02 अगस्त 2020

INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH

इन्होनें किया दुनिया को कोरोना संकट से आगाह 


Estimated reading time: 4 minutes, 59 seconds.


INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
dr.li wenliang

डॉ. ली वेंगलियांग- चेतावनी देने वाले पहले विह्सल ब्लोअर - 


34 साल डॉ. ली वेंगलियांग वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल में नेत्र विशेषज्ञ रहे|चीन में कोरोनावायरस के बारे में लोगों को बताने वाले और सरकार के रवैये के खिलाफ आवाज उठाने वाले वे पहले व्यक्ति थे।
 
31 दिसंबर को उन्होंने लोकप्रिय चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट पर वायरस के बारे में लोगों को चेतावनी दी थी। इस तरह वो कोरोना संकट की चेतावनी देने वाले पहले विह्सल ब्लोअर बने|

इसके बाद पुलिस ने उन्हें एक पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा था। उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया गया था और उन्हें अपना मुंह बंद करने के लिए भी कहा गया था| 

लेकिन इस सबके बावजूद डॉ. ली ने अपना काम जारी रखा। वह मरीजों का इलाज करते रहे और लोगों को भी इस बीमारी के बारे में जागरूक करते रहे।

डॉ. ली ने संक्रमण की गंभीरता को समझा, उन्हें लगा कि सार्स जैसा कोई वायरस, जो इंसानों से इंसानों में फैला था, दोबारा वापस आ गया है। डॉ. ली ने सात ऐसे मामले देखे थे जिनमें सार्स जैसे किसी वायरस के संक्रमण के लक्षण थे। 

31 जनवरी को डॉ. ली ने न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार को इंटरव्यू दिया था। उन्होंने बताया था कि 10 जनवरी को उन्हें खांसी शुरू हुई थी। अपने मरीज का इलाज करने के दौरान डॉ. ली खुद भी संक्रमित हो गए और उनकी मौत हो गई |


INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
dr. zhang wenhong


डॉ. जहांग जियांगपहली डॉ. जिन्होंने वाइरस के बारे में बताया- 


नोवल कोरोनावायरस का पता लगाने वाली 54 साल की डॉ. जहांग जियांग दुनिया की पहली डॉक्टर हैं। वो एक श्वसन तंत्र विशेषज्ञ है|

26 दिसंबर को हॉस्पिटल में रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट की निदेशक डॉ. जहांग जियांग ने चार मरीज़ों में कुछ लक्षण एक जैसे पाए। 

उन्होंने देखा कि मरीज़ों को निमोनिया है और उनके फेफड़ों में एक जैसा संक्रमण दिख रहा है। इन मरीज़ों में तीन तो एक ही परिवार से थे। 

अगले दिन उनके पास तीन और मरीज़ उन्हीं लक्षणों के साथ इलाज कराने के लिए आए। उन्हें यह सब अजीब लगा और इसके बारे में उन्होंने खोजबीन शुरू की। उन्होंने तुरंत अस्पताल के दूसरे विभागों को सूचित किया और बताया कि यह कोई सामान्य बीमारी नहीं है।

27 दिसंबर को डॉ. जहांग ने चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों को बता दिया था कि नई बीमारी कोरोनावायरस के चलते फैल रही है। डॉ. जहांग जियांग की कहानी सामने आने के बाद वह चीनी सोशल मीडिया में हीरो बन गईं। 

वह सार्स वायरस से निपटने वाली टीम में भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि उस समय का प्रशिक्षण उन्हें इस वक्त काम आया।


INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
chen wei

चेन वुई- टर्मिनेटर ऑफ़ इबोला


54 साल की चेन वुई चीन की शीर्ष सैन्य जैव-युद्ध विशेषज्ञ हैं। वह द इंस्टीट्यूट ऑफ बायोइंजीनियरिंग, अकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेस में जीवाणु विज्ञानी हैं। 

चीनी मीडिया के मुताबिक चेन और उनकी टीम ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन विकसित कर रही हैं चेन के मुताबिक अगर परीक्षण सफल होता है, तो यह कोरोनावायरस के खिलाफ पहला टीका होगा। चेन वैज्ञानिक के अलावा पीपुल लिबरेशन आर्मी में मेजर जनरल हैं।

चेन का इससे पहले सार्स और इबोला जैसे वायरस का टीका बनाने में भी योगदान रहा है। उन्होंने 2003 में सार्स से लड़ने के लिए मेडिकल स्प्रे बनाया था। 

2015 में डॉ. चेन को चीनी सरकार ने इबोला वायरस की वैक्सीन विकसित करने के लिए दक्षिण अफ्रीकी देश सिएरा लिओन भेजा था। अफ्रीका में इबोला तेजी से फैल रहा था। ऐसे में डॉ. चेन की रिसर्च ने काफी मदद की थी।

2017 में चीन में वोल्फ वारियर 2 नामक फिल्म में डॉ. चेन का किरदार भी था| फिल्म में उनके किरदार ने लमानला वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाई थी |



INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
neil ferguson


नील फर्गुसन- महामारी विशेषज्ञ -


52 साल के नील फर्गुसन ने ब्रिटिश सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए तो अकेले ब्रिटेन में ही 2 लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। 

नील कोरोनावायरस की गंभीरता को समझ रहे थे और पिछले दो महीने से वायरस पर रिसर्च पेपर लिख रहे थे। नील के रिसर्च पेपर के बाद ब्रिटिश सरकार ने कोविड 19 से लड़ने की अपनी रणनीति बदल दी। इसके बाद ही ब्रिटेन में वर्क फ्रॉम होम शुरू हुआ।

सरकार ने जरूरी कदम उठाते हुए स्कूल्स, मॉल, थिएटर और सार्वजनिक जगहें बंद कर दी हैं। नील ने 16 मार्च को ट्विटर पर लिखा कि उन्हें खांसी और बुखार है। उन्हें कुछ-कुछ कोविड जैसे लक्षण दिख रहे थे। इसके बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है। 

नील इंपीरियर कॉलेज लंदन के सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजिकल एनालिसिस एंड मॉडलिंग ऑफ इंफेक्सियस डिज़ीज़ के निदेशक हैं। 

नील गणितज्ञ भी हैं। उन्होंने सरकार को अपने अनुमान के मुताबिक चेतावनी दी है कि अगर सावधानियां नहीं रखी गईं, तो मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है।



INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
ralph baric

राल्फ बेरिक- जिन्होंने सबसे पहले कोरोना को जांचा- 


राल्फ बेरिक, बैरिक लैब, यूनिवर्सिटी ऑफ़ नार्थ कैरोलीना, अमेरिका में शोधकर्ता हैं| 6 फ़रवरी 2020 को राल्फ बेरिक की प्रयोगशाला में कई सारे प्लास्टिक पाउच, 500 माइक्रोलीटर वाइल, सील्ड प्लास्टिक कंटेनर और ड्राई आइस से पैक नावेल करोना वाइरस लाया गया|

दुनिया की किसी भी प्रयोगशाला में प्रयोग के लिए पहली बार यह वायरस लाया गया था| यूनिवर्सिटी ऑफ़ नार्थ कैरोलीना की बैरिक लैब में डॉ. राल्फ अपनी टीम के साथ वायरस को टेस्ट करने के लिए तैयार थे|

डॉ. राल्फ उन चंद शोधकर्ताओं में शामिल हैं, जिनकी कोरोना वायरस में विशेषज्ञता है| इससे पहले वो जीका, इबोला पर भी शौध कर चुके हैं|

राल्फ कहते हैं कि उन्होंने  30 साल पहले शोधकार्य शुरू किया था| तब कोरोना वायरस को सामान्य सर्दी-खांसी से ज्यादा कुछ नहीं समझा जाता था| 

2003 में सार्स और फिर 2012 में सामने आये कोरोना वायरस मर्स ने जब संक्रमण फैलाया था, तब इसकी भयावहता का पता चला अभी आया कोरोना वायरस नया वायरस है| 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

please do not enter any spam link in the comment box.

Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...