31 अगस्त 2020

National Parks of India in Hindi

भारत के राष्ट्रीय उद्यान


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National Parks of India in Hindi
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राष्ट्रीय उद्यान (national park) किसे कहते हैं?-


राष्ट्रीय उद्यान (national park) ऐसा उद्यान या वन क्षेत्र होता है जिसे किसी राष्ट्र की प्रशासन प्रणाली द्वारा औपचारिक रूप से संरक्षित करा गया हो। अलग-अलग देश अपने राष्ट्रीय उद्यानों के लिए अलग-अलग नीतियाँ रखते हैं लेकिन लगभग सभी में क्षेत्रों के वन्य जीवन को आने वाली पीढ़ीयों के लिए संरक्षित रखना एक मुख्य ध्येय होता है।


वन्यजीव अभयारण्य और राष्टीय उद्यान ( नेशनल पार्क ) में अंतर-

1. राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाएं अच्छी तरह से चिह्नित हैं, जबकि वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमाएं अक्सर अच्छी तरह से चिह्नित नहीं हैं।

2. राष्ट्रीय उद्यानों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र वन्य जीवन के संरक्षण के लिए कड़ाई से आरक्षित हैं, जिसमें मानव गतिविधियों के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।

3. राष्ट्रीय उद्यानों के अंतर्गत सभी मानव गतिविधियों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जबकि वन्यजीव अभ्यारण्य में, लकड़ी निकासी, वानिकी और खेती जैसी कुछ मानवीय गतिविधियों की अनुमति है, बशर्ते वन्यजीव पर उनके प्रत्यक्ष प्रतिकूल असर न हो।

4. वन्यजीव अभ्यारण्य में, निजी स्वामित्व अधिकार लंबे समय तक जारी रह सकते हैं क्योंकि वन्यजीव संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन राष्ट्रीय उद्यानों में निजी स्वामित्व अधिकार नहीं हैं।

5. दोनों ही वन्य जीवन की सुरक्षा, संरक्षण प्रदान करने के लिए है।

6. केंद्र सरकार राज्य सरकारों को राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के रखरखाव के लिए सहायता प्रदान करती है।



राष्ट्रीय उद्यान एक परिचय-


राष्ट्रीय उद्यान एक या एक से अधिक पारिस्थितिकी तंत्रों का समूह है, जिन्हें मानव की पहुँच से सुरक्षित रखा जाता है। यहाँ पर पौधे, वृक्ष, एवं अनेक जीवों तथा उनके निवास स्थानों का संरक्षण एवं उनसे जुड़ी विशेष वैज्ञानिक शोध की जाती हैं। राष्ट्रीय उद्यान की सीमाएं भारतीय कानून के अंतर्गत निर्धारित की जाती हैं।

भारत के सभी राष्ट्रीय उद्यान आई.यू.सी.एन. की दूसरी श्रेणी के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्रों में सम्मिलित हैं। भारत के प्रथम राष्ट्रीय उद्यान हैले नेशनल पार्क की स्थापना वर्ष 1936 में की गई थी, वर्तमान में यह उद्यान जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के नाम से चर्चित है। वर्ष 1970 तक भारत में सिर्फ 5 राष्ट्रीय उद्यान थे।

वर्ष 1972 में पारित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम एवं प्रोजेक्ट टाइगर आदि परियोजनाएं वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उचित रूप से लागू की गई।  जिनका कुल क्षेत्रफल भारत के भू-भाग का करीब 1.2% है।


भारत के राष्ट्रीय उद्यान-


1. अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह 

कैंपबेल बेय नेशनल पार्क :- यह नेशनल पार्क अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में स्थित एवं यह राज्य का प्रमुख उद्यान है| 

गलातया नेशनल पार्क :- इस पार्क का प्रमुख आकर्षण यहां पर मौजूद पेड़ों की विविधता है| 

महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क :- यह पार्क 281 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ एक विस्तृत पार्क है| 

मिडल बटन आईलैंड नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1987 में की गई थी और यह 44 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

माउंट हैरियट नेशनल पार्क :- यह पार्क यहां पर मौजूद पक्षियों के कारण काफी ज्यादा प्रसिद्ध है| यह 46 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1987 में की गई थी| 

नॉर्थ बटन आईलैंड नेशनल पार्क :- यह उद्यान आधे किलोमीटर के सूक्ष्म से क्षेत्र में फैला है और इसकी स्थापना 1979 में की गई थी| यह एक द्वीपीय पार्क है| 

रानी झांसी मरीन नेशनल पार्क :- यह पार्क 256 किलोमीटर में फैला एक विस्तृत पार्क है|

साउथ बटन आईलैंड नेशनल पार्क :- यह पार्क कुल 30 मीटर में फैला है और इसका मुख्य आकर्षण यहां पाए जाने वाले जलीय जीव हैं| 



2. आंध्र प्रदेश

पपीकोंडा नेशनल पार्क :- इस पार्क को 2008 में बनाया गया था और यह कुल 1 हजार वर्गकिलोमीटर में फैला हुआ है| 

श्री वेंकटेश्वर नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1989 मे की गई थी और यह 353 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है|



3. अरुणाचल प्रदेश

मुलिंग नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1986 मे की गई थी और यह 483 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

नामडफा नेशनल पार्क :- उस पार्क की स्थापना 1974 में की गई थी और यह पार्क 2000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 


4. असम

डिब्रू सैखोवा नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1999 में की गई थी और यह कुल 340 वर्गकिलोमीटर में फैला हुआ है| इसका मुख्य आकर्षण यहां पाए जाने वाले फेरल घोड़े हैं| 

काजीरंगा नेशनल पार्क :- यह पार्क यहां मौजूद बाघों के लिए जाना जाता है| 858 किलोमीटर वर्ग में फैले इस पार्क की स्थापना 1974 में की गयी थी| 

मानस नेशनल पार्क :- यह पार्क युनेस्को द्वारा हेरिटेज साइट के रूप में घोषित किया जा चुका है| 

नेमरी नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1978 में की गई थी और यह पार्क कुल 137 वर्गकिलोमीटर में फैला हुआ है| 

ओरंग नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1999 में की गई थी और यह पार्क 80 किलोमीटर वर्ग में फैला हुआ है|



5. बिहार

वाल्मीकि नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1976 में की गई थी और यह कुल 898.45 वर्गकिलोमीटर में फैला हुआ है| 


6. छत्तीसगढ़ 

गुरु घासीदास नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1981 में की गई थी और यह पार्क कुल 1440.71 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है|

इंद्रावती नेशनल पार्क :- यह पार्क जंगली एशियन भैंसों, बाघ संरक्षण और माइनस हिल्स के कारण प्रसिध्द है| 

कांगर घाटी नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1982 में की गई थी और यह कुल 200 किलोमीटर वर्ग में फैला हुआ है|




7. गोवा 

मोल्लम नेशनल पार्क :- यह गोवा का एकमात्र नेशनल पार्क है| इस पार्क की स्थापना 1978 में की गई थी और यह कुल 107 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 


8. गुजरात

काला हिरण नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1976 में की गई थी और यह कुल 34.08 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| इस पार्क का मुख्य आकर्षण यहां पर उपस्थित बाघ, काले हिरण और अन्य जानवर हैं| 

गिर फ़ॉरेस्ट पार्क :- यह पार्क 1412 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसकी स्थापना 1965 में की गई थी| यह पार्क एशियाई शेरों के लिए प्रसिद्ध है| 

मरीन नेशनल पार्क, कच्छ की खाड़ी :- इस पार्क की स्थापना 1980 में की गई थी और यह कुल 162 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

वंसड़ा नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1979 में की गई थी और यह कुल 23.33 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 


9. हरियाणा

कलेसर नेशनल पार्क :- यह पार्क कुल 100.8 वर्ग किलोमिटर में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 2003 में की गई थी|

सुल्तानपुर नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1989 में की गई थी और यह कुल 1.43 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है|




10. हिमाचल प्रदेश 

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1984 में की गई थी और यह पार्क कुल 754.40 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| यह हिमाचल प्रदेश का प्रमुख पार्क है और युनेस्को द्वारा विश्व हेरिटेज साइट घोषित किया जा चुका है| 

इंद्रकिला नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 2010 में की गई थी और यह पार्क कुल 104 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

खीरगंगा नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 2010 में की गई थी और यह पार्क 710 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है|


पिन वैली नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1987 में की गई थी और यह पार्क कुल 807.36 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

सिंबलबारा नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 2010 में की गई थी और यह पटना कुल 27.88 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है|


11. जम्मू एवं कश्मीर

दचीगम नेशनल पार्क :- यह भारत का एकमात्र नेशनल पार्क है जहां पर कश्मीरी हिरण पाए जाते हैं| 

हीमिस नेशनल पार्क :- यह भारत का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है और कुल 4400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

किश्तवर नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1981 में की गई थी और यह कुल 400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

सलीम अली नेशनल पार्क :- यह पार्क यहां उपलब्ध पंछियों के कारण प्रसिध्द है|


12. झारखंड

बेतला नेशनल पार्क :- यह झारखंड का एकमात्र नेशनल पार्क है और यहां पर तरह तरह के जानवर जैसे चिता, बाघ, बंदर, तेंदुए पाए जाते हैं| 


13. कर्नाटक

अंशी नेशनल पार्क :- यहाँ पर मुख्य रूप से शेर, तेंदुए, हाथी, भालू, हिरण और काले तेंदुए पाए जाते हैं| 

बंदीपुर नेशनल पार्क :- यह पार्क यहां पाए जाने वाले बंगाली शेरों के लिए मशहूर है|

बनारघटा नेशनल पार्क :- यह पार्क स्लोथ बीयर और सांभर हिरण के कारण मशहूर है|

कूदरेमुख नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1987 में की गई थी और यह पार्क कुल 600.32 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

नगरहॉल नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1988 में की गई थी और यह पार्क कुल 643.39 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है|



14. केरल 

अनामूडी शोला नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 2003 में की गई थी और यह पार्क कुल 7.50 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

एरावीकुलम नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1978 में की गई थी और यह पार्क कुल 97 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

मथीकेटन नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 2003 में की गई थी और यह पार्क कुल 12.82 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

पम्बादुम शोला नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 2003 में की गई थी और यह पार्क कुल 1.32 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

पेरियार नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1982 में की गई थी और यह पार्क कुल 305 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

साइलेंट वैली नेशनल पार्क :- इस पार्क की मुख्य विशेषता है कि यहां पर ऐसा कुछ नहीं जो आवाज करता हो, इसलिए इसका नाम साइलेंट वैली है| 


15. मध्य प्रदेश 

बांधवगढ़ नेशनल पार्क :- इस पार्क में एंडीमिक पौधों की 1336 स्पिसीज पाई जाती हैं|

कान्हा नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1955 में की गई थी और यह पार्क कुल 940 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

माधव नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1959 में की गई थी और यह पार्क कुल 375.22 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

मंडल पौधा गृह, नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1983 में की गई थी और यह पार्क कुल 0.27 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

पन्ना नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1981 में की गई थी और यह पार्क कुल 542.67वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

पेंच नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1977 में की गई थी और यह पार्क कुल 758 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

संजय नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1981 में की गई थी और यह पार्क कुल 466.67 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

सतपुड़ा नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1981 में की गई थी और यह पार्क कुल 524 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

वन विहार नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1983 में की गई थी और यह पार्क कुल 4.48 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है|


16. महाराष्ट्र

चंदोलि नेशनल पार्क :– इस पार्क की स्थापना 2004 में की गई थी और यह पार्क कुल 317.67 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

गुगामल नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1987 में की गई थी और यह पार्क कुल 361.28 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

नवेगांव नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1975 में की गई थी और यह पार्क कुल 133.88 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

संजय गांधी नेशनल पार्क :- यह पार्क यहां मौजूद एशियाई शेरों, भारतीय तेन्दुओं, हनुमान लंगूर, हिरणों और लोम्ड़ियों के लिए प्रसिद्ध है| 

तवोड़ा नेशनल पार्क :- यह पार्क बाघों के लिए जाना जाता है|



17. मणिपुर

केबुल लामज्व नेशनल पार्क :- यह विश्व का एकमात्र तैरता हुआ पार्क है|

सिरोही नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1982 में की गई थी और यह पार्क कुल 40 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है|


18. मेघालय

बल्फ़ाक्रम नेशनल पार्क :- यह पार्क यहां मौजूद जंगली जलीय भैंसों और बिल्लियों की विशाल स्पिसीज के लिए प्रसिद्ध है| 

नोकरेक नेशनल पार्क :- यह पार्क युनेस्को द्वारा विश्व जैविक धरोहर घोषित किया जा चुका है| 


19. मिजोरम 

मूरलेन नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1991 में की गई थी और यह पार्क कुल 100 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

फांगफ़ुई नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1992 में की गई थी और यह पार्क कुल 50 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 


20. नागालैंड 

टैंजकी नेशनल पार्क :- यह पार्क नागालैंड का एकमात्र पार्क है| इसे 1993 में स्थापित किया गया था और यह कुल 202.02 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 


21. उड़ीसा 

भीतरकनिका नेशनल पार्क :- यह पार्क यहां मौजूद सफेद मगर, जंगली सुअर और चीतल के कारण प्रसिद्ध है| 

सिमली पाल नेशनल पार्क :- यह पार्क यहां मौजूद सांभर के कारण जाना जाता है|


22. राजस्थान 

थार नेशनल पार्क :- यहाँ का प्रमुख आकर्षण यहां पाए जाने वाले पक्षी हैं|

केओलादेव नेशनल पार्क :- इस पार्क को युनेस्को द्वारा विश्व हेरिटेज साइट घोषित किया जा चुका है| 

माउंट आबू नेशनल पार्क :- यह पार्क माउंट आबू पर स्थित है|

मुकुन्दरा हिल्स नेशनल पार्क :- यह पार्क पहाड़ियों के पास स्थित होने के कारण अत्यधिक खूबसूरत नजर आता है| 

रणथम्बौर नेशनल पार्क :- यह राजस्थान का सर्वाधिक लोकप्रिय पार्क है|

सरिस्का टाइगर रिजर्व :- यह पार्क यहां संरक्षित बाघों के लिए जाना जाता है|


23. सिक्किम 

कंचनजंगा नेशनल पार्क :- इस पार्क को युनेस्को द्वारा विश्व हेरिटेज साइट घोषित किया गया है| 


24. तमिलनाडु

ग्यूंडी नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1976 में की गई थी और यह कुल 2.82 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है| 

मन्नार की खाड़ी, मरीन नेशनल पार्क :- यह एक खाड़ी पार्क है जो कि समुन्द्र के कारण बहुत आकर्षक लगता है| 

इंदिरा गांधी वन्यजीव संरक्षण एवं नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 90 के दशक में की गई थी| 

मुदुमलाई नेशनल पार्क :- यह पार्क आजादी के पहले स्थापित किया गया था और यह तमिलनाडु का सबसे बड़ा पार्क है| 

मुकुरथी नेशनल पार्क :- यह पार्क नीलगिरी पहाड़ों के बीच बनाया गया है|


25. तेलंगाना 

कासू ब्रह्मनन्दा रेड्डी नेशनल पार्क :- यह पार्क 1994 मे बनाया गया था|

महावीर हरिना वनस्थली नेशनल पार्क :- यह तेलंगाना का सबसे बड़ा पार्क है|

मृगवाणी नेशनल पार्क :- यह पार्क कुल 3.60 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है|


26. त्रिपुरा 

बिशन नेशनल पार्क :- यह त्रिपुरा का सबसे बड़ा पार्क है|

क्लाऊडेड लियोपर्ड नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 2003 में की गई थी|


27. उत्तर प्रदेश

दुधवा नेशनल पार्क :- यह उत्तर प्रदेश का एकमात्र नेशनल पार्क है| यह पार्क यहां मौजूद बाघ, सांभर हिरण के लिए प्रसिद्ध है|


28. उत्तराखंड

गोविंद पशु विहार :- इस पार्क की स्थापना 1990 में की गई थी|

जिम कार्बेट नेशनल पार्क :- यह भारत का पहला नेशनल पार्क है|

नंदा देवी नेशनल पार्क :- यह युनेस्को द्वारा घोषित विश्व हेरिटेज साइट में से एक है|

राजाजी नेशनल पार्क :- मुख्यतः इस नेशनल पार्क को यहां मौजूद हाथियों के लिए जाना जाता है|

वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क :- यह युनेस्को द्वारा विश्व हेरिटेज साइट घोषित किया जा चुका है| 


29. पश्चिम बंगाल 

बक्सा टाइगर रिजर्व :- यह पार्क बाघों के लिए जाना जाता है|

गोरूमरा नेशनल पार्क :- यह पार्क 1994 में स्थापित किया गया था|

जल्दापरा नेशनल पार्क :- यह भारतीय गेण्डों के लिए प्रसिद्ध है|

नियोरा वैली नेशनल पार्क :- यह पार्क कुल 88 वर्ग किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है| 

सिंगलीला नेशनल पार्क :- इस पार्क की स्थापना 1986 में की गई थी|

सुंदरबन नेशनल पार्क :- यह युनेस्को द्वारा घोषित विश्व हेरिटेज साइट्स में से एक है|


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29 अगस्त 2020

moharram kyon manate hain aur youm e ashura kya hai

मुहर्रम क्यों मनाते हैं ? और यौमे आशुरा क्या है ? 




मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है जिसकी 10वीं तारीख को यौम-ए-आशूरा मनाया जाता है| यौम-ए-आशूरा का अर्थ है (यौम यानी दिन और आशूरा यानी दसवां जो अशर या अशरा से बना है, जिसका अर्थ होता है दस) इस तरह यौम-ए-आशूरा का मतलब दसवां दिन से है | दरअसल इसी दिन कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन को उनके परिवार के साथ शहीद कर दिया गया था| 

इस्लाम के प्रचार के दौरान कई कबीले दुश्मन बन गए-


इस शहादत की कहानी वहीं से शुरू होती है जहां से हज़रत मुहम्मद की कहानी का आगाज होता है यानी जब उन्होंने इस्लाम का प्रचार शुरू किया था| इस्लाम के प्रचार के दौरान अरब के कई कबीले मुहम्मद साहब के दुश्मन बन गए| उनमें से कई ने मुहम्मद साहब की बढ़ती हुई ताकत को देखकर इस्लाम कबूल कर लिया लेकिन दिलों के अंदर दुश्मनी बाकी रखी| 

इन्ही में से एक था अबु सुफियान का परिवार| ये वही अबु सुफियान था जिसकी हज़रत मुहम्मद के हाथों मक्का में हार हुई थी और उसने इस्लाम अपना लिया था| अबु सुफियान का बेटा था अमीर मुआविया जिसने हज़रत अली के बाद खिलाफत की गद्दी संभाली और पांचवा खलीफा बना| 

इतिहासकर लिखते हैं कि हज़रत अली के बाद उनके बेटे इमाम हसन को खलीफा बनना था लेकिन अमीर मुआविया ने कुछ शर्तों के साथ खिलाफत हासिल कर ली| कुछ इतिहासकारों का मत है कि अमीर-ए-मुआविया को हज़रत मुहम्मद के परिवार से डर था कि कहीं ये लोग खिलाफत पर दावा न कर दें इसलिए उसने इमाम हसन को जहर देकर मरवा डाला| बाद में जब अमीर-ए-मुआविया ने अपने बाद अपने बेटे यज़ीद को खलीफा घोषित कर दिया| ये उन शर्तो का उल्लंघन था जिनके तहत मुआविया को खिलाफत दी गई थी| अमीर मुआविया की मौत के बाद यज़ीद खलीफा बन गया और उसने इमाम हुसैन से अपनी बैत (समर्थन) के लिए कहा| इमाम हुसैन ने यज़ीद को खलीफा मानने से इनकार कर दिया| 

यज़ीद को मालूम था कि जब तक हज़रत मुहम्मद के नाती और हज़रत अली के बेटे इमाम हुसैन उसकी बैत नही करेंगे तब तक उसका खिलाफत का दावा अधूरा था| इसलिये यज़ीद किसी भी कीमत पर इमाम हुसैन का समर्थन चाहता था| मगर इमाम हुसैन को बेदीन (अधर्मी) यज़ीद का खलीफा बनना मंजूर नही था| उन्होंने कहा कि मेरे जैसा कभी तेरे जैसे कि बैत नही कर सकता| 

अल्लाह के पाक घर में खून-खराबा नहीं चाहते थे-


जब इमाम हुसैन हज करने के लिए मदीना से मक्का आए तो उन्हें मालूम हुआ कि यहां यज़ीद के लोग उनका कत्ल कर सकते हैं तो वो मक्का से बिना हज किए ही चले गए| क्योंकि वो अल्लाह के पाक घर में खून-खराबा नहीं चाहते थे| वो मक्का से इराक के शहर कूफा पहुंचे| उन्होंने कूफे के लोगों से मदद मांगी| यज़ीद के सैनिक इमाम हुसैन की तलाश में कूफा भी पहुंच गए| इमाम हुसैन ने अपने पैसों से कर्बला में कुछ जमीन खरीदी और वहां अपने तंबू गाड़ दिए और अपने परिवार के 72 सदस्यों के साथ इन तंबुओं में ठहर गए| यज़ीद का हजारों का लश्कर भी कर्बला के मैदान में पहुंच गया| 

प्राचीन परंपराओं के अनुसार कर्बला का अर्थ है ईश्वर की पवित्र भूमि| कहते हैं ये बस्ती कई बार उजड़ी और कई बार आबाद हुई| जब यज़ीद की सेना कर्बला पहुंची तो इमाम हुसैन को मालूम हुआ कि फौजी प्यासे हैं तो उन्होंने फौज को पानी पिलवाया| इमाम हुसैन का कहना था कि हमारी लड़ाई खिलाफत के पद की नही बल्कि नाना (हज़रत मुहम्मद) के दीन को बचाने की है| कुछ इतिहासकारों का मत है यज़ीद ने अपने कमांडर उमरे साद को आदेश दिया था कि वो इमाम हुसैन और उनके परिवार को शाम (सीरिया) ले कर आए और वो यहां उनसे बैत करने को कहेगा| लेकिन इसी दौरान शिम्र, इब्ने जियाद का खत लेकर पहुंचता है जिसमे लिखा था कि तुम इमाम हुसैन को कत्ल कर दो नहीं तो शिम्र को सेनापति बना दो| 

बहरहाल हुकूमत हो या खिलाफत हमेशा षडयंत्र करने वाले सक्रिय रहते हैं| इसी कर्बला के मैदान में जहां इमाम हुसैन ने अपने विरोधी की सेना को पानी पिलवाया| वहीं उनके विरोधियों ने फुरात नदी से निकली नहर पर कब्जा कर लिया और इमाम हुसैन के परिवार का पानी बंद कर दिया| इमाम हुसैन जानते थे कि हजारों फौजियों के मुकाबले में उनके 72 साथी शहीद हो जाएंगे| वो चाहते तो खुद समेत सबको बचा सकते थे लेकिन उनकी नजर में दीनी उसूल ज्यादा अहम थे| 

बेटे का कत्ल कर दिए जाने के बावजूद अपना इरादा न बदला-


इमाम हुसैन तीन दिन तक भूखे-प्यासे औरतों और बच्चों से सब्र करने को कहते रहे| वो अपने छह महीने के बेटे को पानी पिलाने नहर पर ले गए| उनको उम्मीद थी कि इस बच्चे को तो पानी मिल ही जाएगा| लेकिन जालिम फौजियों ने उस बच्चे को भी नही बख्शा और एक तीन कीलों वाला तीर उसके गले मे दे मारा जो आर-पार होकर इमाम हुसैन के बाजू में जा धंसा| इमाम हुसैन के सामने उनके छह महीने के बेटे को कत्ल कर दिया गया लेकिन उन्होंने अपना इरादा न बदला| 

नौ मोहर्रम की रात को इमाम हुसैन अपने परिवार के लोगों के साथ रात भर दुआ करते रहे| वो अल्लाह से दुआ करते रहे कि अल्लाह उनकी कुर्बानी को कबूल कर ले और दीन व शरीयत को बचा ले| 




अगले दिन 10 मोहर्रम 61 हिजरी यानी 10 अक्टूबर, 680 ई| को कर्बला के मैदान में एक अजीब जंग हुई जिसमें हजारों प्रशिक्षित सैनिकों का मुकाबला छोटे-छोटे बच्चों और और औरतों समेत 72 भूखे-प्यासे लोगों से था| नतीजा सबको मालूम था| फिर भी लड़ना था| इंसानियत के लिए, सच्चाई के लिए, ईमान के लिए और शहादत के लिए| 

सभी मर्दों को कत्ल कर दिया गया| बच्चों को मौत के घाट उतार दिया गया| औरतों को कैदी बना लिया गया| इमाम हुसैन का कटा सिर नेजे (भाले) पर शहर की गलियों में घुमाया गया| जालिमों ने अपने जुल्म की हर इंतेहा का प्रदर्शन किया लेकिन इमाम हुसैन से बैत न करा सके| 


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मुहर्रम की 10वीं तारीख को यौम-ए-आशूरा का एहतमाम इस तरह पैगंबर हज़रत मुहम्मद के नवासे और हज़रत अली के बेटे हज़रत इमाम हुसैन ने शहादत देकर अधर्मी और अत्याचारी के खिलाफ न सिर्फ अपनी बहादुरी का परिचय दिया बल्कि अपनी धर्मपरायणता का भी उदाहरण दिया| तभी से मुहर्रम की दसवीं तारीख को यौम-ए-आशूरा का एहतमाम किया जाता है और इस मौके पर रोजे रखे जाते हैं, नफ्ल नमाजें पढ़ीं जाती है, सदका किया जाता है, लंगर लुटाये जाते हैं और भी कई तरह के दीनी और समाजी कार्य किये जाते हैं|

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what is pink tax in hindi

 PINK TAX KYA HOTA HAI ?


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WHAT IS PINK TAX IN HINDI
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पिंक टैक्स क्या होता है ?

बाजार में खरीददारी करते वक्त आपने भी नोटिस किया होगा कि महिला और पुरुषों के एक-जैसे उत्पादों का दाम बराबर नहीं होता है। हेल्थकेयर से लेकर पर्सनल ग्रूमिंग के प्रोडक्ट्स के लिए महिलाओं से पुरुषों की तुलना में अधिक कीमत वसूली जाती है। यह जो अतिरिक्त कीमत महिलाओं को चुकानी पड़ती है इसी को Pink Tax कहते हैं।

पिंक टैक्स (Pink Tax) महिलाओं द्वारा चुकाई जाने वाली एक इनविज़िबल कॉस्ट (अदृश्य लागत) है। यह राशि उन्हें उन उत्पादों के लिये चुकानी पड़ती है जो विशेष तौर पर उनके लिये डिज़ाइन किये जाते हैं। 

न्यूयॉर्क में किये गए एक अध्ययन में पाया गया है कि महिलाओं के लिये बने उत्पादों की लागत पुरुषों के लिये बनाए गए समान उत्पादों की तुलना में 7% अधिक होती है। 

व्यक्तिगत देखभाल संबंधी उत्पादों (Personal Care Products) के मामले में यह अंतर 13% तक बढ़ जाता है। 

यह अंतर सिर्फ न्यूयॉर्क या विकसित देशों तक ही सीमित नहीं है बल्कि भारत में भी महिलाएँ विशेष रूप से उनके लिये उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर पिंक टैक्स का भुगतान करती हैं। 

उदाहरण के तौर पर अधिकांश सैलून पुरुषों की तुलना में महिलाओं के बाल काटने पर अधिक शुल्क लेते हैं। यह रेज़र और डियोडरेंट जैसे व्यक्तिगत देखभाल संबंधी उत्पादों के लिये भी सही है। 

एक प्रसिद्ध ब्रांड के डिस्पोज़ेबल रेज़र की कीमत पुरुषों के लिये लगभग 20 रुपए के आसपास है और उसी कंपनी की महिलाओं के लिये सबसे सस्ती डिस्पोज़ेबल रेज़र की कीमत 55 रुपए के करीब है। जबकि ‘महिला संस्करण’ पैकेजिंग के अलावा सामान्य से शायद ही अलग हो।


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महिलाओं पर होता है अच्छा दिखने का दबाव-



इस पिंक टैक्स के पीछे वजह यह है कि महिलाओं पर अच्छा दिखने का दबाव होता है, जो कि पुरुषों पर कम या न के बराबर होता है। 

इस कारण को भुनाने के लिए कंपनियां महिलाओं और पुरुषों के लिए एक ही उत्पाद और सर्विस को अलग-अलग दामों पर बेचती हैं। 

इस बात को साबित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के टीवी एंकर Karl Stefanovic एक साल तक रोजाना ब्लू कलर का एक ही सूट पहनकर ऑफिस गए और किसी ने उन्हें नहीं टोका, जबकि उनकी को-होस्ट्स पर दबाव रहता था कि वे रोजाना नए कपड़ों में दफ्तर आएं।


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ऐसे बचें पिंक टैक्स से-


पिंक टैक्स से बचने का सबसे पहला तरीका यह है कि आप पैकेजिंग पर न जाकर प्रोडक्ट क्वालिटी पर जाएं। अगर आपको लगता है कि महिला और पुरुषों के प्रोडक्ट में सिवाए पैकेजिंग के और कोई फर्क नहीं है तो आप सस्ता वाला प्रोडक्ट खरीदें।


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who was bairam khan

 बैरम खान कौन था ?

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बैरम खाँ एक असाधारण सैन्य जनरल थे जिन्होंने मुगल सम्राट हुमायूं और उनके बेटे अकबर के लिए सेवा की और उनके राज्य का विस्तार करने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। बैरम खां ने पानीपत की दूसरी लड़ाई में हेमू के खिलाफ अकबर की जीत के लिए उनका नेतृत्व किया। एक योग्य संरक्षक के रूप में, उन्होंने शत्रुतापूर्ण स्थितियों के दौरान अकबर को निर्देशित भी किया। बैरम खाँ मुगल साम्राज्य के प्रति तब तक वफादार रहे जब तक कि अकबर अपनी धाय माँ माहम अनगा के करीब नहीं आए, क्योंकि माहम अनगा ने दोनों के बीच मतभेद पैदा कर दिए थे। 

जब हुमायूं को इस्लाम शाह की मौत के बारे में खबर मिली, तो वह भारत पर आक्रमण करने के लिए उत्साहित हो गया। उसी समय पर, बैरम खाँ उनकी मदद के लिए आए थे। उन्होंने अफगानों को हराकर पंजाब पर विजय प्राप्त की थी और बिना किसी विपक्ष के दिल्ली पर कब्जा कर लिया था। मुगल साम्राज्य फिर से अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया क्योंकि उसमें बैरम खाँ का बहुत बड़ा योगदान था। जब अकबर केवल चौदह वर्ष का था तो हुमायूं की मृत्यु हो गई और बैरम खाँ ने अकबर का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली। उनके संरक्षण के तहत, अकबर ने मुगल साम्राज्य को बदलकर एक विशाल साम्राज्य में समेकित किया। इसके बाद हेमू विक्रमादित्य के तहत अफगान सेना ने आगरा और दिल्ली पर कब्जा कर लिया लेकिन बैरम की अगुआई में अकबर की सेना ने पानीपत (1556) की दूसरी लड़ाई में हेमू को हरा दिया और खोए गए क्षेत्रों पर पुनः कब्जा कर लिया। 

अकबर की धाय मां माहम मनगा के विचार अलग तरह के थे। वह अपने बेटे आधम खान के साथ-साथ खुद भी शासन करना चाहती थीं। उन्होंने बैरम खाँ को पद से हटाने के लिए अकबर को यह कहकर मजबूर कर दिया था कि वो अब बिल्कुल बूढ़े हो चुके हैं और कार्यभार संभालने में असमर्थ हैं। अकबर उनकी इस बात से सहमत थे और उन्होंने बैरम खाँ को हज करने के लिए मक्का की यात्रा की व्यवस्था कर दी। बैरम खां मक्का के लिए रवाना हो गए लेकिन रास्ते में उन्हें आधम खान द्वारा भेजी गई एक सेना मिली, जिसने उनसे कहा कि उन्हें पहरेदार के रूप में साथ जाने के लिए मुगल साम्राज्य द्वारा भेजा गया है। बैरम ने अपने आप को अपमानित महसूस किया और सेनाओं के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत की। जिसके कारण बैरम को बन्दी बनाकर अकबर के राज-दरबार में पेश किया गया। अनादर करने की बजाय, अकबर ने उनका आदर और सम्मान किया और मक्का की उनकी उचित यात्रा को वित्त पोषित किया। हालांकि किस्मत ने बैरम खाँ के लिए कुछ और ही सोंच रखा था, जब वह खंभात के बंदरगाह शहर पहुंचे तो अफगानों, जिसके पिता को बैरम खाँ ने पांच साल पहले एक युद्धा में मार दिया गया था, ने उनकी पीठ पर छुरा भोंक दिया था। इसके बाद 31 जनवरी 1561 को बैरम खाँ की मृत्यु हो गई।


बैरम खान के बारे में तथ्य और जानकारी-


समयाकाल                       1517-1561

जन्म

बदख्शां में 1501

मृत्यु

31 जनवरी 1561, गुजरात

पत्नी

सलीमा सुल्तान बेगम

पुत्र

अब्दुल रहीम खान-ए-खाना

धर्म

शिया इस्लाम

बारे में

बैरम खाँ शीर्ष जनरलों के बीच एक सैन्य कमांडर, मुगल सेना का प्रमुख कमांडर, एक शक्तिशाली राजनेता और साथ-साथ मुगल सम्राट के दरबार में एक शासक था

सम्राट

अकबर

निष्ठावान

मुगल साम्राज्य

कमांड

मुगल सेना

सैन्य सेवा

बैरम ने 16 वर्ष की उम्र में बाबर के साम्राज्य की सेवा की थी और भारत की प्रारम्भिक मुगल विजय में सक्रिय रूप से भाग लिया था।

हुमांयू के तहत मुगल साम्राज्य की स्थापना में बैरम खान ने भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

1556 में हुमायूं की मौत के बाद, बैरम खाँ राज्य-संरक्षक बन गए क्योंकि अकबर उस समय शासन करने के लिए बहुत छोटे थे।

 

पानीपत की दूसरी लड़ाई नवंबर 1556 में, मुगल सेनाओं का नेतृत्व बैरम खाँ ने किया था।

सलीमा सुल्तान

सलीमा सुल्तान बैरम की पत्नियों में से एक थीं। बैरम की मृत्यु के बाद अकबर ने उनसे विवाह किया।

मृत्यु

1560 में, अकबर ने बैरम को पदच्युत कर दिया और उन्हें मक्का की तीर्थ यात्रा पर जाने का आदेश दिया। यद्यपि, गुजरात में 31 जनवरी 1561 को बीच रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई।

खानवा का युद्ध

17 मार्च 1527 को खानवा का युद्ध पानीपत की लड़ाई के बाद आगरा के लगभग 60 किलोमीटर पश्चिम में मुगल सम्राट बाबर द्वारा पहली बार लड़ा गया था।

घाघरा का युद्ध

1529 में घाघरा की लड़ाई मुगल साम्राज्य द्वारा सुल्तान महमूद लोदी द्वारा शासित पूर्वी अफगान संघ और सुल्तान नुसरत शाह द्वारा शासित बंगाल की सल्तनत के खिलाफ लड़ी गई

संभल की घेराबंदी

बाबर ने कासिम संभली द्वारा छीने गए एक जिले संभल को एक सेना भेजी।

पानीपत की लड़ाई (1556)

पानीपत की दूसरी लड़ाई 5 नवंबर 1556 को अकबर और सम्राट हेम चंद्र विक्रमादित्य (हेमू), हिंदू शासक के बीच लड़ी गई थी। अकबर के सेनापति और खान जमान और बैरम खां ने उनके लिए जीत सुनिश्चित की।

अंग्रेजी में किताबें

जानकी प्रकाशन द्वारा राजनीतिक जीवनी खान-ए-खाना बैरम खाँ

बैरम खां: सैनिक और प्रशासक

मुहम्मद बैरम खां का जीवन और उनकी उपलब्धियां

हिन्दी में किताबें

खान-ए-खाना नामा प्रतिभा प्रतिष्ठान



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