04 अगस्त 2020

ONE NATION ONE RATION CARD

ONE NATION ONE RATION CARD

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्च 2021 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ' एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' प्रणाली के राष्ट्रीय रोलआउट की घोषणा की । वित्त मंत्री के अनुसार, यह प्रणाली प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से पीडीएस लाभों का उपयोग करने में सक्षम बनाएगी। 

वर्तमान प्रणाली में, एक राशन कार्डधारक उसी एफपीएस (Fair price shop) से खाद्यान्न खरीद सकता है जिस इलाके में वह रहता है। हालाँकि, यह 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' प्रणाली के राष्ट्रीय स्तर पर चालू हो जाने के बाद बदल जाएगा। वह देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न प्राप्त कर पायेगा|



देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली(PDS) का इतिहास-


देश में लोगों को विभिन्न आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को उचित कीमतों पर व उचित समय पर उपलब्ध करवाने तथा उनके पोषण के उचित स्तर को बनाये रखने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System- PDS) को एक प्राथमिक उपकरण (Intrument) के रूप में प्रयोग किया गया है। 

भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का इतिहास स्वतंत्रता के पहले द्वितीय विश्व युद्ध के प्रारंभ (सन् 1939) से माना जाता है। उस समय औपनिवेशिक सरकार ने गरीबों को कुछ चुने हुए शहरों में सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया था। इसके बाद समय-समय पर जरुरतों के मुताबिक पीडीएस का स्वरूप बदलता रहा। 

आज भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा समवर्ती सूची के अंतर्गत सामूहिक रूप से संचालित किया जाता है। 

इस संदर्भ में केन्द्र सरकार की भूमिका आवश्यक वस्तुओं का अधिग्रहण (Procurement), उनका भंडारण तथा उन्हें बड़ी मात्रा में गंतव्य स्थान तक पहुँचाने की होती है, जबकि राज्य सरकारों की भूमिका गंतव्य स्थान से वस्तुओं को उठाने एवं उन्हें उचित मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops- FPSs) तक पहुँचाने तथा उपभोक्ताओं तक वितरित करने की होती है।



वन नेशन, वन राशन कार्ड सिस्टम कब से काम कर रहा है? 


इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम लगभग दो साल पहले शुरू हुआ था जब सरकार ने देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लिए अप्रैल 2018 में एकीकृत प्रबंधन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (IM-PDS) नामक एक योजना शुरू की थी।


वन नेशन, वन राशन कार्ड प्रणाली क्या है?

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह है| एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर भी आप अपने पुराने राशन कार्ड का ही इस्तेमाल कर सकते हैं| इसी राशन कार्ड से आप दूसरे राज्य से भी सस्ती कीमत पर सरकारी राशन दुकान से अनाज खरीद सकते हैं| 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत, लगभग 81 करोड़ लोग सब्सिडी वाले खाद्यान्न खरीदने के हकदार हैं – जिनमे चावल 3 रुपये किलो, गेहूँ 2 रुपये किलो, और मोटे अनाज 1 रुपये किलो के हिसाब से निर्धारित है|



यह कैसे काम करेगा ? 

मान लीजिए कि अजीत यादव उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का निवासी है और उसके पास उत्तर प्रदेश का राशन कार्ड है| जॉब के सिलसिले में अजीत यादव दिल्ली में रहते हैं तो वे अपने उत्तर प्रदेश वाले राशन कार्ड की मदद से ही दिल्ली या किसी और राज्य में भी उचित मूल्य पर सरकारी राशन खरीद सकेंगे| 

इसके तहत केंद्र सरकार राज्यों को 10 अंकों का राशन कार्ड नंबर जारी करेगी| इस नंबर में पहले दो अंक राज्य कोड होंगे और अगले दो अंक राशन कार्ड नंबर होंगे| इसके अतिरिक्त राशन कार्ड नंबर के साथ एक और दो अंकों के सेट को जोड़ा जाएगा| इसे देश भर में लागू करने के लिए राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी की सुविधा होगी|



एक देश, एक राशन कार्ड का महत्व-

भारत सरकार की ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ (One Nation, One Ration Card) योजना कई राज्यों में कार्य कर रही| एक राशन कार्ड सार्वजनिक वितरण प्रणाली को एक नया आयाम प्रदान करेगी। 

खाद्य, सार्वजनिक वितरण व उपभोक्ता मंत्रालय की ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ योजना के तहत किसी भी राज्य का व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान से राशन ले सकता है। 

गौरतलब है कि सभी राशन कार्डों को आधार कार्ड से जोड़ने और पॉइंट ऑफ सेल (Point of Sale PoS) मशीन के माध्यम से खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था अपने अंतिम चरण में है| 

इस नई व्यवस्था के कारण लोग देशभर में एक ही राशन कार्ड का इस्तेमाल कर सकेंगे। दरअसल, सरकार की तैयारी है कि आधार कार्ड की तर्ज पर हर एक राशन कार्ड को एक विशिष्ट (यूनिक) पहचान नंबर दिया जाएगा। इससे फर्जी राशन कार्ड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा। 

इसके साथ ही सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी, जिसमें एक ऑनलाइन एकीकृत (इंटीगेटेड) सिस्टम बनाया जाएगा। इस सिस्टम में राशन कार्ड का डेटा स्टोर होगा। इसके बन जाने के बाद अगर देश में कहीं भी कोई फर्जी राशन कार्ड बनवाने की कोशिश करेगा, तो इस सिस्टम के जरिये से पता चल जाएगा। इसके बाद अगर कोई नया राशन कार्ड बनवाने जाता है, तो वह ऐसा कर नहीं पाएगा।

इस ऑनलाइन सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि कोई भी लाभार्थी देश के किसी हिस्से में और किसी भी राशन की दुकान पर सब्सिडी वाला अनाज ले सकेंगे। केंद्र सरकार की स्कीम 'वन नेशन वन राशन कार्ड' का फायदा अब 1 अगस्त से देशभर में 67 करोड़ लाभार्थियों को मिल सकेगा|

'वन नेशन वन राशन कार्ड' स्कीम में 1 अगस्त से अब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के अलावा मणिपुर. नागालैंड और उत्तराखंड भी राशन कार्ड की नेशनल पोर्टेबिलिटी से जुड़ गए| 

केंद्रीय उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक,01 अगस्त, 2020 से 'वन नेशन वन राशन कार्ड' स्कीम से कुल 24 राज्य/संघ शासित प्रदेश (UT) जुड़ गए हैं जिससे देशभर में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के करीब 65 करोड़ लाभार्थी इसका फायदा उठा पाएंगे |



वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम से जुड़े राज्य -

01 एक अगस्त, 2020 से अब 'वन नेशन वन राशन कार्ड' के तहत कुल 24 राज्य/संघ शासित प्रदेश आ गए हैं| जिनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड हैं|


ये भी जाने- भारत की जनसंख्या 


एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड प्रणाली के बारे में हमने जाना-

1) पहल के तहत, पात्र लाभार्थी एक ही राशन कार्ड का उपयोग करके देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत अपने पात्र खाद्यान्न का लाभ उठा सकेंगे। 

2) सरकार देश भर में एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड ’योजना को 1 जून 2020 से लागू करना चाहती थी। 

3) राशन कार्ड के लिए एक मानक प्रारूप विभिन्न राज्यों द्वारा उपयोग किए गए प्रारूप को ध्यान में रखकर और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श के बाद तैयार किया गया है। 

4) राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के लिए, राज्य सरकारों को द्वि-भाषी प्रारूप में राशन कार्ड जारी करने के लिए कहा गया है, जिसमें स्थानीय भाषा के अलावा, अन्य भाषा हिंदी या अंग्रेजी हो सकती है। 

5) अब तक, 17 राज्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के एकीकृत प्रबंधन पर हैं।

6) आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गोवा, झारखंड और त्रिपुरा। बिहार, यूपी, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दमन और दीव को 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है । 

7) इससे पात्र लाभार्थी, रियायती दर पर खाद्यान्न खरीदने के लिए सक्षम हो जाएगा, जिसे चावल ₹3 प्रति किलो, गेहूं ₹ 1 रुपया प्रति किलो और मोटा अनाज 2 प्रति किलो, देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से प्राप्त होगा। 

8) वर्तमान प्रणाली में, एक राशन कार्डधारक केवल उसी एफपीएस से खाद्यान्न खरीद सकता है जिसमें वह रहता है| 

9) IMPDS पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अंतर-राज्य राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी के माध्यम से किए गए लेनदेन की संख्या 15 मई तक केवल 274 है| 

10) सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( IM-PDS ) पोर्टल का एकीकृत प्रबंधन राशन कार्डों की अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी के लिए तकनीकी मंच प्रदान करता है।

03 अगस्त 2020

Use these platforms to find better articles on Wikipedia

विकिपीडिया पर बेहतर लेख खोजने के लिए इन प्लेटफार्मों का उपयोग करें

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विकिपीडिया क्या है ?

Wikipedia विकिपीडिया एक Free विश्वकोश है जो हर किसी व्यक्ति द्वारा Edit या लिखा जा सकता है। इस ऑनलाइन विश्वकोश में लाखों करोड़ों लेख लोगों ने विभिन्न Topics पर लिखा है। Wikipedia के Articles 270 से भी ज्यादा भाषाओँ में मौजूद हैं।

Wikipedia का नाम हवाई भाषा के शब्द से लिया गया है (Wiki=जल्दी)। इसका अर्थ है टेक्नोलॉजी का एक ऐसा माध्यम है जो वेबसाइट और विश्वकोष को मिलकर सक्षम बनाता है। विकिपीडिया के Article को और भी अच्छा और शिक्षाप्रद बनाने के लिए दुनिया भर से लाखों Volunteer या स्वयंसेवक अपना योगदान देते हैं।

Wikipedia की शुरुवात वर्ष 2001 में हुई थी। प्रतिदिन लाखों विकिपीडिया Volunteer आर्टिकल लिखते हैं और साथ ही Edit भी करते हैं जिसके कारण Wikipedia दुनिया का सबसे बड़ा Online Portal जहाँ दुनिया के लगभग सभी चीजों के विषयों में आप जानकारी पा सकते हैं।


बेहतर लेख खोजने के लिए इन प्लेटफार्मों-


विकिपीडिया पर यूजर्स नॉलेज और इंफॉर्मेशन पाने के अलावा उन सब्जेक्ट्स के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जिनके बारे में वे पहले जानते नहीं थे। इसके लिए कुछ टूल्स की मदद लेकर पसंदीदा विषय चुनकर पढ़े जा सकते हैं। 

इसके होम पेज पर प्रतिदिन फीचर्ड आर्टिकल्स व खबरों में लोकप्रिय टॉपिक्स पब्लिश होते हैं। विकिपीडिया अकाउंट बनाकर आप भी अपनी रुचि के अनुसार पेजेज को छांटकर बाद के लिए सेव कर सकते हैं।

विकी गुड आर्टिकल (ट्विटर)-


विकिपीडिया ने रीडर्स के लिए गुड आर्टिकल्स की लिस्ट बनाई है। इसके लिए आप ट्विटर पर विकी गुड आर्टिकल बॉट को फॉलो कर सकते हैं। 

नापसंद टॉपिक्स को हटाने के लिए किसी अच्छे आर्टिकल को इन 6 फैक्टर्स के आधार पर चुन सकते हैं- वैल रिटन, वेरिफाएबल, ब्रॉड कवरेज, न्यूट्रल, स्टेबल और इलस्ट्रेटेड। 

किसी भी एंट्री का 'गुड आर्टिकल' स्टेटस तब खत्म हो जाता है जब वह इसका एक फीचर्ड आर्टिकल बन जाती है।

कॉपरनिकस (वेब)-


यह टूल, गूगल मैप्स व विकिपीडिया का एक मिक्स है जो वर्ल्ड मैप ब्राउज करने और उसके बारे में नई बातें जानने का दिलचस्प जरिया है। चाहे हिस्ट्री हो या ज्योग्राफी या करंट इवेंट्स, गूगल अर्थ के बाद यह सबसे अच्छा मैप-बेस्ड एक्सपीरिएंस देता है। 

इस मैप के अंदर विकिपीडिया के रुचिपूर्ण आर्टिकल्स से कई पिन्स डाले गए हैं। आपको इस तरह के पिन्स मिलेंगे - इथोपिया में इथोपियन एयरलाइन्स फ्लाइट 302 आदि।

वीकलीपीडिया (वेब)- 


इस वीकली लिस्ट या न्यूजलेटर डाइजेस्ट में वे आर्टिकल्स शामिल होते हैं जिनमें पिछले हफ्ते के अंदर सबसे ज्यादा बदलाव आए हों। 

विकिपीडिया के ओपन-सोर्स टूल्स के माध्यम से किसी भी आर्टिकल में ये बदलाव देखे जा सकते हैं। इन बदलावों को ट्रैक करते हुए वीकलीपीडिया किसी भी हफ्ते सबसे ज्यादा संपादित 20 आर्टिकल्स को न्यूजलेटर में बदल देता है। 

वीकलीपीडिया इन 20 आर्टिकल्स के अलावा विकिपीडिया पर दूसरी एक्टिविटीज को भी ट्रैक करता है जैसे टॉप 5 डिस्कशंस और वीक में क्रिएट 10 न्यू टॉप आर्टिकल्स।



विकिट्वीक्स (क्रोम एक्सटेंशन)-


इसकी मदद से आप विकिपीडिया के स्पेस के ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल के लिए कुछ कॉस्मेटिक बदलाव कर सकते हैं। 

इससे विकिपीडिया के किसी भी पेज को बेहतर रीडिंग के लिए ऑप्टिमाइज किया जा सकता है, खासकर जब उसमें टेबल्स, चार्ट्स या इमेजेज हों। 

हालांकि अब विकिपीडिया ने इसे अपना ऑफिशियल फीचर बना दिया है। विकिट्वीक्स की दूसरी विशेषता है-रीडर की विकिपीडिया हिस्ट्री को ट्रैक करना।

इस तरह से आप इन प्लेटफॉर्म्स को काम में लेकर विकिपीडिया पर अपनी रूचि के अनुसार पेजेज को सेव कर सकते हैं | 

02 अगस्त 2020

INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH

इन्होनें किया दुनिया को कोरोना संकट से आगाह 


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INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
dr.li wenliang

डॉ. ली वेंगलियांग- चेतावनी देने वाले पहले विह्सल ब्लोअर - 


34 साल डॉ. ली वेंगलियांग वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल में नेत्र विशेषज्ञ रहे|चीन में कोरोनावायरस के बारे में लोगों को बताने वाले और सरकार के रवैये के खिलाफ आवाज उठाने वाले वे पहले व्यक्ति थे।
 
31 दिसंबर को उन्होंने लोकप्रिय चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट पर वायरस के बारे में लोगों को चेतावनी दी थी। इस तरह वो कोरोना संकट की चेतावनी देने वाले पहले विह्सल ब्लोअर बने|

इसके बाद पुलिस ने उन्हें एक पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा था। उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया गया था और उन्हें अपना मुंह बंद करने के लिए भी कहा गया था| 

लेकिन इस सबके बावजूद डॉ. ली ने अपना काम जारी रखा। वह मरीजों का इलाज करते रहे और लोगों को भी इस बीमारी के बारे में जागरूक करते रहे।

डॉ. ली ने संक्रमण की गंभीरता को समझा, उन्हें लगा कि सार्स जैसा कोई वायरस, जो इंसानों से इंसानों में फैला था, दोबारा वापस आ गया है। डॉ. ली ने सात ऐसे मामले देखे थे जिनमें सार्स जैसे किसी वायरस के संक्रमण के लक्षण थे। 

31 जनवरी को डॉ. ली ने न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार को इंटरव्यू दिया था। उन्होंने बताया था कि 10 जनवरी को उन्हें खांसी शुरू हुई थी। अपने मरीज का इलाज करने के दौरान डॉ. ली खुद भी संक्रमित हो गए और उनकी मौत हो गई |


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dr. zhang wenhong


डॉ. जहांग जियांगपहली डॉ. जिन्होंने वाइरस के बारे में बताया- 


नोवल कोरोनावायरस का पता लगाने वाली 54 साल की डॉ. जहांग जियांग दुनिया की पहली डॉक्टर हैं। वो एक श्वसन तंत्र विशेषज्ञ है|

26 दिसंबर को हॉस्पिटल में रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट की निदेशक डॉ. जहांग जियांग ने चार मरीज़ों में कुछ लक्षण एक जैसे पाए। 

उन्होंने देखा कि मरीज़ों को निमोनिया है और उनके फेफड़ों में एक जैसा संक्रमण दिख रहा है। इन मरीज़ों में तीन तो एक ही परिवार से थे। 

अगले दिन उनके पास तीन और मरीज़ उन्हीं लक्षणों के साथ इलाज कराने के लिए आए। उन्हें यह सब अजीब लगा और इसके बारे में उन्होंने खोजबीन शुरू की। उन्होंने तुरंत अस्पताल के दूसरे विभागों को सूचित किया और बताया कि यह कोई सामान्य बीमारी नहीं है।

27 दिसंबर को डॉ. जहांग ने चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों को बता दिया था कि नई बीमारी कोरोनावायरस के चलते फैल रही है। डॉ. जहांग जियांग की कहानी सामने आने के बाद वह चीनी सोशल मीडिया में हीरो बन गईं। 

वह सार्स वायरस से निपटने वाली टीम में भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि उस समय का प्रशिक्षण उन्हें इस वक्त काम आया।


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chen wei

चेन वुई- टर्मिनेटर ऑफ़ इबोला


54 साल की चेन वुई चीन की शीर्ष सैन्य जैव-युद्ध विशेषज्ञ हैं। वह द इंस्टीट्यूट ऑफ बायोइंजीनियरिंग, अकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेस में जीवाणु विज्ञानी हैं। 

चीनी मीडिया के मुताबिक चेन और उनकी टीम ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन विकसित कर रही हैं चेन के मुताबिक अगर परीक्षण सफल होता है, तो यह कोरोनावायरस के खिलाफ पहला टीका होगा। चेन वैज्ञानिक के अलावा पीपुल लिबरेशन आर्मी में मेजर जनरल हैं।

चेन का इससे पहले सार्स और इबोला जैसे वायरस का टीका बनाने में भी योगदान रहा है। उन्होंने 2003 में सार्स से लड़ने के लिए मेडिकल स्प्रे बनाया था। 

2015 में डॉ. चेन को चीनी सरकार ने इबोला वायरस की वैक्सीन विकसित करने के लिए दक्षिण अफ्रीकी देश सिएरा लिओन भेजा था। अफ्रीका में इबोला तेजी से फैल रहा था। ऐसे में डॉ. चेन की रिसर्च ने काफी मदद की थी।

2017 में चीन में वोल्फ वारियर 2 नामक फिल्म में डॉ. चेन का किरदार भी था| फिल्म में उनके किरदार ने लमानला वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाई थी |



INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
neil ferguson


नील फर्गुसन- महामारी विशेषज्ञ -


52 साल के नील फर्गुसन ने ब्रिटिश सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए तो अकेले ब्रिटेन में ही 2 लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। 

नील कोरोनावायरस की गंभीरता को समझ रहे थे और पिछले दो महीने से वायरस पर रिसर्च पेपर लिख रहे थे। नील के रिसर्च पेपर के बाद ब्रिटिश सरकार ने कोविड 19 से लड़ने की अपनी रणनीति बदल दी। इसके बाद ही ब्रिटेन में वर्क फ्रॉम होम शुरू हुआ।

सरकार ने जरूरी कदम उठाते हुए स्कूल्स, मॉल, थिएटर और सार्वजनिक जगहें बंद कर दी हैं। नील ने 16 मार्च को ट्विटर पर लिखा कि उन्हें खांसी और बुखार है। उन्हें कुछ-कुछ कोविड जैसे लक्षण दिख रहे थे। इसके बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है। 

नील इंपीरियर कॉलेज लंदन के सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजिकल एनालिसिस एंड मॉडलिंग ऑफ इंफेक्सियस डिज़ीज़ के निदेशक हैं। 

नील गणितज्ञ भी हैं। उन्होंने सरकार को अपने अनुमान के मुताबिक चेतावनी दी है कि अगर सावधानियां नहीं रखी गईं, तो मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है।



INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
ralph baric

राल्फ बेरिक- जिन्होंने सबसे पहले कोरोना को जांचा- 


राल्फ बेरिक, बैरिक लैब, यूनिवर्सिटी ऑफ़ नार्थ कैरोलीना, अमेरिका में शोधकर्ता हैं| 6 फ़रवरी 2020 को राल्फ बेरिक की प्रयोगशाला में कई सारे प्लास्टिक पाउच, 500 माइक्रोलीटर वाइल, सील्ड प्लास्टिक कंटेनर और ड्राई आइस से पैक नावेल करोना वाइरस लाया गया|

दुनिया की किसी भी प्रयोगशाला में प्रयोग के लिए पहली बार यह वायरस लाया गया था| यूनिवर्सिटी ऑफ़ नार्थ कैरोलीना की बैरिक लैब में डॉ. राल्फ अपनी टीम के साथ वायरस को टेस्ट करने के लिए तैयार थे|

डॉ. राल्फ उन चंद शोधकर्ताओं में शामिल हैं, जिनकी कोरोना वायरस में विशेषज्ञता है| इससे पहले वो जीका, इबोला पर भी शौध कर चुके हैं|

राल्फ कहते हैं कि उन्होंने  30 साल पहले शोधकार्य शुरू किया था| तब कोरोना वायरस को सामान्य सर्दी-खांसी से ज्यादा कुछ नहीं समझा जाता था| 

2003 में सार्स और फिर 2012 में सामने आये कोरोना वायरस मर्स ने जब संक्रमण फैलाया था, तब इसकी भयावहता का पता चला अभी आया कोरोना वायरस नया वायरस है| 


28 जुलाई 2020

qualcomm launches quick charge 5 technology for charging

अब स्मार्ट फ़ोन होगा मिनटों में फुल चार्ज


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qualcomm launches quick charge 5 technology for charging
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/

Qualcomm का धमाका:-


स्मार्टफोन के लिए प्रोसेसर बनाने वाली मशहूर अमेरिकी कंपनी Qualcomm ने क्विक चार्ज 5 (Quick Charge 5) को अपनी अल्ट्रा फास्ट टेक्नोलॉजी के तौर पर लॉन्च किया है|

कंपनी ने दावा किया है कि इसके जरिए पूरी तरह खत्म हो चुकी स्मार्टफोन की बैटरी को सिर्फ 5 मिनट में ही 0 से 50 फीसदी तक चार्ज किया जा सकता है| 

इससे पहले कंपनी ने जून 2017 में इसके पिछले वर्जन Quick Charge 4+ को भी लॉन्च किया| यह उसी क्विक चार्ज 4+ तकनीक का अपग्रेड है। 

सुपर क्विक चार्जिंग के अलावा टेक्नोलॉजी पिछले वर्जन के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा कूल और 70 फीसदी ज्यादा क्षमता के साथ है| 

और यह अभी फलहाल टेस्टिंग फेज़ में है और इस साल की तीसरी तिमाही तक फोन में यह टेक्नॉलजी आने लग जाएगी।

यह 2S बैटरी पैक को सपोर्ट करती है. इसके साथ टेक्नोलॉजी को यूएसबी पावर डिलीवरी (USB-PD) और यूएसबी टाइप सी टेक्नोलॉजी के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है|


क्या है खासियत:-


क्विक चार्ज 5 टेक्नॉलजी 100W से ज्यादा की चार्जिंग क्षमता सपॉर्ट करती है, वहीं पुरानी तकनीक 45W पावर के साथ आती थी।

यह 4000mAh की बैटरी को चार्ज करते समय 10 डिग्री तक कम गर्म करती है। यह पहली जेनरेशन की क्विक चार्ज तकनीक के मुकाबले 10 गुना ज्यादा पावरफुल है। 

यह एक साधारण बैटरी को शून्य से 100 फीसदी तक चार्ज करने में 15 मिनट का समय लेगी। 

वहीं, क्विक चार्ज 4+ के जरिए 15 मिनट में सिर्फ 15 फीसदी बैटरी चार्ज होती है।

इतना ही नहीं, बैटरी लाइफ बढ़ाने के लिए इसमें क्वालकॉम बैटरी सेवर और अडेप्टर कैपेबिलिटी के लिए स्मार्ट आइडेंटिफिकेशन जैसे फीचर्स भी मिलेंगे |


किन-किन फ़ोन में मिलेगा क्विक चार्ज का सपोर्ट:-


शुरुआत में यह टेक्नॉलजी सिर्फ उन डिवाइस में सपॉर्ट करेगी जिनमें क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 865, स्नैपड्रैगन 865+ और इसके बाद आने वाले प्रोसेसर होंगे। 

हालांकि आने वाले समय में इसे क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 700-सीरीज के प्रोसेसर वाले फोन में भी दिया जाने लगेगा।


ये भी जान लें :-


ये भी जान लें कि हाल ही में ओप्पो ने भी नई फास्ट चार्जिंग टेक्नॉलजी 125W Flash Charge पेश की है।

ओप्पो दावा करती है कि उनकी टेक्नॉलजी से 4000mAh की बैटरी सिर्फ 20 मिनट में चार्ज हो जाती है। 

इसके अलावा रियलमी भी 125W UltraDAR फास्ट चार्जिंग टेक्नॉलजी ले आई है।






दोस्तों जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेन्ट और शेयर जरुर करें धन्यवाद जय हिन्द जय भारत |





Sbi pension seva website launched for sbi pensioners

SBI पेंशन सेवा वेबसाइट लॉन्च, पेंशनर्स को ऑनलाइन मिलेंगे कई फायदे


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Sbi pension seva website launched for sbi pensioners

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने पेंशनभोगियों (स्टाफ पेंशनरों के अलावा) के लिए एक वेबसाइट लॉन्च की है, जिनके बैंक में पेंशन खाता है। एसबीआई पेंशन सेवा, पेंशनरों के लिए समर्पित वेबसाइट है| जिसका उपयोग करना सरल है और निश्चित रूप से ईस वेबसाइट का लाभ पेंशनभोगियों को मिलेगा करेगा।

SBI भारत में सबसे बड़ा पेंशन देने वाला बैंक है, जो पूरे देश में लगभग 54 लाख पेंशनभोगियों की सेवा कर रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान करने के लिए, एसबीआई ने केंद्र सरकार की एजेंसियों (रक्षा, रेलवे, डाक, दूरसंचार, नागरिक), राज्य सरकार के विभागों और पेंशन प्रसंस्करण के लिए विभिन्न स्वायत्त निकायों के साथ सहयोग किया है।

देश के शीर्ष ऋणदाता से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनभोगी एसबीआई पेंशन सेवा वेबसाइट पर लॉगिन कर सकते हैं और अपनी पेंशन से संबंधित विवरणों की तुरंत जांच कर सकते हैं:-

 

एसबीआई पेंशनसेवा वेबसाइट पर उपलब्ध सेवाएं:-


 1) अर्रेअर (arrear) गणना पत्रक डाउनलोड करें (Download of Arrear calculation sheets)

 2) पैंशनशिप / फॉर्म 16 डाउनलोड करें(Download of Pensionslip/Form 16)

 3) पेंशन प्रोफाइल विवरण (Pension Profile Details)

 4) निवेश से संबंधित विवरण (Investment related details)

 5) जीवन प्रमाण पत्र की स्थिति (Life Certificate status)

 6) लेनदेन विवरण (Transactions Details)

 

 

पेंशनरों को विस्तारित लाभ (Extended benefits to pensioners):-


 1) पेंशन भुगतान विवरण का मोबाइल फोन पर एसएमएस अलर्ट।

 2) पेंशन पर्ची ईमेल / पेंशन भुगतान शाखा के माध्यम से।

 3) भारतीय स्टेट बैंक की किसी भी शाखा में जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की सुविधा।

 4) जीवन प्रमाण की सुविधा शाखाओं में उपलब्ध।

 5) वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS)

 6) रक्षा / रेलवे / सीपीएओ / राजस्थान पेंशनरों के लिए ईपीपीओ प्रावधान

 

पेंशनर्स ऐसे कर सकते हैं रजिस्टर:-


SBI में पेंशन अकाउंट रखने वाले पेंशनर्स को SBI पेंशन सेवा वेबसाइट का लाभ लेने के लिए खुद को पहले रजिस्टर करना होगा. इसके लिए https://www.pensionseva.sbi/  पर जाना होगा |


1) कम-से-कम पांच अक्षरों से अपना यूजर आई डी(USER ID)बनायें|

2) फिर अपना पेंशन खाता संख्या दर्ज करें|

3) अपनी जन्मतिथि दर्ज करें |

4) पेंशन भुगतान शाखा का शाखा कोड (BRANCH CODE) दर्ज करें|

5) पंजीकृत ईमेल आईडी दर्ज करें |

6) मेल नया पासवर्ड दर्ज करें, फिर पासवर्ड की पुष्टि करें |


इसे भी पढ़ें:- SBI ATM WITHDRAWAL RULES 


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS

विज्ञान को नाज है इन महिला वैज्ञानिकों पर


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रसायन और भौतिक विज्ञानी-


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS


मैरी क्यूरी (mary curie)- 

मैरी स्क्लाडोवका क्यूरी,  (लघु नाम: मैरी क्यूरी) (जन्म 07 नवम्बर 1867- मृत्यु 04 जुलाई 1934) मैरी क्यूरी का जन्म पोलैंड के वारसा नगर में हुआ था। महिला होने के कारण तत्कालीन वारसॉ में उन्हें सीमित शिक्षा की ही अनुमति थी। इसलिए उन्हें छुप-छुपाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करनी पड़ी। बाद में बड़ी बहन की आर्थिक सहायता की बदौलत वह भौतिकी और गणित की पढ़ाई के लिए पेरिस आईं। 

मैरी क्यूरी एकमात्र ऐसी महिला है, जिन्हें दो बार नोबेल पुरुस्कार मिल चूका है| वह यूनिवर्सिटी आफ पेरिस की पहली महिला प्रोफ़ेसर रहीं| उन्होंने अपने पति पियरे क्यूरी और हेनरी बेक्यूरेल के साथ मिलकर रेडियोधर्मी किरणों और उसके पीछे छुपे सिद्धांत का पता लगाया| 

उन्होंने दुनिया को रेडियोधर्मिता शब्द दिया| वह सभी जांचों में अपनी टीम का नेतृत्व करती थीं| उन्होंने पोलोनियम और रेडियम कि खोज भी की| आइसोटोप के साथ ट्यूमर के इलाज का अध्ययन शुरू करने का विचार भी मैरी का ही था| उन्होंने पेरिस और वारसा में क्यूरी संस्थान की स्थापना की| 

दुर्भाग्य से मैरी रेडियोधर्मिता के खतरों से अनजान थीं| लम्बी अवधि तक विकिरणों के सम्पर्क के कारण 66 साल की उम्र में फ्रांस के सांटोरियम में  अप्लासटिक एनीमिया की वजह से 1934 में उनकी मौत हुई| उनके जर्नल और शोध पत्र भी इतने ज्यादा रेडियोधर्मी है कि उन्हें सीसे के बक्से में रखा जाता है| 

मैडम क्युरी आज भले ही इस संसार में नही हैं| किन्तु उनके द्वारा किये गए कार्य तथा समर्पण को विश्व कभी नही भूल सकता. आज भी समस्त विश्व में मैरी क्युरी श्रद्धा की पात्र हैं तथा उनको सम्मान से याद करना हम सबके लिए गौरव की बात है|


रसायन विज्ञानी-


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आइरीन
क्यूरी (Irène Curie)-

(जन्म 12 सितंबर- मृत्यु 17 मार्च 1956ई.)  आइरीन क्यूरी महान वैज्ञानिक मैरी क्यूरी की बेटी आइरीन ने अपने काम के बूते पर अपनी पहचान बनाई| उन्होंने अपने पति फ्रेडरिक जोल्यो  के साथ मिलकर कृत्रिम रेडियोधर्मिता की खोज की| 

उनकी अपने पति के साथ पहली मुलाकात उस समय हुई थी, जब वह अपनी डॉक्टरेट की डिग्री ले रही थीं| उस दौरान उनके पति ने रेडियोधर्मी रसायनों के अध्ययन के लिए प्रयोगशाला तकनीक सिखाने के लिए निवेदन किया था| 1926 ई. में आइरीन क्यूरी और जोल्यो दोनों का विवाह हो गया। 

अपनी माँ की तरह उन्हें भी अपने बेहतरीन कार्य के लिए नोबल पुरुस्कार मिला| आज भी उनका परिवार सबसे ज्यादा नोबल पुरुस्कार विजेता जीतने वाला परिवार है| उनके बच्चे हेलन और पियरे भी नामी वैज्ञानिक हैं| इसमें कोई शक नहीं कि इस परिवार में वैज्ञानिक बुद्धिमत्ता वाकई कमाल की है|


जीवाश्म वैज्ञानी


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मैरी एनिंग(
Mary Anning
)- 

(जन्म 21 मई 1799 – मृत्यु 9 मार्च 1847)  मैरी एनिंग समुद्र के किनारे पाए जाने वाले शंख और सीप पर किये गए शोध कार्यों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं| उन्होंने बताया कि ये जीवाश्म हैं | मैरी एनिंग ने पृथ्वीं के इतिहास के बारे में वैज्ञानिक समुदाय की समझ बढ़ाने में मदद की |

एनिंग ने डोरसेट में इंग्लिश चैनल के सहारे बनी चट्टानों पर जीवाश्म अध्ययन किया| उन्होंने पहली बार मीनसरीसृप कंकाल को दुनिया के सामने पेश किया| लिंगभेद के कारण उन्हें 19वीं सदी के वैज्ञानिक समुदाय का सदस्य ही स्वीकार नहीं किया गया| वर्ष 2010 में रॉयल सोसायटी ने उन्हें विज्ञान में सबसे प्रभावशाली ब्रिटिश महिलाओं की सूची में शामिल किया|


जानिए नोबल पुरुस्कार क्या है? और अब तक किन-किन लोगों को 

ये पुरुस्कार मिल चूका है|


भौतिक विज्ञानी-


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लीज माइटनर
(lise meitner)
- 

अगर लीज माइटनर और ओटो हैन ने बेहतरीन कार्य नहीं किया होता तो परमाणु उर्जा और हथियारों की दुनिया संभव नहीं होती| दोनों ने मिलकर विखंडन प्रक्रिया की खोज की, जिससे विशाल मात्र में उर्जा बाहर निकलती है| 

वैज्ञानिक खोज में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए हैन को 1944 में रसायन का नोबल पुरुस्कार मिला, पर लीज माइटनर को नजरअंदाज किया गया| हालाँकि कई वैज्ञानिकों और पत्रकारों ने नोबल समिति के इस निर्णय का विरोध किया, पर नोबल समिति ने अभी तक उनके काम को मान्यता नहीं दी है| 

वह जर्मन में भौतिक कि प्रोफ़ेसर बनने वाली पहली महिला हैं| उन्हें बर्लिन अकेडमी ऑफ़ साइंसेज की और से लाइबनिट्स पदक से सम्मानित किया जा चूका है| रसायन तत्व 109 (माइटनेरियम) का नाम उनके नाम से ही लिया गया है|



खगोल भौतिक विज्ञानी-


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जोसेलिन बेल बरनेल(
jocelyn bell burnell
)- 

(जन्म 15 जुलाई, 1943 )- माइटनर ऐसी पहली या अंतिम महिला नहीं है, जिन्हें नोबल पुरुस्कार समिति ने नजरंदाज किया हो | बरनेल ने 1967 में रेडियो पल्सर की खोज की और विश्लेषण शुरू किया| 

जब उन्होंने इसके बारे में अपने शोध पर्वेक्षक एंटनी हेविश को बताया तो वह उलझन में थे, और कहा कि उनकी खोज केवल मानव निर्मित हस्तक्षेप का परिणाम है| आखिर में हेविश ने इस घटना को पेपर में प्रकाशित करवाया| बरनेल इसके पांच लेखकों की सूची में दुसरे स्थान पर थीं | 

नोबल पुरुस्कार हेविश और मार्टिन रेयल को दिया गया| हालाँकि वैज्ञानिकों ने इस निर्णय का विरोध किया| बरनेल ने टेलिस्कोप के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई|



प्रीमैटोलोजिस्ट-


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जेन गुडाल(
Jane Goodall
)- 

अगर किसी महिला वैज्ञानिक को अपने समय में सेलिब्रिटी का दर्जा मिला है तो वह हैं- जेन गुडाल| 

वह चिम्पांजी का अध्ययन करने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हुईं| यह ख्याति उन्हें रातों-रात नहीं मिली थी| इसके लिए तंजानियां में जंगली चिम्पंजियों के सामाजिक और पारिवारिक संबंधों का 55 वर्ष तक अध्ययन किया| 

गुडाल बचपन से ही चिम्पंजियों को लेकर काफी उत्सुक रहीं| उन्होंने केनिया के प्रसिद्ध जीवाश्म विज्ञानी लुईस लीके के साथ काम किया| लीके ने गुडाल को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी भेजा | 

वह कैम्ब्रिज के इतिहास में आठवीं ऐसी स्टूडेंट थीं, जिसने पहले बैचलर्स डिग्री प्राप्त किये बिना ही पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर ली|

 


कोशिका आनुवांशिक विज्ञानी-


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बारबरा मैक्क्लिंटाक (
Barbara-McClintock
)- 

बारबरा मैक्क्लिंटाक (जन्म 16 जून, मृत्यु 1902 - 2 सितंबर, 1992) एक अमेरिकी वैज्ञानिक और साइटोजेनेटिकिस्ट थी उन्हीं की बदौलत ही पूरी दुनिया जानती है कि क्रोमोसोम किस तरह से काम करते हैं| 

उन्होंने आनुवंशिकी पर फोकस किया और मक्के के लिए पहला आनुवांशिक नक्शा तैयार किया| इससे पता लगा कि किस तरह से क्रोमोसोम शारीरिक लक्षणों को प्रभावित करता है | उन्होंने बताया कि जीन्स के कारण शारीरिक विशेषताओं में बदलाव आ सकता है| 

उनका शोध कार्य अपने समय से बहुत आगे का था| यही कारण है कि उनके कार्य की काफी आलोचाना की गई| आखिर उन्होंने 1953 में अपना कार्य प्रकाशित करना बंद कर दिया| 

सौभाग्य से इसकी पुनः खोज हुई और 1983 में आनुवांशिक ट्रांसपोजिशन की खोज के लिए उन्हें सम्मानित किया गया| वह उस श्रेणी में एक नोबेल पुरस्कार पाने वाली एकमात्र महिला हैं।



रसायन विज्ञानी-


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रोज़लिन फ़्रैंकलिन(
Rosalind Franklin)-
 

(जन्म 25 जुलाई 1920 – मृत्यु 16 अप्रैल 1958) डीएनए (डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड), आरएनए (रैबोनुक्लियक एसिड), वायरस, कोयले की आणविक संरचना को समझने के लिए योगदान दिया है|

1951 में किंग्स कॉलेज में काम शुरू करने के बाद, रोज़लिन फ्रैंकलिन ने डीएनए की डबल हेलिक्स वाली संरचना की खोज में अहम भूमिका अदा की| फ़्रैंकलिन अपने समय से बहुत आगे थीं, वह बहुत घूमती थीं, एक बार तो उन्होंने पीठ पर सामान लादकर, फ्रांस की ऐल्प्स पर्वतमाला की यात्रा की |


दोस्तों ऐसे और भी कई महिला वैज्ञानिकों के नाम है जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से और पुरे मन से विज्ञान और मानवता की सेवा की है| हम ऐसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सभी महिला वैज्ञानिकों के ऋणी और आभारी रहेंगे |

Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...