30 अप्रैल 2020

मजदूर दिवस

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस



Estimated reading time: 3 minutes, 39 seconds

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
Labour Day

बिना मजदूर के विकास की काल्पना नहीं की जा सकती आज हम अपने आस पास जो कुछ भी निर्माण देख रहे है उन सब निर्माण के पीछे सैकड़ों मजदूरों का श्रम छुपा हुआ होता है जो जाहिरी तौर पर तो हमें नजर नहीं आता है |लेकिन सच्चाई ये है कि बिना मजदूर के मेहनत के हमारी दुनिया इतनी खुबसूरत कभी नहीं हो सकती थी हम इतना विकास नहीं कर सकते थे | मजदूर वो है जो अपना श्रम बेच कर पूंजीपतियों को जीवन के हर एश्वर्य और वैभव को प्राप्त करने का सामर्थ प्रदान करता है | मजदूर नींव कि ईट कि मानिंद अदृश्य रहता है और पूंजीपति गगनचुम्बी इमारतों के शिखर पर लगे प्रकाश पुंज कि तरह चमकता रहता है| हमारे समाज में मजदूरों को आज भी वो सम्मान नहीं मिल पाया है जिस के वो हक़दार हैं| ये हम सब जानते हैं कि मजदूर हमारे समाज का वह हिस्सा है जिसपर समस्त आर्थिक उन्नति टिकी हुई हैl वर्तमान समय के मशीनी युग में भी उनकी महत्ता कम नहीं हुई है | उदाहरण के लिए, उद्‌योग, व्यापार, कृषि, भवन निर्माण, पुल एवं सड़कों का निर्माण आदि समस्त क्रियाकलापों में मजदूरों के श्रम का योगदान महत्त्वपूर्ण होता है | मजदूर अपना श्रम बेचकर न्यूनतम मजदूरी प्राप्त करता है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ को बढ़ावा देने के लिये मजदूर दिवस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता हैl पारंपरिक तौर पर इसको यूरोप में गर्मी के अवकाश के रूप में घोषित किया गया था, इसीलिए पूरे विश्व में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस” मनाया जाता है |


विश्व में मजदूर दिवस की उत्पत्ति



1 मई 1886 में अमेरिका के सभी मजदूर संघ साथ मिलकर ये निश्चय करते है कि वे 8 घंटो से ज्यादा काम नहीं करेंगें, जिसके लिए वे हड़ताल कर लेते है | इस दौरान श्रमिक वर्ग से 10-16 घंटे काम करवाया जाता था, साथ ही उनकी सुरक्षा का भी ध्यान नहीं रखा जाता था | उस समय काम के दौरान मजदूर को कई चोटें भी आती थी, कई लोगों की तो मौत हो जाया करती थी. काम के दौरान बच्चे, महिलाएं व् पुरुष की मौत का अनुपात बढ़ता ही जा रहा था, जिस वजह से ये जरुरी हो गया था, कि सभी लोग अपने अधिकारों के हनन को रोकने के लिए सामने आयें और एक आवाज में विरोध प्रदर्शन करें | इस हड़ताल के दौरान 4 मई को शिकागो के हेमार्केट में अचानक किसी आदमी के द्वारा बम ब्लास्ट कर दिया जाता है, जिसके बाद वहां मौजूद पुलिस अंधाधुंध गोली चलाने लगती है | जिससे बहुत से मजदूर व् आम आदमी की मौत हो जाती है | इसके साथ ही 100 से ज्यादा लोग घायल हो जाते है | इस विरोध का अमेरिका में तुरंत परिणाम नहीं मिला, लेकिन कर्मचारियों व् समाजसेवियों की मदद के फलस्वरूप कुछ समय बाद भारत व अन्य देशों में 8 घंटे वाली काम की पद्धति को अपनाया जाने लगा | तब से श्रमिक दिवस को पुरे विश्व में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाने लगा, इस दिन मजदूर वर्ग तरह तरह की रेलियां निकालते व् प्रदर्शन करते है |


भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत



https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/

भारत में मजदूर दिवस कामकाजी लोगों के सम्‍मान में मनाया जाता है. भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्‍दुस्‍तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में इसकी शुरुआत की थी | यह वह समय भी था जब लाल झंडा (इसकी नींव के बाद से इस्तेमाल किया जाने वाला दिन का प्रतीक) भारत में पहली बार इस्तेमाल किया गया था। हालांकि उस समय इसे मद्रास दिवस के रूप में मनाया जाता था |


मौजूदा दौर में मजदूरों के हालात


महात्मा गांधी कहते थे कि किसी भी देश का विकास उस देश के मेहनतकश मजदूरों और किसानों पर निर्भर करता है। अब देश का विकास तो धड़ल्ले से हो रहा है लेकिन देश के मजदूर आज भी बदहाली में जीवन बसर करने को मजबूर हैं। कहने को तो मजदूरों के संघर्ष आज भी होते हैं लेकिन उनमें वो धार नज़र नहीं आती। आज फिर पूंजीपति वर्ग मेहनतकश के शोषण से मोटा मुनाफा कमाने में जुटा है। नये-नये कानून पारित कर मजदूरों को संगठित होने पर पांबदियां लगाई जाने लगी हैं। आंदोलनों को तोड़ने के लिये साम दाम दंड भेद जितने भी हथियार अपनाये जाने चाहियें अपनाये जा रहे हैं। मजदूर भी खेमों में बंटा है जिस कारण उसकी ताकत कमजोर हुई है। जहां मजदूर संगठित हैं वहां फिर भी वे अपने हकों के लिये आवाज़ उठा लेते हैं लेकिन असंगठित क्षेत्र के मजदूर तो शोषण के लिये अभिशप्त हैं।

27 अप्रैल 2020

वायरस या विषाणु क्या होता है ?

वायरस या विषाणु क्या होता है ?


Estimated reading time: 5 minutes, 34 seconds

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
corona virus

वायरस (virus) अकोशिकीय अतिसूक्ष्म जीव हैं जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ये नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन से मिलकर गठित होते हैं, शरीर के बाहर तो ये मृत-समान होते हैं परंतु शरीर के अंदर जीवित हो जाते हैं। इन्हें क्रिस्टल के रूप में इकट्ठा किया जा सकता है। एक विषाणु बिना किसी सजीव माध्यम के पुनरुत्पादन नहीं कर सकता है। यह सैकड़ों वर्षों तक सुशुप्तावस्था में रह सकता है और जब भी एक जीवित मध्यम या धारक के संपर्क में आता है उस जीव की कोशिका को भेद कर आच्छादित कर देता है और जीव बीमार हो जाता है। एक बार जब विषाणु जीवित कोशिका में प्रवेश कर जाता है, वह कोशिका के मूल आरएनए एवं डीएनए की जेनेटिक संरचना को अपनी जेनेटिक सूचना से बदल देता है और संक्रमित कोशिका अपने जैसे संक्रमित कोशिकाओं का पुनरुत्पादन शुरू कर देती है। कई बार उनके दो डीएनए या आरएनए जो विभाजित हो चुके हों,आपस में जुड़कर नई किस्म कि संरचना को जन्म देते हैं | ऐसे में उनके इलाज में इस्तेमाल की जा रही दवाएं बेअसर हो जाती हैं और तब नए सिरे से दवाएं विकसित करने कि जरुरत पड़ती है|"वायरस कोशिका के बाहर तो मरे हुए ऱहते है लेकिन जब ये कोशिका में प्रवेश करते है तो इनका जीवन चक्र प्रारम्भ होने लगता है | क्योंकि कोशिकाओं के भीतर वो सारी सामग्री होती है जो उनको अपनी संख्या बढ़ाने के लिए चाहिए| फिर ये कोशिकाएं भले ही इंसान कि हो,किसी जानवर की हो, कीट-पतंगों की हो या फिर बैकटीरिया की ही क्यों न हो | ऐसे भी वायरस होते हैं जो खुद बैक्टीरिया पर हमला कर देते हैं तथा उनके शरीर में ही बढ़ने लगते हैं | इन्हें बैक्टीरियाफेज कहा जाता है| किसी दुसरे प्राणी के शरीर में जाने के बाद वायरस के लक्षण दिखाई देने में जितना समय लगता है, उसे इनक्यूबेसन पीरियड कहा जाता है | विषाणु अति सूक्ष्म, परजीवी, अकोशिकीय (Noncellular) और विशेष न्यूक्लियो प्रोटीन कण है, जो जीवित परपोषी के अन्दर रहकर जनन (Reproduction) करते हैं। विषाणु को सिर्फ इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है। विषाणुओं के अध्ययन को विषाणु विज्ञान (Virology) कहा जाता है। विषाणु का अंग्रेजी शब्द वाइरस का शाब्दिक अर्थ विष होता है। सर्वप्रथम सन 1796ई०  में डाक्टर एडवर्ड जेनर ने पता लगाया कि चेचक, विषाणु के कारण होता है। उन्होंने चेचक के टीके का आविष्कार भी किया |


सबसे पहले वायरस या विषाणु कि खोज किसने किया ?


विषाणु की खोज सबसे पहले रूसी वनस्पति इवानविस्की ने 1892 ई. में तम्बाकू की पत्ती में मोजैक रोग (Mosaic disease) के कारण की खोज करते समय किया था।




कैसे होते है वायरस ?



वायरस बहुत सूक्ष्म होते हैं| रहने को तो कोशिका भी सूक्ष्म होती है लेकिन वायरस कोशिका के आकार से भी बहुत छोटे होते हैं| उनको देखने के लिए इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप का इस्तमाल करना पड़ता है वायरस में चूँकि कोशिका नहीं होती इसलिए छोटे और बेक्टीरिया में कोशिका होती है इसलिए बेक्टीरिया बड़े होते हैं | दोनों के आकार में कितना फर्क होता है इसको हम एक उदाहरण द्वारा समझ सकते हैं – खसरे के वायरस का व्यास 220नैनोमीटर होता है जो कि E coli नामक बेक्टीरिया के आकर का आठवां हिस्सा होता है | इसी तरह हेपिटाईटिस का वायरस और भी सूक्ष्म होता है इसका आकार E coli बेक्टीरिया के 40वें हिस्से के बराबर होता है| सन 1931ई० में इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप बनने से पहले इनको देखा नहीं जा सका था |



विषाणु की संरचना


विषाणु प्रोटीन के आवरण से घिरी रचना होती हैं , जिसमें न्यूक्लिक अम्ल उपस्थित होता हैं | अनेक प्रोटीन इकाइयाँ ( Capsomeres ) वाइरस के बाहरी आवरण या कैप्सिड ( Capsid ) में उपस्थित होती हैं | इस पूरे कन को ‘ विरिऑन ‘ कहते हैं , जिनका आकार 10 – 500 मिलीमाइक्रॉन होता हैं | DNA या RNA में से कोई एक न्यूक्लिक अम्ल में पाया जाता हैं | पतली पूँछ के रूप में प्रोटीन कवच होता हैं |




क्या वायरस सदैव हानिकारक ही होतें है ? 





विषाणु, लाभप्रद एवं हानिकारक दोनों प्रकार के होते हैं। जीवाणुभोजी विषाणु एक लाभप्रद विषाणु है, यह हैजापेचिशटायफायड आदि रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को नष्ट कर मानव की रोगों से रक्षा करता है। वायरस का उपयोग लाभदायक कार्यों में भी संभव है जैसे हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए बैक्टीरियोफेज का प्रयोग किया जाता है. इनके द्वारा जल को सड़ने से बचाया जा सकता है | कुछ विषाणु पौधे या जन्तुओं में रोग उत्पन्न करते हैं एवं हानिप्रद होते हैं। एचआईवीइन्फ्लूएन्जा वाइरसपोलियो वाइरस रोग उत्पन्न करने वाले प्रमुख विषाणु हैं। सम्पर्क द्वारा, वायु द्वारा, भोजन एवं जल द्वारा तथा कीटों द्वारा विषाणुओं का संचरण होता है परन्तु विशिष्ट प्रकार के विषाणु विशिष्ट विधियों द्वारा संचरण करते हैं।


वायरस या विषाणु के प्रकार:-


परपोषी प्रकति के अनुसार विषाणु तीन प्रकार के होते हैं:-


1.  पादप विषाणु (plant virus) :-  इनमें न्यूक्लिक अम्ल के रूप में RNA होता हैं | जैसे – टी.एम.वी.(T.M.V. ) , पीला मोजैक विषाणु ( Y.M.V. ) आदि |



2.  जन्तु विषाणु (animal virus):-  इनमें न्यूक्लिक अम्ल के रूप में DNA तथा कभी – कभी  RNA पाया जाता हैं , जो प्रायः गोल होते हैं | जैसे – इन्फ्लूएंजा, मम्पस वाइरस आदि |



3.  जीवाणुभोजी (bacteriophage):- इनमें DNA होता हैं तथा ये केवल जीवाणुओं के ऊपर आश्रित होते हैं |




जीवाणु और विषाणु में अंतर:-


जीवाणु

विषाणु

जीवाणु एक कोशिकीय जीव है
विषाणु अकोशिकीय होता है।
जीवाणु सुसुप्त अवस्था मे नहीं रहते हैं।
विषाणु जीवित कोशिका के बाहर सुसुप्त अवस्था मे हजारों साल तक रह सकते है और जब भी इन्हें जीवित कोशिका मिलती है ये जीवित हो जाते हैं।
जीवाणु का आकार विषाणु से बड़ा होता है और इन्हें प्रकाशीय सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखा जा सकता है।
विषाणु का आकार जीवाणु से छोटा होता है। विषाणु को इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखा जाता है।
इन्हें संग्रह नहीं किया जा सकता।
इन्हें निर्जीव की भांति क्रिस्टल के रूप में संग्रह कर सकते हैं।



वायरस के बारे में रोचक तथ्य:-





1 क्या आप जानते हैं कि सबसे छोटा वायरस टोबैको नेक्रोसिस वायरस (Tobacco necrosis virus) है जिसका परिमाण लगभग 17 nm होता है|इसके विपरीत सबसे बड़ा जन्तु वायरस (Animal virus) पोटैटो फीवर वायरस (Potato fever virus) है लगभग 400 nm. 


2 जीवाणुभोजी (Bacteriophage) की खोज टूवार्ट (Twart) एवं हेरिल ने की थी. ऐसे विषाणु या वायरस जो जीवाणुओं में प्रवेश करके बहुगुणन (Multiplication) करते हैं उन्हें जीवाणुभोजी या बैक्टीरियोफेज कहते हैं| 


3 लखनऊ के पेलियोबोटनी संस्थान में 3.2 बिलियन वर्ष पुरानी चट्टान में सायनोबैक्टीरिया के जीवाश्म रखे हैं| 


4 वायरस के प्रोटीन कोट को कैप्सिड (Capsid) कहते हैं|


5 बॉडन (Bawden) व डार्लिंगटन (Darlington) ने बताया कि वायरस न्यूक्लियोप्रोटीन से बने होते हैं
|

वायरस के द्वारा इंसानों में होने वाली बीमारी:-


क्र०
बीमारी
प्रभावित अंग
विषाणु का नाम
1
चेचक
सम्पूर्ण शरीर
वैरिओला वायरस
2
छोटी माता
सम्पूर्ण शरीर
वैरिसेला वायरस
3
इन्फ़्लुएजा
सम्पूर्ण शरीर
मिक्सो वायरस
4
एड्स
प्रतिरक्षा प्रणाली
HIV
5
पोलियो
गला,रीढ़,नाड़ी
पोलियो
6
रेबीज
तंत्रिका तंत्र
रैबडो वायरस
7
गलसोथ 
पैराथाइराइड ग्रंथि

8
डेंगूज्वर
सम्पूर्ण शरीर
अरबो वायरस
9
हर्पीस
त्वचा
हरपीस
10
खसरा
सम्पूर्ण शरीर
मोर्बिली वायरस
11
ट्रेकोमा
आँख

12
मेनिनजाईटिस
मस्तिष्क

13
हिपेटाईटीस
यकृत

14
कोविड-19
फेफड़ा
सार्स कोव-2

Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...