21 जुलाई 2020

KASHMIRI SAFFRON GOT GI TAG IN HINDI

KASHMIRI SAFFRON GOT GI TAG


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KASHMIRI SAFFRON

आपने सुना होगा कि मथुरा के पेडे, आगरा का पेठा, दार्जिलिंग चाय, बनारस और कांजीवरम की साड़ी भारत में इन्ही नामों से बहुत प्रसिद्द है और हर दुकानदार इन्ही नामों के साथ अपने उत्पादों को बेचना चाहता है| इसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग कहा जाता हैइसी क्रम में कश्मीरी केसर को भी GI TAG मिल गया है| भारत में अब तक लगभग 361 प्रोडक्ट्स को GI टैग मिल चुका है|

भौगोलिक संकेत (GI) टैग क्या होता है? (What is Meaning of Geographical Indications Tag)



भौगोलिक संकेत एक नाम या निशान होता है जो किसी निश्चित क्षेत्र विशेष के उत्पाद, कृषि, प्राकृतिक और निर्मित उत्पाद (मिठाई, हस्तशिल्प और औद्योगिक सामान) को दिया जाने वाला एक स्पेशल टैग है| यह स्पेशल क्वालिटी और पहचान वाले उत्पाद जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले को दिया जाता है|

जिस भी किसी क्षेत्र को यह टैग दिया जाता है उसके अलावा किसी और को इस नाम को इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती है|


इस टैग को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन ऑफ़ गुड्स (रजिस्ट्रेशन और प्रोटेक्शन) एक्ट,1999  (Geographical Indications Act) के तहत  ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री के द्वारा दिया जाता है जो कि उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के द्वारा दिया जाता हैकश्मीरी केसर को GI टैग, ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री ने डायरेक्टरेट ऑफ़ एग्रीकल्चर,जम्मू कश्मीर सरकार को दिया है|
ध्यान रहे कि GI टैग किसी उत्पाद को जीवन भर के लिए नहीं दिया जाता है| नियम के अनुसार यह 10 वर्ष के लिए दिया जाता है| इस अवधि के बाद इसे प्राप्त करने के लिए फिर से अप्लाई करना पड़ता है|

कश्मीरी केसर को GI टैग क्यों लेना पड़ा? (Why Kashmiri saffron has to take GI Tag)


दरअसल, दुनिया में सबसे अधिक केसर उत्पादन करने वाला देश ईरान है जो कि जो हर साल 30,000 हेक्टेयर भूमि पर 300 टन से अधिक केसर की खेती करता हैइसके अलावा स्पेन, अफग़ानिस्तान ख़राब क्वालिटी का केसर कम कीमत में बेचते हैं| जिसके कारण कश्मीरी केसर की कीमत लगभग 50% तक गिर गई हैं|

चूंकि कश्मीरी केसर पूरी दुनिया में सबसे अधिक उच्च क्वालिटी का माना जाता है| कश्मीरी केसर अन्य देशों के केसर से अलग हैं कश्मीरी केसर जैसे उच्च सुगंध, गहरे रंग, लंबे और मोटे धागे (कलंक) के कारण अधिक औषधीय मूल्य वाले गुणों में श्रेष्ठ माना जाता है|


लेकिन ईरान और अन्य देशों के निम्न क्वालिटी के केसर के कारण कश्मीरी केसर उत्पादकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है|इसलिए कश्मीरी केसर उत्पादक चाहते है कि उनके केसर को दुनिया में अलग पहचान मिले जिससे कि उन्हें अच्छी क्वालिटी के केसर के लिए ठीक दाम मिल सकें|

कश्मीरी केसर को GI टैग मिलने के फायदे (Benefits of GI Tag to Kashmir Saffron)


कश्मीरी केसर को GI टैग मिलने के बाद यहाँ के उत्पादक अपने पैकेजिंग में यह लिख सकते हैं कि यह कश्मीरी उत्पाद है अर्थात यह उच्च क्वालिटी का है और इसलिए लोगों को यह विश्वास हो जायेगा कि इस उत्पाद के लिए ज्यादा कीमत देना भी गलत नहीं है|

इस प्रकार GI टैग मिलने से कश्मीरी केसर की बाजार में अलग पहचान बनेगी, बिक्री बढ़ेगी और इसका उत्पादन करना भी फायदेमंद होगा|

कश्मीरी केसर कहाँ पैदा होता है? (Where Kashmir Saffron Produced?)



कश्मीर में मुख्यतः 3 तरह का केसर पैदा किया जाता है, गुच्छी केसर, लच्छा केसर और मोंगरा केसर| इसका उत्पादन कश्मीर में लगभग पहली शताब्दी पू से पैदा किया जा रहा है| कश्मीरी केसर का उत्पादन समुद्र तल से औसतन 1600 मीटर से 1800 मीटर की ऊँचाई पर उगाया जाने वाला एकमात्र केसर हैयह मुख्य रूप से पुलवामा, बडगांव, किस्तवार और श्रीनगर में पैदा किया जाता है

18 जुलाई 2020

BIOGRAPHY OF C V RAMAN IN HINDI

BIOGRAPHY OF C V RAMAN IN HINDI


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Chandrasekhara Venkata Raman
सीवी रमन आधुनिक भारत के एक महान वैज्ञानिक थे, जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपना अति महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी अनूठी खोजों से भारत को विज्ञान की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान दिलवाई।

‘रमन प्रभाव’ (Raman Effect) सीवी रमन की अद्भुत और महत्वपूर्ण खोजों में से एक थी, जिसके लिए उन्हें साल 1930 में नोबेल पुरस्कार* से भी नवाजा गया था।

वहीं अगर सीवी रमन ने यह खोज नहीं की होती तो शायद हमें कभी यह पता नहीं चल पाता कि ‘समुद्र के पानी का रंग नीला क्यों होता है, और इस खोज के माध्यम से ही लाइट के नेचर और बिहेवियर के बारे में भी यह पता चलता हैं कि जब कोई लाइट किसी भी पारदर्शी माध्यम जैसे कि सॉलिड, लिक्वड या गैस से होकर गुजरती है तो उसके नेचर और बिहेवियर में बदलाव आता है।

वास्तव में उनकी इन खोजों ने विज्ञान के क्षेत्र में भारत को एक नई दिशा प्रदान की, जिससे देश के विकास को भी बढ़ावा मिला। इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि सीवी रमन को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न और लेनिन शांति पुरस्कार समेत विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण कामों के लिए तमाम पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

* 
कैसे हुई नोबेल पुरुस्कार कि शुरुवात कैसे हुई ? और किन-किन भारतीयों को ये पुरस्कार मिला है जानने के लिए क्लिक करें |


आइए जानते हैं भारत के महान वैज्ञानिक सीवी रमन (C V Raman) के बारे में –



आधुनिक भारत के महान वैज्ञानिक ‘भारत रत्न’ सी वी रमन – C V Raman Biography in Hindi
C. V. Raman

सीवी रमन की संक्षिप्त जीवन परिचय एक नजर में – CV Raman Information
पूरा नाम(Name)- सर चंद्रशेखर वेंकट रमन (सी.वी. रमन)
जन्म (Birth)- 7 नवंबर, 1888
जन्म स्थान (Birthplace)- तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
पिता का नाम(Father Name)- चंद्रशेखर अय्यर
माता का नाम (Mother Name)- पार्वती अम्मल
पत्नी का नाम(Wife Name)- त्रिलोकसुंदरी
कार्य (Known for) रमन प्रभाव (Raman effect) की खोज,

भौतिक वैज्ञानिक
शिक्षा (Education) एम.एस.सी
मृत्यु (CV Raman Death)- 21 नवम्बर, 1970, बैंगलोर
उपलब्धियां (Awards)-  प्रकाश के प्रकीर्णन और रमन प्रभाव की खोज के लिए
नोबेल पुरस्कार, ‘भारत रत्न’, लेनिन पुरस्कार’
नागरिकता (Nationality) भारतीय


सीवी रमन का जन्म और प्रारंभिक जीवन – CV Raman Life History



दक्षिण भारत के तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली शहर में 7 नवम्बर 1888 को, भारत के महान वैज्ञानिक सीवी रमन एक साधारण से ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। वह चंद्रशेखर अय्यर और पार्वती अम्मल की दूसरी संतान थे। उनके पिता चंद्रशेखर अय्यर ए वी नरसिम्हाराव महाविद्यालय, विशाखापत्तनम, (आधुनिक आंध्र प्रदेश) में फिजिक्स और गणित के एक प्रख्यात प्रवक्ता थे।

वहीं उनके पिता को किताबों से बेहद लगाव था, उनके पिता को पढ़ना इतना पसंद था कि उन्होंने अपने घर में ही एक छोटी सी लाइब्रेरी भी बना ली थी, हालांकि आगे चलतक इसका फायदा सीवी रमन को मिला, इसके साथ ही वह पढ़ाई-लिखाई के माहौल में पले और बढ़े हुए, वहीं सीवी रमन ने छोटी उम्र से ही अंग्रेजी साहित्य और विज्ञान की किताबों से दोस्ती कर ली थी, और फिर बाद में उन्होंने विज्ञान और रिसर्च के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए और भारत को विज्ञान के क्षेत्र में अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।


सीवी रमन की पढ़ाई – लिखाई एवं छात्र जीवन – CV Raman Education



सीवी रमन बेहद तेज बुद्धि के एक होनहार और प्रतिभाशील छात्र थे, जिनकी पढ़ाई में शुरुआत से ही गहरी रुचि थी, वहीं उनकी किसी चीज को सीखने और समझने की क्षमता भी बेहद तेज थी, यही वजह है कि उन्होंने महज 11 साल की उम्र में विशाखापत्तनम के सेंट अलोय्सिअस एंग्लो-इंडियन हाई स्कूल से अपनी 10वीं की परीक्षा पास की थी, जबकि 13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी कर ली थी।

सीवी रमन शुरुआत से ही पढ़ने में काफी अच्छे थे, इसलिए उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई स्कॉलरशिप के साथ पूरी की। इसके बाद उन्होंने साल 1902 में प्रेसीडेंसी कॉलेज मद्रास (चेन्नई) में एडमिशन लिया था, और वहां से साल 1904 में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री प्रथम श्रेणी के साथ हासिल की, इसके साथ ही सीवी रमन ने इस दौरान पहली बार फिजिक्स में ‘गोल्ड मेडल’ भी प्राप्त किया था।

इसके बाद उन्होंने साल 1907 में मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए मद्रास यूनिवर्सिटी में ही एमएससी में एडमिशन लिया। आपको बता दें कि इस दौरान उन्होंने फिजिक्स को मुख्य विषय के तौर पर चुना, हालांकि वे इस दौरान क्लास में कम ही आते थे, क्योंकि उन्हें थ्योरी नॉलेज से ज्यादा लैब में नए-नए प्रयोग करना पसंद था, उन्होंने अपनी एमएससी की पढ़ाई के दौरान ही ध्वनिकी और प्रकाशिकी (Acoustics and Optics) के क्षेत्र में रिसर्च करनी शुरु कर दी थी।

वहीं उनके प्रोफेसर आर एस जोन्स भी उनकी प्रतिभा को देखकर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने सीवी रमन को उनकी रिसर्च को ‘शोध पेपर’ के रुप में पब्लिश करवाने की सलाह दी, जिसके बाद नवंबर, साल 1906 में लंदन से प्रकाशित होने वाली ‘फ़िलॉसफ़िकल पत्रिका’ (Philosophical Magazine) में उनका शोध प्रकाश का ‘आणविक विकिरण‘ को प्रकाशित किया गया। आपको बता दें कि उस दौरान वह महज18 साल के थे।


सीवी रमन ने सहायक लेखपाल के तौर पर की अपने करियर की शुरुआत – CV Raman Career
मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद सीवी रमन की अद्भुत प्रतिभा को देखते हुए कुछ प्रोफेसर्स ने उनके पिता से हायर स्टडीज के लिए उन्हें इंग्लैंड भेजने की भी सलाह दी, लेकिन सीवी रमन का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने की वजह से वह आगे की पढ़ाई के लिए विदेश तो नहीं जा सके।



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लेकिन इसी दौरान ब्रिटिश सरकार की तरफ से एक परीक्षा आयोजित करवाई गई थी, जिसमें सीवी रमन ने भी हिस्सा लिया था और वह इस परीक्षा में सफल हुए और इसके बाद उन्हें सरकार के वित्तीय विभाग में नौकरी करने करने का मौका मिला, फिर कोलकाता में उन्होंने सहायक लेखापाल के तौर पर अपनी पहली सरकारी नौकरी ज्वाइन की।

हालांकि इस दौरान भी उन्होंने एक्सपेरिंमेंट और रिसर्च करना नहीं छोड़ा, वे कोलकाता में ‘इण्डियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस’ लैब में अपनी खोज करते रहते थे, नौकरी के दौरान जब भी उन्हें समय मिलता था, वह अपनी खोज में लग जाते थे।

सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर कलकत्ता यूनिवर्सिटी में बने प्रोफेसर

हालांकि, विज्ञान के क्षेत्र में कुछ करने के उद्देश्य से उन्होंने साल 1917 में ही उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर ‘इण्डियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस’ लैब में मानद सचिव के पद पर ज्वाइन कर लिया था। वहीं इसी साल उन्हें कलकत्ता यूनिवर्सिटी से भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर का भी जॉब ऑफर मिला था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया और वे भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर के तौर पर कलकत्ता यूनिवर्सिटी में अपनी सेवाएं देने लगे, और अब वे अपनी रुचि के क्षेत्र में काम करके बेहद खुश भी थे।


इसके बाद साल 1924 में सीवी रमन को ‘ऑपटिक्स’ के क्षेत्र में उनके सराहनीय योगदान के लिए लंदन की ‘रॉयल सोसायटी’ की सदस्य बनाया गया।


‘रमन इफ़ेक्ट’ की खोज – Raman scattering or the Raman effect



‘रमन प्रभाव’ की खोज उनकी वो खोज थी, जिसने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान दिलवाई। उन्होंने 28 फरवरी, साल 1928 को कड़ी मेहनत और काफी प्रयास के बाद ‘रमन प्रभाव’ की खोज की।

वहीं उन्होंने अगले ही दिन इसकी घोषणा कर दी थी। उनकी इस खोज से न सिर्फ इस बात का पता चला कि समुद्र का जल नीले रंग का क्यों होता है, बल्कि यह भी पता चला कि जब भी कोई लाइट किसी पारदर्शी माध्यम से होकर गुजरती है तो उसके नेचर और बिहेवियेर में चेंज आ जाता है।

प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ ने इसे प्रकाशित किया। वहीं उनकी इस खोज को ‘रमन इफेक्ट’ (Raman effect) या ‘रमन प्रभाव’ का नाम दिया गया। इसके बाद वह एक महान वैज्ञानिक के तौर पर पहचाने जाने लगे और उनकी ख्याति पूरी दुनिया में फैल गई।

इसके बाद मार्च, साल 1928 में सीवी रमन ने गलोर स्थित साउथ इंडियन साइन्स एसोसिएशन में अपनी इस खोज पर स्पीच भी दी। इसके बाद दुनिया की कई लैब में उनकी इस खोज पर अन्वेषण होने लगे।

आपको बता दें कि उनकी इस खोज के द्धारा लेजर की खोज से अब रसायन उद्योग, और प्रदूषण की समस्या आदि में रसायन की मात्रा पता लगाने में भी मद्द मिलती है। सीवी रमन एक विज्ञान के क्षेत्र में वाकई में यह एक अतुलनीय खोज थी।

वहीं उन्हें इस खोज के लिए साल 1930 में भारत के प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘नोबेल पुरस्कार’ से भी नवाजा गया। वहीं सीवी रमन की इस महान खोज के लिए भारत सरकार ने 28 फरवरी के दिन को हर साल ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के रुप में मनाने की भी घोषणा की।



इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस (आईआईएस) से रिटायरमेंट –



बेंगलौंर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में सीवी रमन को साल 1934 में डायरेक्टर बनाया गया था। हालांकि इस दौरान भी वे स्टिल की स्पेक्ट्रम प्रकृति, हीरे की संरचना, स्टिल डाइनेमिक्स के बुनियादी मुद्दे और गुणों समेत कई रंगदीप्त पदार्थो के प्रकाशीय आचरण पर खोज करते रहे।

इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि सीवी रमन को वाध्य यंत्र और संगीत में भी काफी रुचि थी, इसी वजह से उन्होंने तबले और मृदंगम के संनादी (हार्मोनिक) की प्रकृति की भी खोज की थी। इसके बाद साल 1948 में सी.वी रमन आईआईएस से रिटायर्ड हो गए थे।

रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट की स्थापना – Raman Research Institute

साल 1948 में सी.वी रमन ने वैज्ञानिक सोच और अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट, बैंग्लोर (Raman Research Institute, Bangluru) की स्थापना की थी।


सीवी रमन का पारिवारिक जीवन – 


सीवी रमन ने लोकसुंदरी नाम की कन्या को वीणा बजाते हुए सुना था, जिसे सुनकर वह मंत्रमुग्ध हो गए थे और इसके बाद उन्होंने लोकसुंदरी से विवाह करने की इच्छा जताई थी, वहीं इसके बाद परिवार वालों की रजामंदी से वे 6 मई साल 1907 को लोकसुंदरी अम्मल के साथ शादी के बंधन में बंध गए।

जिनसे उन्हें चंद्रशेखर और राधाकृष्णन नाम के दो पुत्रों की प्राप्ति हुई। वहीं आगे चलकर उनका बेटा राधाकृष्णन एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री के रुप में भी मशहूर हुआ था।

वैज्ञानिक सीवी रमन की महान उपलब्धियां – CV Raman Awards
भारत के महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन को विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए कई पुरुस्कारों से भी नवाजा गया, जिनके बारे में हम आपको नीचे बता रहे हैं-

वैज्ञानिक सीवी रमन को साल 1924 में लन्दन की ‘रॉयल सोसाइटी’ का सदस्य बनाया गया।
सीवी रमन ने 28 फ़रवरी 1928 को ‘रमन प्रभाव’ की खोज की थी, इसलिए इस दिन को भारत सरकार ने हर साल ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के रूप में बनाने की घोषणा की थी।
सीवी रमन ने भारतीय विज्ञान कांग्रेस की 16 वें सत्र की अध्यक्षता साल 1929 में की।

सीवी रमन को साल 1929 में उनके अलग-अलग प्रयोगों और खोजों के कई यूनिवर्सिटी से मानद उपाधि, नाइटहुड के साथ बहुत सारे पदक भी दिए गए।
साल 1930 में प्रकाश के प्रकीर्णन और ‘रमन प्रभाव’ जैसी महत्वपूर्ण खोज के लिए उन्हें भारत के उत्कृष्ठ और प्रतिष्ठित सम्मान नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। आपको बता दें कि वे इस पुरस्कार को पाने वाले पहले एशियाई भी थे।
विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए साल 1954 में उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया।
साल 1957 में सीवी रमन को लेनिन शांति पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।


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सीवी रमन का निधन – CV Raman Death



महान वैज्ञानिक सीवी रमन ने अपनी जिंदगी में ज्यादातर टाइम लैब में रहकर, नई-नई खोज और प्रयोग करने में व्यतीत किया। वह 82 साल की उम्र में भी रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट, बैंग्लोर में अपनी लैब में काम कर रहे थे, तभी अचानक उनको हार्ट अटैक आया, जिसकी वजह से वह गिर पड़ें और तभी 21 नवंबर साल 1970 को उन्होंने अपनी जिंदगी की आखिरी सांस ली।

भारत को विज्ञान के क्षेत्र में अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाने वाले वैज्ञानिक सी.वी. रमन भले ही आज हमारे बीच मौजूद नहीं हैं लेकिन उनकी महत्पूर्ण खोजें हमेशा हमारे बीच जिंदा रहेंगी, आज भी उनकी अद्भुत खोजों का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जाता है।

उन्होंने जिस तरह कठोर प्रयास और कड़ी के दम पर ‘रमन प्रभाव’ जैसी खोज के माध्यम से विज्ञान के क्षेत्र में भारत को गौरव हासिल करवाया, वाकई हम सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है, वहीं सीवी रमन का व्यक्तित्व आने वाली कई पीढि़यों को ऐसे ही प्रेरित करता रहेगा।

ज्ञानी पंडित की टीम की तरफ से भारत के विज्ञान शिरोमणि, महान कर्मयोगी वैज्ञानिक सी.वी. रमन को हमारा शत-शत नमन। जय हिन्द, जय भारत |

17 जुलाई 2020

INDIAN MOBILE COMPANIES IN HINDI

INDIAN MOBILE COMPANIES IN HINDI


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देशों की सीमाओं पर भारत और चीन के बीच हालिया तनाव के कारण, कई भारतीय नागरिकों ने चीनी के साथ-साथ अन्य देशों के उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। वे उन चीजों का उपयोग करने के इच्छुक हैं जिससे भारतीय अर्थ व्यवस्था को सहयोग और मजबूती प्राप्त हो सके। लोग अब उन भारतीय मोबाइल फोन निर्माता कंपनी (Indian mobile phone manufacturer Companies) और ब्रांडों का उपयोग करने की ओर बढ़ रहे हैं जिनका निर्माण भारत में हुआ हैं। आज के इस लेख में हम उन्हीं भारतीय मोबाइल कंपनियों के बारे में जानेंगे-


1. MICROMAX



माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स भारत में सबसे बड़ी फोन निर्माता कंपनी है। यह कम लागत और सस्ती हैंडसेट बनाती है और यह कंपनी एलईडी टीवी और टैबलेट भी निर्मित किए करती हैं। कंपनी का मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में स्थापित है। उन्होंने 2008 में मोबाइल फोन बेचना शुरू किया। मोहित शर्मा, देवास और रोहित पटेल कंपनी के सह-संस्थापक हैं। Micromax के कुछ प्रसिद्ध मॉडल Canvas Infinity और Infinity N11 हैं।


2. KARBONN MOBILES



Karbonn Mobiles मोबाइल फोन एक्सेसरीज, स्मार्टफोन, टैबलेट और बनाता है। मोबाइल फोन कंपनी बेंगलुरु से दिल्ली स्थित जैन ग्रुप और यूटीएल ग्रुप के बीच एक संयुक्त उद्यम है। इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थापित है। यह वर्तमान में बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और मध्य पूर्व और यूरोप जैसे देशों में भी फैला हुआ है। Karbonn की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी, जो स्मार्टफ़ोन को जनता के लिए सुलभ बनाने की कोशिश कर रहा था। प्रसिद्ध कार्बन मॉडल में टाइटेनियम एस 9 प्लस, कार्बन वी 1, K9 स्मार्ट प्लस शामिल हैं।


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3. LAVA INTERNATIONAL



लावा इंटरनेशनल ने वर्ष 2009 में भारत में अपना मैदान स्थापित किया। इसके अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हरिओम राय ने लोगों को सशक्त बनाने के लिए शुरू किया। CMR रिटेल सेंटीमेंट इंडेक्स 2018 में लावा को 'सबसे भरोसेमंद ब्रांड' के रूप में स्थान दिया गया था। यह एकमात्र कंपनी भी है जिसका भारत में पूरा डिजाइन और विनिर्माण है।


4. XOLO



स्मार्टफोनभारतीय मोबाइल्स सूची में अगला नाम Xolo स्मार्टफोन का है। XOLO लावा इंटरनेशनल की सहायक कंपनी है। इसका मुख्यालय नोएडा में स्थित है। XOLO इंटेल प्रोसेसर वाला स्मार्टफोन लॉन्च करने वाली पहली कंपनी बन गई XOLO X900 और XOLO Q सीरीज़ भी बहुत प्रसिद्ध हैं।



5. YU TELEVENTURES



एक भारतीय ब्रांड है और Cyanogen Inc और Micromax Informatics Limited की सहायक कंपनी है। YU का मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा में स्थापित है। माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राहुल शर्मा, YU में 99% नियंत्रण हिस्सेदारी के मालिक हैं। YU Televentures के कुछ अद्भुत मॉडल YU Yunique 2, YU Yureka 2 और YU Ace हैं।


6. INTEX TECHNOLOGIES



कंपनी की स्थापना 1996 में नई दिल्ली में नरेंद्र बंसल द्वारा की गई थी। वर्तमान में, नरेंद्र बंसल के बेटे केशव बंसल कंपनी के सक्रिय निदेशक हैं। इंटेक्स टेक्नोलॉजीज, एक भारतीय स्मार्टफोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और सहायक उपकरण निर्माता कंपनी है इसके साथ ही ये एमपी 3 प्लेयर, डीवीडी प्लेयर, हेडफ़ोन, होम थिएटर सिस्टम और स्पीकर, एलसीडी, टीवी, इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण करती है। इंटेक्स टेक्नोलॉजीज भारत की दूसरी सबसे बड़ी बिक्री वाली मोबाइल फोन कंपनी है|


7. RELIANCE LYF



LYF की स्थापना 2015 में दूरसंचार ऑपरेटर, Jio द्वारा की गई थी। Jio की 4G सेवाओं के साथ निकटता से, ब्रांड के तहत स्मार्टफोन नवंबर 2015 में लॉन्च किए गए थे| जनवरी 2016 में, इसने अपने चार तत्वों, पृथ्वी, ज्वाला (अग्नि), जल और पवन के नाम से 4 जी-सक्षम स्मार्टफोन का पहला सेट लॉन्च किया। मई 2016 में, अंतरराष्ट्रीय बाजार ट्रैकर काउंटरपॉइंट रिसर्च ने बताया कि LYF भारतीय बाजार में पांचवां सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्माता बन गया है, जो वित्त वर्ष 2015-16 की जनवरी-मार्च तिमाही में 7% हिस्सेदारी पर कब्जा कर रहा है। इस तिमाही के दौरान माइक्रोमैक्स और लेनोवो को पीछे छोड़ते हुए सैमसंग के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा एलटीई फोन आपूर्तिकर्ता था। 
मोबाइल हैंडसेट कंपनी है जो भारत में 4G- सक्षम VoLTE स्मार्टफ़ोन बनाती है और पेरेंट Jio के साथ संचालित होती है।


8. ONIDA



एक लोकप्रिय भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता, ओनिडा ने भारत के प्रमुख टेलीविजन निर्माताओं में अपनी एक अलग पहचान बनाई है, और एक घरेलू उपकरण निर्माता के रूप में भी लोकप्रिय है। कंपनी ने दिसंबर 2015 में अपना नवीनतम मोबाइल i4G1 लॉन्च किया| यह फोन 5.00 इंच के डिस्प्ले के साथ आता है जिसका रिज़ॉल्यूशन 720 पिक्सल 1280 पिक्सल है जो कि 294 पिक्सल प्रति इंच की पीपीआई है। और इसके साथ ही सस्ते और बजट में आने वाले मोबाइल फोन भी बनाती आ रही है| 


9. CELKON



सेलकॉन भारत में हैदराबाद में स्थित एक मोबाइल फोन निर्माण कंपनी थी। इसने दोहरे सिम स्मार्टफोन, फीचर फोन और टैबलेट का निर्माण किया। इसके स्मार्टफोन दो ब्रांडों के तहत बेचे जाते थे CAMPUS और एक उच्च श्रेणी की श्रृंखला MILLENNIA। प्रारंभ में इसके मोबाइल, टैबलेट और पीसी को ताइवान और चीन में assembled किया जाता था। सेलकॉन ने 200,000 मोबाइल फोन की क्षमता के साथ हैदराबाद के मेडचल में अपनी दो इकाइयां स्थापित कीं- एक तिरुपति, आंध्र प्रदेश और दूसरी हैदराबाद, तेलंगाना में। इसके कुछ मॉडल्स के नाम इस प्रकार हैं- Celkon UniQ, Celkon Star 4G+, Celkon Smart 4G


दोस्तों ये थे भारतीय मोबाइल फोने निर्माता कंपनीज आप को ये लेख कैसा लगा जरुर बताइए |

16 जुलाई 2020

WHAT IS JIO GLASS IN HINDI

WHAT IS JIO GLASS IN HINDI


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jio glass 







रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने अपने 15 जुलाई को 43 वें Reliance AGM के दौरान एक नये प्रोडक्ट का एलान किया है जिसका नाम जियो ग्लास (Jio Glass) है |



WHAT IS JIO GLASS



आपके मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि what is jio glass आखिर ये जिओ गिलास क्या है ? तो आप को मैं बता दूँ कि यह दिखने में तो चश्मे जैसा होगा लेकिन ये कोई आम चश्मा नहीं है इस चश्मे से आप विडियो कॉल कर पाएंगे जिससे आपके विडियो कॉलिंग का अनुभव पूरी तरह बदल जायेगा, ये हमारे virtual दुनिया को real बना देगा| Jio ग्लास को वीडियो कॉल करने में मदद करने के लिए फोन के साथ जोड़ा जा सकता है| जिओ के इस नए प्रोडक्ट का मकसद वर्चुअल दुनिया को और बेहतर और वास्तविक बनाना है |

इसके लिए 3D अवतार, होलोग्राफिक कंटेंट और सामान्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग फीचर्स का भी इस्तेमाल किया जाएगा | जियो ग्लास का वजन केवल 75 ग्राम है इसमें इनबिल्ट साउंड सिस्टम है और इसे आसानी से सभी फोन से जोड़ा जा सकता है। इस डिवाइड में मनोरंजन, सीखने, गेमिंग, खरीदारी और उत्पादकता (Productivity) जैसे 25 एप्लिकेशन का support मिलेगा और यह पर्सनलाइज्ड ऑडियो के साथ आता है | डिवाइस पर कंटेंट को एक्सेस करने के लिए कंपनी एक सामान्य केबल देगी जिसे अलग-अलग इस्तेमाल के लिए स्मार्टफोन से अटैच किया जा सकता है |



अभी 25 ऐप्स को करेगा सपोर्ट



जियो ग्लास वर्चुअल दुनिया में बातचीत को बेहतर बनाने के लिए 3D का इस्तेमाल किया जायेगा| jio glass को Jio Platforms की Tesseract सहायक कंपनी द्वारा डिज़ाइन किया गया है, Jio Glass को अभी 25 ऐप्स का सपोर्ट मिलेगा इसको इस्तेमाल करने के लिए आपको इसी के साथ एक केबल दिया जायेगा जिसे आप अपने स्मार्ट फ़ोन से कनेक्ट करने के लिये internet on रखना है उसके बाद ये कनेक्टेड हो जायेगा इसमें आपको होलोग्राफिक विडियो का सपोर्ट मिलता है जिससे आप किसी से video calling करेंगे तो आपको लगेगा कि आप आमने-सामने ही बात कर रहे है|



JIO GLASS  की कीमत और उपलब्धता


हालांकि कंपनी ने जियो ग्लास की कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है| अगर दूसरे स्मार्ट ग्लास की ओर देखें, तो Snap Spectacles की भारत में कीमत 29,999 रुपये है| कंपनी जियो ग्लास की कीमत इसके मुकाबले कम रख सकती है | Jio Glass की कीमत लगभग $200 (INR 14000) हो सकती है। यह डिवाइस भारत में व्यक्तिगत उपयोग और व्यवसायों दोनों के लिए अगस्त महीने से उपलब्ध होगा|


JIO GLASS का लाइव डेमो



15 जुलाई को 43 वें Reliance AGM के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष, किरण थॉमस ने डेमो के दौरान कहा, 'हैलो जियो, आकाश और ईशा को फोन करें।' जिसके बाद Jio ग्लास ने आकाश और ईशा अंबानी को कॉल किया। जबकि ईशा 2 डी वीडियो कॉल इंटरफ़ेस का उपयोग करने में शामिल हुई, आकाश को 3 डी अवतार के रूप में दिखाया गया था। डेमो में दिखाया गया है कि कैसे डिवाइस प्रदर्शन बैठकों को आसान और इंटरैक्टिव बना देगा।

15 जुलाई 2020

BENEFITS AND IMPORTANCE OF PAN CARD IN HINDI

BENEFITS AND IMPORTANCE OF PAN CARD IN HINDI



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PAN Card बेहद ही अहम डाक्यूमेंट है, खासतौर पर उनके लिए जिनका बैंक में लेन देन ज्यादा होता है और आयकर भरते हैं,इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं है कि जो आयकर नहीं भरते उनके लिए पैन कार्ड जरुरी नहीं होता है | 

Income Tax Return की तरह ही अक्सर लोग PAN Card का भी संबंध सिर्फ Income Tax भरने लायक लोगों से जोड़ लेते हैं। वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। आप भारतीय हैं और थोड़े-बहुत पैसे वाले भी हैं तो भले ही आप इनकम टैक्स भरते हों या न भरते हों पैन कार्ड (PAN Card) के बिना आपका काम नहीं चलने वाला है। 

Income Tax Return के अलावा भी कई ऐसे काम हैं जहां पैन कार्ड की जरूरत होती है। अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं है तो आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हम आपको आज इन्ही चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां इस पैन कार्ड के बिना आपके काम अधूर रहे जाएंगे। 

अगर आपके पास पैन कार्ड नहीं है तो इसे तुरंत बनवा लें क्योंकि इसे बनवाना ना तो महंगा है ना कोई परेशानी का काम। साथ ही इसके होने से आपकी कई चीजें आसान हो जाती हैं।


पैन कार्ड क्या होता है? (What Is PAN Card)


पैन कार्ड एक विशिष्ट पहचान कार्ड है जिसे स्थायी खाता संख्या (Permanent account number) कहा जाता है, जो कि किसी भी तरह के आर्थिक लेनदेन में बहुत जरुरी है| 

पैन कार्ड में एक अल्फ़ान्यूमेरिक 10 अंकों की संख्या होती है, जो कि आयकर विभाग द्वारा निर्धारित की जाती है| यह प्रक्रिया केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अंतर्गत आती है| पैन कार्ड एक जरुरी कार्ड है |



PAN Card के बिना आप नहीं कर सकते हैं ये काम:-

PAN Card के बिना आप बैंक अकाउंट खुलवाने के अलावा FD और DMAT अकाउंट खुलवाने जैसे काम नहीं कर सकते।

पैन कार्ड ना हो तो आप बैंक में एक बार में 50 हजार रुपए से ज्यादा कैश जमा नहीं कर सकते।

आप किसी बैंक या वित्तीय संस्थान में Credit Card या Debit Card के लिए Apply करते हैं, तो उसके लिए आपको अपना PAN Number देना जरूरी होता है।

रुपए को विदेशी करेंसी में एक्सचेंज करवाने के लिए पैन कार्ड आवश्यक हो जाता है।

अगर आप 5 लाख रुपए से ज्यादा कीमत का (gold, silver या अन्य कीमती धातुएं) या उनसे बने जेवर खरीदते हैं तो आपको खरीदारी के समय अपना PAN Number देना अनिवार्य है।

आयकर रिटर्न फाइल करने के लिए पैन कार्ड जरूरी है।

विदेश यात्रा का टिकट बुक करने के लिए पैन ड्राइव जरूरी है नहीं तो आपको ज्यादा खर्च आएगा।

बच्चों को विदेश पढ़ाई के लिए भेजना हो तो पैन कार्ड जरूरी है।
वाहन खरीदने जा रहे हैं तो पैन कार्ड जरूरी होता है। 2 लाख रुपए से अधिक कीमत की कार या अन्य मोटर वाहन खरीदने और बेचने वाले, दोनों का PAN Number दर्ज करना जरूरी है।

किसी भी तरह की प्रॉपर्टी की खरीदी या बिक्री के लिए पैन कार्ड अहम हो जाता है।

किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में एक बार में 50 हजार या इससे ज्यादा का पेमेंट करना हो तो।
अगर आप Share Market या बांड्स में 50 हजार रुपए से ज्यादा का निवेश (Investment) करना चाहते हैं तो भी आपको सौदे के दौरान अपना PAN Number देना जरूरी होता है। 

अगर आप 10 लाख रुपए से ज्यादा कीमत वाली अचल सं​पत्ति (Immovable Property) खरीदते हैं या बेचते हैं तो सौदा करते समय आपको अपना PAN Numer देना अनिवार्य होता है।

अगर आप अपने लिए 50 हजार रुपए सालाना से अधिक जीवन बीमा प्रीमियम (life insurance premium) के रूप में भुगतान करते हैं तो भी आपको अपना PAN Number देना अनिवार्य है। 

आप किसी बैंक या अन्य़ वित्तीय संस्थान से लोन लेना चाहते हैं, जैसे कि education loans या personal loan वगैरह तो भी ऋणदाता संस्थान (Loan Providers) आपसे loan application के साथ पैन नंबर मांगते हैं। Home Loan और Education Loan पर सरकार Tax छूट भी देती है। लेकिन, इन छूट को पाने के लिए भी PAN Number की जरूरत होती है |


फ्री में 10 मीनट में पैन कार्ड कैसे बनायें, ये जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें- 
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/2020/04/Free-mai-pan-Card-kaise-banaye-2020.html


पैन कार्ड का उपयोग करते समय इन बातों का ध्यान रखें:-


पैन कार्ड को हालांकि, मान्य पहचान प्रमाण (Valid Identity Proof) का दर्जा हासिल है, लेकिन इसे हर कहीं प्रयोग से बचना चाहिए। नीचे दिए निर्देशों का पालन करना आपके लिए हितकर रहेगा।

अगर आप बड़े करदाता हैं तो बहुत अनिवार्य होने पर और विश्वसनीय जगहों पर ही अपना पैन नंबर दें। बेनामी/हवाला जैसे लेन-देन में किसी दूसरे के पैन नंबर के उपयोग के मामले भी पाए जाते रहे हैं।

अगर अन्य कोई विकल्प (मतदाता पहचानपत्र, राशन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस वगैरह) आपके पास पहचान प्रमाण पत्र के रूप में मौजूद है तो पैन कार्ड की फोटो कॉपी देने से बचें।

अगर आपका पैन कार्ड खो गया है तो उसकी तुरंत एफआईआर पुलिस में दर्ज कराएं, ताकि उसका दुरुपयोग न हो सके। साथ ही नए पैन कार्ड के लिए Apply भी कर दें।

दोस्तों जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेंट और शेयर करें धन्यवाद जय हिन्द , जय भारत|

14 जुलाई 2020

WHAT IS UDISE CODE AND HOW TO SEARCH IT

WHAT IS UDISE CODE AND HOW TO SEARCH IT


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किसी संस्था से सम्बन्धित बहुत से कार्यों के संपादन हेतु हमें उस संस्था के खास Unique Code की आवश्यक होती है, जिससे कि उससे सम्बन्धित जानकरियां प्राप्त की जा सके, उसकी पहचान हो सके । जैसे बैंकिंग के लिए ifsc,micr,branch code इत्यादि की जरुरत होती है ठीक इसी तरह अगर हम School U-DISE Code की बात करे तो भारत में स्कूलों के बारे में एक डेटाबेस है जिसे यू-डायस कोड (U-DISE CODE) कहते हैं| डेटाबेस स्कूल शिक्षा विभाग, एमएचआरडी, सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा विकसित किया गया है । जिसे भारत के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा Maintaine किया जाता है |यह स्कूलों के लिए एक आवश्यक कोड है, जिससे कि स्कूल से सम्बंधित जानकारी, छात्रवृत्ति से लेकर स्थानान्तरण प्रमाण पत्र, ड्रॉपआउट (शाला त्यागी) के स्तर और स्कूल के शौचालयों की स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। तो आज हम इसके बारे में ही बात करने वाले है कि School DISE Code क्या होता है और हम कैसे अपने स्कूल का U-DISE Code search कर सकते है 

School DISE Code Means:- 

यह 11 अंकों का नम्बर होता है। इसके द्वारा विद्यालय की पहचान होती है, जिसे विकासखंड, संकुल स्तर, जिला स्तर के साथ ही राष्ट्रीय स्तर तक पहचाना जाता है। सभी विद्यालयों के लिए U-DISE Code लेना ज़रुरी है जैसे- अनुदानित, शासकीय, अशासकीय, मदरसा आदि के साथ ही अन्य विद्यालयों के लिए भी डायस कोड ज़रुरी होता है। 

U-DISE Code Full Form:- 

यू-डायस कोड फुल फॉर्म – Unified District Information System For Education होता है। 

ऐसे बहुत से स्टूडेंट और टीचर्स होते है जिन्हें स्कूल डाइस कोड पता नहीं होता है और किसी आवश्यक कार्य के लिए फिर उन्हें परेशान होना पड़ता है। लेकिन आज की पोस्ट पढ़ने के बाद आपको स्कूल डायस कोड (School DISE Code) सर्च करने की जानकारी विस्तार में मिलेगी। तो आइए जानते है -

USE OF U-DISE CODE:- 

U-DISE Code का उपयोग स्कूल के विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जिसे जानना आपके लिए जरुरी है तो चलिए जानते है school dise code के उपयोग क्या है- 

स्कूल से स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने हेतु आपको U-DISE Code कि आवश्यकता होती है |
छात्रवृत्ति पोर्टल में School U-DISE Code काम आता है।
पाठ्यपुस्तक निःशुल्क प्राप्त करने में। 

RTE पोर्टल में इसकी जरुरत होती है।
शालाओं व विद्यार्थियों को सुविधा प्रदान करने में। 

U-DISE Code के 11 अंकों में छुपे राज- 

प्रायः सभी स्कूलों को 11 अंकों का ही U-DISE Code प्रदान किया गया है | इस 11 नंबर के कोड में पहले के 2 कोड राज्य को दर्शाते है। उसके बाद के 2 अंक जिले को प्रदर्शित करते है। जिले के बाद के 2 अंक ब्लॉक को प्रदर्शित करते है और उसके बाद के 3 अंक गाँव या शहर को दर्शाते है तथा अंत के 2 अंक विद्यालय को दर्शाते है। 

How To Search School U-DISE Code:- 

U-DISE Code पता करने के लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की जरुरत नहीं होगी। इसका तरीका बहुत आसान है। आइए जानते है School U-DISE Code ऑनलाइन कैसे सर्च करें- 

Step 1: Enter School U-DISE Code 

सबसे पहले आपको Google में School DISE Code टाइप करके सर्च करना होगा। 

Step 2: इसके बाद आपको अपने सर्च रिजल्ट में पहले नंबर पर इस http://udise.in/ UDISE के Website पर क्लिक करें |

Step 3: अब यहाँ Udise.in की वेबसाइट ओपन होगी। 

Step 4: Select State इसमें आपको अपना स्टेट सिलेक्ट करना है और “Go” पर क्लिक कर दीजिए। 
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Step 5: Select District अब अपनी District Select करे और “Go” पर क्लिक कर दीजिए 
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Step 6: Search School DISE Code Go पर क्लिक करते ही एक पीडीऍफ़ फाइल डाउनलोड होगी,जिसमें “School UDISE Code List” आ जाएगी। यहाँ पर आपको अपने स्कूल डायस कोड मिल जाएगा। इस तरह आप अपने School UDISE Code सर्च कर सकते है और अपना कार्य कर सकते है। आप जिस भी स्टेट से है वहां का UDISE Code आपको मिल जाएगा जैसे- School UDISE Code Chhattisgarh या School DISE Code Panjab भी सर्च कर सकते है।

दोस्तों उम्मीद है आप इस तरह से आप अपने स्कूल के यू-डाइस कोड को खोज पाएंगे | अगर पोस्ट अच्छा लगा हो तो कमेंट और शेयर जरुर करें धन्यवाद | जय हिन्द , जय भारत |

Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...