ONE NATION ONE RATION CARD
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्च 2021 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ' एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' प्रणाली के राष्ट्रीय रोलआउट की घोषणा की । वित्त मंत्री के अनुसार, यह प्रणाली प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से पीडीएस लाभों का उपयोग करने में सक्षम बनाएगी।
वर्तमान प्रणाली में, एक राशन कार्डधारक उसी एफपीएस (Fair price shop) से खाद्यान्न खरीद सकता है जिस इलाके में वह रहता है। हालाँकि, यह 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' प्रणाली के राष्ट्रीय स्तर पर चालू हो जाने के बाद बदल जाएगा। वह देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न प्राप्त कर पायेगा|
देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली(PDS) का इतिहास-
देश में लोगों को विभिन्न आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को उचित कीमतों पर व उचित समय पर उपलब्ध करवाने तथा उनके पोषण के उचित स्तर को बनाये रखने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System- PDS) को एक प्राथमिक उपकरण (Intrument) के रूप में प्रयोग किया गया है।
भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का इतिहास स्वतंत्रता के पहले द्वितीय विश्व युद्ध के प्रारंभ (सन् 1939) से माना जाता है। उस समय औपनिवेशिक सरकार ने गरीबों को कुछ चुने हुए शहरों में सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया था। इसके बाद समय-समय पर जरुरतों के मुताबिक पीडीएस का स्वरूप बदलता रहा।
आज भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा समवर्ती सूची के अंतर्गत सामूहिक रूप से संचालित किया जाता है।
इस संदर्भ में केन्द्र सरकार की भूमिका आवश्यक वस्तुओं का अधिग्रहण (Procurement), उनका भंडारण तथा उन्हें बड़ी मात्रा में गंतव्य स्थान तक पहुँचाने की होती है, जबकि राज्य सरकारों की भूमिका गंतव्य स्थान से वस्तुओं को उठाने एवं उन्हें उचित मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops- FPSs) तक पहुँचाने तथा उपभोक्ताओं तक वितरित करने की होती है।
वन नेशन, वन राशन कार्ड सिस्टम कब से काम कर रहा है?
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम लगभग दो साल पहले शुरू हुआ था जब सरकार ने देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लिए अप्रैल 2018 में एकीकृत प्रबंधन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (IM-PDS) नामक एक योजना शुरू की थी।
वन नेशन, वन राशन कार्ड प्रणाली क्या है?
वन नेशन वन राशन कार्ड योजना मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह है| एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर भी आप अपने पुराने राशन कार्ड का ही इस्तेमाल कर सकते हैं| इसी राशन कार्ड से आप दूसरे राज्य से भी सस्ती कीमत पर सरकारी राशन दुकान से अनाज खरीद सकते हैं|
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत, लगभग 81 करोड़ लोग सब्सिडी वाले खाद्यान्न खरीदने के हकदार हैं – जिनमे चावल 3 रुपये किलो, गेहूँ 2 रुपये किलो, और मोटे अनाज 1 रुपये किलो के हिसाब से निर्धारित है|
यह कैसे काम करेगा ?
मान लीजिए कि अजीत यादव उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का निवासी है और उसके पास उत्तर प्रदेश का राशन कार्ड है| जॉब के सिलसिले में अजीत यादव दिल्ली में रहते हैं तो वे अपने उत्तर प्रदेश वाले राशन कार्ड की मदद से ही दिल्ली या किसी और राज्य में भी उचित मूल्य पर सरकारी राशन खरीद सकेंगे|
इसके तहत केंद्र सरकार राज्यों को 10 अंकों का राशन कार्ड नंबर जारी करेगी| इस नंबर में पहले दो अंक राज्य कोड होंगे और अगले दो अंक राशन कार्ड नंबर होंगे| इसके अतिरिक्त राशन कार्ड नंबर के साथ एक और दो अंकों के सेट को जोड़ा जाएगा| इसे देश भर में लागू करने के लिए राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी की सुविधा होगी|
एक देश, एक राशन कार्ड का महत्व-
भारत सरकार की ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ (One Nation, One Ration Card) योजना कई राज्यों में कार्य कर रही| एक राशन कार्ड सार्वजनिक वितरण प्रणाली को एक नया आयाम प्रदान करेगी।
खाद्य, सार्वजनिक वितरण व उपभोक्ता मंत्रालय की ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ योजना के तहत किसी भी राज्य का व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान से राशन ले सकता है।
गौरतलब है कि सभी राशन कार्डों को आधार कार्ड से जोड़ने और पॉइंट ऑफ सेल (Point of Sale PoS) मशीन के माध्यम से खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था अपने अंतिम चरण में है|
इस नई व्यवस्था के कारण लोग देशभर में एक ही राशन कार्ड का इस्तेमाल कर सकेंगे। दरअसल, सरकार की तैयारी है कि आधार कार्ड की तर्ज पर हर एक राशन कार्ड को एक विशिष्ट (यूनिक) पहचान नंबर दिया जाएगा। इससे फर्जी राशन कार्ड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी, जिसमें एक ऑनलाइन एकीकृत (इंटीगेटेड) सिस्टम बनाया जाएगा। इस सिस्टम में राशन कार्ड का डेटा स्टोर होगा। इसके बन जाने के बाद अगर देश में कहीं भी कोई फर्जी राशन कार्ड बनवाने की कोशिश करेगा, तो इस सिस्टम के जरिये से पता चल जाएगा। इसके बाद अगर कोई नया राशन कार्ड बनवाने जाता है, तो वह ऐसा कर नहीं पाएगा।
इस ऑनलाइन सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि कोई भी लाभार्थी देश के किसी हिस्से में और किसी भी राशन की दुकान पर सब्सिडी वाला अनाज ले सकेंगे। केंद्र सरकार की स्कीम 'वन नेशन वन राशन कार्ड' का फायदा अब 1 अगस्त से देशभर में 67 करोड़ लाभार्थियों को मिल सकेगा|
'वन नेशन वन राशन कार्ड' स्कीम में 1 अगस्त से अब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के अलावा मणिपुर. नागालैंड और उत्तराखंड भी राशन कार्ड की नेशनल पोर्टेबिलिटी से जुड़ गए|
केंद्रीय उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक,01 अगस्त, 2020 से 'वन नेशन वन राशन कार्ड' स्कीम से कुल 24 राज्य/संघ शासित प्रदेश (UT) जुड़ गए हैं जिससे देशभर में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के करीब 65 करोड़ लाभार्थी इसका फायदा उठा पाएंगे |
वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम से जुड़े राज्य -
01 एक अगस्त, 2020 से अब 'वन नेशन वन राशन कार्ड' के तहत कुल 24 राज्य/संघ शासित प्रदेश आ गए हैं| जिनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड हैं|
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एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड प्रणाली के बारे में हमने जाना-
1) पहल के तहत, पात्र लाभार्थी एक ही राशन कार्ड का उपयोग करके देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत अपने पात्र खाद्यान्न का लाभ उठा सकेंगे।
2) सरकार देश भर में एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड ’योजना को 1 जून 2020 से लागू करना चाहती थी।
3) राशन कार्ड के लिए एक मानक प्रारूप विभिन्न राज्यों द्वारा उपयोग किए गए प्रारूप को ध्यान में रखकर और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श के बाद तैयार किया गया है।
4) राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के लिए, राज्य सरकारों को द्वि-भाषी प्रारूप में राशन कार्ड जारी करने के लिए कहा गया है, जिसमें स्थानीय भाषा के अलावा, अन्य भाषा हिंदी या अंग्रेजी हो सकती है।
6) आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गोवा, झारखंड और त्रिपुरा। बिहार, यूपी, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दमन और दीव को 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है ।
7) इससे पात्र लाभार्थी, रियायती दर पर खाद्यान्न खरीदने के लिए सक्षम हो जाएगा, जिसे चावल ₹3 प्रति किलो, गेहूं ₹ 1 रुपया प्रति किलो और मोटा अनाज 2 प्रति किलो, देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से प्राप्त होगा।
8) वर्तमान प्रणाली में, एक राशन कार्डधारक केवल उसी एफपीएस से खाद्यान्न खरीद सकता है जिसमें वह रहता है|
9) IMPDS पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अंतर-राज्य राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी के माध्यम से किए गए लेनदेन की संख्या 15 मई तक केवल 274 है|
10) सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( IM-PDS ) पोर्टल का एकीकृत प्रबंधन राशन कार्डों की अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी के लिए तकनीकी मंच प्रदान करता है।

Acchi jaankari👍🏼
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सर
जवाब देंहटाएंऐसी महत्वपूर्ण जनकारी हेतु
धन्यवाद् सर
जवाब देंहटाएंऐसी अच्छी जानकारी हेतु