16 अगस्त 2020

meer-e-arab ko aai thandi hawa jahan se mera watan wahi hai mera watan wahi hai

 मीर-ए-अरब को आई ठंडी हवा जहाँ से 


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meer-e-arab ko aai thandi hawa jahan se mera watan wahi hai mera watan wahi hai
ALLAMA IQBAL


कवि परिचय-  

महान शायर अल्लामा इकबाल का जन्म पंजाबपाकिस्तान में नवंबर 1877 को हुआ था। इन्तेकाल 21 अप्रैल 1938 में हुआ था। इकबाल की रचनाएं उम्मीदों के साथ जिंदगी में हमेशा नए रास्तों की ईजाद करती रहीं। इनकी शायरी में ज्यादातर लोगों को अपने किसी ना किसी रूप में अपना अक्श दिखाई देता है। उर्दू और फ़ारसी में इनकी शायरी को आधुनिक काल की सर्वश्रेष्ठ शायरी में गिना जाता है।



चिश्ती ने जिस ज़मीं पे पैग़ामे हक़ सुनाया,

नानक ने जिस चमन में वदहत का गीत गाया,

तातारियों ने जिसको अपना वतन बनाया,

जिसने हेजाजियों से दश्ते अरब छुड़ाया,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है|




सारे जहाँ को जिसने इल्मो-हुनर दिया था,

यूनानियों को जिसने हैरान कर दिया था,

मिट्टी को जिसकी हक़ ने ज़र का असर दिया था

तुर्कों का जिसने दामन हीरों से भर दिया था,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है|




टूटे थे जो सितारे फ़ारस के आसमां से,

फिर ताब दे के जिसने चमकाए कहकशां से,

वदहत की लय सुनी थी दुनिया ने जिस मकां से,

मीरे-अरब को आई ठण्डी हवा जहाँ से,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है|



बंदे कलीम जिसके, परबत जहाँ के सीना, 

नूहे-नबी का ठहरा, आकर जहाँ सफ़ीना,

रफ़अत है जिस ज़मीं को, बामे-फलक़ का ज़ीना,

जन्नत की ज़िन्दगी है, जिसकी फ़िज़ा में जीना,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है|




गौतम का जो वतन है, जापान का हरम है,

ईसा के आशिक़ों को मिस्ले-यरूशलम है,

मदफ़ून जिस ज़मीं में इस्लाम का हरम है,

हर फूल जिस चमन का, फिरदौस है, इरम है,

मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है|


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