28 जुलाई 2020

qualcomm launches quick charge 5 technology for charging

अब स्मार्ट फ़ोन होगा मिनटों में फुल चार्ज


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qualcomm launches quick charge 5 technology for charging
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Qualcomm का धमाका:-


स्मार्टफोन के लिए प्रोसेसर बनाने वाली मशहूर अमेरिकी कंपनी Qualcomm ने क्विक चार्ज 5 (Quick Charge 5) को अपनी अल्ट्रा फास्ट टेक्नोलॉजी के तौर पर लॉन्च किया है|

कंपनी ने दावा किया है कि इसके जरिए पूरी तरह खत्म हो चुकी स्मार्टफोन की बैटरी को सिर्फ 5 मिनट में ही 0 से 50 फीसदी तक चार्ज किया जा सकता है| 

इससे पहले कंपनी ने जून 2017 में इसके पिछले वर्जन Quick Charge 4+ को भी लॉन्च किया| यह उसी क्विक चार्ज 4+ तकनीक का अपग्रेड है। 

सुपर क्विक चार्जिंग के अलावा टेक्नोलॉजी पिछले वर्जन के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा कूल और 70 फीसदी ज्यादा क्षमता के साथ है| 

और यह अभी फलहाल टेस्टिंग फेज़ में है और इस साल की तीसरी तिमाही तक फोन में यह टेक्नॉलजी आने लग जाएगी।

यह 2S बैटरी पैक को सपोर्ट करती है. इसके साथ टेक्नोलॉजी को यूएसबी पावर डिलीवरी (USB-PD) और यूएसबी टाइप सी टेक्नोलॉजी के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है|


क्या है खासियत:-


क्विक चार्ज 5 टेक्नॉलजी 100W से ज्यादा की चार्जिंग क्षमता सपॉर्ट करती है, वहीं पुरानी तकनीक 45W पावर के साथ आती थी।

यह 4000mAh की बैटरी को चार्ज करते समय 10 डिग्री तक कम गर्म करती है। यह पहली जेनरेशन की क्विक चार्ज तकनीक के मुकाबले 10 गुना ज्यादा पावरफुल है। 

यह एक साधारण बैटरी को शून्य से 100 फीसदी तक चार्ज करने में 15 मिनट का समय लेगी। 

वहीं, क्विक चार्ज 4+ के जरिए 15 मिनट में सिर्फ 15 फीसदी बैटरी चार्ज होती है।

इतना ही नहीं, बैटरी लाइफ बढ़ाने के लिए इसमें क्वालकॉम बैटरी सेवर और अडेप्टर कैपेबिलिटी के लिए स्मार्ट आइडेंटिफिकेशन जैसे फीचर्स भी मिलेंगे |


किन-किन फ़ोन में मिलेगा क्विक चार्ज का सपोर्ट:-


शुरुआत में यह टेक्नॉलजी सिर्फ उन डिवाइस में सपॉर्ट करेगी जिनमें क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 865, स्नैपड्रैगन 865+ और इसके बाद आने वाले प्रोसेसर होंगे। 

हालांकि आने वाले समय में इसे क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 700-सीरीज के प्रोसेसर वाले फोन में भी दिया जाने लगेगा।


ये भी जान लें :-


ये भी जान लें कि हाल ही में ओप्पो ने भी नई फास्ट चार्जिंग टेक्नॉलजी 125W Flash Charge पेश की है।

ओप्पो दावा करती है कि उनकी टेक्नॉलजी से 4000mAh की बैटरी सिर्फ 20 मिनट में चार्ज हो जाती है। 

इसके अलावा रियलमी भी 125W UltraDAR फास्ट चार्जिंग टेक्नॉलजी ले आई है।






दोस्तों जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेन्ट और शेयर जरुर करें धन्यवाद जय हिन्द जय भारत |





Sbi pension seva website launched for sbi pensioners

SBI पेंशन सेवा वेबसाइट लॉन्च, पेंशनर्स को ऑनलाइन मिलेंगे कई फायदे


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Sbi pension seva website launched for sbi pensioners

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने पेंशनभोगियों (स्टाफ पेंशनरों के अलावा) के लिए एक वेबसाइट लॉन्च की है, जिनके बैंक में पेंशन खाता है। एसबीआई पेंशन सेवा, पेंशनरों के लिए समर्पित वेबसाइट है| जिसका उपयोग करना सरल है और निश्चित रूप से ईस वेबसाइट का लाभ पेंशनभोगियों को मिलेगा करेगा।

SBI भारत में सबसे बड़ा पेंशन देने वाला बैंक है, जो पूरे देश में लगभग 54 लाख पेंशनभोगियों की सेवा कर रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान करने के लिए, एसबीआई ने केंद्र सरकार की एजेंसियों (रक्षा, रेलवे, डाक, दूरसंचार, नागरिक), राज्य सरकार के विभागों और पेंशन प्रसंस्करण के लिए विभिन्न स्वायत्त निकायों के साथ सहयोग किया है।

देश के शीर्ष ऋणदाता से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनभोगी एसबीआई पेंशन सेवा वेबसाइट पर लॉगिन कर सकते हैं और अपनी पेंशन से संबंधित विवरणों की तुरंत जांच कर सकते हैं:-

 

एसबीआई पेंशनसेवा वेबसाइट पर उपलब्ध सेवाएं:-


 1) अर्रेअर (arrear) गणना पत्रक डाउनलोड करें (Download of Arrear calculation sheets)

 2) पैंशनशिप / फॉर्म 16 डाउनलोड करें(Download of Pensionslip/Form 16)

 3) पेंशन प्रोफाइल विवरण (Pension Profile Details)

 4) निवेश से संबंधित विवरण (Investment related details)

 5) जीवन प्रमाण पत्र की स्थिति (Life Certificate status)

 6) लेनदेन विवरण (Transactions Details)

 

 

पेंशनरों को विस्तारित लाभ (Extended benefits to pensioners):-


 1) पेंशन भुगतान विवरण का मोबाइल फोन पर एसएमएस अलर्ट।

 2) पेंशन पर्ची ईमेल / पेंशन भुगतान शाखा के माध्यम से।

 3) भारतीय स्टेट बैंक की किसी भी शाखा में जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की सुविधा।

 4) जीवन प्रमाण की सुविधा शाखाओं में उपलब्ध।

 5) वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS)

 6) रक्षा / रेलवे / सीपीएओ / राजस्थान पेंशनरों के लिए ईपीपीओ प्रावधान

 

पेंशनर्स ऐसे कर सकते हैं रजिस्टर:-


SBI में पेंशन अकाउंट रखने वाले पेंशनर्स को SBI पेंशन सेवा वेबसाइट का लाभ लेने के लिए खुद को पहले रजिस्टर करना होगा. इसके लिए https://www.pensionseva.sbi/  पर जाना होगा |


1) कम-से-कम पांच अक्षरों से अपना यूजर आई डी(USER ID)बनायें|

2) फिर अपना पेंशन खाता संख्या दर्ज करें|

3) अपनी जन्मतिथि दर्ज करें |

4) पेंशन भुगतान शाखा का शाखा कोड (BRANCH CODE) दर्ज करें|

5) पंजीकृत ईमेल आईडी दर्ज करें |

6) मेल नया पासवर्ड दर्ज करें, फिर पासवर्ड की पुष्टि करें |


इसे भी पढ़ें:- SBI ATM WITHDRAWAL RULES 


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS

विज्ञान को नाज है इन महिला वैज्ञानिकों पर


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रसायन और भौतिक विज्ञानी-


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS


मैरी क्यूरी (mary curie)- 

मैरी स्क्लाडोवका क्यूरी,  (लघु नाम: मैरी क्यूरी) (जन्म 07 नवम्बर 1867- मृत्यु 04 जुलाई 1934) मैरी क्यूरी का जन्म पोलैंड के वारसा नगर में हुआ था। महिला होने के कारण तत्कालीन वारसॉ में उन्हें सीमित शिक्षा की ही अनुमति थी। इसलिए उन्हें छुप-छुपाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करनी पड़ी। बाद में बड़ी बहन की आर्थिक सहायता की बदौलत वह भौतिकी और गणित की पढ़ाई के लिए पेरिस आईं। 

मैरी क्यूरी एकमात्र ऐसी महिला है, जिन्हें दो बार नोबेल पुरुस्कार मिल चूका है| वह यूनिवर्सिटी आफ पेरिस की पहली महिला प्रोफ़ेसर रहीं| उन्होंने अपने पति पियरे क्यूरी और हेनरी बेक्यूरेल के साथ मिलकर रेडियोधर्मी किरणों और उसके पीछे छुपे सिद्धांत का पता लगाया| 

उन्होंने दुनिया को रेडियोधर्मिता शब्द दिया| वह सभी जांचों में अपनी टीम का नेतृत्व करती थीं| उन्होंने पोलोनियम और रेडियम कि खोज भी की| आइसोटोप के साथ ट्यूमर के इलाज का अध्ययन शुरू करने का विचार भी मैरी का ही था| उन्होंने पेरिस और वारसा में क्यूरी संस्थान की स्थापना की| 

दुर्भाग्य से मैरी रेडियोधर्मिता के खतरों से अनजान थीं| लम्बी अवधि तक विकिरणों के सम्पर्क के कारण 66 साल की उम्र में फ्रांस के सांटोरियम में  अप्लासटिक एनीमिया की वजह से 1934 में उनकी मौत हुई| उनके जर्नल और शोध पत्र भी इतने ज्यादा रेडियोधर्मी है कि उन्हें सीसे के बक्से में रखा जाता है| 

मैडम क्युरी आज भले ही इस संसार में नही हैं| किन्तु उनके द्वारा किये गए कार्य तथा समर्पण को विश्व कभी नही भूल सकता. आज भी समस्त विश्व में मैरी क्युरी श्रद्धा की पात्र हैं तथा उनको सम्मान से याद करना हम सबके लिए गौरव की बात है|


रसायन विज्ञानी-


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS


आइरीन
क्यूरी (Irène Curie)-

(जन्म 12 सितंबर- मृत्यु 17 मार्च 1956ई.)  आइरीन क्यूरी महान वैज्ञानिक मैरी क्यूरी की बेटी आइरीन ने अपने काम के बूते पर अपनी पहचान बनाई| उन्होंने अपने पति फ्रेडरिक जोल्यो  के साथ मिलकर कृत्रिम रेडियोधर्मिता की खोज की| 

उनकी अपने पति के साथ पहली मुलाकात उस समय हुई थी, जब वह अपनी डॉक्टरेट की डिग्री ले रही थीं| उस दौरान उनके पति ने रेडियोधर्मी रसायनों के अध्ययन के लिए प्रयोगशाला तकनीक सिखाने के लिए निवेदन किया था| 1926 ई. में आइरीन क्यूरी और जोल्यो दोनों का विवाह हो गया। 

अपनी माँ की तरह उन्हें भी अपने बेहतरीन कार्य के लिए नोबल पुरुस्कार मिला| आज भी उनका परिवार सबसे ज्यादा नोबल पुरुस्कार विजेता जीतने वाला परिवार है| उनके बच्चे हेलन और पियरे भी नामी वैज्ञानिक हैं| इसमें कोई शक नहीं कि इस परिवार में वैज्ञानिक बुद्धिमत्ता वाकई कमाल की है|


जीवाश्म वैज्ञानी


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मैरी एनिंग(
Mary Anning
)- 

(जन्म 21 मई 1799 – मृत्यु 9 मार्च 1847)  मैरी एनिंग समुद्र के किनारे पाए जाने वाले शंख और सीप पर किये गए शोध कार्यों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं| उन्होंने बताया कि ये जीवाश्म हैं | मैरी एनिंग ने पृथ्वीं के इतिहास के बारे में वैज्ञानिक समुदाय की समझ बढ़ाने में मदद की |

एनिंग ने डोरसेट में इंग्लिश चैनल के सहारे बनी चट्टानों पर जीवाश्म अध्ययन किया| उन्होंने पहली बार मीनसरीसृप कंकाल को दुनिया के सामने पेश किया| लिंगभेद के कारण उन्हें 19वीं सदी के वैज्ञानिक समुदाय का सदस्य ही स्वीकार नहीं किया गया| वर्ष 2010 में रॉयल सोसायटी ने उन्हें विज्ञान में सबसे प्रभावशाली ब्रिटिश महिलाओं की सूची में शामिल किया|


जानिए नोबल पुरुस्कार क्या है? और अब तक किन-किन लोगों को 

ये पुरुस्कार मिल चूका है|


भौतिक विज्ञानी-


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS


लीज माइटनर
(lise meitner)
- 

अगर लीज माइटनर और ओटो हैन ने बेहतरीन कार्य नहीं किया होता तो परमाणु उर्जा और हथियारों की दुनिया संभव नहीं होती| दोनों ने मिलकर विखंडन प्रक्रिया की खोज की, जिससे विशाल मात्र में उर्जा बाहर निकलती है| 

वैज्ञानिक खोज में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए हैन को 1944 में रसायन का नोबल पुरुस्कार मिला, पर लीज माइटनर को नजरअंदाज किया गया| हालाँकि कई वैज्ञानिकों और पत्रकारों ने नोबल समिति के इस निर्णय का विरोध किया, पर नोबल समिति ने अभी तक उनके काम को मान्यता नहीं दी है| 

वह जर्मन में भौतिक कि प्रोफ़ेसर बनने वाली पहली महिला हैं| उन्हें बर्लिन अकेडमी ऑफ़ साइंसेज की और से लाइबनिट्स पदक से सम्मानित किया जा चूका है| रसायन तत्व 109 (माइटनेरियम) का नाम उनके नाम से ही लिया गया है|



खगोल भौतिक विज्ञानी-


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS


जोसेलिन बेल बरनेल(
jocelyn bell burnell
)- 

(जन्म 15 जुलाई, 1943 )- माइटनर ऐसी पहली या अंतिम महिला नहीं है, जिन्हें नोबल पुरुस्कार समिति ने नजरंदाज किया हो | बरनेल ने 1967 में रेडियो पल्सर की खोज की और विश्लेषण शुरू किया| 

जब उन्होंने इसके बारे में अपने शोध पर्वेक्षक एंटनी हेविश को बताया तो वह उलझन में थे, और कहा कि उनकी खोज केवल मानव निर्मित हस्तक्षेप का परिणाम है| आखिर में हेविश ने इस घटना को पेपर में प्रकाशित करवाया| बरनेल इसके पांच लेखकों की सूची में दुसरे स्थान पर थीं | 

नोबल पुरुस्कार हेविश और मार्टिन रेयल को दिया गया| हालाँकि वैज्ञानिकों ने इस निर्णय का विरोध किया| बरनेल ने टेलिस्कोप के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई|



प्रीमैटोलोजिस्ट-


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS


जेन गुडाल(
Jane Goodall
)- 

अगर किसी महिला वैज्ञानिक को अपने समय में सेलिब्रिटी का दर्जा मिला है तो वह हैं- जेन गुडाल| 

वह चिम्पांजी का अध्ययन करने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हुईं| यह ख्याति उन्हें रातों-रात नहीं मिली थी| इसके लिए तंजानियां में जंगली चिम्पंजियों के सामाजिक और पारिवारिक संबंधों का 55 वर्ष तक अध्ययन किया| 

गुडाल बचपन से ही चिम्पंजियों को लेकर काफी उत्सुक रहीं| उन्होंने केनिया के प्रसिद्ध जीवाश्म विज्ञानी लुईस लीके के साथ काम किया| लीके ने गुडाल को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी भेजा | 

वह कैम्ब्रिज के इतिहास में आठवीं ऐसी स्टूडेंट थीं, जिसने पहले बैचलर्स डिग्री प्राप्त किये बिना ही पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर ली|

 


कोशिका आनुवांशिक विज्ञानी-


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS


बारबरा मैक्क्लिंटाक (
Barbara-McClintock
)- 

बारबरा मैक्क्लिंटाक (जन्म 16 जून, मृत्यु 1902 - 2 सितंबर, 1992) एक अमेरिकी वैज्ञानिक और साइटोजेनेटिकिस्ट थी उन्हीं की बदौलत ही पूरी दुनिया जानती है कि क्रोमोसोम किस तरह से काम करते हैं| 

उन्होंने आनुवंशिकी पर फोकस किया और मक्के के लिए पहला आनुवांशिक नक्शा तैयार किया| इससे पता लगा कि किस तरह से क्रोमोसोम शारीरिक लक्षणों को प्रभावित करता है | उन्होंने बताया कि जीन्स के कारण शारीरिक विशेषताओं में बदलाव आ सकता है| 

उनका शोध कार्य अपने समय से बहुत आगे का था| यही कारण है कि उनके कार्य की काफी आलोचाना की गई| आखिर उन्होंने 1953 में अपना कार्य प्रकाशित करना बंद कर दिया| 

सौभाग्य से इसकी पुनः खोज हुई और 1983 में आनुवांशिक ट्रांसपोजिशन की खोज के लिए उन्हें सम्मानित किया गया| वह उस श्रेणी में एक नोबेल पुरस्कार पाने वाली एकमात्र महिला हैं।



रसायन विज्ञानी-


SCIENCE IS PROUD OF THESE WOMEN SCIENTISTS


रोज़लिन फ़्रैंकलिन(
Rosalind Franklin)-
 

(जन्म 25 जुलाई 1920 – मृत्यु 16 अप्रैल 1958) डीएनए (डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड), आरएनए (रैबोनुक्लियक एसिड), वायरस, कोयले की आणविक संरचना को समझने के लिए योगदान दिया है|

1951 में किंग्स कॉलेज में काम शुरू करने के बाद, रोज़लिन फ्रैंकलिन ने डीएनए की डबल हेलिक्स वाली संरचना की खोज में अहम भूमिका अदा की| फ़्रैंकलिन अपने समय से बहुत आगे थीं, वह बहुत घूमती थीं, एक बार तो उन्होंने पीठ पर सामान लादकर, फ्रांस की ऐल्प्स पर्वतमाला की यात्रा की |


दोस्तों ऐसे और भी कई महिला वैज्ञानिकों के नाम है जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से और पुरे मन से विज्ञान और मानवता की सेवा की है| हम ऐसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सभी महिला वैज्ञानिकों के ऋणी और आभारी रहेंगे |

26 जुलाई 2020

Jo khija hui wo bahar hun Jo utar gaya wo khumar hun

जो खिजा हुई वो बहार हूँ जो उतर गया वो खुमार हूँ

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Jo khija hui wo bahar hun Jo utar gaya

बहादुर शाह जफर का जन्म 24 अक्टूबर 1775 को हुआ था. उनका पूरा नाम मिर्ज़ा अबू ज़फर सिराजुद्दीन मुहम्मद बहादुर शाह जाफर था. जफर का जन्म भले एक मुगल घराने में हुआ था लेकिन उनकी माँ हिन्दू महिला थी|

बहादुर शाह ज़फ़र मुग़ल साम्राज्य के आख़िर शासक थे। उन्होंने 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय सिपाहियों का नेतृत्व किया था।बहादुर शाह जफर सिर्फ एक देशभक्त मुगल बादशाह ही नहीं बल्कि उर्दू के मशहूर शायर भी थे। उन्होंने बहुत सी मशहूर उर्दू कविताएं लिखीं, जिनमें से काफी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत के समय मची उथल-पुथल के दौरान खो गई या नष्ट हो गई। 

ज़फर ने अपने जीवन के अंतिम क्षण अकेले और अवसाद में गुजारे थे, अपनी हार और अंग्रेजो द्वारा पकडे जाने के बाद उन्होंने कागज-कलम से रिश्ता तोड़ लिया था| बहादुर शाह की मृत्यु 7 नवम्बर 1862 को हुयी थी| उन्हें रंगून में श्वेडागोन पगोडा के पास दफनाया गया,जिस जगह पर बाद में बहादुर शाह जफर दरगाह बनी| उनकी पत्नी जीनत की मौत 1886 को हुई| जफर को एक सूफी संत माना जाता हैं,इसलिए आज भी सभी धर्मों लोग उनकी कब्र पर श्रद्धा के फूल चढाने जाते हैं |


आज मैं उन्हीं के मशहूर ग़ज़ल को आपके पेशे खिदमत कर रहा हूँ|


जो खिजा हुई, वो बहार हूँ


                         जो खिजा हुई, वो बहार हूँ

                         जो उतर गया, वो खुमार हूँ

           

                         जो बिगड़ गया, वो नसीब हूँ

                         जो उजड़ गया, वो सिंगार हूँ


                          मेरा हाल काबिले दीद है

                          जिसे आस है न उम्मीद है


                          मेरी घुट के हसरतें रह गई

                          उन हसरतों, का मजार हूँ



इसे भी पढ़ें:-  लाई फिर इक लग़्ज़िश-ए-मस्ताना


In roman

Jo khija hui, wo bahar hun

Jo utar gaya, wo khumar hun


Jo bigad gaya, wo nasib hun

Jo ujad gaya, wo singaar hun


Mera haal qabile deed hai

Jise aas hai na ummed hai


Meri ghut ke hasraten rah gai

Un hasraton ka majaar hun 

24 जुलाई 2020

KABHI ARSH PAR KABHI FARSH PAR KABHI UNKE DAR

कभी अर्श पर कभी फ़र्श पर कभी उनके दर कभी दर बदर 


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parween shakir

दोस्तों आपने वो नज़्म तो जरुर सुनी होगी कभी अर्श पर कभी फर्श पर, आज मैं आपकी खिदमत में इसी नज़्म को पेश कर रहा हूँ जो कि मुझे बहुत पंसंद है उम्मीद है आपको भी पसंद आये| ये नज़्म जिस शायरा ने लिखी है उनका उर्दू अदब में अपना एक अलग ही मक़ाम है| इनकी शख्सियत किसी तारुफ़ का मोहताज नहीं है, उनके तारुफ़ के लिए उनका नाम ही काफ़ी है और वो नाम है- परवीन शाकिर, परवीन शाकिर पकिस्तान की नयी उर्दू शायरी में एक अहम् मुकाम रखती है |

आपका जन्म 24 नवम्बर, 1952 को शाकिर हुसैन के घर कराची सिंध, पकिस्तान में हुआ | आपकी उस्ताद मोहतरमा इरफान अजीज ने आपको लिखने की सलाह दी थी आप पहले भी पढना पसंद करती थी |

आपने एक Doctor से शादी की जिनका नाम नसीर अली था जिनसे आपको एक पुत्र भी है जिसका नाम सय्यद मुराद अली है | पर यह शादी ज्यादा दिनों तक नहीं रह पाई और यह तलाक के रूप में समाप्त हुई | परवीन शाकिर का प्रेम अपने अद्वितीय अंदाज में नर्म सुखन बनकर फूटे है और अपनी खुशबु से उसने उर्दू शायरी कि दुनिया को सराबोर कर दिया है |

आपकी शायरी का केन्द्रीय विषय 'स्त्री' रहा है | प्रेम में टूटी हुई बिखरी हुई खुद्दार स्त्री | आपकी शायरी में प्रेम का सूफियाना रूप नहीं मिलता वह अलौकिक कुछ नहीं है जो भी इसी दुनिया का है | आपके मुख्य शायरी के संग्रह है खुशबु (1976), सदबर्ग (1980), खुद कलामी (1990), इनकार (1990), माह-ए-तमाम (1994)

इस शायरा कि मृत्यु 26 दिसम्बर, 1994 को इस्लामाबाद पकिस्तान में अपने कार्य पर जाते वक्त कार दुर्घटना में हुई |


कभी अर्श पर कभी फ़र्श पर कभी उनके दर


कभी रुक गए कभी चल दिए! 
कभी चलते-चलते, भटक गए,
यूँ ही उम्र सारी गुजर दी
यूँ ही ज़िन्दगी के सितम सहे...

कभी नींद में कभी होश में!
तू जहाँ मिला तुझे देख कर
न नज़र मिली न जुबां हिली,
यूँ ही सर झुका के गुजर गए...

कभी ज़ुल्फ़ पर, कभी चश्म पर,
कभी तेरे हसीन वजूद पर
जो पसंद थे मेरे किताब में
वो शेर सारे बिखर गए!

मुझे याद है कभी एक थे
मगर आज हम है जुदा-जुदा
वो जुदा हुए तो संवर गए
हम जुदा हुए तो बिखर गए!

कभी अर्श पर  कभी फ़र्श पर 
कभी उनके दर कभी दर बदर
ग़म-ए-आशिकी तेरा शुक्रिया
हम कहाँ-कहाँ से गुजर गए

कभी अर्श पर  कभी फ़र्श पर 
कभी उनके दर कभी दर बदर
ग़म-ए-आशिकी तेरा शुक्रिया
हम कहाँ-कहाँ से गुजर गए



परवीन शाकिर 

इसे भी पढ़ें :- कोई आरजू नहीं  है कोई मुद्दआ नहीं है


KABHI ARSH PAR KABHI FARSH PAR KABHI UNKE DAR


Kabhi Ruk Gaye Kabhi Chal Diye !
Kabhi Chalte Chalte Bhatak Gaye,

Yunhi Umar Saari Guzaar Di
Yunhi Zinndagi Ke Sitam Sahe...

Kabhi Neend Mein Kabhi Hosh Mein!
Tu Jahan Mila Tujhe Dekh Kar

Na Nazar Mili Na Zubaan Hili,
Yunhi Sar Jhuka Ke Guzar Gaye...


Kabhi Zulf Par, Kabhi Chashm Par,
Kabhi Tere Hasin Wajood Par

Jo Pasand The Meri Kitab Mein
Wo Sher Saare Bikhar Gaye!

Mujhe Yaad Hai Kabhi Ek The
Magar Aaj Hum Hai Juda Juda

Wo Juda Hue To Sanwar Gaye
Hum Juda Hue To Bikhar Gaye!


Kabhi Arsh Par Kabhi Farsh Par,
Kabhi Unke Dar Kabhi Dar-Badar

Gham - e - Ashiqui Tera Shukriya
Hum Kahan Kahan Se Guzar Gaye

Kabhi Arsh Par Kabhi Farsh Par,
Kabhi Unke Dar Kabhi Dar-Badar

Gham - e - Ashiqui Tera Shukriya
Hum Kahan Kahan Se Guzar Gaye




praween shakir



KALA PILIYA KYA HAI

KALA PILIYA  KYA HAI (काला पीलिया क्या है?)

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हर साल तेजी से शहरों में बीमारी (काला पीलिया) की गिरफ्त में आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। चौकाने वाली बात यह है कि इस बीमारी के कीटाणु ने स्वस्थ लोगों को भी निशाना बनाना शुरू कर लिया है। राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल टीकाकरण भी रोग को फैलने से रोक नहीं पा रहा। बावजूद इन सबके समय पर जानकारी और इलाज लोगों को बीमारी से निजात दिलाने में कामयाब है। गरीबी के कारण कुपोषण की अब भी लोगों में बड़ी समस्या है। कुपोषण के कारण लोगों में प्रतिरोधक क्षमता की कमी हो रही है। शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण काला पीलिया का वायरस लोगों को जकड़ रहा है। अशिक्षा व अज्ञानता के कारण भी बच्चों को टीके नहीं लग पाना इसका कारण बन रहा है।


KALA PILIYA KE LAKSHAN:-


काला पीलिया एक आम यकृत विकार हैं, जो कि कई असामान्य चिकित्सा कारणों की वजह से हो सकते हैं| काला पीलिया होने के लक्षण-  व्यक्ति का स्वास्थ्य गिरना, भूख कम लगना, मरीज का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाना, वजन कम हो जाना, सिर दर्द, लो-ग्रेड बुखार, मतली और उल्टी, त्वचा में खुजली और थकान, त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाना, मल पीला और मूत्र गाड़ा हो जाना इसके साथ ही व्यक्ति को पीलिया हो जाता है।

KALA PILIYA KO ENGLIS ME KYA KAHTE HAIN:-



काला पीलिया का शब्दिक अर्थ तो Black jaundice है लेकिन हेपेटाइटिस बी को ही काला पीलिया कहा जाता है। यह वायरस के कारण होने वाली एक संक्रमित बीमारी है जो मनुष्य के लीवर को संक्रमित करती है। इसका वायरस शरीर में हल्के से पनपता है और लंबे समय तक रहता है। इस वायरस के कारण लिवर सिरोसिस (यकृत सिकुड़ना) और लिवर कैंसर का भी खतरा रहता है।


KALA PILIYA KYON HOTA HAI ?


हेपेटाइटिस बी संक्रामक शरीर के तरल पदार्थ, जैसे रक्त, योनि स्राव या वीर्य के संपर्क से फैलता है जिसमें हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) होता है। इंजेक्शन ड्रग का उपयोग, बनाना या से हेपेटाइटिस बी होने का खतरा बढ़ जाता है। हेपेटाइटिस बी दूषित पानी पीने, गंदगी, संक्रमित रक्त चढ़ाने, एक ही सिरिंज को बार-बार मरीजों में इस्तेमाल करने, संक्रमित डिप्स चढ़ाने, संक्रमित व्यक्ति के साथ रेजर साझा करने और संक्रमित साथी के साथ यौन संबंध बनाने से भी फैलता है।

 

KALA PILIYA SE BACHAO KE TARIKE:-

सुरक्षित यौन संबंध बनाएं। एक से ज्यादा पार्टनर के साथ सेक्स करने से बचें।
किसी और के साथ सूई, रेजर, टूथब्रश वगैरह शेयर न करें, जिनमें इंफेक्शन वाला ब्लड हो सकता है।
अगर आपको खतरा महसूस हो रहा है, तो हेपेटाइटिस बी सीरीज का इंजेक्शन लगवाएं।
कोई भी टीका लगवाते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि उसमें नई सूई का इस्तेमाल हो।
बचाव व जांच के तरीके
दूषित पानी का इस्तेमाल नहीं करें, गंदगी से बचे, सही रक्त चढ़ाए, और सिरिंज नई इस्तेमाल करें। इसके साथ ही इलाज के लिए मरीज में डीएनए का स्तर चेक किया जाता है और लिवर बायोप्सी से भी इसकी जांच की जा सकती है। 


KALA PILIYA KA ILAJ:-

प्रारंभिक चरण में काला पीलिया गंभीर नहीं है। समय पर और पूरा इलाज करने से इसका वायरस सुप्त अवस्था में चला जाता है। डीएनए लेवल बढ़ने और सिरोसिस होने पर इलाज हो सकता है। इसके लिए इंजेक्शन थैरेपी है, जिसमें इंटरफेरॉन का इंजेक्शन एक से डेढ़ साल रोजाना लगाना होता है। यह थोड़ा महंगा है। दूसरी विधि एंटी वायरल थैरेपी है। इसमें टीनोफोबिल दवा रोजाना एक गोली तीन से पांच साल तक खानी होती है। 

Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...