08 अगस्त 2020

HOW TO PLAY 2048 GAME

HOW TO PLAY 2048 GAME



आज कल इन्इटरनेट पर एक गेम ने धूम मचा रखी है जिसका नाम 2048 है|

इस गेम को  ईटली के उन्नीस वर्षीय युवा Gabriele Cirulli का बनाया है इस खेल ‘2048’ को दुनिया भर में करोड़ों लोगों द्वारा डाउनलोड किया जा चुका है| आइये जानते है क्यों लोगों को लगा है इस गेम का चस्का और कितना आसान है इसे ऑनलाइन खेलना


क्या है 2048 खेल?


इस खेल के प्रारंभ में निम्न स्क्रीन आपका स्वागत करती है:-



https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/



कैसे खेलें इसे?

इसके बाद, इस खेल को खेलने के लिए आपको सिर्फ चार नियंत्रणों का प्रयोग करना होता है – वे है “दायें, बाएं, ऊपर, नीचे,
यदि आप टच स्क्रीन मोबाइल पर यह गेम खेल रहे है, तो इसके लिए आप इन चारों दिशाओं में स्वाइप करके इस गेम को नियंत्रित कर सकते है, और कंप्यूटर पर खेलते समय अपनी चारों एरो key का प्रयोग कर यह गेम खेल सकते है|



खेल 2048 को खेलने के नियम है-


1.आपको इस गेम को खेलने के लिए चारों एरो --> KEY का उपयोग करना होगा

2.आप जिस भी दिशा में स्वाइप करेंगे या की दबायेंगे, स्क्रीन की सभी संख्याएँ उस दिशा में खिसक जाएगी

3.एक ही दिशा में खिसकी दो संख्याएँ यदि समान है, तो दोनों खिसकने के साथ ही जुड़ जाएँगी

इस प्रकार आप इस खेल में संख्याओं को खिसकाते और जोड़ते हुए आगे बढ़ते जाते है, और इस खेल का अंतिम लक्ष्य रहता है 2048 की संख्या को हासिल करना|


इस गेम को कहाँ से खेल सकते हैं-

आप इस गेम को ऑनलाइन   https://2048freeplay.blogspot.com/ पर जाकर 

खेल सकते  हैं

06 अगस्त 2020

Lines of Longitude and Latitude in hindi

पृथ्वी की देशांतर एवं अक्षांश रेखाएं 

Estimated reading time: 8 minutes, 18 seconds.



Lines of Longitude and Latitude in hindi

अक्षांश और देशांतर रेखाओं का क्या महत्व है?


अक्षांश और देशांतर रेखाएं पृथ्वी पर खींची गई काल्पनिक रेखाएं होती है। इनकी माप अंश में की जाती है। इनका सर्वाधिक उपयोग पृथ्वी के किसी बिंदु की स्थिति को पता लगाने में किया जाता है। आइए समझते है थोड़ा इन रेखाओं के महत्त्व को


आक्षांश रेखा (Latitude)-

Lines of Longitude and Latitude in hindi
अक्षांश रेखा 

विषुवत रेखा के सामानांतर ग्लोब पर पूरब से पश्चिम की तरफ खीची गयी रेखा को अक्षांस रेखा कहते है । 

विषुवत रेखा से उतर की ओर एक एक डिग्री पर अक्षांश रेखा खिची जाय तो हमें 90 आक्षांश रेखा प्राप्त होगी जिन्हें हम उत्तरी अक्षांश रेखा कहेंगे । 

ठीक उसी प्रकार विषवत रेखा के दक्षिण में एक एक डिग्री पर अक्षांश रेखा खींचने पर हमें 90 अक्षांश रेखा प्राप्त होगी जिन्हें हम दक्षिणी अक्षांश रेखा कहेंगे । 

इस प्रकार कुल आक्षांश रेखा की संख्या 180 होती है । 

विषुवत वृत्त या भूमध्य रेखा भी एक अक्षांश रेखा ही है । और इस प्रकार कुल मिलाकर अक्षांश रेखा की संख्या 181 हो जाएगी 

सभी अक्षांश रेखाएं समांतर होती हैं। तथा इन्हें अंश ( ° ) में प्रदर्शित की जाती हैं। 

दो अक्षांशों के मध्य की दूरी 111 किमी. होती है। 

विषुवत वृत्त 0 डिग्री अक्षांश को प्रदर्शित करता है। 

विषुवत वृत्त के उत्तर के सभी अक्षांश उत्तरी अक्षांश तथा दक्षिण के सभी अक्षांश दक्षिणी अक्षांश कहलाते हैं। 

पृथ्वी पर खींचे गए अक्षांश वृत्तों में विषुवत वृत्त सबसे बड़ा है। इसकी लम्बाई 40069 किमी. है। 

कर्क वृत्त ( अक्षांश रेखा ) धरातल पर उत्तरी गोलार्द्ध में विषुवत वृत्त से 23½°की कोणीय दूरी पर खींचा गया काल्पनिक वृत्त है। 

मकर वृत्त धरातल पर दक्षिणी गोलार्द्ध में विषुवत रेखा से 23½° की कोणीय दुरी पर खींचा गया काल्पनिक वृत्त है। 

आर्कटिक वृत्त धरातल पर उत्तरी गोलार्द्ध में विषुवत रेखा से 66½° की कोणीय दूरी पर खींचा गया काल्पनिक वृत्त है। 

अंटार्कटिक वृत्त धरातल पर दक्षिणी गोलार्द्ध में विषुवत वृत्त से 66½° की कोणीय दूरी पर खींचा गया काल्पनिक वृत्त है। 

कर्क तथा मकर वृत्त के बिच सभी अक्षांशों पर मध्याह्न का सूर्य दिन में कम से कम एक बार ठीक सिर के ऊपर होता है । अतः इस क्षेत्र में सबसे अधिक गर्मी रहती है, इसे ‘उष्ण कटिबंध’ कहते हैं । 

कर्क वृत्त के उत्तर में तथा मकर वृत्त के दक्षिण में मध्याह्न का सूर्य कभी भी ठीक सिर के ऊपर नहीं चमकता । सूर्य की किरणों का कोण धु्रवों की ओर घटता जाता है । इसके फलस्वरूप उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क वृत्त तथा आर्कटिक वृत्त के बीच एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर वृत्त तथा अंटार्कटिक वृत्त के बीच साधारण तापमान रहता है । अतः यहाँ न तो अधिक सर्दी पड़ती है और न ही अधिक गर्मी । इसी कारण इसे ‘‘शीतोष्ण कटिबंध’ कहते हैं । 

उत्तरी गोलार्द्ध में आर्कटिक वृत्त तथा उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अंटार्कटिक वृत्त और दक्षिणी ध्रुव के बीच के क्षेत्रों में काफी ठण्ड पड़ती है । इसका कारण यह है कि यहां सूर्य क्षितिज के ऊपर नहीं जाता । सूर्य की किरणें यहाँ काफी तिरछी पड़ती है । इसी कारण इन्हें ‘‘शीत कटिबंध” कहते हैं।


अक्षांश रेखाओं का क्या महत्व है?



कुछ प्रमुख अक्षांश रेखाएं होती है, जो पृथ्वी को अलग अलग जलवायु प्रदेशों में बांटती है। 23 अंश 30 मिनट उत्तरी और दक्षिणी अक्षांश रेखाओं को क्रमशः कर्क और मकर रेखाएं कहते हैं। 

इसके बाद 66 अंश 30 मिनट उत्तरी और दक्षिणी अक्षांश को क्रमशः आर्कटिक और अंटार्कटिका वृत्त कहते हैं।

अब देखिए कर्क और मकर रेखाओं के बीच के क्षेत्र को उष्ण कटीबंध कहते हैं। जोकि ऐसा क्षेत्र है जहाँ सूर्य की किरणें वर्ष में एक ना एक बार लंबवत होती ही हैं, जिस कारण यह थोड़ा गर्म क्षेत्र होता है। 

इसके बाद कर्क रेखा से आर्कटिक वृत्त और मकर रेखा से अंटार्कटिका वृत्त के बीच के क्षेत्र को शीतोष्ण कटिबंध कहते हैं। 

इसके अतिरिक्त आर्कटिक वृत्त और अंटार्कटिका वृत्त के बीच का क्षेत्र शीत कटिबंध कहलाता है। यह क्षेत्र ठंडा क्षेत्र होता है और जनसंख्या और वनस्पति नाम मात्र की होती है। अर्थात ये रेखाएं एक विशिष्ट जलवायु क्षेत्र को प्रदर्शित करती हैं।


देशान्तर रेखा (Longitude) 

Lines of Longitude and Latitude in hindi
देशान्तर रेखा 


आक्षांश रेखा के लंबवत उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली अर्धवृत्ताकार लाइन को देशांतर रेखा कहते हैं । 

देशांतर रेखा उत्तर से दक्षिण की ओर खींची जाती है । 

चुकी एक बिंदु पर 360 डिग्री का कोन होता है तो इस प्रकार अगर एक-एक डिग्री पर रेखाएं खींची जाए तो हमें 360 देशांतर रेखा प्राप्त होगी । तो इस प्रकार कुल देशांतर रेखाओं की संख्या 360 है । 

दो देशांतर रेखाओं के बीच अधिकतम दूरी भूमध्य रेखा के पास 111.32 किलोमीटर होती है । 

भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी घटती जाती है । 

लंदन के एक शहर ग्रीनविच से गुजरती हुई एक देशांतर रेखा को 0 डिग्री देशांतर रेखा माना गया है जिसे ” प्रधान मध्यान्ह देशांतर रेखा” ( Prime Meridian ) भी कहते हैं । चुकी यह रेखा ग्रीनविच नामक शहर से गुजरती है अतः इस रेखा को ग्रीनविच रेखा भी कहा जाता है । 

दुनिया का मानक समय ग्रीनविच रेखा से ही ज्ञात की जाती है । 

ग्रीनविच रेखा पृथ्वी को लंवबत दो भागों में बांटती है , पूर्वी भाग तथा पश्चिमी भाग । 

ग्रीनविच रेखा से पूर्व दिशा में स्थित 180 देशांतर रेखाओं को पूर्वी देशांतर रेखा कहते हैं तथा ग्रीनविच रेखा से पश्चिम की ओर 180 देशांतर रेखाओं को पश्चिमी देशांतर रेखाएं कहते हैं । 

प्रथ्वी 24 घंटो में एक चक्कर लगाती है । अर्थात पृथ्वी 24 घंटो में 360° घूम जाती है । तो पृथ्वी को 1° घुमने में 4 मिनट का समय लगेगा । अर्थात पृथ्वी को 1° देशांतर तय करने में 4 मिनट का समय लगता है । 

पृथ्वी अपने काल्पनिक अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर धूमती है । अतः ग्रीनविच से पूर्व के स्थानों का समय ग्रीनविच समय से आगे होगा एवं पश्चिम के स्थानों का समय पीछे होगा । 

जब ग्रीनविच पर दोपहर के 12 बजते हैं, उस समय ग्रीनविच के पूर्व में 15° देशान्तर पर 15 × 4 = 60 मिनट यानी 1 घंटा समय आगे रहेगा । किंतु ग्रीनविच के पश्चिम में 15° देशान्तर पर समय ग्रीनविच समय से एक घंटा पीछे होगा । 

किसी स्थान पर जब सूर्य आकाश में सबसे अधिक ऊँचाई पर होता है, उस समय दिन के 12 बजे होते हैं । इस समय को वहां का स्थानीय समय कहते हैं । एक देशान्तर रेखा पर स्थित सभी स्थानों का स्थानीय समय एक ही होता है । 

प्रत्येक देश की एक केन्द्रीय देशांतर रेखा (मानक मध्याह्न रेखा) के स्थानीय समय को ही संपूर्ण देश का मानक समय माना जाता है । भारत में 82.5° पूर्वी देशान्तर रेखा को यहां की मानक मध्याह्न रेखा माना जाता है । इस देशान्तर रेखा के स्थानीय समय को सारे देश का मानक समय माना जाता है। 

82.5° पूर्वी देशांतर रेखा भारत में इलाहबाद के नैनीताल से होकर गुजरती है । 

चूंकि कुछ देशों का देशान्तरीय विस्तार अधिक है, इसलिए वहां सुविधा के लिए एक से अधिक मानक समय मान लिए गए हैं । जैसे कि रूस में 11 मानक समय हैं । 

हमारे देश का मानक समय ग्रीनविच मीन टाइम से 5 घण्टे 30 मिनट आगे है ।


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देशान्तर रेखाओं का क्या महत्व है?

 

अक्षांश के मुकाबले देशांतर रेखाओं का महत्त्व अधिक है। इनके द्वारा किसी स्थान का समय ज्ञात करने में किया जाता है। किसी स्थान पर जब सूर्य एकदम सर के ऊपर होता है तो, उसको स्थानीय समय कहते हैं। 

एक देशांतर पर स्थानीय समय एक होता है। इस कारण एक देशांतर पर समय समान होता है। दो देशांतर के बीच 4 मिनट का अंतर होता है। 

कभी कभी किसी देश का देशांतर विस्तार अधिक होने के कारण वहां एक से अधिक स्थानीय समय या समय जोन होते हैं जैसे रूस में 11, ऑस्ट्रेलिया में 9 और चीन में 2 टाइम ज़ोन हैं आदि। 

भारत का भी देशांतर विस्तार अधिक है इसीलिए यहां 82 अंश 30 मिनट रेखा को पूरे भारत के लिए मानक समय माना गया है। 

भारत के पूर्वी और पश्चिमी किनारों के बीच लगभग 2 घंटे का अंतर पाया जाता है। इस कारण अरूणांचल प्रदेश में गुजरात की अपेक्षा शाम को अंधेरा भी जल्दी हो जाता है और सूर्योदय भी पहले हो जाता है। 

हालांकि भारत में भी उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए चाय बागान समय जोन की मांग उठती रही है। इसके अतिरिक्त 180 अंश देशांतर रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं, इस रेखा के पश्चिम में जाने पर एक दिन कम होता है, जबकि पूर्व की ओर एक दिन बढ़ जाता है।


भूमध्य रेखा (Equator)

यदि एक काल्पनिक रेखा द्वारा पुरे पृथ्वी को क्षैतिज रूप से दो बराबर भाग में बाँट दिया जाय तो उस वृतिय रेखा को विषुवतीय वृत्त रेखा या भूमध्य रेखा ( Equator ) कहेंगे । 

विषुवत रेखा से उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव की दुरी सामान होती है | 

इस प्रकार भूमध्य रेखा पृथ्वी को दो बराबर भागों में उत्तर एवं दक्षिण के रूप में विभाजित करता है । 

भूमध्य रेखा के उत्तरी भाग को उतरी गोलार्द्ध तथा भूमध्य रेखा के दक्षिणी भाग को दक्षिणी गोलार्द्ध कहते है । 

भूमध्य रेखा एक वृताकार रेखा ही होगी जो पृथ्वी के चारो ओर घुमती हुई वृताकार पथ बनाएगी । 

विषुवत वृत्त या भूमध्य रेखा को 0° माना गया है क्यूंकि यह मध्य में है । 

पृथ्वी के सबसे उपरी बिंदु को उतरी ध्रुव ( North Pole ) तथा पृथ्वी के सबसे दक्षिणी बिंदु को दक्षिणी ध्रुव ( South Pole ) कहते है । 
उतरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा को पृथ्वी का अक्ष कहते है , जो पृथ्वी के केंद्र से होकर जाती है । पृथ्वी इसी अक्ष को केंद्र बनाकर घुमती रहती है ।




अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा ( International Date Line ) 

Lines of Longitude and Latitude in hindi
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा 


यह प्रशांत महासागर पर मौजूद 180° देशांतर रेखा है, यह अल्यूशियन द्वीप समूह, फिजी, सामोआ और गिल्बर्ट आइलैंड्स में अपने सीधे मार्ग से विचलित हो जाता है। यह एक ज़िग-ज़ैग रेखा है। 


पश्चिम से पूर्व की ओर तिथि रेखा को पार करने वाले यात्री (अर्थात जापान से यूएसए) एक दिन दोहराते हैं और इसे पूर्व से पश्चिम की ओर (अर्थात संयुक्त राज्य अमेरिका से जापान तक) पार करने वाले वाले यात्री एक दिन खो देता है।


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05 अगस्त 2020

JOGI JI RUKO EK BAAT SUNO GHAR CHHOD KE WAN ME JANA KYA

जोगी जी रुको एक बात सुनो घर छोड़ के वन में जाना क्या 


Estimated reading time: 2 minutes, 48 seconds.


ABDUSSALAM KOUSAR 


दोस्तों आज मैं जिस शायर कि शायरी आपकि खिदमत में पेश कर रहा हूँ उनका नाम है अब्दुस्सलाम कौसर | तो आइये सब से पहले हम इनके बारे में थोड़ा जान लें 

अपने समकालीन शायरों में अलग पहचान रखने वाले जनाब अब्दुस्सलाम ‘कौसर’ का जन्म 09 जनवरी 1948 को रायपुर जिले के ग्राम खरोरा में हुआ। उनके पिता का नाम श्री सिद्दीक अहमद था। 

‘कौसर’ के जन्म के बाद उनका परिवार संस्कारधानी राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) में आकर बस गया। ‘कौसर’ ने बी.एस-सी. एवं बी.टी.सी. तथा अदीबे-कामिल तक शिक्षा प्राप्त की है। सिर्फ़ पांचवीं तक उर्दू पढ़ने के पश्चात ‘कौसर’ ने उर्दू साहित्य का गहन अध्ययन किया। 

उर्दू शेरो-सुख़न और अदब का ‘कौसर’ ने इतना अध्ययन किया कि उन्हें हज़ारों शेर ज़ुबानी याद हैं। ‘कौसर’ को ग़ज़लों के अलावा नज़्म लिखने में भी महारत हासिल है। 

सहाफ़त (पत्रकारिता) के क्षेत्र में नई दिल्ली से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका ‘शमा’ विश्वस्तर पर उर्दू साहित्य की सर्वश्रेष्ठ पत्रिका मान ली गई थी। ‘शमा’ का क्रेज ऐसा था कि इसमें छपने की आस में कई लेखकों और शायरों की उम्र गुज़र जाती थी। 

ऐसी उत्कृष्ठ गौरवशाली पत्रिका में साठ-साठ, सत्तर-सत्तर मिसरों (पक्तियों) पर लिखी गयी नौ-नौ, दस-दस बंद की नज़्में क्रमश: लाटरी का तूफ़ान, मेरे हिन्दोस्तां, हवाले का शिकंजा, नया साल, कौन रहबर है तथा कंप्यूटर प्रकाशित होने से ‘कौसर’ राष्ट्रीय ही नहीं अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शायरों की पंक्ति में आ गये।


जोगी जी रुको एक बात सुनो घर छोड़ के वन में जाना क्या



जोगी जी रुको एक बात सुनो

घर छोड़ के वन में जाना क्या!

हर साँस में उसका ज़िक्र है जब

फिर बस्ती क्या, वीराना क्या!!
 


सरमद ने पड़ा क्यूँ आधा कलमा

मीरा क्यूँ जोगन बन बैठी!

क्यूँ गौतम ने घर छोड़ दिया

ये राज़ किसी ने जाना क्या!!
 


दुनिया की खातिर दुःख झेले

घर से भी गए, सूली पे चढ़े!

वो लोग तो सच्चे थे लेकिन

जग ने उनको पहचाना क्या!! 


क्या ईद दिवाली की खुशियां

क्या होली क्रिसमस बैसाखी!

मुफलिस की जेब तो खाली है

त्यौहार का आना-जाना क्या!!


"सुकरात" तो है खामोश मगर

ये ज़हर का प्याला कहता है!

इंसाफ जहां दम तोड़ चुका,

वहा जीना क्या? मर जाना क्या!!
 


माना तुम अच्छे रहबर हो

फिर देश में क्यूँ बदहाली है?

"कौसर" इस राज़ से बाकिफ है 

समझे थे उसे दीवाना क्या?



 JOGI JI RUKO EK BAAT SUNO GHAR CHHOD KE WAN ME JANA KYA 




Jogi ji ruko, ek baat suno

Ghar chhod ke wan me jana kya

Har saans me uska jikr hai jab

Fir basti kya, veerana kya



Sarmad ne padha kyon aadha kalma

Meera kyon jogan ban baithi

Kyon goutam ne ghar chhod diya

Ye raaz kisi ne jana kya



Duniya ki khatir dukh jhele

Ghar se bhi gaye, suli pe chadhe

Wo log to sachche the lekin

Jag ne unko pahchana kya



Kya eid diwali ki khushiyan

Kya holi Christmas baisakhi

Muflis ki zeb to khali hai

Tyohar ka aana jana kya



Sukrat to hai khamosh magar

Ye zahar ka pyala kahta hai

Insaf jahan dam tod chuka

Wahan jeena kya mar jana kya



Mana tum achchhe rahbar ho

Fir desh me kyon badhali hai

Kousar is raj se wakif hai 

Samjhe the use deewana kya 


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04 अगस्त 2020

Aisa Bacteria jo Carbon dioxide khakar shakkar banayega

ऐसा बैक्टीरिया जो कार्बन डाइऑक्साइड खाकर शक्कर बनाएगा 

Estimated reading time: 1 minute, 57 seconds.



Bacteria jo Carbon dioxide khakar shakkar banayega
E-coli Bacteria


पिछले कुछ समय से भारत समेत दुनिया के बहुत सारे देश गहरे वायु प्रदूषण की समस्या का सामना कर रहे हैं। जिसकी वजह से सांस की बीमारियों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। 

लेकिन इजरायल ने एक रिसर्च के जरिए ऐसे बैक्टीरिया को विकसित किया है, जो वातावरण से कार्बन को अवशोषित करके अपने शरीर को बनाता है। 

इससे फ्यूचर में ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकेगी।शोधकर्ता ऐसा बैक्टीरिया विकसित करते हैं जो कार्बन डाइऑक्साइड (Eat) को खाता है। 

ये बैक्टीरिया भविष्य में ग्रीनहाउस गैस संचय को कम करने के लिए जरुरी तकनीकों को विकसित करने में मदद कर सकता है।

वैज्ञानिकों ने 10 वर्ष की रिसर्च के बाद एक ऐसा बैक्टीरिया बनाया है जो कार्बन डाइऑक्साइड को खाएगा और शक्कर को बनाएगा। और यह वातावरण को भी शुद्ध करेगा। 

यह खोज वेइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस द्वारा की गई है। तेल अवीव के सेंट्रल इजरायल के रेहोवोट में स्थित इस रिसर्च सेंटर को 1934 में डैनियल सीफ इंस्टीट्यूट के रूप में स्थापित किया गया था। 

इस संस्थान को प्राकृतिक और सटीक विज्ञान में खोज करने के लिए दुनिया के नंबर वन रिसर्च सेंटर्स में माना जाता है।




जर्नल सेल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कॉली बैक्टीरिया को लगभग एक दशक की लंबी प्रक्रिया के बाद चीनी से पूरी तरह हटाया गया। दरअसल, ये बैक्टीरिया शुगर कंज्यूम करने के बाद कॉर्बन डाइऑक्साइड को प्रोड्यूस करते थे, लेकिन इनकी री-प्रोग्रामिंग करने के बाद ये कॉर्बन डाइऑक्साइड कंज्यूम करके शुगर का निर्माण करने लगे। 

इसके लिए ये बैक्टीरिया अपनी बॉडी का निर्माण पर्यावरण में मौजूद कॉर्बन डॉइऑक्साइड से करेंगे और फिर शुगर प्रड्यूस करेंगे।

बैक्टीरिया की री-प्रोग्रामिंग सफल रही-

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने अपने शोध पर दावा किया है कि ये बैक्टीरिया हवा में मौजूद कार्बन से अपने शरीर के पूरे बायोमास का निर्माण करते हैं। 

इससे उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में इन बैक्टीरियाओं की मदद से वातावरण में ग्रीनहाउस गैस के संचय को कम करने के लिए तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते खतरे को कम किया जा सकेगा।

इस शोध को पूरा करने के लिए वैज्ञानिकों ने उन जीन्स को मैप किया जो इस प्रक्रिया के लिए जरूरी हैं और उनमें से कुछ को अपनी प्रयोगशाला में बैक्टीरिया के जीनोम में शामिल कर लिया। अथक परिश्रम के बाद शोधकर्ता इन बैक्टीरिया की री-प्रोग्रामिंग में सफल रहे।

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ONE NATION ONE RATION CARD

ONE NATION ONE RATION CARD

Estimated reading time: 6 minutes, 26 seconds.




वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्च 2021 तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ' एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' प्रणाली के राष्ट्रीय रोलआउट की घोषणा की । वित्त मंत्री के अनुसार, यह प्रणाली प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से पीडीएस लाभों का उपयोग करने में सक्षम बनाएगी। 

वर्तमान प्रणाली में, एक राशन कार्डधारक उसी एफपीएस (Fair price shop) से खाद्यान्न खरीद सकता है जिस इलाके में वह रहता है। हालाँकि, यह 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' प्रणाली के राष्ट्रीय स्तर पर चालू हो जाने के बाद बदल जाएगा। वह देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न प्राप्त कर पायेगा|



देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली(PDS) का इतिहास-


देश में लोगों को विभिन्न आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को उचित कीमतों पर व उचित समय पर उपलब्ध करवाने तथा उनके पोषण के उचित स्तर को बनाये रखने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System- PDS) को एक प्राथमिक उपकरण (Intrument) के रूप में प्रयोग किया गया है। 

भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का इतिहास स्वतंत्रता के पहले द्वितीय विश्व युद्ध के प्रारंभ (सन् 1939) से माना जाता है। उस समय औपनिवेशिक सरकार ने गरीबों को कुछ चुने हुए शहरों में सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया था। इसके बाद समय-समय पर जरुरतों के मुताबिक पीडीएस का स्वरूप बदलता रहा। 

आज भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा समवर्ती सूची के अंतर्गत सामूहिक रूप से संचालित किया जाता है। 

इस संदर्भ में केन्द्र सरकार की भूमिका आवश्यक वस्तुओं का अधिग्रहण (Procurement), उनका भंडारण तथा उन्हें बड़ी मात्रा में गंतव्य स्थान तक पहुँचाने की होती है, जबकि राज्य सरकारों की भूमिका गंतव्य स्थान से वस्तुओं को उठाने एवं उन्हें उचित मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops- FPSs) तक पहुँचाने तथा उपभोक्ताओं तक वितरित करने की होती है।



वन नेशन, वन राशन कार्ड सिस्टम कब से काम कर रहा है? 


इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम लगभग दो साल पहले शुरू हुआ था जब सरकार ने देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के लिए अप्रैल 2018 में एकीकृत प्रबंधन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (IM-PDS) नामक एक योजना शुरू की थी।


वन नेशन, वन राशन कार्ड प्रणाली क्या है?

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह है| एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर भी आप अपने पुराने राशन कार्ड का ही इस्तेमाल कर सकते हैं| इसी राशन कार्ड से आप दूसरे राज्य से भी सस्ती कीमत पर सरकारी राशन दुकान से अनाज खरीद सकते हैं| 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत, लगभग 81 करोड़ लोग सब्सिडी वाले खाद्यान्न खरीदने के हकदार हैं – जिनमे चावल 3 रुपये किलो, गेहूँ 2 रुपये किलो, और मोटे अनाज 1 रुपये किलो के हिसाब से निर्धारित है|



यह कैसे काम करेगा ? 

मान लीजिए कि अजीत यादव उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का निवासी है और उसके पास उत्तर प्रदेश का राशन कार्ड है| जॉब के सिलसिले में अजीत यादव दिल्ली में रहते हैं तो वे अपने उत्तर प्रदेश वाले राशन कार्ड की मदद से ही दिल्ली या किसी और राज्य में भी उचित मूल्य पर सरकारी राशन खरीद सकेंगे| 

इसके तहत केंद्र सरकार राज्यों को 10 अंकों का राशन कार्ड नंबर जारी करेगी| इस नंबर में पहले दो अंक राज्य कोड होंगे और अगले दो अंक राशन कार्ड नंबर होंगे| इसके अतिरिक्त राशन कार्ड नंबर के साथ एक और दो अंकों के सेट को जोड़ा जाएगा| इसे देश भर में लागू करने के लिए राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी की सुविधा होगी|



एक देश, एक राशन कार्ड का महत्व-

भारत सरकार की ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ (One Nation, One Ration Card) योजना कई राज्यों में कार्य कर रही| एक राशन कार्ड सार्वजनिक वितरण प्रणाली को एक नया आयाम प्रदान करेगी। 

खाद्य, सार्वजनिक वितरण व उपभोक्ता मंत्रालय की ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ योजना के तहत किसी भी राज्य का व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान से राशन ले सकता है। 

गौरतलब है कि सभी राशन कार्डों को आधार कार्ड से जोड़ने और पॉइंट ऑफ सेल (Point of Sale PoS) मशीन के माध्यम से खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था अपने अंतिम चरण में है| 

इस नई व्यवस्था के कारण लोग देशभर में एक ही राशन कार्ड का इस्तेमाल कर सकेंगे। दरअसल, सरकार की तैयारी है कि आधार कार्ड की तर्ज पर हर एक राशन कार्ड को एक विशिष्ट (यूनिक) पहचान नंबर दिया जाएगा। इससे फर्जी राशन कार्ड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा। 

इसके साथ ही सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी, जिसमें एक ऑनलाइन एकीकृत (इंटीगेटेड) सिस्टम बनाया जाएगा। इस सिस्टम में राशन कार्ड का डेटा स्टोर होगा। इसके बन जाने के बाद अगर देश में कहीं भी कोई फर्जी राशन कार्ड बनवाने की कोशिश करेगा, तो इस सिस्टम के जरिये से पता चल जाएगा। इसके बाद अगर कोई नया राशन कार्ड बनवाने जाता है, तो वह ऐसा कर नहीं पाएगा।

इस ऑनलाइन सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि कोई भी लाभार्थी देश के किसी हिस्से में और किसी भी राशन की दुकान पर सब्सिडी वाला अनाज ले सकेंगे। केंद्र सरकार की स्कीम 'वन नेशन वन राशन कार्ड' का फायदा अब 1 अगस्त से देशभर में 67 करोड़ लाभार्थियों को मिल सकेगा|

'वन नेशन वन राशन कार्ड' स्कीम में 1 अगस्त से अब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के अलावा मणिपुर. नागालैंड और उत्तराखंड भी राशन कार्ड की नेशनल पोर्टेबिलिटी से जुड़ गए| 

केंद्रीय उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक,01 अगस्त, 2020 से 'वन नेशन वन राशन कार्ड' स्कीम से कुल 24 राज्य/संघ शासित प्रदेश (UT) जुड़ गए हैं जिससे देशभर में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के करीब 65 करोड़ लाभार्थी इसका फायदा उठा पाएंगे |



वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम से जुड़े राज्य -

01 एक अगस्त, 2020 से अब 'वन नेशन वन राशन कार्ड' के तहत कुल 24 राज्य/संघ शासित प्रदेश आ गए हैं| जिनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड हैं|


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एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड प्रणाली के बारे में हमने जाना-

1) पहल के तहत, पात्र लाभार्थी एक ही राशन कार्ड का उपयोग करके देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत अपने पात्र खाद्यान्न का लाभ उठा सकेंगे। 

2) सरकार देश भर में एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड ’योजना को 1 जून 2020 से लागू करना चाहती थी। 

3) राशन कार्ड के लिए एक मानक प्रारूप विभिन्न राज्यों द्वारा उपयोग किए गए प्रारूप को ध्यान में रखकर और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श के बाद तैयार किया गया है। 

4) राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के लिए, राज्य सरकारों को द्वि-भाषी प्रारूप में राशन कार्ड जारी करने के लिए कहा गया है, जिसमें स्थानीय भाषा के अलावा, अन्य भाषा हिंदी या अंग्रेजी हो सकती है। 

5) अब तक, 17 राज्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के एकीकृत प्रबंधन पर हैं।

6) आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, गोवा, झारखंड और त्रिपुरा। बिहार, यूपी, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दमन और दीव को 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है । 

7) इससे पात्र लाभार्थी, रियायती दर पर खाद्यान्न खरीदने के लिए सक्षम हो जाएगा, जिसे चावल ₹3 प्रति किलो, गेहूं ₹ 1 रुपया प्रति किलो और मोटा अनाज 2 प्रति किलो, देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से प्राप्त होगा। 

8) वर्तमान प्रणाली में, एक राशन कार्डधारक केवल उसी एफपीएस से खाद्यान्न खरीद सकता है जिसमें वह रहता है| 

9) IMPDS पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अंतर-राज्य राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी के माध्यम से किए गए लेनदेन की संख्या 15 मई तक केवल 274 है| 

10) सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( IM-PDS ) पोर्टल का एकीकृत प्रबंधन राशन कार्डों की अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी के लिए तकनीकी मंच प्रदान करता है।

03 अगस्त 2020

Use these platforms to find better articles on Wikipedia

विकिपीडिया पर बेहतर लेख खोजने के लिए इन प्लेटफार्मों का उपयोग करें

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विकिपीडिया क्या है ?

Wikipedia विकिपीडिया एक Free विश्वकोश है जो हर किसी व्यक्ति द्वारा Edit या लिखा जा सकता है। इस ऑनलाइन विश्वकोश में लाखों करोड़ों लेख लोगों ने विभिन्न Topics पर लिखा है। Wikipedia के Articles 270 से भी ज्यादा भाषाओँ में मौजूद हैं।

Wikipedia का नाम हवाई भाषा के शब्द से लिया गया है (Wiki=जल्दी)। इसका अर्थ है टेक्नोलॉजी का एक ऐसा माध्यम है जो वेबसाइट और विश्वकोष को मिलकर सक्षम बनाता है। विकिपीडिया के Article को और भी अच्छा और शिक्षाप्रद बनाने के लिए दुनिया भर से लाखों Volunteer या स्वयंसेवक अपना योगदान देते हैं।

Wikipedia की शुरुवात वर्ष 2001 में हुई थी। प्रतिदिन लाखों विकिपीडिया Volunteer आर्टिकल लिखते हैं और साथ ही Edit भी करते हैं जिसके कारण Wikipedia दुनिया का सबसे बड़ा Online Portal जहाँ दुनिया के लगभग सभी चीजों के विषयों में आप जानकारी पा सकते हैं।


बेहतर लेख खोजने के लिए इन प्लेटफार्मों-


विकिपीडिया पर यूजर्स नॉलेज और इंफॉर्मेशन पाने के अलावा उन सब्जेक्ट्स के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जिनके बारे में वे पहले जानते नहीं थे। इसके लिए कुछ टूल्स की मदद लेकर पसंदीदा विषय चुनकर पढ़े जा सकते हैं। 

इसके होम पेज पर प्रतिदिन फीचर्ड आर्टिकल्स व खबरों में लोकप्रिय टॉपिक्स पब्लिश होते हैं। विकिपीडिया अकाउंट बनाकर आप भी अपनी रुचि के अनुसार पेजेज को छांटकर बाद के लिए सेव कर सकते हैं।

विकी गुड आर्टिकल (ट्विटर)-


विकिपीडिया ने रीडर्स के लिए गुड आर्टिकल्स की लिस्ट बनाई है। इसके लिए आप ट्विटर पर विकी गुड आर्टिकल बॉट को फॉलो कर सकते हैं। 

नापसंद टॉपिक्स को हटाने के लिए किसी अच्छे आर्टिकल को इन 6 फैक्टर्स के आधार पर चुन सकते हैं- वैल रिटन, वेरिफाएबल, ब्रॉड कवरेज, न्यूट्रल, स्टेबल और इलस्ट्रेटेड। 

किसी भी एंट्री का 'गुड आर्टिकल' स्टेटस तब खत्म हो जाता है जब वह इसका एक फीचर्ड आर्टिकल बन जाती है।

कॉपरनिकस (वेब)-


यह टूल, गूगल मैप्स व विकिपीडिया का एक मिक्स है जो वर्ल्ड मैप ब्राउज करने और उसके बारे में नई बातें जानने का दिलचस्प जरिया है। चाहे हिस्ट्री हो या ज्योग्राफी या करंट इवेंट्स, गूगल अर्थ के बाद यह सबसे अच्छा मैप-बेस्ड एक्सपीरिएंस देता है। 

इस मैप के अंदर विकिपीडिया के रुचिपूर्ण आर्टिकल्स से कई पिन्स डाले गए हैं। आपको इस तरह के पिन्स मिलेंगे - इथोपिया में इथोपियन एयरलाइन्स फ्लाइट 302 आदि।

वीकलीपीडिया (वेब)- 


इस वीकली लिस्ट या न्यूजलेटर डाइजेस्ट में वे आर्टिकल्स शामिल होते हैं जिनमें पिछले हफ्ते के अंदर सबसे ज्यादा बदलाव आए हों। 

विकिपीडिया के ओपन-सोर्स टूल्स के माध्यम से किसी भी आर्टिकल में ये बदलाव देखे जा सकते हैं। इन बदलावों को ट्रैक करते हुए वीकलीपीडिया किसी भी हफ्ते सबसे ज्यादा संपादित 20 आर्टिकल्स को न्यूजलेटर में बदल देता है। 

वीकलीपीडिया इन 20 आर्टिकल्स के अलावा विकिपीडिया पर दूसरी एक्टिविटीज को भी ट्रैक करता है जैसे टॉप 5 डिस्कशंस और वीक में क्रिएट 10 न्यू टॉप आर्टिकल्स।



विकिट्वीक्स (क्रोम एक्सटेंशन)-


इसकी मदद से आप विकिपीडिया के स्पेस के ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल के लिए कुछ कॉस्मेटिक बदलाव कर सकते हैं। 

इससे विकिपीडिया के किसी भी पेज को बेहतर रीडिंग के लिए ऑप्टिमाइज किया जा सकता है, खासकर जब उसमें टेबल्स, चार्ट्स या इमेजेज हों। 

हालांकि अब विकिपीडिया ने इसे अपना ऑफिशियल फीचर बना दिया है। विकिट्वीक्स की दूसरी विशेषता है-रीडर की विकिपीडिया हिस्ट्री को ट्रैक करना।

इस तरह से आप इन प्लेटफॉर्म्स को काम में लेकर विकिपीडिया पर अपनी रूचि के अनुसार पेजेज को सेव कर सकते हैं | 

02 अगस्त 2020

INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH

इन्होनें किया दुनिया को कोरोना संकट से आगाह 


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INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
dr.li wenliang

डॉ. ली वेंगलियांग- चेतावनी देने वाले पहले विह्सल ब्लोअर - 


34 साल डॉ. ली वेंगलियांग वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल में नेत्र विशेषज्ञ रहे|चीन में कोरोनावायरस के बारे में लोगों को बताने वाले और सरकार के रवैये के खिलाफ आवाज उठाने वाले वे पहले व्यक्ति थे।
 
31 दिसंबर को उन्होंने लोकप्रिय चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट पर वायरस के बारे में लोगों को चेतावनी दी थी। इस तरह वो कोरोना संकट की चेतावनी देने वाले पहले विह्सल ब्लोअर बने|

इसके बाद पुलिस ने उन्हें एक पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा था। उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया गया था और उन्हें अपना मुंह बंद करने के लिए भी कहा गया था| 

लेकिन इस सबके बावजूद डॉ. ली ने अपना काम जारी रखा। वह मरीजों का इलाज करते रहे और लोगों को भी इस बीमारी के बारे में जागरूक करते रहे।

डॉ. ली ने संक्रमण की गंभीरता को समझा, उन्हें लगा कि सार्स जैसा कोई वायरस, जो इंसानों से इंसानों में फैला था, दोबारा वापस आ गया है। डॉ. ली ने सात ऐसे मामले देखे थे जिनमें सार्स जैसे किसी वायरस के संक्रमण के लक्षण थे। 

31 जनवरी को डॉ. ली ने न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार को इंटरव्यू दिया था। उन्होंने बताया था कि 10 जनवरी को उन्हें खांसी शुरू हुई थी। अपने मरीज का इलाज करने के दौरान डॉ. ली खुद भी संक्रमित हो गए और उनकी मौत हो गई |


INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
dr. zhang wenhong


डॉ. जहांग जियांगपहली डॉ. जिन्होंने वाइरस के बारे में बताया- 


नोवल कोरोनावायरस का पता लगाने वाली 54 साल की डॉ. जहांग जियांग दुनिया की पहली डॉक्टर हैं। वो एक श्वसन तंत्र विशेषज्ञ है|

26 दिसंबर को हॉस्पिटल में रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट की निदेशक डॉ. जहांग जियांग ने चार मरीज़ों में कुछ लक्षण एक जैसे पाए। 

उन्होंने देखा कि मरीज़ों को निमोनिया है और उनके फेफड़ों में एक जैसा संक्रमण दिख रहा है। इन मरीज़ों में तीन तो एक ही परिवार से थे। 

अगले दिन उनके पास तीन और मरीज़ उन्हीं लक्षणों के साथ इलाज कराने के लिए आए। उन्हें यह सब अजीब लगा और इसके बारे में उन्होंने खोजबीन शुरू की। उन्होंने तुरंत अस्पताल के दूसरे विभागों को सूचित किया और बताया कि यह कोई सामान्य बीमारी नहीं है।

27 दिसंबर को डॉ. जहांग ने चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों को बता दिया था कि नई बीमारी कोरोनावायरस के चलते फैल रही है। डॉ. जहांग जियांग की कहानी सामने आने के बाद वह चीनी सोशल मीडिया में हीरो बन गईं। 

वह सार्स वायरस से निपटने वाली टीम में भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि उस समय का प्रशिक्षण उन्हें इस वक्त काम आया।


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chen wei

चेन वुई- टर्मिनेटर ऑफ़ इबोला


54 साल की चेन वुई चीन की शीर्ष सैन्य जैव-युद्ध विशेषज्ञ हैं। वह द इंस्टीट्यूट ऑफ बायोइंजीनियरिंग, अकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेस में जीवाणु विज्ञानी हैं। 

चीनी मीडिया के मुताबिक चेन और उनकी टीम ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन विकसित कर रही हैं चेन के मुताबिक अगर परीक्षण सफल होता है, तो यह कोरोनावायरस के खिलाफ पहला टीका होगा। चेन वैज्ञानिक के अलावा पीपुल लिबरेशन आर्मी में मेजर जनरल हैं।

चेन का इससे पहले सार्स और इबोला जैसे वायरस का टीका बनाने में भी योगदान रहा है। उन्होंने 2003 में सार्स से लड़ने के लिए मेडिकल स्प्रे बनाया था। 

2015 में डॉ. चेन को चीनी सरकार ने इबोला वायरस की वैक्सीन विकसित करने के लिए दक्षिण अफ्रीकी देश सिएरा लिओन भेजा था। अफ्रीका में इबोला तेजी से फैल रहा था। ऐसे में डॉ. चेन की रिसर्च ने काफी मदद की थी।

2017 में चीन में वोल्फ वारियर 2 नामक फिल्म में डॉ. चेन का किरदार भी था| फिल्म में उनके किरदार ने लमानला वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाई थी |



INHONE KIYA DUNIYA KO CORONA SANKAT SE AAGAH
neil ferguson


नील फर्गुसन- महामारी विशेषज्ञ -


52 साल के नील फर्गुसन ने ब्रिटिश सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए तो अकेले ब्रिटेन में ही 2 लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। 

नील कोरोनावायरस की गंभीरता को समझ रहे थे और पिछले दो महीने से वायरस पर रिसर्च पेपर लिख रहे थे। नील के रिसर्च पेपर के बाद ब्रिटिश सरकार ने कोविड 19 से लड़ने की अपनी रणनीति बदल दी। इसके बाद ही ब्रिटेन में वर्क फ्रॉम होम शुरू हुआ।

सरकार ने जरूरी कदम उठाते हुए स्कूल्स, मॉल, थिएटर और सार्वजनिक जगहें बंद कर दी हैं। नील ने 16 मार्च को ट्विटर पर लिखा कि उन्हें खांसी और बुखार है। उन्हें कुछ-कुछ कोविड जैसे लक्षण दिख रहे थे। इसके बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है। 

नील इंपीरियर कॉलेज लंदन के सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजिकल एनालिसिस एंड मॉडलिंग ऑफ इंफेक्सियस डिज़ीज़ के निदेशक हैं। 

नील गणितज्ञ भी हैं। उन्होंने सरकार को अपने अनुमान के मुताबिक चेतावनी दी है कि अगर सावधानियां नहीं रखी गईं, तो मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है।



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ralph baric

राल्फ बेरिक- जिन्होंने सबसे पहले कोरोना को जांचा- 


राल्फ बेरिक, बैरिक लैब, यूनिवर्सिटी ऑफ़ नार्थ कैरोलीना, अमेरिका में शोधकर्ता हैं| 6 फ़रवरी 2020 को राल्फ बेरिक की प्रयोगशाला में कई सारे प्लास्टिक पाउच, 500 माइक्रोलीटर वाइल, सील्ड प्लास्टिक कंटेनर और ड्राई आइस से पैक नावेल करोना वाइरस लाया गया|

दुनिया की किसी भी प्रयोगशाला में प्रयोग के लिए पहली बार यह वायरस लाया गया था| यूनिवर्सिटी ऑफ़ नार्थ कैरोलीना की बैरिक लैब में डॉ. राल्फ अपनी टीम के साथ वायरस को टेस्ट करने के लिए तैयार थे|

डॉ. राल्फ उन चंद शोधकर्ताओं में शामिल हैं, जिनकी कोरोना वायरस में विशेषज्ञता है| इससे पहले वो जीका, इबोला पर भी शौध कर चुके हैं|

राल्फ कहते हैं कि उन्होंने  30 साल पहले शोधकार्य शुरू किया था| तब कोरोना वायरस को सामान्य सर्दी-खांसी से ज्यादा कुछ नहीं समझा जाता था| 

2003 में सार्स और फिर 2012 में सामने आये कोरोना वायरस मर्स ने जब संक्रमण फैलाया था, तब इसकी भयावहता का पता चला अभी आया कोरोना वायरस नया वायरस है| 


Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...