लफ़्ज़ एहसास-से छाने लगे, ये तो हद है
Estimated reading time: 01minutes, 52 seconds
लफ़्ज़ माने भी छुपाने लगे, ये तो हद है|
आप दीवार गिराने के लिए आए थे,
आप दीवार उठाने लगे, ये तो हद है|
ख़ामोशी शोर से सुनते थे कि घबराती है,
ख़ामोशी शोर मचाने लगे, ये तो हद है|
आदमी होंठ चबाए तो समझ आता है,
आदमी छाल चबाने लगे, ये तो हद है |
आप दीवार गिराने के लिए आए थे,
आप दीवार उठाने लगे, ये तो हद है|
ख़ामोशी शोर से सुनते थे कि घबराती है,
ख़ामोशी शोर मचाने लगे, ये तो हद है|
आदमी होंठ चबाए तो समझ आता है,
आदमी छाल चबाने लगे, ये तो हद है |
जिस्म पहरावों में छुप जाते थे, पहरावों में-
जिस्म नंगे नज़र आने लगे, ये तो हद है|
जिस्म नंगे नज़र आने लगे, ये तो हद है|
लोग तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के सलीक़े सीखे,
लोग रोते हुए गाने लगे, ये तो हद है|
लोग रोते हुए गाने लगे, ये तो हद है|
शायर परिचय- दुष्यंत कुमार
इसे भी पढ़ें- जोगी जी रुको इक बात सुनो घर छोड़

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
please do not enter any spam link in the comment box.