21 अगस्त 2020

dushyant kumar gazal lafz ehsas se chhane lage hai

लफ़्ज़ एहसास-से छाने लगे, ये तो हद है

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लफ़्ज़ एहसास-से छाने लगे, ये तो हद है,
लफ़्ज़ माने भी छुपाने लगे, ये तो हद है|

आप दीवार गिराने के लिए आए थे,
आप दीवार उठाने लगे, ये तो हद है|


ख़ामोशी शोर से सुनते थे कि घबराती है,
ख़ामोशी शोर मचाने लगे, ये तो हद है|


आदमी होंठ चबाए तो समझ आता है,
आदमी छाल चबाने लगे, ये तो हद है |

जिस्म पहरावों में छुप जाते थे, पहरावों में-
जिस्म नंगे नज़र आने लगे, ये तो हद है|

लोग तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के सलीक़े सीखे,
लोग रोते हुए गाने लगे, ये तो हद है|



शायर परिचय-                दुष्यंत कुमार

dushyant kumar gazal lafz ehsas se chhane lage hai


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7 सितम्बर 1933 को राजपुरा नवादा गाँव उत्तर प्रदेश में पैदा हुए दुष्यंत कुमार की कोशिश हिंदी और उर्दू भाषाओँ को ज्यादा से ज्यादा करीब लाने की थी| ग़ज़ल को हिंदी भाषा में उतरने का श्रेय उन्हीं को जाता है| दुष्यंत की ग़ज़लों में आमजन की पीड़ा के साथ-साथ प्रेम भी मिलता है| उन्होंने साहित्य की गारिमा से कभी समझौता नही किया| 30 दिसंबर 1975 को अल्पायु में ही उनका देहांत हो गया|


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