27 अक्टूबर 2020

Who designed ram temple ayodhya ram mandir ayodhya in hindi ram mandir ka Design kisne banya hai

राम मंदिर अयोध्या का डिजाइन किसने बनाया है?


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अयोध्या में 5 अगस्त को राम मंदिर के लिए भूमि पूजन से एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है । ये घड़ी देखने के लिए अहमदाबाद का एक परिवार भी बहुत उत्साहित था। ये परिवार और कोई नहीं बल्कि राम मंदिर के डिजाइन से जुड़ा सोमपुरा परिवार है । 

इस Architect परिवार की मंदिरों के Design तैयार करने के लिए देश-विदेश में ख्याति है । 15 पीढ़ियों से ये परिवार यही काम करता आ रहा है। परिवार का दावा है कि वे अब तक 131 मंदिरों के Design तैयार कर चुके हैं। 

अयोध्या में राम मंदिर के Design पर सबसे पहले इस परिवार के चंद्रकांत सोमपुरा ने तीन दशक से भी ज्यादा पहले काम करना शुरू किया। उन्होंने राम मंदिर के लिए एक भव्य डिजाइन बनाया, जिसे बाद में 1990 के दशक की शुरुआत में इलाहाबाद कुंभ के दौरान संतों द्वारा अनुमोदित किया गया था। 

chandrakant sompura

चंद्रकात अब 77 वर्ष के हैं। परिवार की मंदिर Design की पंरपरा को अब चंद्रकांत के दो बेटे निखिल (55) और आशीष (49) आगे बढ़ा रहे हैं। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलने वाले चंद्रकांत सोमपुरा ने अपने बेटों के साथ 131 मंदिरों को डिजाइन किया है। इसमें गांधीनगर में स्वामी नारायण मंदिर, पालनपुर में अंबाजी मंदिर और कई अन्य शामिल हैं।
निखिल बताते हैं कि गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के Re-construction का Design उनके दादा प्रभाशंकर सोमपुरा ने तैयार किया था। पद्मश्री से सम्मानित प्रभाशंकर सोमपुरा ने शिल्प-शास्त्र पर 14 किताबें भी लिखीं। नागर शैली में मंदिरों के Design के माहिर इस परिवार को वास्तुकला का यह गुण पीढ़ी दर पीढ़ी मिलता आया है।


नागर शैली की विशेषताएं-


इस शैली के सबसे पुराने उदाहरण गुप्तकालीन मंदिरों में, विशेषकर, देवगढ़ के दशावतार मंदिर और भितरगाँव के ईंट-निर्मित मंदिर में मिलते हैं | 

नागर शैली की दो बड़ी विशेषताएँ हैं – इसकी विशिष्ट योजना और विमान |

इसकी मुख्य भूमि आयताकार होती है जिसमें बीच के दोनों ओर क्रमिक विमान होते हैं जिनके चलते इसका पूर्ण आकार तिकोना हो जाता है | यदि दोनों पार्श्वों में एक-एक विमान होता है तो वह त्रिरथ कहलाता है| दो-दो विमानों वाले मध्य भाग को सप्तरथ और चार-चार विमानों वाले भाग को नवरथ कहते हैं | ये विमान मध्य भाग्य से लेकर के मंदिर के अंतिम ऊँचाई तक बनाए जाते हैं | 

मंदिर के सबसे ऊपर शिखर होता है |

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नागर मंदिर के शिखर को रेखा शिखर भी कहते हैं |

नागर शैली के मंदिर में दो भवन होते हैं – एक गर्भगृह और दूसरा मंडप| गर्भगृह ऊँचा होता है और मंडप छोटा होता है | 

गर्भगृह के ऊपर एक घंटाकार संरचना होती है जिससे मंदिर की ऊँचाई बढ़ जाती है |

नागर शैली के मंदिरों में चार कक्ष होते हैं – गर्भगृह, जगमोहन, नाट्यमंदिर और भोगमंदिर| 

प्रारम्भिक नागर शैली के मंदिरों में स्तम्भ नहीं होते थे |

8वीं शताब्दी आते-आते नागर शैली में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नए लक्षण भी प्रकट हुए| बनावट में कहीं-कहीं विविधता आई | जैसा कि हम जानते हैं कि इस शैली का विस्तार उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में बीजापुर तक और पश्चिम में पंजाब से लेकर पूरब में बंगाल तक था | इसलिए स्थानीय विविधता का आना अनपेक्षित नहीं था, फिर भी तिकोनी आधार भूमि और नीचे से ऊपर घटता हुआ शिखर का आकार सर्वत्र एक जैसा रहा| भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है |


25 अक्टूबर 2020

bazicha e atfal hai duniya mere aage hota hai shab-o-roz tamaasha mere aage mirza ghalib shayari

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मेरे आगे, होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे


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बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे

इक खेल है औरंग-ए-सुलेमाँ मेरे नज़दीक
इक बात है एजाज़-ए-मसीहा मेरे आगे

जुज़ नाम नहीं सूरत-ए-आलम मुझे मंज़ूर
जुज़ वहम नहीं हस्ती-ए-अशिया मेरे आगे

होता है निहाँ गर्द में सहरा मेरे होते
घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मेरे आगे

मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे

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सच कहते हो ख़ुद-बीन ओ ख़ुद-आरा हूँ न क्यूँ हूँ
बैठा है बुत-ए-आइना-सीमा मेरे आगे

फिर देखिए अंदाज़-ए-गुल-अफ़्शानी-ए-गुफ़्तार
रख दे कोई पैमाना-ए-सहबा मेरे आगे

नफ़रत का गुमाँ गुज़रे है मैं रश्क से गुज़रा
क्यूँकर कहूँ लो नाम न उन का मेरे आगे

ईमाँ मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र
काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे

आशिक़ हूँ प माशूक़-फ़रेबी है मेरा काम
मजनूँ को बुरा कहती है लैला मेरे आगे

ख़ुश होते हैं पर वस्ल में यूँ मर नहीं जाते
आई शब-ए-हिज्राँ की तमन्ना मेरे आगे

है मौजज़न इक क़ुल्ज़ुम-ए-ख़ूँ काश यही हो
आता है अभी देखिए क्या क्या मेरे आगे

गो हाथ को जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है
रहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मेरे आगे

हम-पेशा ओ हम-मशरब ओ हमराज़ है मेरा
'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो अच्छा मेरे आगे

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23 अक्टूबर 2020

What are the total No of branches of Manohar bikaneri all over India in hindi

पूरे भारत में मनोहर बीकानेरी की कुल कितनी शाखाएँ हैं?


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भारत अपनी स्वादिष्ट मिठाइयों और भोजन के लिए जाना जाता है। राजस्थान की बीकानेर सबसे पुरानी और सबसे अच्छी मिठाई के लिए भरोसेमंद है! बीकानेरी घराने की मिठाइयों को सबसे अच्छी मिठाई कहा जाता है।

मनोहर बीकानेरी भारत का पारंपरिक आतिथ्य उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण मीठा ब्रांड है। महान मनोहर बीकानेरी का स्वामित्व मनोहर लाल अग्रवाल के पास है। उन्होंने अपना व्यवसाय 1984 में दिल्ली में शुरू किया था।

दो भाइयों, मनोहर लाल अग्रवाल और मधुसूदन अग्रवाल ने दिल्ली में यह व्यवसाय शुरू किया। महान हल्दीराम। मिठाइयाँ और नमकीन अब अन्य देशों में भी निर्यात किए जाते हैं, इसमें मसालेदार स्वाद और भारतीय भोजन का मीठा स्वाद होता है। मिठाइयां दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।

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भुजिया-रसगुल्ला से मिली पहचान-

दो सगे भाई मनोहर लाल और मधुसूदन अग्रवाल की बीकानेर के बड़े बाजार में पुस्तैनी दुकान पर भुजिया-रसगुल्ला की बिक्री आज भी होती है। दोनों ही अग्रवाल बंधु समाज हित के कार्य करते रहते हैं। हल्दीराम समूह ने बीकानेर में हल्दीराम मूलचंद कार्डियो वस्कुलर एण्ड रिसर्च सेंटर हार्ट अस्पताल का निर्माण करवाया है जो एक अनुकरणी कार्य है।


गुणवत्ता का ध्यान-

हल्दीराम समूह के मनोहर लाल व मधुसूदन अग्रवाल ने कारोबार बीकानेर से दिल्ली स्थापित किया था। अग्रवाल परिवार ने कड़ी मेहनत और उच्च गुणवत्ता के दम पर इस बुलंदी को छुआ है।

इन दोनों भाइयों के दादा ने 1937 में बीकानेर की एक छोटी दुकान से नमकीन स्नैक्स बेचना शुरू कर दिया। बाद में, व्यवसाय को तीन अलग-अलग कंपनियों में विभाजित किया गया। हल्दीराम उनमें से एक है। अक्टूबर 2019 में हल्दीराम की कुल संपत्ति 1.7 बिलियन डॉलर थी |

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पूरे भारत में मनोहर बीकानेरी की कुल कितनी शाखाएँ हैं?

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हल्दीराम की दुनिया भर में लाखों शाखाएँ और दुकानें हैं। दुनिया भारतीय मसाले और मीठे को एक साथ मिलाना पसंद करती है। मनोहर बीकानेरी की पूरे भारत में हजारों शाखाएँ हैं। बीकानेरी मिठाइयां सबसे प्रसिद्ध, स्वादिष्ट और त्योहारों और अवसरों के दौरान सबसे ज्यादा मांग की जाती हैं।


18 अक्टूबर 2020

vitamin kya hai vitamin ke karya prakar vitamin ki kami se hone wale rog koun koun se hain 2020

विटामिन के कार्य, प्रकार और स्रोत क्या हैं? विटामिन की कमी से होने वाले रोग कौन कौन से  है ?


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विटामिन क्या है ? 

यह एक प्रकार का कार्बनिक यौगिक है इनमे कोई कैलोरी नही प्राप्त होती , परन्तु ये शरीर के उपापचय में रासायनिक प्रतिक्रियाओ के नियम के लिए अत्यंत आवश्यक है इसे रक्षात्मक पदार्थ भी कहा जाता है |

विटामिन के प्रकार - 

घुलनशीलता के आधार पर विटामिन दो प्रकार के होते है

1. जल में घुलनशील विटामिन, जैसे- विटामिन ‘B’, ‘C’

2. वसा में घुलनशील विटामिन, जैसे- विटामिन ‘A’, ‘D’, ‘K’ आदि।


विटामिन की खोज- 

विटामिन की खोज एफ.जी. हाफकिन्स ने की थी, परन्तु इसे विटामिन का नाम फन्क ने सन 1911 0 में दिया। विटामिन कार्बनिक यौगिक है, जो शरीर के विकास एवं रोगों से रक्षा के लिए आवश्यक है। ये ऊतकों में एन्जाइम का निर्माण करते है |

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विटामिन B12 में कोबाल्ट पाया जाता है |

विटामिन  D  का संश्लेष्ण सूर्य के प्रकाश में उपस्थित पराबैगनी किरणों द्वारा त्वचा के कोलेस्ट्रोल द्वारा होता है |

विटामिन K जीवाणुओं दवारा हमारे कोलन में संश्लेषित होता है तथा वहां से उसका अवशोषण होता है |


विटामिनों का संश्लेषण हमारे शरीर की कोशिकाओं दवारा नहीं हो सकता एवं इसकी पूर्ति विटामिन युक्त भोजन से होती है| तथापि,
 विटामिन D एवं K का संश्लेषण हमारे शरीर में होता है |


विटामिन के रासायनिक नाम व स्त्रोत व उनकी कमी से होने वाले रोग


क्रमांक

विटामिन का नाम

रासायनिक नाम

स्त्रोत

विटामिन की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग व लक्षण

1.

विटामिन

रेटिनॉल

अंडा, पनीर, हरी सब्जी, दूध, मछली का तेल

रतौंधी, त्वचा का शुष्क पड़ जाना

2.

विटामिन बी’1

थाइमीन

अनाज के छिलके, दाल, तिल, सब्जियां

बेरी-बेरी, भूख न लगना

3.

विटामिन बी’ 2

राइबोफ्लेविन

दूध, हरी सब्जियां, खमीर, मांस

जीभ में सूजन,मुख की त्वचा और होठों का फटना तथा आंखों का लाल हो जाना

4.

विटामिन बी’3

निकोटिनैमाइड या नियासिन

मांस, हरी सब्जी, दूध, अंडे,गन्ना, टमाटर

बाल सफेद होना, मंदबुद्धि

5.

विटामिन बी’ 5

पेंटोंथेनीक अम्ल

आलू टमाटर मूंगफली, पत्ति वाली सब्जियां

त्वचा का सूख जाना, डायरिया, मानसिक असंतुलन

6.

विटामिन बी’6

पायरीडॉक्सिन

दूध, कलेजी, हरी सब्जियां

एनीमिया, वृद्धि कम होना, चिड़चिड़ापन,  त्वचा संबंधी समस्याएं, शिशु के शरीर में ऐंठन

7.

विटामिन बी’ 7

निकोटिनिक अम्ल

दूध, मांस, यकृत, अंडा

पैलाग्रा

8.

विटामिन बी’12

साइनोकोबालामिन

यकृत, मांस, दूध

अरक्तता (एनीमिया) पांडूरोग

9.

विटामिन सी

एस्कार्बिक अम्ल

टमाटर, संतरा, खट्टे पदार्थ, मिर्च,  अंकुरित अनाज, आलू

स्कर्वी रोग, हड्डियों का कम विकास, घावों का देर से भरना, मसूड़ों से खून बहना

10.

विटामिन डी

कैल्सिफेरॉल

मक्खन, मांस-मछली, यकृत, अंडे की जर्दी, सूर्य का प्रकाश

रिकेट्स, अस्थियों की कोमलता तथा टेढ़ापन, दांतों का विकास न होना, दंतक्षय

11.

विटामिन

टोकोकोफेरॉल

दूध मक्खन हरी सब्जियां तेल कलेजी आदि

बांझपन, एनीमिया

12.

विटामिन के

फिलोक्विनोन

टमाटर, हरी सब्जियां, आँतों में भी उत्पन्न

रक्त स्कंदन( रक्त का थक्का न बनना)


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16 अक्टूबर 2020

what is trp how it is calculated and Importance of trp in Hindi trp kya hota hai 2020

टीआरपी क्या होता है ? इसकी गणना कैसे की 

जाती है ?और टीआरपी का क्या महत्व है?




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TV चैनल की TRP क्या होती है ?


TRP का फुल फॉर्म टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट’ (Television Rating Point) होता है| टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट्स किसी भी टेलीविज़न कार्यक्रम की लोकप्रियता और उसकी दर्शक संख्या का अनुमान लगाने का एक तरीका है। 


किसी तय समय पर किसी चैनल या टीवी शो को औसतन कितने लोग देख रहे हैं इस की गणना TRP की सहायता से की जाती है। TRP द्वारा ये पता लगाया जाता है कि कौन सा प्रोग्राम या TV चैनल सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। 


साथ ही इसके कारण किसी भी प्रोग्राम या चैनल की पॉपुलैरिटी को समझने में मदद मिलती है यानी कि लोग किसी चैनल या प्रोग्राम को कितनी बार और कितने समय के लिए देख रहे है। प्रोग्राम की TRP सबसे ज्यादा होना मतलब सबसे ज्यादा दर्शक उस प्रोग्राम को देख रहे हैं। 

अगर किसी शो या चैनल की टीआरपी ज्यादा है तो इसका मतलब है कि उस शो को ज्यादा लोग देख रहे हैं या पसंद कर रहे हैं। इसी के साथ अगर किसी शो की TRP बहुत कम है तो इसका मतलब है कि उस शो को देखने वाले लोगों की संख्या भी कम है।




TRP कैसे कैलकुलेट की जाती है, इसकी प्रक्रिया क्या है?


दुनिया भर में TRP कैलकुलेट करने के लिए कई सारे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है| इंडिया में TRP प्रमुखतया दो तरीकों से कैलकुलेट की जाती है-

पहला तरीका है People Meter का इस्तेमाल और 
दूसरा तरीका है Picture Matching.

1. People Meter:- टीआरपी की गणना करने का सबसे प्रमुख तरीका People Meter है | People Meter एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है जिसे जगह-जगह पर लोगों के घरों पर लगा दिया जाता है | पीपल मीटर ख़ास फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करके तय करता है कि ख़ास समय पर किस घर में कौनसा प्रोग्राम या चैनल देखा जा रहा है | इस डाटा को एक साथ इकट्ठा किया जाता है और फिर विश्लेषण के बाद साप्ताहिक या मासिक TRP लिस्ट जारी की जाती है |


2. Picture Matching:- यह एक कम पोपुलर तरीका है | इसमें अलग-अलग समय पर अलग-अलग जगह पर चल रहे टीवी सेट की स्क्रीन कैप्चर की जाती है और उससे पता लगाया जाता है कि किस टीवी पर कौनसा चैनल या कार्यक्रम देखा जा रहा था | एक ख़ास समय में जिस शो से जुड़े सबसे ज्यादा पिक्चर स्क्रीन रिकॉर्ड होते हैं उस शो की TRP सबसे ज्यादा होती है |


इंडिया में TRP रेटिंग कौन जारी करता है?

TRP रेटिंग कैलकुलेट करने का काम इंडिया में मुख्यतः INTAM (Indian Television Audience Measurement) और BARC (Broadcast Audience Research Council) एजेंसी द्वारा किया जाता है |


1. INTAM (Indian Television Audience Measurement) एजेंसी है जो लोगों के घरों में पीपलस मीटर (People's Meter) लगाती है और उन मीटर से प्राप्त हुए डाटा के आधार पर टीवी कार्यक्रमों की रेटिंग तय करती है | ये टीम पीपलस मीटर से मिली जानकारी का विश्लेषण करने के बाद तय करती है कि किस चैनल या प्रोग्राम की टीआरपी कितनी है| इसको गिनने के लिए एक दर्शक के द्वारा नियमित रूप से देखे जाने वाले प्रोग्राम और समय को लगातार रिकॉर्ड किया जाता है और फिर इस डाटा को 30 से गुना करके प्रोग्राम का एवरेज रिकॉर्ड निकाला जाता है| यह पीपल मीटर किसी भी चैनल और उसके प्रोग्राम के बारे में पूरी जानकारी निकाल लेता है|

2. BARC (Broadcast Audience Research Council) एक प्रमुख भारतीय ब्रॉडकास्ट रिसर्च एजेंसी है  ये चैनल TRP तय करने के लिए आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल करती है| BARC द्वारा BAR-O मीटर और Audio Watermark जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल करके किसी भी शो की विडियो फाइल के साथ कुछ ऑडियो वॉटरमार्क (एक प्रकार के अद्रश्य कोड) जोड़ देती है| जब दर्शक उस शो को देखते हैं और वह कोड उनके स्क्रीन पर दिखाई देता है तो इसे BARC के बार कोड मीटर द्वारा दर्ज कर लिया जाता है | बाद में इस डाटा को समय, प्रोग्राम,भाषा आदि केटेगरी में बांटकर और विश्लेषण करके साप्ताहिक TRP लिस्ट जारी की जाती है |


3. DART (Doordarshan Audience Research Team) भी TRP रेटिंग कैलकुलेट करने का काम करती है| DART मुख्यत: दूरदर्शन के कार्यक्रमों की लोकप्रियता मापने का काम करती है| इससे जुड़े लोग दूर दराज के गाँव तक में कौनसा कार्यक्रम देखा जा रहा है इसकी भी जानकारी इकठ्ठा करते हैं |


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टीआरपी का क्या महत्व है? Importance of TRP in Hindi


TRP को इतना ज्यादा महत्व इसीलिए दे जाता है क्योंकि इसका संबंध सीधा चैनल की कमाई से होता है। जिस चैनल को कम दर्शक देखते हैं उसकी टीआरपी गिर जाती है और उस पर एडवर्टाइजमेंट कम मिलते हैं।


TRP सबसे ज्यादा Advertisers के लिए महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि इससे उन्हें बड़ी आसानी से यह पता लग जाता है कि किस चैनल पर ऐड देने से उन्हें ज्यादा से ज्यादा फायदा होगा।


टी| आर| पी| डाटा विज्ञापनदाताओं के लिए बहुत उपयोगी होता है। हर विज्ञापनदाता सबसे ज्यादा टीआरपी वाले चैनल पर ऐड देना पसंद करता है, क्योंकि इससे उसे ज्यादा ऑडियंस मिलते हैं। 


जिस चैनल की जितनी ज्यादा टीआरपी होती है उसे उतने ही ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट मिलते हैं और उसकी उतनी ही ज्यादा कमाई होती है।

 


टीआरपी के बढ़ने या घटने पर क्या होता है?


किसी भी प्रोग्राम की टीआरपी के ज्यादा या कम होने का सीधा असर उस टीवी चैनल की इनकम पर पड़ता है | जिसमें वो प्रोग्राम आ रहा होता है| क्या आप जानते हैं कि टीवी चैनल्स है जैसे सोनी, स्टार प्लस, जी चैनल संग अन्य जितने चैनल हैं वे सभी विज्ञापन द्वारा पैसे कमाते हैं

अगर किसी प्रोग्राम या चैनल की टीआरपी कम है तो इसका मतलब है कि लोग उसे कम देख रहे हैं| ऐसे में उसे कम विज्ञापन और कम पैसे मिलेंगे| लेकिन अगर किसी चैनल या प्रोग्राम का टीआरपी ज्यादा है तो उसे विज्ञापन और विज्ञापनदाताओं द्वारा पैसे दोनों ज्यादा मिलेंगे

ऐसे में हम कह सकते है कि टीआरपी केवल चैनल ही नहीं बल्कि किसी एक प्रोग्राम पर भी निर्भर करती है| उदाहरण के लिए यदि किसी प्रोग्राम की टीआरपी अन्य प्रोग्रामों से ज्यादा है तो विज्ञापनदाता अपना विज्ञापन उसमें दिखाना चाहेंगे और ज्यादा पैसे भी देंगे | 


Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...