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31 जुलाई 2021

Rachel Carson silent spring pustak ka saransh Summary of the Silent Spring

रैचैल कार्सन- की पुस्तक साइलेंट स्प्रिंग  का सारांश 

 
रैचैल लुईस कार्सन Rachel Louise Carson (27 मई, 1907 - 14 अप्रैल, 1964) एक अमेरिकी समुद्री जीवविज्ञानी, लेखक और संरक्षणवादी थीं, जिनकी प्रभावशाली पुस्तक साइलेंट स्प्रिंग (निस्तब्ध बसंत) (1962) और अन्य लेखन को वैश्विक पर्यावरण आंदोलन को आगे बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है।

Rachel Carson


साइलेंट ​स्प्रिंग (Silent Spring) पुस्तक के लेखक रैचैल कार्सन (Rachel Carson) है। यह पुस्तक पर्यावरण विज्ञान पर आधारित है, जिसे 27 सितंबर, 1962 में कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग के कारण होने वाले प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभावों का दस्तावेजीकरण करते हुए प्रकाशित किया गया था। कार्सन ने रासायनिक उद्योग पर विघटन फैलाने का आरोप लगाया और सार्वजनिक अधिकारियों ने उद्योग के विपणन दावों को निर्विवाद रूप से स्वीकार कर लिया |

silent spring- rachel carson

पुस्तक ने पर्यावरण पर कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों का वर्णन किया है, और व्यापक रूप से पर्यावरण आंदोलन को शुरू करने में मदद करने का श्रेय दिया जाता है। कार्सन डीडीटी के बारे में चिंता व्यक्त करने वाले पहले या एकमात्र व्यक्ति नहीं थे, लेकिन "वैज्ञानिक ज्ञान और काव्य लेखन" का उनका संयोजन व्यापक दर्शकों तक पहुंचा और डीडीटी के उपयोग के विरोध पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की। 1994 में, उप राष्ट्रपति अल गोर द्वारा लिखित एक परिचय के साथ साइलेंट स्प्रिंग का एक संस्करण प्रकाशित किया गया था। 2012 में साइलेंट स्प्रिंग को आधुनिक पर्यावरण आंदोलन के विकास में अपनी भूमिका के लिए अमेरिकन केमिकल सोसाइटी द्वारा एक राष्ट्रीय ऐतिहासिक रासायनिक मील का पत्थर नामित किया गया था।

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बीसवीं सदी की सर्वाधिक प्रभावशाली पुस्तकों में शामिल लेखिका रैचैल कार्सन की पुस्तक- साइलेंट स्प्रिंग- के आलोचकों की कमी नहीं है। प्रकाशन के 50 साल बाद भी किताब और कारसन को आड़े हाथों लिया जा रहा है। विलियम साउडर ने कारसन की आत्मकथा - ऑन ए फारदर शोर- में लिखा है, कारसन ने कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से पर्यावरण के नष्ट होने और मानव स्वास्थ्य को नुकसान के बारे में आगाह किया था। इस पर केमिकल कंपनियों ने उन पर मुकदमे दायर कर दिए थे। 

कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनकी कम्युनिस्टों से मिलीभगत है, जो अमेरिका की खेती को ध्वस्त कर देना चाहते हैं। रसायन उद्योग के एक पूर्व प्रवक्ता ने कह दिया अगर लोग सुश्री कारसन की बातों को मानेंगे तो धरती पर कीड़ों और बीमारियों का राज हो जाएगा। 

स्तन कैंसर से कार्सन की मौत के 48 साल बाद भी आलोचक खामोश नहीं हुए हैं। अब दावा किया जा रहा है कि कीटनाशकों के खिलाफ कार्सन की लेखनी के कारण ही डाइक्लोरो डाइफिनाइल ट्राइक्लोरोइथेन (डीडीटी) कीटनाशक का उपयोग धीरे-धीरे बंद किया गया। 


कार्सन ने साइलेंट स्प्रिंग में जानवरों खासतौर से पक्षियों पर डीडीटी के जानलेवा असर के बारे में लिखा है। 1972 में अमेरिका की पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी ने उस पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया। पाबंदी के 40 साल बाद भी अमेरिकियों के शरीर में डीडीटी के अवशेष मिल जाएंगे। डीडीटी मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का सफाया करने में प्रभावी रही है। कई आलोचकों का कहना है, डीडीटी के खिलाफ मुहिम छेड़कर कार्सन ने जानलेवा बीमारी पर काबू पाने के प्रयासों को कमजोर किया है। 

अफ्रीका में मलेरिया से हर साल सैकड़ों लोग मरते हैं। 2005 में ब्रिटेन के राजनीतिज्ञ डिक टेवर्ने ने लिखा, कार्सन के डीडीटी विरोधी अभियान के कारण इतनी मौतें हुई हैं जितनी कि बीती सदी के क्रूर तानाशाहों के हाथों हुई हैं। 

कार्सन ने स्पष्ट किया था कि वे उन सभी कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं जो मानवों को कीड़ों से होने वाली बीमारियों से बचाते हैं। दरअसल वे शक्तिशाली रसायनों के संतुलित इस्तेमाल के पक्ष में थीं। जहां तक डीडीटी का सवाल है, कई विशेषज्ञों की धारणा है, यह कीटनाशक अफ्रीका में दूरदराज फैले गांवों में घने- बसे उत्तर अमेरिका की तुलना में अधिक असरकारक नहीं हो सकता था। 


साइलेंट स्प्रिंग ने आधुनिक ग्रीन मूवमेंट को जन्म दिया है। दूसरी तरफ यह भी साफ है कि केमिकल उद्योग किस तरह पर्यावरणवादियों के खिलाफ अभियान छेड़ता है।


साइलेंट स्प्रिंग नामक पुस्तक का सारांश-
 


साइलेंट स्प्रिंग नामक पुस्तक प्रकृति विज्ञान पर आधारित है , जो विभिन्न कारणों से से उत्त्पन्न पर्यावरण प्रदुषण पर आधारित है।

इस पुस्तक में उर्वरकों , केमिकल्स आदि के द्वारा प्रकृति में हो रहे नुकसान को काफी विस्तार से समझाया गया है।

इस पुस्तिका की लेखिका रेचल कार्सन ने काफी शोध के बाद उर्वरकों द्वारा फसलें उगाने के कारण मानव जीवन में पद रहे प्रतीकूल प्रभावों को बतलाया है।


इस पुस्तक के माध्यम से हमे सबसे पहले रासायनिक उर्वरकों से होने वाली कई बीमारियों और लम्बे समय तक होने वाले बुरे प्रभाव के बारे में पता चला।

25 जून 2021

Is truecaller safe for us or not truecaller ka use karen ya nahi

truecaller humare liye surkshit hai ya nahi

ट्रू कॉलर हमारे लिए कितना उपयोगी ? 

Is truecaller safe for us or not truecaller ka use karen ya nahi
truecaller




आपने Truecaller (ट्रूकॉलर) का नाम तो जरूर सुना होगा! अगर नहीं सुना है तो आज सुन लीजिए। यह दरअसल एक Caller ID और Spam Blocking सर्विस है, जिसका मुख्य काम है Caller ID बताना। यानि कि किसी फोन नंबर के मालिक का नाम बताना। अब आप लोग सोच रहे होंगे कि Truecaller को कैसे पता कि कौनसा नम्बर किसका है? तो इसके पीछे दरअसल आप और हम जैसे लाखों यूजर्स का कीमती Data है और यही हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा है। आज हम यही जानने की कोशिश करेंगे की क्या true caller हमारे लिए सुरक्षित है जा नहीं।

Is truecaller safe for us or not truecaller ka use karen ya nahi

Truecaller का काम करने का तरीका बहुत ही simple है। जब आप अपने फोन में Truecaller App को Install करते हैं तो यह आपसे Contacts को एक्सेस करने की Permission माँगती है। और जैसे ही आप इसे परमिशन देते हैं, यह आपके सारे के सारे Contacts को अपने सर्वर पर अपलोड कर लेती है और पूरी दुनिया को बांट देती है। अब आप कहेंगे कि अगर ऐसा है तो परमिशन को Allow ही मत करो। पर समस्या यह है कि जब तक आप permission को Allow नहीं करेंगे, तब तक यह App काम ही नहीं करेगी। यानि कि अगर आपको truecaller app use करनी है, तो इसे Contacts की permission देनी ही पड़ेगी। यह अनिवार्य है।


अगर आपने एक बार अपने फोन में true caller App को Install कर लिया तो आपके सारे Contacts true caller के server पर upload हो जाऐंगे। फिर चाहे आप app को use करें या ना करें, अपने फोन में रखें या ना रखें, कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि ऐप को Un-Install करने के बाद भी आपके Contacts true caller के server पर मौजूद रहेंगे। आज तक जितने भी लोगों ने true caller app को अपने फोन में install किया है, उन सबके Contacts true caller के server पर मौजूद हैं। और इन्हीं Contacts की मदद से true caller आपको Unknown Numbers की जानकारी देता है।

True caller की Privacy Policy में साफ-साफ लिखा है कि वह अपने यूजर्स के Data को Third Party कंपनियों और दूसरे देशों के साथ शेयर कर सकती है। मतलब आपका Data किसी और कंपनी या देश को बेचा जा सकता है। और मजे की बात पता है क्या है? आप इसका विरोध नहीं कर सकते। क्यों? क्योंकि आप true caller के Terms & Conditions से पूरी तरह सहमत हैं। ये देखिए…

क्या इसके इलावा हमारे पास कोई विकल्प है?


अगर दो-तीन नम्बर्स की जानकारी के लिए मैं Truecaller Mobile App Use करूँ और अपना सारा का सारा Data ट्रूकॉलर को दे दूँ तो मुझसे बड़ा बेवकूफ इस दुनिया में कोई नहीं होगा। इसलिए मैं Truecaller Web का इस्तेमाल करता हूँ। जी हाँ, सही सुना आपने। मैं अपने फोन में ट्रूकॉलर की मोबाइल ऐप नहीं रखता, बल्कि Browser की मदद से ही इस ऐप के सभी फीचर्स को यूज करता हूँ। कैसे? बहुत ही सिंपल है। अपने फोन के किसी भी ब्राउजर में ट्रूकॉलर की को Open कीजिए और एक फर्जी Email ID से एक Truecaller Account बना लीजिए। ध्यान रहे, आपको अपना मोबाइल नम्बर या पर्सनल Email ID नहीं देनी है। अब जब भी आपको किसी Unknown Number के Owner की जानकारी लेनी हो, आप अपने browser में Truecaller की वेबसाइट खोलकर उस नम्बर को सर्च कर लीजिएगा। आपका काम हो जाएगा। तो इस तरह आप बिना App के भी true caller की सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

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21 जून 2021

prathamesh jaju made an amazing picture of moon captures the clearest pic of moon in hindi

प्रथमेश जाजू ने ली चंद्रमा की सबसे विस्तृत, सुंदर और स्पष्ट तस्वीर 


prathamesh jaju made an amazing picture of moon captures the clearest pic of moon in hindi
 clearest pic of moon prathamesh jaju


prathamesh jaju made an amazing picture of moon

पुणे के एक 16 वर्षीय लड़के प्रथमेश जाजू ने चंद्रमा की सबसे विस्तृत, सुंदर और सबसे स्पष्ट तस्वीरों में से एक को कैप्चर किया है। तस्वीर का आकार आपको हैरान कर देगा मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक चांद की बेहद साफ और रंगीन तस्वीरें (clearest pic of moon) क्लिक करने वाले प्रथमेश जाजू  ने करीब 50 हजार से ज्यादा फोटो क्लिक कीं और इस काम में करीब 186 जीबी डेटा इस्तेमाल किया । 

लगभग 50,000 फ़ोटो को (processing) संसाधित करने में उन्हें लगभग 40 घंटे लगे । इस प्रक्रिया के दौरान रॉ डाटा करीब 100 जीबी था और जब आप इसे प्रोसेस किया तो यह डाटा बढ़ गया तो यह करीबन 186 जीबी तक पहुंच गया था। 

जाजू ने बताया कि जब मैंने इन सभी को एक साथ मिलाया तो वह करीबन 600MB तक हो गया था। 3 मई को दोपहर 1 बजे फोटो क्लिक की गई । वीडियो और फोटो के साथ करीब 4 घंटे यह प्रक्रिया चली। इस प्रोसेस में करीबन 38-40 घंटे का समय लगा। इसमें 50 हजार फोटो क्लिक करने के पीछे की वजह चांद की सबसे क्लियर फोटो क्लिक करना था। मैंने इन सभी को एक साथ मिल दिया और चांद की साफ फोटो को तैयार किया।


prathamesh jaju made an amazing picture of moon captures the clearest pic of moon in hindi
Pune young boy prathamesh jaju

 
पुणे के प्रथमेश जाजू, जो अपनी तस्वीर वायरल होने के बाद इंटरनेट सनसनी बन गए, प्रथमेश खुद को "शौकिया खगोलशास्त्री" कहते हैं । जाजू चांद की खींची हुई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं ।

पुणे के विद्या भवन हाई स्कूल की दसवीं की छात्रा का कहना कि वह किस प्रकार तस्वीर लेते हैं। उन्होंने बताया कि दो अलग-अलग फोटो का एक HDR कंपोसाइट है। इस फोटो को 3- डाइमेंशनल इफेक्ट देने के लिए यह किया गया था। उन्होंने कहा कि यह थर्ड क्वार्टर के मिनरल मून का सबसे क्लियर शॉट है।

प्रथमेश जाजू ने अपनी इस विलक्षण तस्वीर को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है और अब लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं। जाजू ने इसे 'एचडीआर लास्ट क्वॉर्टर मिनरल मून' (Last Quarter Mineral HDR Moon Composite) का नाम दिया है।


प्रथमेश पेशेवर रूप से खगोल विज्ञान को अपनाना चाहते हैं। जाजू ने कहा, "मैंने कुछ लेख पढ़े और कुछ YouTube वीडियो देखे मैंने वहां प्रोसेसिंग के बारे में जानकारी इकट्ठा की और इन तस्वीरों को कैप्चर करने के तरीके को समझा । मैं एक खगोल भौतिकीविद् बनना चाहता हूं और पेशेवर रूप से खगोल विज्ञान का अध्ययन करना चाहता हूं, लेकिन अभी मेरे लिए एस्ट्रोफोटोग्राफी सिर्फ एक शौक है।"

मैंने पहली बार चंद्रमा के विभिन्न छोटे क्षेत्रों पर कई वीडियो कैप्चर करके उन्हें कैप्चर किया। प्रत्येक वीडियो में लगभग 2000 फ़्रेम होते हैं, पहले हम उन्हें स्थिर करते हैं, फिर हम प्रत्येक वीडियो को एक छवि में मर्ज और स्टैक करते हैं। इसलिए मैंने लगभग 38 वीडियो लिए। अब हमारे पास 38 चित्र हैं। हम उनमें से प्रत्येक को मैन्युअल रूप से तेज करते हैं और फिर उन्हें फ़ोटोशॉप में एक बड़े मोज़ेक की तरह एक साथ सिलाई करते हैं। एक बार मोज़ेक हो जाने के बाद, कुछ और समायोजन किए जाते हैं और कुछ अंतिम टच-अप और बूम! 


छवि के लिए उनके इंस्टाग्राम कैप्शन में से एक के अनुसार, जाजू ने कहा कि उन्होंने फोटो लेते समय Celestron 5 Cassegrain OTA (टेलीस्कोप), एक ZWO ASI120MC-S सुपर-स्पीड USB कैमरा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने रंगों के लिए कैनन EOS 90D (APS-C CMOS सेंसर के साथ) स्काईवॉचर 8 ”कोलैप्सिबल रिफ्लेक्टर डोबसनियन का इस्तेमाल किया। 

विस्तृत पोस्ट-प्रोसेसिंग के लिए, जाजू ने PIPP, Autostakkert, IMPPG, Registax 6, Adobe Photoshop और Lightroom जैसे सॉफ़्टवेयर का उपयोग किया। जबकि छवि में चंद्रमा का रंग असामान्य प्रतीत होता है, जाजू के अनुसार, रंग चंद्रमा पर खनिजों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें हमारी आंखें नहीं बल्कि डीएसएलआर कैमरे और अन्य विशिष्ट कैमरे स्पष्ट करते हैं।

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18 जून 2021

Corona vaccine types of covid vaccine in hindi

कोरोना वेक्सीन के प्रकार

Corona vaccine types of covid vaccine in hindi
प्रतीकात्मक फोटो 


कोरोना वायरस से निपटने के लिए बन रही वैक्सीन अलग-अलग प्रकार की होती है| वायरस के स्ट्रेन के बेस, उससे निपटने के तरीके के आधार पर इनमें अंतर होता है| अलग-अलग प्रकार की वैक्सीन का असर भी अलग-अलग तरीके से होता है

विशेषज्ञों के मुताबिक, मूल रूप से देखें तो कोरोना वैक्सीन चार प्रकार की हैं और वो हैं- 

1. प्रोटीन आधारित वैक्सीन 
2. वायरल वेक्टर वैक्सीन 
3. आरएनए-डीएनए आधारित वैक्सीन  
4. निष्क्रिय या कमजोर पड़ चुके वायरस से बनी वैक्सीन।


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इन वैक्सीन्स को तैयार करने के पीछे मकसद है मानव शरीर के इम्युन सिस्टम को इस तरीके से ट्रेन्ड करना है कि वह कोरोना वायरस की पहचान कर शरीर में उसके संक्रमण को रोकने के काबिल बन सके  मूल रूप से देखा जाए तो कोरोना वैक्सीन 4 प्रकार की होती हैं:-


1. आरएनए-डीएनए आधारित वैक्सीन-

आरएनए-डीएनए आधारित वैक्सीन को बनाने में कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड का इस्तेमाल किया जाता है। इसके एक छोटे से हिस्से को जब व्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है तो यह शरीर में वायरल प्रोटीन बनाता है, न कि पूरा वायरस। इस तरह शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र वायरस पर हमला करने के लिए तैयार हो जाता है। मॉडर्ना कंपनी ने आरएनए आधारित वैक्सीन ही बनाई है, जिसे अमेरिका ने हाल ही में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी है।


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2. प्रोटीन आधारित वैक्सीन- 

इस तरह की वैक्सीन को बनाने में कोरोना वायरस के प्रोटीन सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें प्रोटीन सेल्स से वायरस स्ट्रेन के जरिए इम्यूनिटी विकसित की जाती है।


3.वायरल वेक्टर वैक्सीन-

वायरल वेक्टर वैक्सीन को बनाने के लिए पहले वायरस स्ट्रेन को संक्रमणमुक्त किया जाता है और फिर उसके इस्तेमाल से कोरोना वायरस प्रोटीन विकसित किया जाता है। इसके बाद उन प्रोटीन्स के जरिए शरीर में इतनी इम्यूनिटी विकसित की जाती है कि वो वायरस के संक्रमण को रोक ले। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन और रूस की 'स्पूतनिक-वी' वायरल वेक्टर आधारित वैक्सीन ही है। 


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4. निष्क्रिय या कमजोर पड़ चुके वायरस से बनी वैक्सीन 

इस तरह की वैक्सीन को बनाने के लिए निष्क्रिय हो चुके या कमजोर पड़ चुके ऐसे वायरस के स्ट्रेन का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें संक्रमण फैलाने की क्षमता खत्म हो चुकी होती है। इससे शरीर वायरस से लड़ना सीखता है और उसके खिलाफ इम्यूनिटी विकसित करता है, जो बाद में सक्रिय वायरस से लड़ने में काम आती है। चीन की कोरोनावैक इसी पर आधारित वैक्सीन है।


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17 जून 2021

sagar kavach kya hai coastal security exercise sagar kavach


तटीय सुरक्षा अभ्यास 'सागर कवच' क्या है? 


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तटीय सुरक्षा अभ्यास 'सागर कवच' क्या है?

तटीय सुरक्षा अभ्यास सागर कवच भारतीय नौसेना द्वारा इंडियन कोस्टगार्ड और केरल की तटीय सुरक्षा में लगे सभी हितधारकों के साथ दो दिवसीय तटीय सुरक्षा अभ्यास को सागर कवच का नाम दिया गया । यह संयुक्त अभ्यास कोच्चि केंद्र की निगरानी में किया गया। 

सागर कवच तटीय सुरक्षा तंत्र की क्षमता परखने और मानक संचालन प्रक्रियाओं का जायजा लेने के उद्देश्य से किया जाना वाला एक अर्ध-वार्षिक अभ्यास है । 

केरल, कर्नाटक और लक्षद्वीप के तटीय क्षेत्रों में आयोजित किया जाने वाला यह अभ्यास देश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति की पृष्ठभूमि में अहम माना जाता है। यह संयुक्त अभ्यास कोच्चि केंद्र की निगरानी में किया गया। 


मुख्य विचार:-
 


सागर कवच का उद्देश्य तटीय सुरक्षा तंत्र की जांच करना और मानक संचालन प्रक्रियाओं को मान्य करना है |

दो दिवसीय अभ्यास के दौरान, भारतीय नौसेना और तटरक्षक के 20 जहाजों ने भाग लिया। कई सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संचालित 50 गश्ती विमानों ने भी अभ्यास में भाग लिया

तटीय पुलिस, तटीय जिला प्रशासन, कोओचिन बंदरगाह, मत्स्य विभाग, सीमा शुल्क, समुद्री प्रवर्तन विंग (MEW), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), खुफिया ब्यूरो (IB), लाइटहाउस विभाग और मछुआरा समुदाय ने तटीय सुरक्षा अभ्यास में भाग लिया। मल्टी-लेयर सिक्योरिटी, सीवर्ड से घुसपैठ, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों / संपत्तियों पर नकली हमले, व्यापारी जहाजों का अपहरण, और क्रॉस लैंडिंग का प्रयोग किया गया |


सागर कवच अभ्यास क्यों आयोजित किया गया था?

समुद्र से निकलने वाले एक असममित खतरे से निपटने के लिए सभी एजेंसियों की तैयारियों को जांचने के लिए अभ्यास आयोजित किया गया था।


सागर कवचअभ्यास कैसे किया गया?

प्रतिभागियों को दो टीमों में विभाजित किया गया था- रेड (हमला) और ब्लू (रक्षा)। रेड टीम ने महत्वपूर्ण बिंदुओं पर हमला करके तटीय क्षेत्रों में घुसपैठ करने का प्रयास करने वाले आतंकवादियों के रूप में कार्य किया, जबकि ब्लू टीम ने तटीय सुरक्षा निगरानी की मदद से प्रयासों को निष्क्रिय कर दिया और बेअसर कर दिया।

भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के हेलिकॉप्टरों और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) और विरोधी बल के जहाजों का पता लगाने के लिए आस-पास के समुद्रों की व्यापक वायु गश्त और निगरानी का भी अभ्यास किया गया।


अभ्यास की आवश्यकता क्यों ? 

1993 बॉम्बे बॉम्बिंग और 2008 मुंबई अटैक खराब समुद्री सीमा के कारण हुआ। दोनों ही मामलों में, आतंकवादी समुद्र के रास्ते देश में दाखिल हुए। इसलिए, सीमा से निकलने वाली चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए, मजबूत तटीय सुरक्षा की आवश्यकता है।
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Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...