28 सितंबर 2020

WORLD HEART DAY IN HINDI 2020

 विश्व हृदय दिवस 2020

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WORLD HEART DAY IN HINDI 2020
WORLD HEART DAY 2020

विश्व हृदय दिवस की शुरुआत-

दुनिया भर में हर साल होने वाली 29 प्रतिशत मौतों की एक प्रमुख वजह हृदय की बीमारियां और हृदयाघात हैं। हृदय की बीमारियों और दिल के दौरे से हर साल 1.71 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। आम लोगों को इन बीमारियों व दिल के स्वास्थ्य का ख़ास ख्याल रखने के प्रति जागरुक करने के मकसद से 1999 में वर्ल्ड हार्ट फ़ेडरेशन (WHF) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर विश्व हृदय दिवस की स्थापना की घोषणा की। इस वार्षिक आयोजन की कल्पना सबसे पहले 1997-99 तक WHF के अध्यक्ष एंटोनी बेयस डी लूना द्वारा की गई थी। 'विश्व हृदय दिवस' मनाने की शुरुआत 24 सितंबर, 2000 दिन रविवार को हुआ। अब तक सितम्बर के अंतिम रविवार को 'विश्व हृदय दिवस' मनाया जाता रहा था, लेकिन 2014 से इसे प्रतिवर्ष 29 सितम्बर के दिन मनाने का निर्णय लिया गया । 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' (डब्ल्यूएचओ) की भागीदारी से स्वयंसेवी संगठन 'वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन' हर साल 'विश्व हृदय दिवस' मनाता है।


विश्व हृदय दिवस क्यों मनाया जाता है-

29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का एकमात्र कारण लोगों में दिल की बीमारियों के प्रति जागरुकता फैलाना है। आजकल की गलत दिनचर्या और हानिकारक खानपान के कारण बहुत से लोग हार्ट के मरीज बन रहे हैं और नतीजा असमय आने वाला हार्ट अटैक है। अगर दिल की बीमारी से बचना है तो जरूरी है कि आप हार्ट अटैक के कारण, लक्षण और बचाव के बारे जरूर जानें। 

आजकल लोग माडर्न जीवनशैली जीने के फेर में अपनी सेहत के साथ समझौता करने से बिल्कुल भी नहीं घबराते हैं। बाहर का खाना जैसे फास्ट-फूड, जंक फूड का सेवन, शराब का सेवन, अतिरिक्त वसा वाला भोजन करना। इसके साथ ही शारीरिक गतिविधियों में भाग न लेना, जरूरत से ज्यादा तनाव पालना। इन सबका सीधा असर हमारे दिल पर पड़ता है। और दिल की बीमारी हमें घेर लेती है।


हार्ट अटैक के कारण-

जब ह्रदय ठीक से पंप नहीं कर पाता है तो हमें ह्रदय की बीमारी घेरने का खतरा बन जाता है। इसमें कोरोनरी धमनियों में ब्लाकेज हो जाता है जिसकी वजह से रक्त को ऑक्सीजन का प्रवाह होना कम हो जाता है और मनुष्य को हार्ट अटैक आ जाता है।

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हार्ट अटैक के लक्षण-

हार्ट अटैक के लक्षण हर शरीर में अलग-अलग तरीके के होते हैं। कुछ लोगों के सीने में धीमा दर्द उठता है जबकि कुछ लोगों को एकदम से तीव्र दर्द होता है। हार्ट अटैक आने पर किसी को कोई लक्षण समझ में नहीं आते हैं जबकि किसी को कार्डियक अरेस्ट की परेशानी हो जाती है। हार्ट अटैक आने से पहले चेतावनी के तौर पर सीने में हल्का दर्द होता है या सीने में हल्का दबाव महसूस होता है जो थोड़े बहुत आराम से सही हो जाता है।


इससे बचने के उपाय-

बहुत लोग सीने में होने वाले दर्द या दिल की तकलीफ को सही से समझ नहीं पाते हैं।अगर ऐसी किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो तुरंत ही मेडिकल इमरजेंसी को फोन करना चाहिए। अगर आपके पास कोई मेडिकल मदद नहीं पहुंच रही है तो किसी की मदद से तुरंत ही अस्पताल जाएं।

रोजाना की व्यस्त जीवनशैली और खान-पान में अनियमितता ने आज लोगों को कई बीमारियों की ओर धकेल दिया है। इन बीमीरियों में हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा एक ऐसी बीमारी है जो बहुत ही तेजी से बढ़ी है। दिल की बीमारी से बचने के प्रति जागरुक करने के लिए हर साल के 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस' मनाया जाता है। हार्ट अटैक एक ऐसी स्थिति है, जिसमें अधिकतर लोग इसके लक्षणों को नहीं पहचान पाते और इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं। लेकिन आप अपनी कुछ आदतों में सुधार कर इस बीमारी से बच सकते हैं। आज हम आपको 4 ऐसे आसान उपायों के बारे बताने जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप आसानी से दिल की बीमारी को दूर कर सकते हैं...

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कोलेस्ट्रॉल क्या होता है ? (Cholesterol)

कोलेस्ट्रॉल एक केमिकल कंपाउंड है जो हमारे लिवर में होता है। यह हमारे शरीर में नई कोशिकाओं और हॉर्मोंस को व्यवस्थित रखने में सहायक होता है। हमारे शरीर को जब भी कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है तो लिवर इसे निकाल देता है और शरीर अपनी जरूरत को पूरा कर लेता है। लेकिन जो भी अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में जमा होता है वह शरीर के लिए नुकसानदायक कोलेस्ट्रॉल हो जाता है। मेडिकल की भाषा में इस कोलेस्ट्रॉल को एलडीएल कहते हैं। एलडीएल हमारे शरीर के रक्त प्रवाह को बाधित कर देता है, जिससे दिल और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। एलडीएल जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए डेयरी उत्पाद या अन्य फैट युक्त चीजों के अधिक प्रयोग से बचना चाहिए, जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहे।


तनाव-

अकसर अध्ययनों में इस बात का खुलासा होता है कि अत्यधिक तनाव या डिप्रेशन दिल के लिए घातक हो सकता है। 'तनाव' ह्रदय रोगों के लिए एक जिम्मेदार कारक है। इसलिए हमेशा प्रयास कीजिए की आपके अंदर तनाव की स्थिति न पैदा हो। तनावमुक्त रहने से हृदय रोगों का करीबन आधा खतरा टल जाता है। योग, व्ययायम, वॉकिंग आदि शाररिक गतिविधियों से भी तनाव को कम कर सकते हैं।

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रक्तचाप-

रक्तचाप यानी कि ब्लडप्रेशर का बढ़ना और घटना दोनों ही चीज हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक है। ब्लडप्रेशर के हाई हो जाने से हृदय को नुकसान पहुंचाता है। हाई ब्लडप्रेशर धड़कन को बढ़ा देता है, जिसके कारण दिल सही तरीके से काम नहीं कर पाता है। आपको इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि आपके ब्लड प्रेशर का स्तर हमेशा 120 और 80 के अंदर ही रहे।  हृदय स्वस्थ्य के लिए ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। 


वॉकिंग-

खाना खाने के बाद टहलना सबको पसंद है। टहलने से न सिर्फ आपका मूड फ्रेश होता है बल्कि आपके खाएं को पचाने में भी सहायता मिलता है। हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आपको नियमित वॉक करनी चाहिए। अगर आपको पहले से ही सांस से जुड़ी कोई बीमारी है तो इतनी तेज गति से न टहलें कि आपकी सांस फूलने लग जाए। आपको सामान्य गति से ही टहलना चाहिए। ऐसा करने से आपका दिल हमेशा स्वस्थ रहेगा और आप हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति से दूर रहेंगे।

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26 सितंबर 2020

IRRIGATION PROJECTS IN INDIA IN HINDI

 भारत की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं 

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भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को 'आधुनिक भारत का मंदिर' कहा था. बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनओं का मकसद सिंचाई का प्रबंध, जल विद्युत् का उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण की रक्षा, अन्तः-स्थलीय नौ परिवहन का विकास, भू-संरक्षण और मछली पालन का विकास. भारत की प्रमुख बहु-उद्देशीय घाटी परियोजनाएं इस प्रकार हैं:-


रामगंगा (उत्तर प्रदेश): गढ़वाल जिले में गंगा नदी की सहायक नदी रामगंगा पर बांध का निर्माण । परियोजना में केंद्रीय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बाढ़ के प्रकोप को कम करना और दिल्ली जलापूर्ति योजना में जल की आपूर्ति करना है। 

साबरमती (गुजरात)-  मसाणा जिले में धारी गांव में साबरमती नदी पर संग्रहण बांध अहमदाबाद के निकट वास्त्रा बाना बैरेज का निर्माण ।

शारदा सहायक (उत्तर प्रदेश)-  इस परियोजना में घाघरा नदी पर बैराज,एक लिंक चैनल,शारदा नदी पर बैराज औ एक फीडर कैनाल का निर्माण जी गोमती और साई नदियों कृत्रिम जल प्रयाण का कार्य करे।

 सोन हाई लेवल कैनाल (बिहार) सोन बैराज परियोजना का विस्तार

तावा (मध्य प्रदेश)-  होशंगाबाद जिले में नर्मदा की सहायक नदी तावा पर एक परियोजना

टिहरी बांध (उत्तर प्रदेश)- टिहरी जिले में भागीरथी नदी पर बांध।

थेन बांध (पंजाब)- रावी नदी पर बांध और इसे पश्चिमी तट पर विद्युत संयंत्र।

तुंगभद्रा (कर्नाटक व आंध्र प्रदेश का संयुक्त उपक्रम) तुंगभद्रा नदी पर परियोजना।

उकाई (गुजरात): उकाई गांव के निकट ताप्ती नदी पर बहुउद्देशीय परियोजना।

अपर कृष्णा (कर्नाटक) कृष्णा नदी पर नारायणपुर बांध पर परियोजना और अलमाट्टी बांध।

अपर पेनगंगा (महाराष्ट्र): यवतमाल जिले में इसापुर के निकट वैनगंगा नदी पर दो रिजर्ववायर और परभानी जिले रायाधु नदी पर दूसरा।

बार्गी परियोजना (मध्य प्रदेश)- यह बहुउद्देशीय परियोजना है इसमें जबलपुर जिले में बार्गी नदी पर सोनरी बाँध और नाहर है |

ब्यास- (हरियाण, पंजाब और राजस्थान का संयुक्त उपक्रम)- इसमें ब्यास और सतलुज को जोड़ने के साथ पोंग में ब्यास बाँध सम्मलित है |

गंडक (बिहार व उत्तर प्रदेश का संयुक्त उपक्रम)- इस परियोजना से नेपाल भी कृषि और विद्युत् का लाभ उठता है |

घाटप्रभा (कर्नाटक)- बेलगाँव और बीजापुर जिले के बीच घाटप्रभा पर एक परियोजना |

भद्रा (कर्नाटक- भद्रा नदी पर बहुउद्देशीय परियोजना |

भीम (महाराष्ट्र)- इसमें दो बाँध है एक पुणे जिले में फागने के निकट पवाना नदी पर व दूसरा शोलापुर जिले में उज्जैन के निकट कृष्णा नदी पर है |

चम्बल (बिहार व मध्य प्रदेश का संयुक्त उपक्रम)- इस परियोजना में गाँधी सागर बाँध, राणा प्रताप सागर बाँध और जवाहर सागर बाँध हैं |

भाखड़ा नांगल (हरियाण, पंजाब और राजस्थान का संयुक्त उपक्रम)- भारत का सबसे बड़ा बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना | इसमें भाखड़ा में सतलुज पर बाँध एवं नांगल हायडल चैनल के साथ दो भाखड़ा बाँध पर दो विद्युत गृह व गंगुवाल व कोटमा में दो विद्युत गृह हैं |

फरक्का (पश्चिम बंगाल)- इस परियोजना को कोलकाता बंदरगाह की देखभाल, संरक्षण और हुगली में नौपरिवहन में सुधार के लिए शुरू किया गया था| इसमें गंगा नदी में फरक्का पर बैरेज, भागीरथी पर बैरेज व जांगीपुर बैरेज के नीचे गंगा के पानी को भागीरथी में मिलाने के लिए चैनल है |

हसदेव बांगो परियोजना- (छत्तीसगढ़)- यह परियोजना छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हसदेव नदी पर बांगो गाँव में स्थित है | इसकी स्थापना 1967 में की गई थी |

दामोदर घाटी परियोजन- (पं.बंगाल व बिहार): पश्चिम बंगाल व बिहार में कृषि, बाढ़ को रोकने व विद्युत उत्पादन के लिये बहुउद्देशीय परियोजना। इसमें कोनार, तिलैया, मैथन और पंचेट  में बहुउद्देशीय बांध हैं। जल विद्युत स्टेशन कोनार, तिलैया. मैथन और पंचेट में हैं। दुर्गापुर मं बैरेज व बोकारो, चंद्रपुरा और दुर्गापुर में थर्मल पावर हाउसेज है। परियोजना का प्रशासन दामोदर घाटी निगम करता है।

हीराकुड (उड़ीसा): महानदी पर विश्व का सबसे बड़ा बांध बनाया गया है।

जयाकवाडी (महाराष्ट्र): गोदावरी नदी पर पत्थरों से बना बांध।

ककरापार (गुजरात): सूरत जिले में ककरापार के निकट ताप्ती नदी पर बांध।

कंगसाबाटी (प. बंगाल): इस परियोजना में कंगसाबाटी व कुमारी नदी पर बांध बनाने हैं।

कर्जन (गुजरात): भरूच जिले के नंदू तालुक के जीतगढ़ गांव के निकट कर्जन नदी पर पत्थरों का बांध बनाना है।

कोसी (बिहार): बिहार व नेपाल के लिये बहुउद्देशीय परियोजना।

कृष्णा परियोजना (महाराष्ट्र): कृष्णा नदी पर ढोम गाँव के निकट बांध व सतना जिले के कन्हार गाँव के निकट वर्मा नदी पर बांध बनाना है।

कुकाडी परियोजना (महाराष्ट्र): पांच अलग संग्रहण बांध योदगांव, मानिकदोही, दिम्भा, वादाज और पिंपलगांव जोग। नहर प्रणाली में हैं - कुकाडी, सिम्भा, दिम्भा, मीना फीडर और मीना ब्रांच।

लेफ्ट बैंक घाघरा कैनाल (उत्तर प्रदेश): गिरिजा बैराज से घाघरा नदी के बाईं तट से लिंक चैनल जो सरयू नदी को जोड़े।

मध्य गंगा नहर (उत्तर प्रदेश): बिजनौर जिले में गंगा नदी पर बैराज।

महानदी डेल्टा योजना (उड़ीसा): हीराकुड रिजर्वायर से छोड़े गये पानी को कृषि के लिये उपयोग।

महानदी रिजर्ववायर परियोजना (छत्तीसगढ़): इसके तीन चरण हैं 1. रविशंकर सागर परियोजना और भिलाई इस्पात संयंत्र में जलापूर्ति के लिये फीडर कैनाल सिस्टम, 2.महानदी फीडर कैनाल का विस्तार, 3.पैरी बांध।

माही (गुजरात)-  यह परियोजना दो चरणों की है। एक वानकबोरी गांव के निकट माही नदी पर और कनादा गाँव के निकट माही नदी पर बांध।

मालाप्रभा (कर्नाटक); बेलगाँव जिले में मालप्रभा नदी पर बांध |

मयूरक्षी (प. बंगाल)-  कनाडा बांध से सिंचाई और जल विद्युत परियोजना।

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नागार्जुन सागर (आंध्र प्रदेश): हैदराबाद से लगभग 44 किलोमीटर दूर नांदीकोना गांव में कृष्णा नदी पर बांध

पनम (गुजरात): पंचमहल जिले में केलेडेजर गांव के निकट पनम नदी पर बांध।

परंबिकुलम अलियार (तमिलनाडु व केरल का संयुक्त उपक्रम):-  इस परियोजना में अन्नामलाई पहाड़ियों की 6 व 2 मैदानी नदियों के पानी का कृषि के लिये उपयोग करना।

पोकमपाद (आंध्र प्रदेश), गोदावरी नदी पर बांध।

राजस्थान कैनाल (अब इंदिरा गांधी नहर):- 650 किलोमीटर लम्बी कैनाल पोंग बांध से छोड़े गये पानी को प्रयुक्त करती है और राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराती है। इसमें राजस्थान फीडर कैनाल (पहले 167 किलोमीटर पंजाब व हरियाणा शेष 37 किलोमीटर राजस्थान) मुख्य 445 किलोमीटर कैनाल राजस्थान में है।

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24 सितंबर 2020

dadasaheb phalke award winner list in hindi

 दादा साहेब फाल्के पुरुस्कार प्राप्त विजेताओं की सूचि 

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dadasaheb phalke award winner list in hindi
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दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च पुरस्कार है| दादा साहेब फाल्के जी को भारतीय सिनेमा का प्रणेता या जनक कहा जाए तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी, दादा साहेब फाल्के का पूरा नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था| इनका जन्म 30 अप्रैल 1870 में तत्कालीन ब्रिटिश शासन के अधीन भारत देश में त्रम्ब्क जो की उस समय बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा था में हुआ था| 


उन्होंने सर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में अभिनय का प्रशिक्षण लिया था, और उन्होंने अपने 19 वर्ष के फ़िल्मी कार्यकाल में 95 फिल्में और 27 लघु फिल्मे बनाईं, इसमें सबसे पहली फिल्म थी राजा हरिश्चंद्र जो की उन्होंने 1913 में बनायीं थी |


दादा साहेब फाल्के की मृत्यु 16 फ़रवरी 1944 सिर्फ उम्र 73 वर्ष की आयु में हो गया था|


दादासाहेब फाल्के पुरस्कार कब शुरू हुआ था


दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुबात दादासाहेब फाल्के जी के जन्म के 100 वर्ष बाद में हुयी थी| उस समय तक भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के रूप में हुआ, जब भारत सरकार द्वारा 17वां राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार दिया जाने वाला था उसी वर्ष राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के रूप में दादा साहेब फाल्के पुरुष्कार का प्रारम्भ हुआ और तब से ये प्रति वर्ष भारत में विभिन्न भाषाओं में सर्वोच्च कला के प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। 

दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड सिनेमा के क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार है।

हर साल किसी एक अभिनेता या अभिनेत्री को इस पुरस्कार के लिए चुना जाता है।

डायरेक्टरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल्स द्वारा नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह (National Film Awards) में विजेता को इस पुरस्कार से नवाजा जाता है। 

यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB - Ministry of Information and Broadcasting) के अधीन आती है। 

भारत सरकार ने आज से करीब 50 साल पहले, 1969 में पहली बार दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड की शुरुआत की थी। 

सबसे पहला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड अभिनेत्री देविका रानी को दिया गया था। उन्हें 17वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में इस पुरस्कार से नवाजा गया था। देविका रानी को भारतीय सिनेमा की फर्स्ट लेडी भी कहा जाता है। 

अमिताभ बच्चन को मिलाकर अब तक कुल 50 लोगों को यह सम्मान दिया जा चुका है।



दादा साहेब पुरस्कार में क्या दिया जाता है


दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के विजेताओं का चयन भारतीय फिल्म उद्योग की बड़ी शख्सियतों के कमेटी द्वारा किया जाता है। 

यह पुरस्कार किसी अभिनेता / अभिनेत्री को भारतीय सिनेमा के विकास में उनके बड़े योगदानों के लिए दिया जाता है। 

विजेता को एक स्वर्ण कमल (Golden Lotus) मेडल, शॉल और 10 लाख रुपये नकद पुरस्कार से नवाजा जाता है।



दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेताओं की सूचि:-


 

क्रम संख्या

वर्ष (समारोह)

नाम

फिल्म इंडस्ट्री

1

1969 (17वीं)

देविका रानी

हिन्दी

2

1970 (18वीं)

बीरेन्द्रनाथ सिरकर

बंगाली

3

1971 (19वीं)

पृथ्वीराज कपूर

हिन्दी

4

1972 (20वीं)

पंकज मलिक

बंगाली एवं हिन्दी

5

1973 (21वीं)

रूबी मयेर्स (सुलोचना)

हिन्दी

6

1974 (22वीं)

बोम्मीरेड्डी नरसिम्हा रेड्डी

तेलुगू

7

1975 (23वीं)

धीरेन्द्रनाथ गांगुली

बंगाली

8

1976 (24वीं)

कानन देवी

बंगाली

9

1977 (25वीं)

नितिन बोस

बंगाली

10

1978 (26वीं)

रायचन्द बोराल

बंगाली

11

1979 (27वीं)

सोहराब मोदी

हिन्दी

12

1980 (28वीं)

पैडी जयराज

हिन्दी

13

1981 (29वीं)

नौशाद

हिन्दी

14

1982 (30वीं)

एल. वी. प्रसाद

हिन्दी

15

1983 (31वीं)

दुर्गा खोटे

हिन्दी

16

1984 (32वीं)

सत्यजीत रे

बंगाली

17

1985 (33वीं)

वी. शांताराम

हिन्दी

18

1986 (34वीं)

बी. नागी. रेड्डी

तेलुगू

19

1987 (35वीं)

राज कपूर

हिन्दी

20

1988 (36वीं)

अशोक कुमार

हिन्दी

21

1989 (37वीं)

लता मंगेशकर

हिन्दी, मराठी

22

1990 (38वीं)

अक्कीनेनी नागेश्वर राव

तेलुगू

23

1991 (39वीं)

भालजी पेंढारकर

मराठी

24

1992 (40वीं)

भूपेन हजारिका

असमिया

25

1993 (41वीं)

मजरूह सुल्तानपुरी

हिन्दी

26

1994 (42वीं)

दिलीप कुमार

हिन्दी

27

1995 (43वीं)

राजकुमार

कन्नड़

28

1996 (44वीं)

शिवाजी गणेशन

तमिल

29

1997 (45वीं)

कवि प्रदीप

हिन्दी

30

1998 (46वीं)

बी. आर. चोपड़ा

हिन्दी

31

1999 (47वीं)

ऋषिकेश मुखर्जी

हिन्दी

32

2000 (48वीं)

आशा भोसले

हिन्दी

33

2001 (49वीं)

यश चोपड़ा

हिन्दी

34

2002 (50वीं)

देव आनन्द

हिन्दी

35

2003 (51वीं)

मृणाल सेन

बंगाली

36

2004 (52वीं)

अडूर गोपालकृष्णन

मलयालम

37

2005 (53वीं)

श्याम बेनेगल

हिन्दी

38

2006 (54वीं)

तपन सिन्हा

बंगाली

39

2007(55वीं)

मन्ना डे

बंगाली

40

2008 (56वीं)

वी. के. मूर्ति

हिन्दी

41

2009 (57वीं)

डी. रामानायडू

तेलुगू

42

2010 (58वीं)

के. बालचन्दर

तमिल

43

2011 (59वीं)

सौमित्र चटर्जी

बंगाली

44

2012 (60वीं)

प्राण

हिन्दी

45

2013 (61वीं)

गुलजार

हिन्दी

46

2014 (62वीं)

शशि कपूर

हिन्दी

47

2015 (63वीं)

मनोज कुमार

हिन्दी

48

2016 (64वीं)

कसिनाथुनी विश्वनाथ

तेलुगू

49

2017 (65वीं)

विनोद खन्ना

हिन्दी

50

2018 (66वीं)

 अमिताभ बच्चन

हिन्दी



Annual report of work done for environmental protection in the school

  विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट -  अपने विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले क...