18 मई 2021

ye badshah ka hukm hai aur ek hukm ye bhi hai image par kavita

ये बादशाह का हुक्म है और एक हुक्म ये भी है, मेरे लिए जो है सजी वो सेज न ख़राब हो 


ye badshah ka hukm hai aur ek hukm ye bhi hai image par kavita


तुम्हारी अर्थियां उठे मगर ये ध्यान में रहे

मेरे लिए जो है सजी वो सेज न ख़राब हो

ये बादशाह का हुक्म है, और एक हुक्म ये भी है

भले कोई मरे मेरी इमेज न ख़राब हो



सुनो मेरे मंत्रियों सफेदपोश संत्रियों

जहाँ मिले जमीन खली रोप दो कपास तुम

कपास मिल में डाल कर बुनो सफ़ेद चादरें

गली गली में जाकर के फिर ढको हर एक लाश तुम

सवाल जो करे उसे नरक में तब तलक रखो

कहे न जब तलक मुझे कि आप लाजवाब हो

ये बादशाह का हुक्म है, और एक हुक्म ये भी है

भले कोई मरे मेरी इमेज न ख़राब हो

इसे भी पढ़ें- कब तक बोझ संभाला जाए द्वन्द कहाँ तक पाला जाए तू भी राणा का 


खरीदो ड्रोन कैमरें खीचाऑ मेरी फोटोएं

दिखाओ उसको न्यूज पे करो मेरा प्रचार फुल

कहीं दिखे दाग़ तो ज़बान से ही पोछ दो

मगर ये ध्यान में रहे ज़बान में हो लार फुल

निकाल रीढ़ हर किसी भीड़ वो बनाओ तुम

हो जुल्म बेहिसाब पर कभी न इंक़लाब हो

ये बादशाह का हुक्म है, और एक हुक्म ये भी है

भले कोई मरे मेरी इमेज न ख़राब हो



जो सत्य है वो ही दिखे न लाग न लपेट हो

न कोई पेड न्यूज़ हो न झूट का प्रचार हो

काट दे जो जुल्म को जो चीर दे अनर्थ को

वो पत्रकार के कलम में ऐसे तेजधार हो

सलाख डाल कर , निकाल कर उछाल दो उसे

किसी की आँख में अगर ये बेहुदा सा ख्वाब हो

ये बादशाह का हुक्म है, और एक हुक्म ये भी है

भले कोई मरे मेरी इमेज न ख़राब हो


पुनीत शर्मा

13 मई 2021

what is black fungus infection and mucormycosis fungal infection symptoms and treatment in hind

म्यूकर माइकोसिस या ब्लैक फंगस रोग (black fungus) क्या है ? 


पूरा देश कोरोना वायरस संकट की दूसरी लहर से जूझ रहा है। इस समय जो मरीज कोरोना संक्रमित हैं। इलाज के बाद ठीक होने पर उन्हें एक प्रकार के इन्फेक्शन का सामना करना पड़ रहा है। यह म्यूकर माइकोसिस (mucormycosis) एक तरह का फंगल इंफेक्शन है। जिसे ब्लैक फंगस (black fungus) भी कहा जाता है। 

कोविड से ठीक हुए लोगों के घर पहुंचने के बाद अब एक और नई बीमारी जन्म ले रही है जिसकी खबर न परिजन को है ना ही मरीजों को म्यूकर माइकोसिस जैसी घातक बीमारी को लेकर धीरे-धीरे देश में हड़कंप मचने लगा है। 

कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच इसके बढ़ने का कारण यह है कि जिन मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरुरत लम्बे समय तक पड़ी है उन्हें स्टेरॉयड देने की वजह से ये खतरा बढ़ा है | 

स्टेरॉयड के इस्तेमाल से डायबिटीज के मरीजों का शुगर का लेवल बढ़ जाता है जिससे आँखों को नुकसान पहुँचता है और कुछ दवाएं मरीजों की इम्युनिटी को कम कर देती है। ऐसी स्थिति में यह ब्लैक फंगस आसानी से संक्रमित कर देता है।


म्यूकर क्या है ?



म्यूकर एक प्रकार का कवक है। यह पौधा सड़ी-गली चीजों पर उगा रहता है। यह सफेद, मटमैला रंग का दिखाई पड़ता है। इसमें अनेक पतले-पतले सफेद कोमल कवक तन्तु पाये जाते हैं। यह कई शाखाओं में बँटकर कवक-जाल बनाते हैं। इसकी कवकजाल से पतली-पतली शाखायें निकलकर बाहर की ओर आती हैं। इसके ऊपर का अन्तिम सिरा फूलकर गोल हो जाता है जिसे बीजाणुधानी कहते हैं।


म्यूकर माइकोसिस या ब्लेक फंगस क्या है?

यह फंगस से होने वाली बीमारी है जो माइकोसिस नाम के फंगस की वजह से होता है और इससे होने वाले रोग को म्यूकर माइकोसिस या ब्लैक फंगस (black fungus) भी कहा जाता है। 

म्यूकर माइकोसिस (mucormycosis) एक फंगल इन्फेक्शन है। ये फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है, खासतौर जमीन व सड़ने वाले ऑर्गेनिक मेटर्स में | जैसे- पत्तियों सड़ी लकड़ियों और कम्पोस्ट खाद में ब्लैक फंगस पाया जाता है | 

यह फंगल इंफेक्शन नाक से शुरू होता है, इसके बाद मुंह में होता है, फिर आंखों में पहुंचता है और फिर दिमाग तक चला जाता है। इसके अलावा अगर शरीर में कहीं घाव है, तो वहां से भी ये इन्फेक्शन शरीर में फ़ैल सकता है |


अगर इसे शुरुवाती चरण में ही नहीं पकड़ा गया तो इससे आँखों की रौशनी जा सकती है | या जहां ये फैलता है, वह हिस्सा सड़ सकता है | सही वक्त पर लक्षण पहचान कर इलाज भी संभव है। हालांकि यह इंफेक्शन डायबिटीज मरीजों को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है।


क्या ब्लेक फंगस छूत की बीमारी है ?


पर्यावरण में यह फंगल बीजाणुओं (spores) के संपर्क में आने से लोगों को इस प्रकार का इन्फेक्शन हो जाता है। यह छूत की बीमारी नहीं है । यह लोगों से लोगों में या लोगों से जानवरों में नहीं फैलता ।

ब्लैक फंगस और स्किन इंफेक्शन में अंतर-


ब्लैक फंगस एक आंतरिक फंगल संक्रमण (internal fungal infection) है, जबकि त्वचा पर होने वाला फंगल इंफेक्शन blemishes, गुच्छे (clusters), गांठ (lumps) या स्किन के बीच (Discoloration of the skin) दिखता है। इसमें स्किन पर खुजली होती है, लेकिन ट्रीटमेंट लेने से ठीक हो जाता है। जबकि ब्लैक फंगस की चपेट में आने से मरीज की मौत भी हो सकती है।


म्यूकर माइकोसिस / ब्लैक फंगस बीमारी से किनको खतरा अधिक है -

डायबिटीज के मरीजों में

स्टेरॉयड का अधिक सेवन करने वालों में

ICU में रहने वाले मरीजों में

गंभीर बीमारियों का शिकार हो

पोस्ट ट्रांसप्लांट और मैलिग्नेंसी वाले लोगों में वोरिकोनाज़ोल थेरेपी वाले लोगों में


म्यूकर माइकोसिस / ब्लैक फंगस के लक्षण -

साइनस की परेशानी होना, नाक बंद हो जाना, नाक की हड्डी में दर्द होना

नाक से काला तरल पदार्थ या खून बहना

आंखों में सूजन, धुंधलापन दिखना

सीने में दर्द उठना

सांस लेने में समस्या होना

बुखार 

तालू में काला धब्बा


म्यूकर माइकोसिस / ब्लैक फंगस इंफेक्शन से बचाव के लिए क्या करें-

कोविड से ठीक होने के बाद अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें।

डॉ. की सलाह से ही स्टेरॉयड का उपयोग करें, उनकी सलाह से ही स्टेरॉयड के डोज कम ज्यादा करें।

डॉ. की सलाह से ही एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाइयां का उपयोग करें।

ह्यूमिडिफायर में साफ पानी का इस्तेमाल करें।

हाइपरग्लाइसीमिया को नियंत्रण में रखें।

डायबिटीज मरीज अपना शुगर कंट्रोल करें।

स्टेरॉयड के इस्तेमाल को डॉक्टर की सलाह से कम करें।

इम्यूनिटी बूस्टर दवाइयों को बंद कर दें।

एंटिफंदुनिया गल प्रोफिलैक्सिस की जरूरत नहीं होने पर नहीं लें।

22 अप्रैल 2021

how to Register for corona Vaccination on co win portal co win portal par registration kaise karen

कोविन पोर्टल पर रजिस्टर कैसे करें?

how to Register for corona Vaccination on co-win portal



भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान जारी है अगर आपने अभी तक कोविड- 19 का टीका नहीं लगवाया है तो जल्द से जल्द लगवालें इसके लिए आपको वैक्सीन केंद्र में टीकाकरण के लिए अपॉइंटमेंट लेना होगा आप ये अपॉइंटमेंट दो तरह से ले सकते हैं- 
 
1. स्वम् वैक्सीन केंद्र में जाकर 
2. कोविन पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन रजिस्टर कर अपॉइंटमेंट ले सकते हैं |

वैक्सीन पहली डोज़ लेने के बाद दूसरी डोज़ के लिए आपको फिर से अपॉइंटमेंट लेना होगा |

कोविन पोर्टल की मदद से आप उसी वैक्सीन सेंटर के लिए फिर से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं, जहां आपने वैक्सीन (कोवैक्सीन या कोविशील्ड) की पहली डोज़ ली थी |

अगर आप ऑनलाइन अपॉइंटमेंट नहीं ले सकते हैं तो भी आपके पास एक विकल्प है | वैक्सीन केंद्रों पर हर रोज़ सीमित संख्या में ऑन-स्पॉट रेजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा होती है | मतलब आप सीधे जाकर भी वहां रजिस्टर करा सकते हैं | 

हालांकि इंतज़ार और लाइन से बचने के लिए कोविन पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने की सलाह दी जाती है | 

अगर आपको ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन में कोई दिक़्क़त आए तो आप राष्ट्रीय हेल्पलाइन '1075' पर फ़ोन करके कोविड-19 टीकाकरण और कोविन सॉफ्टवेयर से जुड़ी कोई भी बात पूछ सकते हैं |

कोविन पोर्टल पर रजिस्टर कैसे करें ? 

how to Register for corona Vaccination on co win portal co win portal par registration kaise karen



सबसे पहले अपने ब्रावज़र में जाकर www.cowin.gov.in की सरकारी वेबसाइट पर जाएं |इसके बाद नीचे दिए गए स्टेप फॉलो करें –

अपना मोबाइल नंबर डालें | फिल 'गेट ओटीपी' बटन पर क्लिक करें |

ओटीपी डालें और 'वेरिफाई' पर क्लिक करें |

ओटीपी लेने के बाद, "रेजिस्टर फॉर वैक्सिनेशन" का पन्ना खुलेगा, जहां नागरिकों को अपनी बुनियादी जानकारी डालनी होगी |

इसे भी पढ़ें- jana gana mana full lyrics in hindi

रेजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद, सिस्टम यूज़र को "अकाउंट डिटेल्स" दिखाएगा |

सब जानकारी डाल देने के बाद, "शिड्यूल अपॉइंटमेंट" पर क्लिक करें और अपॉइंटमेंट बुक कर लें |

बुक 'बटन' पर क्लिक कर देने के बाद, अपॉइंटमेंट कंफर्मेशन पेज दिखेगा |

इसे भी पढ़ें- जानिए कोरोना वायरस के परिवार के बारे में 

एक बार पढ़ ले कि दी गई सारी जानकारी ठीक है क्या, उसके बाद 'कंफर्म' पर क्लिक कर दें | आप कोविन पोर्टल के साथ-साथ आरोग्य सेतु के ज़रिए भी कोविड वैक्सीन के लिए रजिस्टर कर सकते हैं | ये आपको अपने नज़दीक का वैक्सीन सेंटर ढूंढने में मदद करेगा और आप अपनी सहूलियत के हिसाब से वक़्त भी चुन सकते हैं | नागरिकों के पास वैक्सीन लेने का वक़्त बदलने या कैंसल करने का विकल्प भी होता है |


21 अप्रैल 2021

kab tak bojh sambhala jaye tu bhi rana ka vansaj hai fenk jahan tak bhala jaye kavi wahid ali wahid ki kavita

कब तक बोझ संभाला जाए, द्वंद्व कहां तक पाला जाए






लखनऊ के मशहूर कवि वाहिद अली वाहिद (59 वर्ष) का मंगलवार 20 अप्रैल को निधन हो गया । उन्हें तीन दिन से उन्हें बुखार था। इलाज के लिए उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया लेकिन न तो उन्हें स्ट्रेचर मिला न ही भर्ती किया गया । आखिरकार इलाज के अभाव में वाहिद ने इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया।

kab tak bojh sambhala jaye tu bhi rana ka vansaj hai fek jahan tak bhala jaye kavi wahid ali wahid ki kavita
kavi wahid ali wahid


कवि वाहिद अली वाहिद लखनऊ के निवासी थें । वे मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले थे, वे आवास विकास लखनऊ में कार्यरत थे । उनकी दर्जनभर से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया था । 

आज हम आपके बीच उन्हीं की प्रसिद्द कविता शेयर कर रहे हैं |



कब तक बोझ संभाला जाए

द्वंद्व कहां तक पाला जाए


दूध छीन बच्चों के मुख से

क्यों नागों को पाला जाए


दोनों ओर लिखा हो भारत

सिक्का वही उछाला जाए


तू भी है राणा का वंशज

फेंक जहां तक भाला जाए


इस बिगड़ैल पड़ोसी को तो

फिर शीशे में ढाला जाए


तेरे मेरे दिल पर ताला

राम करें ये ताला जाए


वाहिद के घर दीप जले तो

मंदिर तलक उजाला जाए


कब तक बोझ संभाला जाए

युद्ध कहां तक टाला जाए


तू भी राणा का वंशज है 

फेंक जहां तक भाला जाए

इसे भी पढ़ें- मैं इश्क लिखूं तुझे हो जाये 




Kab tak bojh sambhala jaye

Dwand kahan tak pala jaye



Doodh chhin bachchon ke mukh se

Kyon naagon ko pala jaye



Dono aur likha ho bharat

Sikka wahi uchhala jaye


Tu bhi rana ka vansaj hai

Fenk jahan tak bhala jaye



Is bigdel padosi ko to

Fir sheeshe me dhala jaye



Tere mere dil par tala

Ram kare ye tala jaye



Wahid ke ghar deep jale to

Mandir tak ujaala jaye



Kab tak bojh sambhala jaye

Yuddh kahan tak tala jaye



Tu bhi rana ka vansaj hai 

18 अप्रैल 2021

what is remdesivir injection uses and price manufacturer companies 2021

What is remdesivir injection uses and price 2021 


https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/
Remdesivir antiviral drug

कोरोना संक्रमण के इस संकट भरे दौरे में एक दवा जो इस महामारी में बेहद उपयोग साबित हो रही है उसका नाम रेमडेसिविर है इसकी उपयोगिता को भांप कर कुछ लोग इस राष्ट्रीय संकट को अवसर समझ कर इस दवा की जबरदस्त कालाबाजारी करने में लगे हैं | 

जिससे ये दवा बाजार से गायब हो गई है और इसकी मांग जबरदस्त तौर पर बढ़ रही है | मांग बढ़ने से इसकी कीमत कई गुणा बढ़ गई है बढती कीमत को देखते हुए भारत सरकार ने रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक दी है | 

देश में इस वक़्त रेमडेसिविर इंजेक्शन के कुल 7 मैन्यूफेक्चरर्स हैं | अब 6 और कंपनियों को इसके उत्पादन की मंजूरी दी गई है | इससे 10 लाख इंजेक्शन हर महीने और बनाये जा सकेंगे| इसके अलावा 30 लाख यूनिट और बनाये जाने की तैयारियां आखिरी दौर में हैं |

रेमडेसिविर ड्रग्स एक एंटी वायरल ड्रग है जिसका इस्तेमाल पहले हेपेटाइटिस सी के इलाज में हुआ, लेकिन असल में ये तब ज्यादा चर्चा में आई, जब 2014 में इबोला अफ्रीकी देशों में महामारी बनकर फैला| उसके इलाज में इसका इस्तेमाल हुआ| ये उसमें असरदार भी दिखी| दरअसल ये एक एंटीवायरल दवा है|

जब कोरोना पहली लहर के तौर पर दुनिया में आया तो उसके प्रकोप के बीच कई देशों में इसका इस्तेमाल हुआ और इसके सकारात्मक नतीजे मिले| 

हालांकि वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन अब भी कोरोना की दवा के तौर पर इसे मान्यता नहीं देता लेकिन कोरोना रोगियों पर जब इस्तेमाल किया गया तो उनके ठीक होने का अनुपात अच्छा खासा रहा|

रेमडेसिविर कैसे काम करती है? 

कोई भी वायरस जब इंसानी शरीर में जाता है तो वह अपने आपको मज़बूत करने के लिए ख़ुद को रेप्लीकेट यानी अपनी दूसरी प्रतियां तैयार करता है| और ये इंसान के शरीर की कोशिकाओं में होता है| लेकिन इस प्रक्रिया में वायरस को एक एंजाइम की ज़रूरत होती है| ये दवा इसी एंजाइम पर हमला करके वायरस के रास्ते में एक तरह का रोड़ा बनती है|


तब पहली बार इसे कारगर माना गया-

दिसंबर 2020 के महीने में ब्रिटेन स्थित कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने कोरोना वायरस से संक्रमित और दुर्लभ इम्युन सिस्टम वाले एक मरीज को रेमडेसिवीर दवा दी| जिसके बाद मरीज के स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार हुआ| वायरस शरीर से खत्म हो गया| इस अध्ययन को नेचर कम्युनिकेशंस ने प्रकाशित किया| फिर तो भारत सहित कई देशों में रेमडेसिवीर का इस्तेमाल होने लगा| वैज्ञानिकों ने कहा कि दवा तब असरदार होती है, जब संक्रमण के शुरुआती स्टेज में इसे मरीज को दिया जाए|

इबोला के अलावा इन बीमारियों पर असरदार

वैसे तो रेमडेसिवीर को इबोला बीमारी के इलाज में पहचान मिली लेकिन इससे मर्स और सार्स जैसे इंफ्युएंजा बीमारियों के इलाज में भी काफी मदद मिली| एक्सपर्ट मानते हैं कि रेमडेसीवीर कोरोना वायरस को बढ़ने से रोकती है |


क्‍यों बनाई गई थी रेमडेसिविर?

रेमडेसिविर को इबोला के लिए विकसित किया गया था |

रेमडेसिविर एक न्यूक्लियोसाइड राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) पोलीमरेज़ इनहिबिटर इंजेक्शन है।

इसका निर्माण सबसे पहले वायरल रक्तस्रावी बुखार इबोला के इलाज के लिए किया गया था।

इसे अमेरिकी फार्मास्युटिकल गिलियड साइंसेज द्वारा बनाया गया है। फरवरी में US नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिजीज (NIAID) ने SARS-CoV-2 के खिलाफ जांच के लिए रेमडेसिविर का ट्रायल करने की घोषणा की थी।

देश में कितनी कंपनियां इसे बनाती हैं-


रेमडेसिविर को अमेरिका की कंपनी Gilead Lifesciences ने विकसित किया है। उसने इसे बनाने के लिए भारत में 6 कंपनियों Zydus Cadila, Dr Reddy’s Laboratories, Hetero Drugs, Jubliant Life Sciences, Cipla Ltd और Biocon Group की Syngene के साथ करार किया है। अमेरिका की कंपनी Mylan की भारतीय यूनिट्स में भी इसका उत्पादन होता है। 

अनुमानों के मुताबिक भारतीय कंपनियां हर महीने कुल 40 लाख यूनिट रेमडेसिविर बना सकती हैं। इसका 120 से अधिक देशों को निर्यात भी होता है। फिलहाल भारत सरकार ने इसके निर्यात पर पाबंदी लगा रखी है |

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत में कटौती- 

एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिविर (anti viral drug remdesivir) की देश में कमी हो गई है। इसे देखते हुए सरकार ने रेमडेसिविर का प्रोडक्शन दोगुना करने की इजाजत दे दी है। 

वहीं सरकार के हस्तक्षेप के बाद देश के तमाम रेमडेसिविर मैन्युफैक्चरर्स ने इस इंजेक्शन की कीमत में कटौती (New Rates of Remdesivir) करने का फैसला किया है। प्रति 100 मिलीग्राम के डोज के रेमडेसिविर के इंजेक्शन की कीमत पहले से बहुत घट गई है।

क्या है रेमडेसिविर की नई कीमत ?

कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड ने REMDAC इंजेक्शन का दाम 2800 रुपये से घटाकर 899 रुपये कर दिया है।

सिंजीन इंटरनेशनल लिमिटेड ने RemWin इंजेक्शन का दाम 3950 रुपये से घटाकर 2450 रुपये कर दिया है।

डॉ. रेड्डीज लेबोरेट्रीज लिमिटेड ने REDYX इंजेक्शन का दाम 5400 रुपये से घटाकर 2700 रुपये कर दिया है।

सिपला लिमिटेड ने CIPREMI इंजेक्शन का दाम 4000 रुपये से घटाकर 3000 रुपये कर दिया है।

माइलैन फार्मास्युटिकल्प प्राइवेज लिमिटेड ने DESREM इंजेक्शन का दाम 4800 रुपये से घटाकर 3400 रुपये कर दिया है।

जुबिलेंट जेनेरिक लिमिटेड ने JUBI-R इंजेक्शन का दाम 4700 रुपये से घटाकर 3400 रुपये कर दिया है। 

हेटेरो हेल्थकेयर लिमिटेड ने COVIFOR इंजेक्शन का दाम 5400 रुपये से घटाकर 3490 रुपये कर दिया है।

27 मार्च 2021

we musalman the devi prasad mishra ki kavita

वे मुसलमान थे 


we musalmaan the devi prasad mishra ki kavita

कवि देवी प्रसाद मिश्र



वे मुसलमान थे

कहते हैं वे विपत्ति की तरह आए
कहते हैं वे प्रदूषण की तरह फैले
वे व्याधि थे

ब्राह्मण कहते थे वे मलेच्छ थे

वे मुसलमान थे

उन्होंने अपने घोड़े सिन्धु में उतारे
और पुकारते रहे हिन्दू! हिन्दू!! हिन्दू!!!

बड़ी जाति को उन्होंने बड़ा नाम दिया
नदी का नाम दिया

वे हर गहरी और अविरल नदी को
पार करना चाहते थे

वे मुसलमान थे लेकिन वे भी
यदि कबीर की समझदारी का सहारा लिया जाए तो
हिन्दुओं की तरह पैदा होते थे

उनके पास बड़ी-बड़ी कहानियाँ थीं
चलने की
ठहरने की
पिटने की
और मृत्यु की

प्रतिपक्षी के ख़ून में घुटनों तक
और अपने ख़ून में कन्धों तक
वे डूबे होते थे

उनकी मुट्ठियों में घोड़ों की लगामें
और म्यानों में सभ्यता के
नक्शे होते थे

न! मृत्यु के लिए नहीं
वे मृत्यु के लिए युद्ध नहीं लड़ते थे

वे मुसलमान थे

वे फ़ारस से आए
तूरान से आए
समरकन्द, फ़रग़ना, सीस्तान से आए
तुर्किस्तान से आए

वे बहुत दूर से आए
फिर भी वे पृथ्वी के ही कुछ हिस्सों से आए
वे आए क्योंकि वे आ सकते थे

वे मुसलमान थे

वे मुसलमान थे कि या ख़ुदा उनकी शक्लें
आदमियों से मिलती थीं हूबहू
हूबहू

वे महत्त्वपूर्ण अप्रवासी थे
क्योंकि उनके पास दुख की स्मृतियाँ थीं

वे घोड़ों के साथ सोते थे
और चट्टानों पर वीर्य बिख़ेर देते थे
निर्माण के लिए वे बेचैन थे

वे मुसलमान थे

यदि सच को सच की तरह कहा जा सकता है
तो सच को सच की तरह सुना जाना चाहिए

कि वे प्रायः इस तरह होते थे
कि प्रायः पता ही नहीं लगता था
कि वे मुसलमान थे या नहीं थे

वे मुसलमान थे

वे न होते तो लखनऊ न होता
आधा इलाहाबाद न होता
मेहराबें न होतीं, गुम्बद न होता
आदाब न होता

मीर मक़दूम मोमिन न होते
शबाना न होती

वे न होते तो उपमहाद्वीप के संगीत को सुननेवाला ख़ुसरो न होता
वे न होते तो पूरे देश के गुस्से से बेचैन होनेवाला कबीर न होता
वे न होते तो भारतीय उपमहाद्वीप के दुख को कहनेवाला ग़ालिब न होता

मुसलमान न होते तो अट्ठारह सौ सत्तावन न होता

वे थे तो चचा हसन थे
वे थे तो पतंगों से रंगीन होते आसमान थे
वे मुसलमान थे

वे मुसलमान थे और हिन्दुस्तान में थे
और उनके रिश्तेदार पाकिस्तान में थे

वे सोचते थे कि काश वे एक बार पाकिस्तान जा सकते
वे सोचते थे और सोचकर डरते थे

इमरान ख़ान को देखकर वे ख़ुश होते थे
वे ख़ुश होते थे और ख़ुश होकर डरते थे

वे जितना पी०ए०सी० के सिपाही से डरते थे
उतना ही राम से
वे मुरादाबाद से डरते थे
वे मेरठ से डरते थे
वे भागलपुर से डरते थे
वे अकड़ते थे लेकिन डरते थे

वे पवित्र रंगों से डरते थे
वे अपने मुसलमान होने से डरते थे

वे फ़िलीस्तीनी नहीं थे लेकिन अपने घर को लेकर घर में
देश को लेकर देश में
ख़ुद को लेकर आश्वस्त नहीं थे

वे उखड़ा-उखड़ा राग-द्वेष थे
वे मुसलमान थे

वे कपड़े बुनते थे
वे कपड़े सिलते थे
वे ताले बनाते थे
वे बक्से बनाते थे
उनके श्रम की आवाज़ें
पूरे शहर में गूँजती रहती थीं

वे शहर के बाहर रहते थे

वे मुसलमान थे लेकिन दमिश्क उनका शहर नहीं था
वे मुसलमान थे अरब का पैट्रोल उनका नहीं था
वे दज़ला का नहीं यमुना का पानी पीते थे

वे मुसलमान थे

वे मुसलमान थे इसलिए बचके निकलते थे
वे मुसलमान थे इसलिए कुछ कहते थे तो हिचकते थे
देश के ज़्यादातर अख़बार यह कहते थे
कि मुसलमान के कारण ही कर्फ़्यू लगते हैं
कर्फ़्यू लगते थे और एक के बाद दूसरे हादसे की
ख़बरें आती थीं

उनकी औरतें
बिना दहाड़ मारे पछाड़ें खाती थीं
बच्चे दीवारों से चिपके रहते थे
वे मुसलमान थे

वे मुसलमान थे इसलिए
जंग लगे तालों की तरह वे खुलते नहीं थे

वे अगर पाँच बार नमाज़ पढ़ते थे
तो उससे कई गुना ज़्यादा बार
सिर पटकते थे
वे मुसलमान थे

वे पूछना चाहते थे कि इस लालकिले का हम क्या करें
वे पूछना चाहते थे कि इस हुमायूं के मक़बरे का हम क्या करें
हम क्या करें इस मस्जिद का जिसका नाम
कुव्वत-उल-इस्लाम है
इस्लाम की ताक़त है

अदरक की तरह वे बहुत कड़वे थे
वे मुसलमान थे

वे सोचते थे कि कहीं और चले जाएँ
लेकिन नहीं जा सकते थे
वे सोचते थे यहीं रह जाएँ
तो नहीं रह सकते थे
वे आधा जिबह बकरे की तरह तकलीफ़ के झटके महसूस करते थे

वे मुसलमान थे इसलिए
तूफ़ान में फँसे जहाज़ के मुसाफ़िरों की तरह
एक दूसरे को भींचे रहते थे

कुछ लोगों ने यह बहस चलाई थी कि
उन्हें फेंका जाए तो
किस समुद्र में फेंका जाए
बहस यह थी
कि उन्हें धकेला जाए
तो किस पहाड़ से धकेला जाए

वे मुसलमान थे लेकिन वे चींटियाँ नहीं थे
वे मुसलमान थे वे चूजे नहीं थे

सावधान!
सिन्धु के दक्षिण में
सैंकड़ों सालों की नागरिकता के बाद
मिट्टी के ढेले नहीं थे वे

वे चट्टान और ऊन की तरह सच थे
वे सिन्धु और हिन्दुकुश की तरह सच थे
सच को जिस तरह भी समझा जा सकता हो
उस तरह वे सच थे
वे सभ्यता का अनिवार्य नियम थे
वे मुसलमान थे अफ़वाह नहीं थे

वे मुसलमान थे
वे मुसलमान थे
वे मुसलमान थे


डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं

12 मार्च 2021

ANI KYA HAI ANI FULL FORM IN HINDI 2021

 ANI KYA HAI ANI FULL FORM IN HINDI 

https://humariduniyakijaankari.blogspot.com/




जब कभी हम न्यूज़ चैनलों पर कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस, या किसी घटना की न्यूज़ चलते देखते हैं तो अक्सर हमें ANI का लोगो दिखाई देता है अब ANI तो कोई न्यूज़ चैनल नहीं है उसके बाद भी लगभग हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ANI की माइक आईडी सामने रखी होती है । या कई सारे चैनल पर ANI की ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही होती है । अक्सर हमें अखबार में खबर के नीचे छोटा सा ANI लिखा भी दिखाई दे जाता है |

ऐसे में आपके दिमाग में सवाल जरूर आता होगा कि आखिर चैनल एबीपी का है तो ANI की खबर क्यों चल रही है ? न्यूज़ अखबार की है तो नाम ANI का क्यों चल रहा है ? और आखिर ये ANI है क्या ?

दोस्तों, आज हम इस post के जरिये यही जानने का प्रयास करेंगे कि ANI क्या है ? यह कैसे काम करती है और क्यों चैनलों पर इसके लोगो दिखाई देती है |

ANI क्या है ? ANI का Full Form क्या है ?

ANI का full form – Asian News International है । इसे हिंदी में एशियन न्यूज इंटरनेशनल के नाम से जाना जाता है। ANयह दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल न्यूज एजेंसी है । और इसके साथ ही साथ यह भारत की भी सबसे बड़ी न्यूज़ एजेंसी है । वर्तमान में इसके देश, विदेश में मिलाकर लगभग 100 ब्यूरो हैं । यह एजेंसी समय-समय पर वेकेंसी निकालती है । जूनियर पदों पर भी यहां भर्ती के लिए विषय विशेषज्ञों को तरजीह दी जाती है ।

ANI एजेंसी क्या करती है?

आप समझ गए होंगे कि ANI एक न्यूज एजेंसी है । और न्यूज़ एजेंसी का कार्य ख़बरों को एकत्र करना होता है लिहाजा,यह मनोरंजन, जीवनशैली, व्यवसाय, राजनीति, विज्ञान, खेल या सामान्य समाचार की वीडियो फुटेज यह एनडीटीवी, सीएनएन, रिपब्लिक, आज तक, एबीपी, टाइम्स नाउ, जी, बीबीसी जैसी न्यूज कंपनियों को देती है । यह न केवल text, बल्कि picture, audio और video content भी यह मुहैया कराती है।

ANI न सिर्फ न्यूज़ चैनल यानी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट ही नहीं बल्कि वेबसाइट और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर भी यह न्यूज़ फ़ीड provide करती है। उसके बदले यह अपने निर्धारित charge वसूलती है। अधिक ब्यूरो और संसाधन होने की वजह से ढ़ेरों consumers इसकी न्यूज़ फ़ीड का लाभ उठाते हैं ।

न्यूज़ कंपनियां ANI की सेवा क्यों लेती हैं?

अब आप सोच रहे होंगे कि जब न्यूज़ कंपनियां अपने संसाधन रखती हैं और उनके पास अपने न्यूज़ रिपोर्टर होते हैं तो फिर उन्हें ANI की सेवा क्यों लेने की क्या आवश्यकता है ? इसकी वजह यह है कि न्यूज कंपनियों के पास हर जगह की न्यूज कवर करने के लिए इतने सारे रिपोर्टर्स नहीं होते हैं । इसलिए यह न्यूज कंपनियां अपने दर्शकों तक खबर पहुँचाने के लिए ANI न्यूज एजेंसी की मदद लेती हैं।

ANI की स्थापना कब हुई थी?

न्यूज़ एजेंसी ANI की स्थापना 9 दिसंबर, 1971 में हुई थी। इस तरह से आज यह न्यूज एजेंसी करीब पचास साल की होने वाली है। प्रेम प्रकाश, जो एक बड़े फोटो जर्नलिस्ट के रूप में नाम कमा चुके थे, वही इस न्यूज़ एजेंसी के संस्थापक थे। अगर आज की बात करें तो इस वक्त संजीव प्रकाश इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ हैं। वह एजेंसी के संस्थापक प्रेम प्रकाश के ही सुपुत्र हैं। इन्हीं संजीव प्रकाश की धर्मपत्नी स्मिता प्रकाश इस एजेंसी की मुख्य संपादक यानी एडिटर इन चीफ हैं। इस एजेंसी का मुख्यालय इसकी स्थापना के वक्त से ही देश की यानी राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में है।


ANI के संस्थापक प्रेम प्रकाश कौन थे ?

Prem Prakash Asian News International Founder

ANI के संस्थापक प्रेम प्रकाश ने अपना करियर फोटोग्राफी से शुरू किया था। इसके बाद इन्हें विसन्यूज में फोटो जर्नलिस्ट के रूप में जगह मिली। उन्होंने आजादी के बाद के बहुत से ऐतिहासिक घटनाक्रमों को कवर किया। 1970 के दौरान वह न्यूज और डाक्यूमेंट्री मेकिंग की दुनिया में एक अहम व्यक्ति थे। एक जाने माने नाम थे। विदेशी पत्रकारों के बीच भी उनका बहुत नाम था। उनके काम के लिए उन्हें एमबीई सम्मान भी दिया गया।

ANI किस-किस को न्यूज बेचती है ?

ANI न्यूज एजेंसी किसी एक जगह से नहीं, बल्कि जगह जगह से न्यूज रिपोर्ट को कलेक्ट करती है। इसके बाद उस न्यूज को सब्सक्राइब करने वाली अपने संस्थाओं जैसे कि समाचार पत्र, पत्रिका, टेलीविजन ब्राडकास्टरों, वेबसाइट और मोबाइल प्लेटफॉर्म को बेच देती है। कई बड़े नेता भी अपनी बात सभी चैनलों और प्रसार माध्यमों तक पहुंचाने के लिए ANI की सेवा लेते हैं।















Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...