाया पड़ती है वहां आंशिक रूप से अंधेरा हो जाता है | इसी घटना को सूर्यग्रहण कहा जाता है ऐसे में सूर्य को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए |

चंद्र ग्रहण की तरह सूर्य ग्रहण भी तीन तरह के होते हैं-
(1) पूर्ण   (2)आंशिक (3) उपच्छाया


जून में ही लगेगा वर्ष का पहला सूर्यग्रहण 

जून में साल का तीसरा ग्रहण और साल का पहला सूर्यग्रहण लगने जा रहा है इस ग्रहण को भारत में देखा जा सकेगा | 21 जून को सूर्य ग्रहण सुबह 9बजकर15 मीनट पर शुरू होगा और दोपहर 3 बजकर 4 मीनट पर खत्म होगा | इस दौरान फुल एक्लिप्स 10बजकर17मीनट पर शुरू होगा और 2बजकर2 मीनट पर खत्म होगा |

31 मई 2020

INDIAN RESEARCH INSTITUTE

INDIAN RESEARCH INSTITUTE

भारतीय शोध संस्थान 

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राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र – गुडगांव
भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड – जलाहली
केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान – कटक
भारतीय दलहन शोध संस्थान – कानपुर
केंद्रीय जल एवं विधुत अनुसंधान केंद्र – खड़कवासला
केंद्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान – लखनऊ
भारतीय रासायनिक जैविक संस्थान – कोलकाता
केंद्रीय जूट प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान – कोलकाता
सेंट फॉर डी.एन.फिंगर प्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स – हैदराबाद
उच्च अक्षांश अनुसंधान प्रयोगशाला – गुलमर्ग
केंद्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान – नागपुर
औद्योगिक विष विज्ञान अनुसंधान – लखनऊ
भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग – कोलकाता
भारतीय खगोल संस्थान – बंगलुरु
राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान – पणजी
कोशिकीय तथा आणविक जीव विज्ञान केंद्र – हैदराबाद
भारतीय सर्वेक्षण विभाग – देहरादून
भारतीय मौसम वेधशाला – पुणे
जीवाणु प्रौद्योगिकी संस्थान – चंडीगढ़
प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान – गांधीनगर
भारतीय भू-चुंबकीय संस्थान – मुंबई
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान – शिमला
दृष्टि विकलांग हेतु राष्ट्रीय संस्थान – देहरादून
केंद्रीय वन अनुसंधान संस्थान – देहरादून
भारतीय पेट्रोलियम संस्थान – देहरादून
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान – नई दिल्ली
टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च – मुंबई
इंडियन सिक्योरिटी प्रेस नासिक रोडपुणे
केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान – मैसूर
केंद्रीय भवन निर्माण अनुसंधान संस्थान – रुड़की
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान –   नई दिल्ली
केंद्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान – कोयंबटूर
केंद्रीय तंबाकू अनुसंधान संस्थान – राजमुंदरी
भारतीय चीनी तकनीकी संस्थान – कानपुर
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान – करनाल
केंद्रीय चमड़ा अनुसंधान संस्थान – चेन्नई
केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान – लखनऊ
केंद्रीय नमक और समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान – भावनगर
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण – नई दिल्ली
राष्ट्रीय भू भौतिकी अनुसंधान संस्थान – हैदराबाद
केंद्रीय नारियल अनुसंधान संस्थान – कासरगोड
भारतीय लाह अनुसंधान संस्थान – रांची
भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान – नई दिल्ली
रमण अनुसंधान संस्थान – बंगलुरु
राष्ट्रीय धातु विज्ञान प्रयोगशाला – जमशेदपुर
कपड़ा उद्योग अनुसंधान संस्थान – अहमदाबाद
केंद्रीय यांत्रिक इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान – दुर्गापुर
केंद्रीय ईंधन अनुसंधान संस्थान – जलगोडा
केंद्रीय खनन अनुसंधान केंद्र – धनबाद
डीजल लोकोमोटिव वर्क्स – वाराणसी
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान – नई दिल्ली
राष्ट्रीय प्रतिरोधक विज्ञान संस्थान – नई दिल्ली
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र – ट्रांबे
केंद्रीय कांच तथा मृतिका अनुसंधान संस्थान – कोलकाता
केंद्रीय विधुत रासायनिक अनुसंधान संस्थान – कराईकुडी
केंद्रीय ट्रैक्टर संस्थान – नई दिल्ली

दोस्तों जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों में शेयर करें धन्यवाद जय हिन्द, जय भारत |

30 मई 2020

KOI AARZU NAHIN HAI KOI MUDDAA NAHI HAI

कोई आरजू नहीं  है कोई मुद्दआ नहीं है 


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दोस्तों आज मैं आपके  लिए ले कर आया हूँ उर्दू के मशहूर शायर शकील बदायूंनी साहब के अशआर | उससे पहले मैं आप लोगों को शकील साहब के बारे में थोड़ी जानकारी दे देता हूँ | शकील बदायूंनी का जन्म 3 अगस्त 1916ई०  में  उत्तरप्रदेश के बदायूं में हुआ था | इनका नाम शकील अहमद था |'शकील' को बचपन से ही शायरी का शौक था | उन्हें जिगर मुरादाबादी का शागिर्द माना जाता है | मशहूर ग़ज़लगो शायरों में शुमार शकील 'बदायूंनी' ने फिल्मों में भी खूब और उम्दा गीत लिखे | लेकिन करीब 20 साल तक फिल्मों में हजारों गीत लिखने के बावजूद वे ठेठ  उर्दू ग़ज़ल की परम्परा से खुद को अलग नहीं कर पाए | 20 अप्रैल 1970 को 'सनम-ओ-हरम' ,'रानाइयां', 'रंगीनियां' और 'चमनिस्तान' जैसे चर्चित ग़ज़ल संग्रह के रचियता शकील बदायूंनी का इन्तेकाल हो गया |


शकील बदायूंनी

कोई आरजू नहीं है, कोई मुद्दआ नहीं है,
तेरा ग़म रहे सलामत, मेरे दिल में क्या नहीं है |

कहाँ जामे-ग़म की तल्खी, कहाँ ज़िन्दगी का रोना,
मुझे वो दवा मिली है, जो निरी दवा नहीं है |

तू बचाए लाख दामन, मेरा फिर भी है ये दावा,
तेरे दिल में मैं ही मैं हूँ, कोई दूसरा नहीं है |

तुम्हें कह दिया सीतमगर, ये कुसूर था जबां का,
मुझे तुम मुआफ कर दो, मेरा दिल बुरा नहीं है |

मुझे दोस्त कहने वाले, जरा दोस्ती निभा ले,
ये मताल्बा है हक़ का, कोई इल्तिजा नहीं है |

ये उदास-उदास चेहरे, ये हसीं-हसीं तबस्सुम 
तेरी अंजुमन में शायद , कोई आईना नहीं है |

मेरी आँख ने तुझे भी, बाखुदा 'शकील' पाया,
मैं समझ रहा था मुझसा, कोई दूसरा नहीं है |


29 मई 2020

AJIT JOGI

AJIT JOGI / अजीत जोगी 

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अजीत जोगी 
छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी (74 वर्ष) का शुक्रवार को निधन हो गया। उन्हें नौ मई को दिल का दौरा पड़ने पर रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 20 दिन तक जीवन के लिए संघर्ष के बाद शुक्रवार दोपहर 3:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। जोगी के निधन पर प्रदेश में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई है। नौ मई को गंगा इमली(जंगली फल) खाने के दौरान फल का बीज जोगी के गले में अटक गया था। इस दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह कोमा में चले गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने जंगली फल का बीज को निकाल दिया, लेकिन जोगी कोमा से बाहर नहीं आ पाए। बुधवार की रात उन्हें फिर से दिल का दौरा पड़ा। इसके बाद उनकी स्थिति संभल नहीं पाई।

अजीत जोगी व्यक्तिगत परिचय 


अजीत प्रमोद जोगी छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री थे। उन्होंने नवंबर 2000 और दिसंबर 2003 के बीच राज्य के सीएम के रूप में कार्य किया। वह राज्य विधानमंडल के लिए चुने जाने के अलावा संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहे हैं। 2016 में, अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी को पार्टी विरोधी गतिविधियों और छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ में उप-चुनावों के लिए कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। उनके बेटे अमित को 6 साल के लिए कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। जोगी अपने अंतिम समय में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। उन्होंने खुद ही इस पार्टी का गठन किया था। हालांकि, इससे पहले उन्होंने कांग्रेस में लंबी पारी खेली। आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आए जोगी राज्य विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और केंद्रीय कैबिनेट के सदस्य रहे।


अजीत जोगी ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग मौलाना आज़ाद कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी, भोपाल से पढ़ाई की, 1968 में यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल जीता। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर में व्याख्याता के रूप में काम करने के बाद, उन्हें भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चुना गया। जोगी ने 1974 से 1986 तक मध्य प्रदेश के सीधी, शहडोल, रायपुर और इंदौर जिलों में 12 से अधिक वर्षों के लिए सबसे लंबे समय तक सेवारत कलेक्टर / जिला मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया। बिलासपुर के पेंड्रा में जन्में अजीत जोगी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद पहले भारतीय पुलिस सेवा और फिर भारतीय प्रशासनिक की नौकरी की। बाद में वे मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सुझाव पर राजनीति में आये।अजीत जोगी साल 1986 से 1998 तक राज्यसभा के सदस्य रहे।

एक नजर जोगी जी के राजनीतिक सफ़र पर


जोगी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1986 में की जब वे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण पर अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) के सदस्य बने। तब उन्हें कांग्रेस द्वारा राज्यसभा में मनोनीत किया गया था। उन्होंने 1998 तक लगातार दो कार्यकालों तक ऊपरी सदन की सेवा की।
सन 1987 में उन्हें मध्य प्रदेश की राज्य कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके अतिरिक्त अध्यक्ष, राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग (मध्य प्रदेश)। के पद पर ही कार्यरत रहे |
सन 1989 में मणिपुर राज्य के निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा के चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने उन्हें केंद्रीय पर्यवेक्षक, के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने मध्य प्रदेश के पूर्वी आदिवासी क्षेत्र में 1500 किलोमीटर की दूरी तय की और सामान्य जागरूकता फैलाने के लिए कांग्रेस पार्टी को समर्थन दिया सन 1996 में संसद में कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी समिति के सदस्य बने |
सन 1997 में उन्हें पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी चुनाव सदस्य, ए.आई.सी. सदस्य, परिवहन और पर्यटन पर समिति, सदस्य, ग्रामीण और शहरी विकास सदस्य समिति, परामर्शदात्री समिति, कोयला मंत्रालय, सदस्य, लोक लेखा समिति, सदस्य, परामर्शदात्री समिति, ऊर्जा मंत्रालय, संयोजक, उप-समिति अप्रत्यक्ष कर। इसके अलावा वे राज्य सभा के उपाध्यक्ष के पैनल में सदस्य थे। इनके समानांतर उन्होंने 1997 से 1999 तक मुख्य प्रवक्ता, कांग्रेस संसदीय दल और AICC के मुख्य प्रवक्ता के रूप में कार्य किया।
सन 1998 में वह अविभाजित मध्यप्रदेश के रायगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से 12 वीं लोकसभा के लिए चुने गए।
सन 1999 में उन्होंने दंतेवाड़ा के माँ दंतेश्वरी मंदिर से अंबिकापुर के महामाया मंदिर तक छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश से यात्रा का नेतृत्व किया |
1 नवम्बर सन 2000 को नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना होने के बाद उन्होंने 9 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री रूप में शपथ ली। उन्होंने 2003 में पूरे छत्तीसगढ़ में विकास यात्रा का नेतृत्व किया।
सन 2004 में 14 वीं लोकसभा में छत्तीसगढ़ के महासमुंद से वे सांसद के रूप में चुने गए |
सन 2008 में मारवाही विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत कर वो विधायक बने |
सन 2009 के लोकसभा चुनावों में जोगी छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन क्षेत्र निर्वाचित होकर लोकसभा सदस्य के रूप में में कार्य किया। हालांकि, जोगी 2014 के एलएस चुनावों में अपनी सीट बरकरार रखने में असफल रहे और भाजपा के चंदू लाल साहू से 133 वोटों से हार गए।
जून 2016 में, अजीत जोगी ने एक नए राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस की स्थापना की।

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